कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने पंजाब चुनाव में किसानों को अपनी ओर आकर्षित करने उस आग को हवा दे दी है, जिसकी तपिश से ये ही तीनों पार्टियां बिलबिला रही हैं। देश के प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान होने पर इन तीनों में से किसी एक ने अभी तक न विरोध किया और न ही अपना प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष समर्थन वापस लेने का प्रयास तक नहीं किया। जिस कारण जनता में रोष जड़ कर रहा है, इंदिरा गाँधी और नरेंद्र मोदी दोनों ही भारत के प्रधानमंत्री हैं। और ये सत्ता के भूखे अपनी कुर्सी की खातिर प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने वालों के खड़े हैं। लानत है ऐसी ओछी राजनीती और ओछी राजनीती करने वालों पर, जो अपनी तत्कालीन और वर्तमान प्रमाणमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने वालों के साथ खड़े हैं। देश जानना चाहता है कि जो पार्टी अथवा नेता अपने प्रधानमंत्री के नहीं हो सकते, क्या जनता के हो सकते हैं? अगर थोड़ी भी नैतिकता है, तुरन्त अपना समर्थन वापस लें, आपस में चाहे कुछ भी करो, लेकिन प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने और उसे समर्थन देने वालों को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
आम आई पार्टी को लग रहा कि पिछली बार ठीक ठाक सीटें आई थी , थोड़ा मेहनत करें तो शायद सरकार बन जाएगी !!
— Vinod Rai (@Kumar_VinodR) December 3, 2020
कैप्टेन जी सोच रहे , एक बार और जीत गए तो 5 साल और CM रह जाएंगे , नही फिर नही बन पाएंगे!
अकाली दल को लग रहा की ये हमारी बारी है !!
यहिं किसान अंदोलन का सारांश है !!
अरे, देश की संसद में अपनी सरकार का बयान भूल गए क्या?
— Dr Harsh Vardhan (@drharshvardhan) December 3, 2020
श्री @RahulGandhi जी आपकी याददाश्त कमज़ोर हो सकती है, धरा की छाती को अपने श्रम से चीरकर अन्न रूपी वरदान देने वाले अन्नदाता की नहीं।
मोदी सरकार की योजनाओं के चलते खेत-खलिहान लहलहाने लगे हैं,किसानों के चेहरे मुस्कुराने लगे हैं। https://t.co/Qbj4GT8D6y pic.twitter.com/RklkjOICgJ
धीरे धीरे सारी कड़ियां जुड़ रही हैं
— राष्ट्र प्रहरी...🚩🚩 (@Lanka_Dahan) December 3, 2020
नए कृषि कानून को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल सियासी दंगल में कूद पड़े हैं। तीनों दल 2022 में होने वाले पंजाब चुनाव को लेगर एक दूसरे के खिलाफ दांव-पेंच लगा रहे हैं। इनके बीच किसानों का सबसे बड़ा हितैषी और दुश्मन साबित करने की होड़ मची हुई है। लेकिन इन तीनों के सियासी कुश्ती का खामियाजा किसान, दिल्लीवासी और दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।
मोहरा बने किसान और फंस गयी दिल्ली
ये तीनों दल किसानों को मोहरा बना कर ठंड में सड़कों पर बैठा दिया है। वहीं दिल्लीवासियों को बढ़ते कोरोना का सामना करना पड़ा रहा है। ऐसे में दिल्ली की घेराबंदी से जरूरी चीजों की कमी हो रही है। सब्जियों के दाम बढ़ने शुरू हो गए हैं। साथ ही दिल्ली आने वाले लोगों को जाम की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन तीनों दलों के सियासी तिकड़म का खामियाजा किसान और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
अपना उल्लू साधने में लगे देश-विरोधी
