आखिर दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल DTC वापस लेकर किस आधार पर दिल्ली की कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? ज्ञात हो, नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हुए शाहीन बाग़ में भी इनकी भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, जिसका अंत हिन्दू-विरोधी दंगों के साथ हुआ और मुख्य षडयंत्रकारी इन्हीं का निगम पार्षद निकला, जो आज तक जेल में हैं। चुनावों में हनुमान चालीसा पढ़ने वाला हिन्दू विरोधी दंगाइयों का समर्थन करे। जेएनयू में टुकड़े-टुकड़े गैंग पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत देने की फाइल को दबा कर बैठ जाना, सिद्ध करता है कि केजरीवाल और इसकी पार्टी को जनता नहीं बल्कि अपनी रोजी-रोटी की चिंता है।
प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ के लिए एक बजे रात अपने विधायक को भेज कर पानी की व्यवस्था करवाने वाले अरविंद केजरीवाल ने नया फ़रमान जारी किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात की गई डीटीसी (DTC) बसों को तत्काल प्रभाव से डिपो में लौटने का आदेश दिया है।
केजरीवाल ने पुलिस से बसें छीन ली और कांग्रेस ने 10 साल सेना को लड़ाकू विमान नही खरिदने दिए Currently, there are over 3,700 DTC buses, out of which nearly 10 per cent are under special hire.https://t.co/Ere4OHBiJj India has a history of brave patriots from Prithvi Raj Chauhan to APJ Kalam & also has a history of Jaichand to Mir Jaffar. Recent action by Arvind Kejriwal to deny DTC bus services to police is a case in point which proves his anarchist credentials in support of Delhi seizure ओछी राजनीति। दिल्ली में अराजकता फैलाने के लिए केजरीवाल सरकार ने पुलिस को बसें देने से इनकार कर दिया। इसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है।
मकसद दोनों का एक ही है देश की सुरक्षा, अस्मिता, सम्मान को कमज़ोर करना...!!
दिल्ली के परिवहन विभाग ने डीटीसी को निर्देश दिया है कि दिल्ली पुलिस को दी गई 576 बसें वापस की जाएँ। दरअसल ‘किसान आंदोलन’ को मद्देनज़र रखते हुए तैनात किए गए पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही के लिए लो फ्लोर डीटीसी बसों का इस्तेमाल किया गया है।
‘किसान आंदोलन’ में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 576 डीटीसी बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दिल्ली सरकार ने डीटीसी से इस मुद्दे पर रिपोर्ट माँगी थी। जिसमें यह पता चला कि 20 फ़ीसदी से अधिक बसें विशेष किराए पर चल रही हैं।
26 जनवरी को किसान आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा के दौरान काफी बसें क्षतिग्रस्त हुई थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ विशेष किराए पर चल रही डीटीसी बसों को वापस बुलाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा एक और अहम फैसला लिया गया है, जिसके मुताबिक़ डीटीसी बसों की सेवा लेने के लिए पुलिस या किसी भी सुरक्षा एजेंसी को दिल्ली सरकार से अनुमति लेनी होगी।
दिल्ली के परिवहन मंत्री और डीटीसी बोर्ड के चेयरमैन कैलाश गहलोत के अनुसार अब से विशेष किराए पर डीटीसी बसों की सेवा लेने के लिए दिल्ली सरकार की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा 26 जनवरी को हुई हिंसा को देखते हुए दिल्ली सरकार और व्यवस्थाएँ देख सकती है।
डीटीसी में कुल 3762 बसें हैं, जिसमें 3400 बसों से सेवाएँ ली जाती हैं। 26 जनवरी को अवकाश होने की वजह से सिर्फ 1975 बस सेवाएँ दे रही थीं। इसमें सरोजिनी नगर, वजीरपुर और गाजीपुर डिपो की लगभग 40 बसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं। नतीजतन उस दिन शाम को सिर्फ 900 बसें बाहर भेजी गई थीं।
डीटीसी श्रेणी में सिर्फ लो फ्लोर बसें ही मौजूद हैं, इनके बड़े आकार के अलावा इंजन बंद होने के समय इन्हें खिसकाना लगभग नामुमकिन है। इसकी वजह से इन बसों का इस्तेमाल सड़कें जाम करने के लिए किया जाता है।

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