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किसान प्रदर्शन : अमरिंदर सिंह, केजरीवाल और अकाली दल में तू-तू मैं-मैं, भुगत रहे दिल्लीवासी

कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने पंजाब चुनाव में किसानों को अपनी ओर आकर्षित करने उस आग को हवा दे दी है, जिसकी तपिश से ये ही तीनों पार्टियां बिलबिला रही हैं। देश के प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान होने पर इन तीनों में से किसी एक ने अभी तक न विरोध किया और न ही अपना प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष समर्थन वापस लेने का प्रयास तक नहीं किया। जिस कारण जनता में रोष जड़ कर रहा है, इंदिरा गाँधी और नरेंद्र मोदी दोनों ही भारत के प्रधानमंत्री हैं। और ये सत्ता के भूखे अपनी कुर्सी की खातिर प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने वालों के खड़े हैं। लानत है ऐसी ओछी राजनीती और ओछी राजनीती करने वालों पर, जो अपनी तत्कालीन और वर्तमान प्रमाणमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने वालों के साथ खड़े हैं। देश जानना चाहता है कि जो पार्टी अथवा नेता अपने प्रधानमंत्री के नहीं हो सकते, क्या जनता के हो सकते हैं? अगर थोड़ी भी नैतिकता है, तुरन्त अपना समर्थन वापस लें, आपस में चाहे कुछ भी करो, लेकिन प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने और उसे समर्थन देने वालों को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।     
नए कृषि कानून को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल सियासी दंगल में कूद पड़े हैं। तीनों दल 2022 में होने वाले पंजाब चुनाव को लेगर एक दूसरे के खिलाफ दांव-पेंच लगा रहे हैं। इनके बीच किसानों का सबसे बड़ा हितैषी और दुश्मन साबित करने की होड़ मची हुई है। लेकिन इन तीनों के सियासी कुश्ती का खामियाजा किसान, दिल्लीवासी और दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।

मोहरा बने किसान और फंस गयी दिल्ली 

ये तीनों दल किसानों को मोहरा बना कर ठंड में सड़कों पर बैठा दिया है। वहीं दिल्लीवासियों को बढ़ते कोरोना का सामना करना पड़ा रहा है। ऐसे में दिल्ली की घेराबंदी से जरूरी चीजों की कमी हो रही है। सब्जियों के दाम बढ़ने शुरू हो गए हैं। साथ ही दिल्ली आने वाले लोगों को जाम की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन तीनों दलों के सियासी तिकड़म का खामियाजा किसान और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

अपना उल्लू साधने में लगे देश-विरोधी 

इन तीनों दलों के सियासी दंगल का फायदा देश विरोधी ताकतें उठा रही हैं, जो किसानों की आड़ में अपना एजेंडा लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदी साफ देखी जा रही है। जो खुलेआम देश विरोधी नारे लगा रहे हैं। कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए लागू करने की मांग की जा रही है। यहां तक कि इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप भी देने की कोशिश की जा रही है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को ठोके जाने का गुणगान किया जा रहा है। 

ये अलग मुद्दा है कि वह किस पार्टी से थीं, असली मुद्दा है कि वह देश की प्रधानमंत्री थीं। और जिस प्रदर्शन में इंदिरा की हत्या का गुणगान किया जा रहा है, यही बात वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए लागु होती है, जिन्हे भी इंदिरा गाँधी की तरह ठोकने का गुणगान किया जा रहा है, उस प्रदर्शन को इन तीनों ही पार्टियों का समर्थन है। तीनों में से किसी भी पार्टी न इस गुणगान का विरोध किया और न ही अपना समर्थन वापस लिया। इसमें कोई शंका नहीं, इस प्रदर्शन पर इन तीनों पार्टियों की बजाए देश-द्रोहियों के कब्जे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जो इस प्रदर्शन से कहीं अधिक गंभीर मसला है। 

अमरिंदर, केजरीवाल और अकाली दल में हो गयी तू-तू मैं-मैं

नए कृषि सुधार कानून पर मचे घमासान के बीच किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच वार्ता का दौर जारी है। वहीं किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर और नोएडा बोर्डर पर जमे हुए हैं, जिससे दिल्ली आने-जाने वालों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच किसानों के प्रदर्शन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अकाली दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। 

दिल्ली और पंजाब मुख्यमंत्रियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू 