इन तीनों दलों के सियासी दंगल का फायदा देश विरोधी ताकतें उठा रही हैं, जो किसानों की आड़ में अपना एजेंडा लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदी साफ देखी जा रही है। जो खुलेआम देश विरोधी नारे लगा रहे हैं। कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए लागू करने की मांग की जा रही है। यहां तक कि इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप भी देने की कोशिश की जा रही है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को ठोके जाने का गुणगान किया जा रहा है।
ये अलग मुद्दा है कि वह किस पार्टी से थीं, असली मुद्दा है कि वह देश की प्रधानमंत्री थीं। और जिस प्रदर्शन में इंदिरा की हत्या का गुणगान किया जा रहा है, यही बात वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए लागु होती है, जिन्हे भी इंदिरा गाँधी की तरह ठोकने का गुणगान किया जा रहा है, उस प्रदर्शन को इन तीनों ही पार्टियों का समर्थन है। तीनों में से किसी भी पार्टी न इस गुणगान का विरोध किया और न ही अपना समर्थन वापस लिया। इसमें कोई शंका नहीं, इस प्रदर्शन पर इन तीनों पार्टियों की बजाए देश-द्रोहियों के कब्जे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जो इस प्रदर्शन से कहीं अधिक गंभीर मसला है।
अमरिंदर, केजरीवाल और अकाली दल में हो गयी तू-तू मैं-मैं
नए कृषि सुधार कानून पर मचे घमासान के बीच किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच वार्ता का दौर जारी है। वहीं किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर और नोएडा बोर्डर पर जमे हुए हैं, जिससे दिल्ली आने-जाने वालों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच किसानों के प्रदर्शन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अकाली दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है।
दिल्ली और पंजाब मुख्यमंत्रियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू
पंजाब के पदर्शनकारी किसानों के समर्थन में खड़ी आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला बोला है। अमरिंदर सिंह के परिवार पर ईडी का केस चलने की बात करते हुए केरीवाल ने सवाल किया है कि वह किसके दबाव में दिल्ली सरकार पर केंद्र सरकार के कानूनों को लागू करने का झूठा आरोप लगा रहे हैं, जबकि खुद कैप्टन ने कानून रोकने के कई मौके गवांए हैं।
ओछी राजनीती कर रहे हैं अमरिंदर सिंह --केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कानूनी प्रावधान जानने के बावजूद पंजाब के मुख्यमंत्री ने उन पर आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने काले कानून पास कर दिए। इस नाजुक मौके पर भी इस तरह की गिरी हुई राजनीति कैप्टन साहब कैसे कर सकते हैं? केजरीवाल ने सवाल किया कि कैप्टन साहब, आज आपके ऊपर किसका दबाव है, जो झूठे आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी की बोली बोल रहे हो? बीजेपी के साथ यह दोस्ती निभा रहे हो या कोई दबाव है?
कमेटी में क्यों नहीं रोका गया --केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कैप्टन साहब के पास यह बिल रोकने के कई मौके आए थे। आज से डेढ़ साल पहले 2019 में केंद्र सरकार ने यह तीनों काले कानून बनाने के लिए एक कमेटी बनाई थी। उस कमेटी में कौन था? उस कमेटी में कैप्टन साहब थे। उस कमेटी में इन काले कानूनों को क्यों नहीं रोका?
कमेटी में एक बार भी इन कानूनों का विरोध क्यों नहीं किया? बाहर आकर लोगों को क्यों नहीं बताया कि केंद्र सरकार इतने खतरनाक कानून बनाने जा रही हैं। केजरीवाल ने कहा कि कैप्टन के पास एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, इतने सारे मौके आए, जब आप इन बिल को रोक सकते थे। आज पंजाब का किसान आपसे पूछ रहा है कि आपने यह बिल क्यों नहीं रोके?
