सहारनपुर के जिस मजदूर को आतंकियों ने मारा, उसके परिवार ने एक करोड़ का मुआवजा मांगा

कश्मीर में नितरोज हो रही आतंकवादियों द्वारा हत्याओं पर कब लगाम लगेगी? सरकार को आतंकवादियों पर कार्यवाही के साथ-साथ इनको पनाह दे रहे स्लीपर सेल्स पर भी कार्यवाही करनी चाहिए, क्योकि जब तक इन पर नकेल नहीं डाली जाएगी, हत्याओं का सिलसिला ख़त्म नहीं होगा। आखिर वो कौन हैं जो आतंकवादियों को पनाह दे रहे हैं? 

दूसरे, लाशों पर सियासत करते सियासतखोर देखे, लेकिन अब सौदा करने वाले भी देखने को मिल रहे हैं। नौकरी के अलावा एक करोड़ की मांग को लाश की बोली ही कहा जा सकता है। मृतक के भाई नईम का यह कहना कि उसका भाई आतंकवादियों की गोली से मरा है या मिलिट्री की यानि अप्रत्यक्ष रूप से शक की सुई मिलिट्री पर आ गयी। जब सुरक्षाकर्मियों पर आरोप की बात निकली है तो बहुत दूर तक जाएगी। ऐसे में मुआवजा देने से पूर्व यह भी जाँच होनी चाहिए कि क्या वह स्लीपर सैल था? पीड़ित परिवार द्वारा एक करोड़ की मांग अपने आप में बहुत बड़ा प्रश्न है। ऐसी मानसिकता वालों को किस श्रेणी में रखा जाए विचारणीय है।  

                                                             सभी चित्र ANI साभार 
कश्मीर में आतंकवादियों ने शनिवार 16 अक्टूबर को 2 आम नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। एक पर श्रीनगर में तो दूसरे पर पुलवामा में हमला किया गया। एक मृतक की पहचान 30 साल के अरविंद कुमार के रूप में हुई। अरविंद कुमार बिहार के रहने वाले थे। वह श्रीनगर में ठेला लगाकर अपना व्यवसाय चला रहे थे। वहीं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले सागिर अहमद पर पुलवामा में हमला हुआ था, वह कारपेंटर का काम करते था। 

सागिर के परिवार वालों ने आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य के लिए नौकरी की मांग की है। न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए मृतक के भाई मोहम्मद नईम ख़ान ने कहा,

“हमारे पास फोन आया कश्मीर से कि आप तीन चार आदमी घर के, गाड़ी करके आ जाओ। आपके भाई को गोली लगी है। हम कैसे जाएं? हमारे पास कोई साधन नहीं है। सरकार ही कोई इंतज़ाम कर दे कि हमारे भाई का शव हमारे पास आ जाए।”

सागिर अहमद की चार बेटियां और एक बेटा है। परिवार ने बताया कि बेटा राजस्थान में कोई छोटा मोटा काम करता है। पत्नी का 6 महीने पहले देहांत हो गया था। 

सागिर अहमद के भाई मोहम्मद नईम खान ने कहा कि उनके भाई के छोटे-छोटे बच्चों है। उनके लिए आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। उनके पास पैसे का कोई इंतज़ाम नहीं है। कोरोना में कारोबार बंद हो जाने की वजह से पिछले एक साल से उनके भाई ही काम कर रहे थे। आरोपियों के बारे में पूछने पर नईम ने कहा,

“यह तो हमको पता नहीं कि आतंकवादियों ने मारा या मिलिट्री ने। वे काम से छुट्टी करके जैसे ही घर गए, बर्तन मांज रहे थे तब गोली लगी। अब गोली आतंकवादियों की थी या मिलिट्री की, ये मालूम नहीं। हमें तो आगे का कुछ पता ही नहीं लगा! लेकिन जिन्होंने भी उनको मारा है उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा देनी चाहिए।”

नईम ख़ान ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता की मांग की,

“उनके पीछे उनका बेटा, बहू, पोता और चार बेटियां है। हम सरकार से 1 करोड़ के मुआवजे की मांग करते है।”

उनके भाई ने बताया है कि वह पिछले डेढ़ साल से काम के लिए आते जाते रहते थे। अभी आख़री बार ढाई महीने पहले गए थे। तीन-चार दिन पहले उनसे बात हुई थी, एकदम ठीक थे, और अभी 1:30 घंटे पहले ख़बर आई कि उनका इंतकाल हो गया।   

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