पंजाब के पदर्शनकारी किसानों के समर्थन में खड़ी आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला बोला है। अमरिंदर सिंह के परिवार पर ईडी का केस चलने की बात करते हुए केरीवाल ने सवाल किया है कि वह किसके दबाव में दिल्ली सरकार पर केंद्र सरकार के कानूनों को लागू करने का झूठा आरोप लगा रहे हैं, जबकि खुद कैप्टन ने कानून रोकने के कई मौके गवांए हैं।

ओछी राजनीती कर रहे हैं अमरिंदर सिंह --केजरीवाल 

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कानूनी प्रावधान जानने के बावजूद पंजाब के मुख्यमंत्री ने उन पर आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने काले कानून पास कर दिए। इस नाजुक मौके पर भी इस तरह की गिरी हुई राजनीति कैप्टन साहब कैसे कर सकते हैं? केजरीवाल ने सवाल किया कि कैप्टन साहब, आज आपके ऊपर किसका दबाव है, जो झूठे आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी की बोली बोल रहे हो? बीजेपी के साथ यह दोस्ती निभा रहे हो या कोई दबाव है? 

कमेटी में क्यों नहीं रोका गया --केजरीवाल 

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कैप्टन साहब के पास यह बिल रोकने के कई मौके आए थे। आज से डेढ़ साल पहले 2019 में केंद्र सरकार ने यह तीनों काले कानून बनाने के लिए एक कमेटी बनाई थी। उस कमेटी में कौन था? उस कमेटी में कैप्टन साहब थे। उस कमेटी में इन काले कानूनों को क्यों नहीं रोका?

कमेटी में एक बार भी इन कानूनों का विरोध क्यों नहीं किया? बाहर आकर लोगों को क्यों नहीं बताया कि केंद्र सरकार इतने खतरनाक कानून बनाने जा रही हैं। केजरीवाल ने कहा कि कैप्टन के पास एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, इतने सारे मौके आए, जब आप इन बिल को रोक सकते थे। आज पंजाब का किसान आपसे पूछ रहा है कि आपने यह बिल क्यों नहीं रोके?

अमरिंदर सिंह का केजरीवाल पर पलटवार 

केजरीवाल के हमले से आगबबूला हुए अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि वो किसानों के बड़े मुद्दे पर छोटी सियासत कर रहे हैं।कैप्टन ने कहा कि केजरीवाल किसान के हितों की रक्षा करने में असफल रहे हैं और इसे छिपाने के लिए निम्न दर्जे की बेतुकी भाषा बोल रहे हैं। कैप्टन ने सवाल किया कि आप पंजाब की तरह अपने राज्य की विधानसभा में कानून पास कर केंद्र के खिलाफ रुख क्यों नहीं अपनाते हैं।

दोहरे मापदंड अपनाते हैं केजरीवाल --अमरिंदर सिंह 

कैप्टन ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि आप नेता खतरनाक कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ने की कोशिश भी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कानूनों को चुपचाप नोटिफाई करने के बजाय केजरीवाल को इन कानूनों को बेअसर करने की कुछ कोशिशें करनी चाहिए थीं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केजरीवाल के दोहरे मापदंड बार-बार सामने आ रहे हैं। अब इस मुद्दे पर वे पूरी तरह घिर गए हैं।

केजरीवाल एक डरपोक आदमी --अमरिंदर सिंह 

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘डरकर केंद्रीय कानूनों की अधिसूचना जारी करने के बजाय केजरीवाल उनका मुकाबला करने के लिए कोशिश कर सकते थे और किसानों के अधिकारों की रक्षा कर सकते थे।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट हो गया है कि यह ‘डरपोक व्यक्ति’, जिसका दोहरा मापदंड बार-बार बेनकाब हो गया, अब इस मुद्दे पर पूरी तरह घिर गया है।

अकाली दल का केजरीवाल और अमरिंदर सिंह पर हमला 

अरविंद केजरीवाल और अमरिंदर सिंह के बीच चल रही जुबानी जंग में अकाली दल भी कूद पड़ा है। अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। अकाली दल ने कहा कि दोनों मुख्यमंत्री किसानों के मामले में सियासत कर रहे हैं और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। 

