सुभाष चन्द्र
अपने 26 जनवरी के लेख में मैंने बताया था कि किस तरह सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए भगवान राम के अपमान को खुली छूट दी थी और जस्टिस संदीप मेहता ने भगवान के अपमान को Line of Thought कह कर समर्थन दे दिया था।
उस लेख में मैंने यह भी लिखा था कि सुप्रीम कोर्ट के जजों का ऐसा आचरण अन्य लोगों को भगवान राम, रामचरितमानस, रामायण और महाभारत के अपमान के लिए प्रेरित करेगा। दरअसल जितने लोग भी भगवान राम या सनातन धर्म के अपमान को अपना लक्ष्य बनाए हुए हैं उसके पीछे सोनिया गांधी और कांग्रेस की ही प्रेरणा काम कर रही है क्योंकि सोनिया गांधी या “मोहब्बत की दुकान” के गल्ले पर बैठा उसका बेटा राहुल “कालनेमि” एक शब्द नहीं बोलते फिर चाहे भगवान राम का अपमान करने वाले DMK के लोग हों या NCP, राजद, जदयू या सपा के नेता हों। लेखक
इसे मैं सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ढील का परिणाम समझता हूं जो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सहयोगी और स्टालिन परिवार द्वारा चलाए जाने वाले कलैनार सेथिगल में एंकर Uma Ilakkiya ने भगवान राम के लिए अशोभनीय टिप्पणियाँ करने में सारी हदें पार कर दी। जिसका संज्ञान लेकर मुकदमा चलना चाहिए। उसने कहा -
“राम महल में हजारों महिलाओं के साथ रहते थे और शराब भी पीते थे। क्या आप उन्हें अपने बच्चों के लिए एक उदाहरण के रूप में पेश करेंगे? उनमें जीने का साहस नहीं था, इसलिए उन्होंने सरयू में छलाँग लगा कर आत्महत्या कर ली। क्या आप अपने बच्चों को उनके उदाहरण के साथ पालेंगे-पोसेंगे? ये कैसी मूर्खता है? राम ने अपनी ही पत्नी पर शक किया और उन्हें जंगल भेज दिया, क्या आप लोग इसे उदाहरण की तरह दिखाएंगे?
Uma Ilakkiya का जहर उगलना यहीं बंद नहीं हुआ, उसने आगे कहा कि ““राम एक हत्यारा था। उन्होंने खुद को छिपाकर बाली को मार डाला और जब शम्बूक ध्यान कर रहा था तो उसने बिना कारण पूछे उसका सिर काट दिया। क्या इस तरह का व्यक्ति आपके बच्चों के लिए आदर्श है?”
भाजपा/RSS के खिलाफ विषवमन करना तो Uma Ilakkiya के लिए कोई बड़ी बात थी ही नहीं।
यह वही DMK है जिसके मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को मलेरिया डेंगू और कोढ़ बता कर ख़तम करने की बात कही थी और सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को उसे बहुत हीलाहवाली के बाद ऐसा नोटिस जारी किया था जिसका जवाब देने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई और जिसकी वजह से उसने आज तक नोटिस का जवाब नहीं दिया।
यह वही DMK की सरकार है जिसने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दिन 36 मंदिरों में पूजा पर रोक लगा दी थी और यह बात स्टालिन सरकार ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट से कही है।
यह वही DMK सरकार है जो RSS के पथ संचलन की अनुमति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देने के लिए मजबूर होती है।
इस सन्दर्भ में श्रीमती नाज़िया इलाही खान के केवल तीन ही वीडियो जिसमें एक मुस्लिम होते हुए समस्त सनातन विरोधी और असदुद्दीन ओवैसी आदि की भड़काऊ सियासत को बेनकाब कर रही हैं:-
मेरा सीधा सवाल है CJI चंद्रचूड़ से है कि क्या वह हिंदू संस्कृति और सनातन के अपमान पर भी कभी Suo Moto संज्ञान लेने की हिम्मत करेंगे या हिंदुओं का अपमान सहते रहेंगे। वह मणिपुर हिंसा पर धमकी देते हैं कि सरकार कार्रवाई नहीं करेगी तो हम करेंगे और पत्रकारों को झूठी रिपोर्ट देने को भी उचित कहते हैं। यह Double Standard कब तक चलेगा। आप भगवा वस्त्र पहन कर द्वारिकाधीश मंदिर में जाते हैं और हिंदू आस्था पर कुठाराघात देखते रहते हैं, क्योंकि आपने सबरीमाला मंदिर को मलिन करने का भी अपराध किया था।
अवलोकन करें:-
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