कश्मीर में नितरोज हो रही आतंकवादियों द्वारा हत्याओं पर कब लगाम लगेगी? सरकार को आतंकवादियों पर कार्यवाही के साथ-साथ इनको पनाह दे रहे स्लीपर सेल्स पर भी कार्यवाही करनी चाहिए, क्योकि जब तक इन पर नकेल नहीं डाली जाएगी, हत्याओं का सिलसिला ख़त्म नहीं होगा। आखिर वो कौन हैं जो आतंकवादियों को पनाह दे रहे हैं?
दूसरे, लाशों पर सियासत करते सियासतखोर देखे, लेकिन अब सौदा करने वाले भी देखने को मिल रहे हैं। नौकरी के अलावा एक करोड़ की मांग को लाश की बोली ही कहा जा सकता है। मृतक के भाई नईम का यह कहना कि उसका भाई आतंकवादियों की गोली से मरा है या मिलिट्री की यानि अप्रत्यक्ष रूप से शक की सुई मिलिट्री पर आ गयी। जब सुरक्षाकर्मियों पर आरोप की बात निकली है तो बहुत दूर तक जाएगी। ऐसे में मुआवजा देने से पूर्व यह भी जाँच होनी चाहिए कि क्या वह स्लीपर सैल था? पीड़ित परिवार द्वारा एक करोड़ की मांग अपने आप में बहुत बड़ा प्रश्न है। ऐसी मानसिकता वालों को किस श्रेणी में रखा जाए विचारणीय है।
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| सभी चित्र ANI साभार |
सागिर के परिवार वालों ने आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य के लिए नौकरी की मांग की है। न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए मृतक के भाई मोहम्मद नईम ख़ान ने कहा,
“हमारे पास फोन आया कश्मीर से कि आप तीन चार आदमी घर के, गाड़ी करके आ जाओ। आपके भाई को गोली लगी है। हम कैसे जाएं? हमारे पास कोई साधन नहीं है। सरकार ही कोई इंतज़ाम कर दे कि हमारे भाई का शव हमारे पास आ जाए।”
सागिर अहमद की चार बेटियां और एक बेटा है। परिवार ने बताया कि बेटा राजस्थान में कोई छोटा मोटा काम करता है। पत्नी का 6 महीने पहले देहांत हो गया था।
Saharanpur: Family members mourn the demise of labourer Sagir Ahmad who was shot dead by terrorists in Pulwama, J&K on Saturday
— ANI UP (@ANINewsUP) October 16, 2021
"He had been working there for the last one year & is survived by 4 daughters. Govt should give assistance to the family," says his brother Naeem pic.twitter.com/RkM6QPNOIl
This comes true...isn't it?
— Ponnappa Pran (@ponnappa_pran) October 17, 2021
वोट नमो को भले न देते हों लेकिन सुविधाओं और लाभ को लेने में पीछे नहीं हैं pic.twitter.com/5uaAurXHzP
किसी भी आतंकी हमले पर कोई शिया सुन्नी बोहरा समाज कोई निंदा नही करती
— M.Reena (@m_reena13) October 17, 2021
सब सेकुलरिज्म का राग अलापते है और बहुसंख्यक समुदाय को मूर्ख बनाने में लगे है
सागिर अहमद के भाई मोहम्मद नईम खान ने कहा कि उनके भाई के छोटे-छोटे बच्चों है। उनके लिए आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। उनके पास पैसे का कोई इंतज़ाम नहीं है। कोरोना में कारोबार बंद हो जाने की वजह से पिछले एक साल से उनके भाई ही काम कर रहे थे। आरोपियों के बारे में पूछने पर नईम ने कहा,
“यह तो हमको पता नहीं कि आतंकवादियों ने मारा या मिलिट्री ने। वे काम से छुट्टी करके जैसे ही घर गए, बर्तन मांज रहे थे तब गोली लगी। अब गोली आतंकवादियों की थी या मिलिट्री की, ये मालूम नहीं। हमें तो आगे का कुछ पता ही नहीं लगा! लेकिन जिन्होंने भी उनको मारा है उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा देनी चाहिए।”
नईम ख़ान ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता की मांग की,
“उनके पीछे उनका बेटा, बहू, पोता और चार बेटियां है। हम सरकार से 1 करोड़ के मुआवजे की मांग करते है।”
उनके भाई ने बताया है कि वह पिछले डेढ़ साल से काम के लिए आते जाते रहते थे। अभी आख़री बार ढाई महीने पहले गए थे। तीन-चार दिन पहले उनसे बात हुई थी, एकदम ठीक थे, और अभी 1:30 घंटे पहले ख़बर आई कि उनका इंतकाल हो गया।


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