केजरीवाल ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा --बादल 

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कृषि कानूनों को लागू करके किसानों की पीठ में छूरा घोंपने का आरोप लगाया। बादल ने एक बयान में कहा, ‘‘यह हद दर्जे की राजनीतिक बेईमानी ही नहीं अपितु सरल हृदय वाले और विश्वास रखने वाले किसानों के साथ अमानवीय विश्वासघात है।’’ उन्होंने कहा कि वह और किसान यह जानकर स्तब्ध हैं कि केजरीवाल ‘किसान विरोधी’ कानूनों को लागू भी कर चुके हैं और उन्होंने इस संबंध में गजट अधिसूचना भी जारी कर दी।

केजरीवाल के घड़ियाली आंसू -- बादल 

सुखबीर सिंह बादल ने केजरीवाल पर हमला करते हुए किसानों के मामले में घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘‘ यहां तक घड़ियाल को भी केजरीवाल से एक या दो बातें सीखने होगी कि नकली आंसू कैसे बहाये जाएं। वाकई, घडि़याली आंसू के बारे में कहावत बदलकर केजरीवाल के आंसू करना होगा।’’

हरसिमत कौर का अमरिंदर पर निशाना 

अकाली दल की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने ट्वीट करके हमला किया है कि जब अध्यादेश पास किया गया तब कैप्टन एक इंच भी नहीं हिले और न ही जब किसान रेल की पटरियों पर बैठे तब और न ही उस समय जब किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस छोड़े गए। वे ठंड में दिल्ली की सड़कों पर बहादुरी से डटे हैं। लेकिन गृह मंत्री उन्हें बुलाते हैं तो वह दौड़कर जाते हैं। लेकिन मिलियन डॉलर का सवाल कि यह किसके हित के लिए है।

कांग्रेस, आप और अकाली दल की लड़ाई में फंस गयी दिल्ली 

नए कृषि कानून को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल सियासी दंगल में कूद पड़े हैं। तीनों दल 2022 में होने वाले पंजाब चुनाव को लेगर एक दूसरे के खिलाफ दांव-पेंच लगा रहे हैं। इनके बीच किसानों का सबसे बड़ा हितैषी और दुश्मन साबित करने की होड़ मची हुई है। लेकिन इन तीनों के सियासी कुश्ती का खामियाजा किसान, दिल्लीवासी और दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।

‘किसान आंदोलन’ का एक ही लक्ष्य है – पंजाब चुनाव

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
राजेश खन्ना और मुमताज़ अभिनीत चर्चित फिल्म "दुश्मन" का एक गीत "सच्चाई छुप नहीं सकती, कभी बनावट के असूलों से, कि खुश्बू आ नहीं सकती, कभी कागज के फूलों से...." जो हो रहे किसान आंदोलन पर सटीक बैठ रहा है। जितनी जल्दी परतें इस आंदोलन की खुलनी शुरू हो चुकी हैं, उतनी जल्दी CAA विरोध की भी नहीं। और जब खुलनी शुरू हुई तो जनता ने आसानी से यकीन नहीं किया। लेकिन इस किसान आंदोलन ने तो प्रारम्भ होते ही संदेह करवाना शुरू कर दिया था। 

पहली बार किसी सिख 
के गले में Cross 
देखने को मिला 
आंदोलन शुरू हुआ उस पंजाब राज्य से जिसके मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र के ही कानून को मानने से मना कर दिया था, फिर आंदोलन का क्या है आधार? देखिए, इस आंदोलन को अपनी ओर करने के लिए कैसे-कैसे तार जुड़ने शुरू हो गए। इस कानून के विरोधी स्वर मुखरित किये थे अकाली दल ने, जिसे कांग्रेस ने लपक लिया। खैर, आंदोलन शुरू हुआ और दिल्ली तक उसकी आग पहुँचते ही आम आदमी पार्टी लपकने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस, अकाली दल और आप तीनों पार्टियां भूल रही हैं कि चुनाव के समय तक जब किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हो चूका होगा, तब इन तीनों की क्या स्थिति होगी, यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। 

इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होता दिख रहा है। जब चुनावों में पूछा जाएगा कि "जिस इंदिरा गाँधी की शाहदत के नाम पर वोट मांगते हो, फिर किसान आंदोलन में खुलेआम 'जैसे इंदिरा को ठोका, वैसे मोदी को भी ठोकेंगे', नारों का कांग्रेस ने क्यों नहीं विरोध किया?" यह वह ज्वलंत प्रश्न है जिसका जवाब माँगा जायेगा। अभी तक कांग्रेस के किसी भी नेता तो क्या इंदिरा गाँधी के अपने ही परिवार सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा किसी ने विरोध नहीं किया। शायद विरोध इसलिए नहीं किया जा रहा कि "मोदी को भी ठोकने" की बात कही जा रही है। कांग्रेस और इसके समर्थक पार्टियां इसका जवाब देने के तैयार रहे। 