अमरिंदर सिंह का केजरीवाल पर पलटवार
केजरीवाल के हमले से आगबबूला हुए अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि वो किसानों के बड़े मुद्दे पर छोटी सियासत कर रहे हैं।कैप्टन ने कहा कि केजरीवाल किसान के हितों की रक्षा करने में असफल रहे हैं और इसे छिपाने के लिए निम्न दर्जे की बेतुकी भाषा बोल रहे हैं। कैप्टन ने सवाल किया कि आप पंजाब की तरह अपने राज्य की विधानसभा में कानून पास कर केंद्र के खिलाफ रुख क्यों नहीं अपनाते हैं।
दोहरे मापदंड अपनाते हैं केजरीवाल --अमरिंदर सिंह
कैप्टन ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि आप नेता खतरनाक कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ने की कोशिश भी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कानूनों को चुपचाप नोटिफाई करने के बजाय केजरीवाल को इन कानूनों को बेअसर करने की कुछ कोशिशें करनी चाहिए थीं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केजरीवाल के दोहरे मापदंड बार-बार सामने आ रहे हैं। अब इस मुद्दे पर वे पूरी तरह घिर गए हैं।
केजरीवाल एक डरपोक आदमी --अमरिंदर सिंह
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘डरकर केंद्रीय कानूनों की अधिसूचना जारी करने के बजाय केजरीवाल उनका मुकाबला करने के लिए कोशिश कर सकते थे और किसानों के अधिकारों की रक्षा कर सकते थे।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट हो गया है कि यह ‘डरपोक व्यक्ति’, जिसका दोहरा मापदंड बार-बार बेनकाब हो गया, अब इस मुद्दे पर पूरी तरह घिर गया है।
अकाली दल का केजरीवाल और अमरिंदर सिंह पर हमला
अरविंद केजरीवाल और अमरिंदर सिंह के बीच चल रही जुबानी जंग में अकाली दल भी कूद पड़ा है। अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। अकाली दल ने कहा कि दोनों मुख्यमंत्री किसानों के मामले में सियासत कर रहे हैं और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
केजरीवाल ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा --बादल
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कृषि कानूनों को लागू करके किसानों की पीठ में छूरा घोंपने का आरोप लगाया। बादल ने एक बयान में कहा, ‘‘यह हद दर्जे की राजनीतिक बेईमानी ही नहीं अपितु सरल हृदय वाले और विश्वास रखने वाले किसानों के साथ अमानवीय विश्वासघात है।’’ उन्होंने कहा कि वह और किसान यह जानकर स्तब्ध हैं कि केजरीवाल ‘किसान विरोधी’ कानूनों को लागू भी कर चुके हैं और उन्होंने इस संबंध में गजट अधिसूचना भी जारी कर दी।
केजरीवाल के घड़ियाली आंसू -- बादल
सुखबीर सिंह बादल ने केजरीवाल पर हमला करते हुए किसानों के मामले में घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘‘ यहां तक घड़ियाल को भी केजरीवाल से एक या दो बातें सीखने होगी कि नकली आंसू कैसे बहाये जाएं। वाकई, घडि़याली आंसू के बारे में कहावत बदलकर केजरीवाल के आंसू करना होगा।’’
हरसिमत कौर का अमरिंदर पर निशाना
अकाली दल की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने ट्वीट करके हमला किया है कि जब अध्यादेश पास किया गया तब कैप्टन एक इंच भी नहीं हिले और न ही जब किसान रेल की पटरियों पर बैठे तब और न ही उस समय जब किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस छोड़े गए। वे ठंड में दिल्ली की सड़कों पर बहादुरी से डटे हैं। लेकिन गृह मंत्री उन्हें बुलाते हैं तो वह दौड़कर जाते हैं। लेकिन मिलियन डॉलर का सवाल कि यह किसके हित के लिए है।
कांग्रेस, आप और अकाली दल की लड़ाई में फंस गयी दिल्ली
नए कृषि कानून को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल सियासी दंगल में कूद पड़े हैं। तीनों दल 2022 में होने वाले पंजाब चुनाव को लेगर एक दूसरे के खिलाफ दांव-पेंच लगा रहे हैं। इनके बीच किसानों का सबसे बड़ा हितैषी और दुश्मन साबित करने की होड़ मची हुई है। लेकिन इन तीनों के सियासी कुश्ती का खामियाजा किसान, दिल्लीवासी और दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।





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