‘मैं पागल हूँ क्या जो ये व्रत करूँगी?’: नसीरुद्दीन शाह की बीवी ने ‘करवा चौथ’ पर उगला जहर

हिन्दुओं के त्योहारों का चलन शुरू होते ही हिन्दू विरोधियों ने अभी से करवा चौथ पर जहर उगलना शुरू कर दिया है। भड़काने और माहौल ख़राब खुद कर रहे हैं और जब प्रतिक्रिया होगी तब अभिव्यक्ति को बोलने की आज़ादी का विधवा विलाप करने बैठ जाएंगे। कोई इन पागलों से पूछे कि करवा चौथ आएगी अक्टूबर में, अभी से रोना शुरू करने का क्या मतलब है? इन्ही लोगों की वजह से फसाद होते हैं, ऐसी उपद्रवी मानसिकता वाले एक्टरों की नयी एवं पुरानी फिल्मों का बहिष्कार कर इनको औकात दिखानी चाहिए।  
बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की बीवी और एक्ट्रेस रत्ना पाठक शाह (Ratna Pathak Shah) ने हिंदू त्योहार पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने करवा चौथ को महिलाओं की गुलामी और अंधविश्वास का प्रतीक बताते हुए इसे मनाने वाली महिलाओं का मजाक उड़ाया है। रत्ना पाठक शाह ने कहा कि देश में औरतों के लिए अभी भी कुछ नहीं बदला है। देश रूढ़िवादी होता जा रहा है। क्या हम सऊदी अरब जैसा देश बनना चाहते हैं?

हाल ही एंटरटेनमेंट वेबसाइट ‘पिंकविला‘ को एक दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 40 वर्षों में पहली बार उनसे पिछले साल पूछा गया था कि क्या वह अपने शौहर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की सलामती के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं? इस पर उन्होंने कहा, “क्या मैं पागल हूँ, जो ऐसा करूँगी?” उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश में औरतें अभी भी सदियों पुरानी प्रथाओं और रीति-रिवाजों को फॉलो करती आ रही हैं। पूरा समाज रूढ़िवादी होता जा रहा है। क्या यह भयावह नहीं है कि पढ़ी-लिखी आधुनिक महिलाएँ भी करवा चौथ का व्रत करती हैं। अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं, जिससे उन्हें विधवा होने का कोप न झेलना पड़े।”

‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ की अभिनेत्री ने कहा, “हम रूढ़िवादी हो रहे हैं। कुंडली दिखो, वास्तु कराओ, अपने ज्योतिषी को दिखाओ के विज्ञापनों की संख्या देखें। नित्यानंद की तरह फनी लोगों को देखिए, जिन्हें कहीं एक जगह मिल गई है। हर जगह एक मूर्ख, बूढ़ा गुरु बनकर बैठा हुआ है और हर कोई उनके पास जाता है। क्या यह आधुनिक समाज की निशानी है। यहाँ दाभोलकर जैसे तर्कवादी दिनदहाड़े मार दिए जाते हैं। उसका मुकदमा अभी चल रहा है और इसके बारे में कुछ नहीं किया जाएगा।”

रत्ना पाठक शाह ने बातचीत में यह भी कहा, “समाज रूढ़िवादी होने पर सबसे पहले औरतों पर शिकंजा कसता है। दुनिया की जितने भी रूढ़िवादी समाज हैं, सब पर नजर डाल लीजिए। आप देखेंगे कि औरतें ही हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आज भी औरतों के लिए कुछ भी नहीं बदला है और अगर बदलाव हुआ भी है तो वह बेहद मामूली है। लोग अब अंधविश्वासी होते जा रहे हैं। उन्हें धर्म को स्वीकार कर उसे अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

रत्ना शाह पाठक अक्सर अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रही हैं। उन्होंने करीब 40 साल पहले नसीरुद्दीन शाह से निकाह किया था। उनके दो बेटे हैं, जिनके नाम इमाद और विवान शाह हैं। उन्हें आखिरी बार यशराज फिल्म की ‘जयेशभाई जोरदार’ में देखा गया था। उन्होंने ‘लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का’ ‘खूबसूरत’, ‘कपूर एंड संस’ के अलावा हिट टीवी शो ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ जैसे कई प्रोजेक्ट में काम किया है।

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