कांग्रेस के बाद जो नुकसान दिख रहा है वह आम आदमी पार्टी और अकाली दल को। केजरीवाल पार्टी को इसलिए कि पार्टी ने दिल्ली में लागू कर दिया है, फिर किस आधार पर विरोध किया जा रहा है? दूसरे, शब्दों में कहा जाये तो मोदी विरोध में इनको कुछ नहीं सूझ रहा। यानि भाजपा के लिए खुला मैदान, फिर रोना शुरू होगा EVM का।  

अवलोकन करें:-

जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। : किसान प्रदर्शन में खालिस्तानी
जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। : किसान प्रदर्शन में खालिस्तानी
  

पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसके लिए अभी से ही जमीन तैयार की जा रही है। कई विश्लेषक मौजूदा ‘किसान आंदोलन’ को इसी रूप में देख रहे हैं। इनमें तीन पार्टियाँ मुख्यतः सम्मिलित हैं – AAP, कांग्रेस और अकाली दल। शुरू तो अकाली दल ने किया था NDA छोड़ कर और कैबिनेट से हट कर, लेकिन अब अमरिंदर और अरविंद केजरीवाल ने इसे हाईजैक कर लिया है।

अरविन्द केजरीवाल का दोगलापन 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके विधायक जहाँ पंजाब से आए ‘किसान आंदोलनकारियों’ के समर्थन में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने खुलासा किया है कि AAP सरकार ने तो मोदी सरकार द्वारा पारित कराए गए 3 कृषि कानूनों में से एक कानून को सोमवार (नवंबर 23, 2020) को ही प्रदेश में लागू कर दिया है। उन्होंने ‘दिल्ली राजपत्र’ के दस्तावेज की तस्वीरें शेयर कर सबूत भी दिखाया।

इस दस्तावेज के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद-123 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में, भारत के राष्ट्रपति ने ‘कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा)’ नामक अध्यादेश, 2020 प्रख्यापित किया है, जिसे विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार का राजपत्र असाधारण भाग-2, खंड-1 में प्रकाशित किया गया है। आगे लिखा है कि यह किसी भी राज्य की APMC अधिनियम या अन्य कानून के लागू होने के समय प्रवृत्त या प्रलेख के प्रभाव में आने वाले समय में लागू होगा।

इस राजपत्र का गौर करने लायक हिस्सा वो है, जिसमें लिखा है, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली की विधानसभा ने ‘दिल्ली कृषि उपज विपणन अधिनियम, 1998’ (1999 का दिल्ली अधिनियम, संख्या-7) को अधिनियमित किया है, जो जून 2, 1999 से लागू है।” यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि सरकार ने APMC के कुछ क्षेत्रों को पुनः परिभाषित किया है, जहाँ ये कानून लागू होंगे। दस्तावेज के दूसरे पन्ने पर उन परिवर्तनों के बारे में बताया गया है।

वहीं आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली में तो सब्जियों और फलों को पहले ही डीरेगुलेट किया जा चुका था, अब अनाजों को लेकर भी ये सुविधा लागू हो गई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, पार्टी ने कहा कि किसान बस इतना चाहते हैं कि MSP से छेड़छाड़ न हो और इस मामले में पार्टी उनके समर्थन में है। सांसद मनोज तिवारी ने पूछा कि जब अपने इस कानून को लागू कर दिया है तो इसके विरोध में आपके विधायक क्यों भाग-दौड़ कर रहे हैं?

