‘गैर मर्द से हाथ मिलाना इस्लाम में गुनाह, बाप ने नहीं सिखाया?’: बुर्के वाली मुस्कान पर बरसे मौलाना

                मौलाना अब्दुल गफ्फार सलाफी (बाएँ) और बुर्का गर्ल मुस्कान खान (फोटो साभार: यूट्यूब)
कर्नाटक (Karnataka) हिजाब (Hijab) विवाद के बीच उडुपी के कॉलेज में ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाने वाली ‘बुर्का गर्ल’ मुस्कान खान (Muskan Khan) को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें मौलाना अब्दुल गफ्फार सलाफी ने मुस्कान खान पर बरसते हुए कहा कि मुस्कान को अल्लाह का डर तो है, लेकिन उसके अब्बू ने उसे ये शिक्षा नहीं दी कि किसी भी गैर मर्द से हाथ मिलाना इस्लाम में गुनाह है।

इस्लामिक कॉन्फ्रेंस वीडियो यूट्यूब चैनल के मुताबिक, मौलाना अब्दुल्ल गफ्फार सलाफी ने गैर मर्द से हाथ मिलाने के लिए मुस्कान खान को कड़ी फटकार लगाई। मौलाना ने कहा, “हैदराबाद से एक व्यक्ति मुस्कान से मिलने आया और उसने मुस्कान से हाथ बढ़ाकर मुसाफा (हाथ मिलाया) किया। उस 50 साल के आदमी ने मुस्कान से हाथ मिलाया, उसकी तारीफ की और कहा कि बेटी तुमने हमारा नाम रोशन कर दिया। इसके बाद ने उसके कंधे, कमर पर भी हाथ रखे। लेकिन, इससे मुस्कान को कोई ऐतराज नहीं हुआ। मतलब ये कि वो दीनदार तो है, अल्लाह का डर भी उसे है, वो स्कूल पर्दे में भी जाती है, लेकिन उसके बाप ने उसे ये नहीं सिखाया कि किसी गैर मेहरम (मर्द) से मुसाफा करना जायज नहीं है। मतलब ये हुआ कि उसके बाप ने उसे तालीम तो दी, लेकिन तरबियत नहीं दी।”

मौलाना ने मुस्लिमों को संबोधित करते हुए आगे कहा, “हमारे घर में मोहल्ले के लड़के आते हैं और हमारी बेटी को वो अपनी बहन कहते हैं। हमें बहुत अच्छा लगता है कि वो बहन कहते हैं। लिख लो बहन केवल अपनी सगी बहन होती है। इसके अलावा दुनिया में कोई बहन नहीं होती। फेसबुक, व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम पर किसी को बहन बना लो तो भी वो आपकी बहन नहीं है। आपको उससे दूर रहकर अपने घर की लड़कियों को मेहरम कौन है और गैर मेहरम कौन है।”

कुरान में बताया गया है मोबाइल के इस्तेमाल का तरीका

अब्दुल गफ्फार सलाफी के मुताबिक, भले ही आज मोबाइल तकनीक है, लेकिन 1400 साल पहले अल्लाह ने मुस्लिम औरतों को मोबाइल के इस्तेमाल का तरीका बताया था। मौलाना मुताबिक अल्लाह ने कहा था, “ऐ मुस्लिम औरतों अगर तुम्हारे मोबाइल पर किसी गैर मेहरम (मर्द) का कॉल आ जाए तो उससे नरमी से बात मत करना। अन्यथा वो तुमसे उम्मीद लगाने लगेगा, चक्कर चलाने लगेगा। इस्लाम में मोहब्बत केवल एक औरत और मर्द के बीच हो सकती है। अल्लाह गैर नमाजियों को नमाजी बनाए।”

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