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जिस तरह से बयान दिए हैं और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ तू-तड़ाक वाली भाषा में बात की, उससे स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस आग में घी डालने वाला काम करना चाहती थी। राहुल गाँधी ने ट्रैक्टर पर बैठ कर ड्रामा किया और किसानों के कथित समर्थन में रैली की, लेकिन बिहार चुनाव और उपचुनावों में हुए हार के बाद वो ठंडे पड़ गए। इधर केजरीवाल की पार्टी प्रदर्शनकारियों को भोजन-पानी मुहैया करा रही है।

‘अमर उजाला’ के एक विश्लेषण में पाया गया है कि इन तीनों दलों के नेता अनौपचारिक बातचीत में मान रहे हैं कि जो भी पार्टी किसानों को जीत लेगी, आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में सत्ता की चाभी उसके ही पास रहेगी। इस चुनाव में 1 वर्ष बचे हैं और किसानों के जमावड़े के सहारे इन दलों को अपनी राजनीति चमकाने का अच्छा अवसर मिला है। बुराड़ी के मैदान में प्रदर्शनकारियों को सारी सुविधाएँ देने से लेकर केंद्र पर लगातार वार तक, निशाना 2022 ही है।

दिल्ली सरकार द्वारा सरकार की उस माँग को ठुकरा दी गई, जिसमें स्टेडियम को अस्थायी जेल के रूप में माँगा गया था। इसके बाद से AAP का हर छोटा-बड़ा नेता सोशल मीडिया पर इस ‘किसान आंदोलन’ के बारे में ही बात करता दिख रहा है। ओखला विधायक अमानतुल्लाह खान के सामने एक प्रदर्शनकारी ने ‘जय हिंद’ और ‘भारत माता की जय’ को नकारते हुए ‘अस्सलाम वालेकुम’ की खुली पैरवी की।

नवंबर 29, 2020 को AAP नेताओं ने इसी मसले पर एक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सभी में मोदी सरकार पर ही हमला बोला गया। केजरीवाल दिल्ली छोड़ कर पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, इस महत्वाकांक्षा की चर्चा अक्सर होती रही है। 2014 लोकसभा चुनाव में राज्य में पार्टी को जिस तरह से 24% से अधिक वोट शेयर मिले थे, AAP अगले चुनाव के लिए तैयारी कर रही है।

 दिल्ली सरकार के जल बोर्ड ने आन्दोलनकारियों को पानी के टैंकर मुहैया कराए हैं। केजरीवाल ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनकारियों की सेवा में लगाया है। अकाली दल के नेता लगातार सिंघु बॉर्डर का दौरा कर रहे हैं और प्रदर्शनकारियों की ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं। दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंध कमेटी पर अकाली दल ही सत्तासीन है और इसके सहारे गुरुद्वारों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों की मदद की जा रही है।

पंजाब में सत्तासीन कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व किसान कानून पर लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। वहीं, पार्टी की दिल्ली यूनिट के नेता भी अपने स्तर पर प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। युवा कॉन्ग्रेस नेताओं ने किसानों को भोजन-पानी और दवा-दारू मुहैया कराने के लिए सिंघु व टिकरी बॉर्डर का दौरा किया है। राहुल और प्रियंका गाँधी छुट्टियाँ मनाते हुए ही सोशल मीडिया पर ट्वीट्स दाग रहे हैं। ‘किसान आंदोलन’ के रूप में उन्हें भी एक हवाई मुद्दा मिल गया है, क्योंकि पंजाब में चुनाव के समय गिनाने को उनके पास कुछ खास है नहीं।

यही आशंका हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने जताई है। उन्होंने कहा कि किसानों का ये आंदोलन पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की राजनीति है। उनका कहना है कि अगले वर्ष पंजाब में चुनाव हैं और ऐसा लग रहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों को उकसाकर भेजा है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के इकलौते पंजाब राज्य से ही किसान क्यों आगे आया है, बाकी किसी प्रदेश के किसान इस आंदोलन में क्यों नहीं पहुँचे?

अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने हरसिमरत कौर के इस्तीफे को पार्टी द्वारा किसानों के लिए एक बड़े बलिदान के रूप में पेश किया था, लेकिन अब कैप्टन अमरिंदर सिंह की सक्रियता ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जैसे करतारपुर कॉरिडोर खोलने के मामले में अकाली दल ने क्रेडिट के लिए माथापच्ची की थी, अभी भी वो कॉन्ग्रेस से आगे दिखना चाहती है। हरियाणा में भी हुड्डा आंदोलन को हवा देने में लगे हैं। ‘किसान आंदोलन’ का एक ही लक्ष्य है – पंजाब चुनाव।

मोदी ने भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कहा कि अब विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है। दुष्प्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन इससे आगे चलकर ऐसा हो सकता है। जो अभी हुआ ही नहीं, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है। कृषि सुधारों के मामले में भी यही हो रहा है। ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है।