अखिलेश यादव ने झूठ की राजनीति के लिए युवक के सुसाइड को बेरोजगारी से जोड़ा

अखिलेश यादव के दावे को संचिता के पिता ने नकार दिया
इंडी गठबंधन और लेफ्ट लिबरल गैंग लोकसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार हारने की खीज मोदी सरकार के खिलाफ फेक न्यूज और फेक नैरेटिव बनाकर मिटाने में लगा है। अब तो राहुल गांधी के बाद  संसद में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी झूठ का पिटारा लेकर आए। यादव ने आत्महत्या और बेरोजगारी का झूठ फैलाकर भाजपा को घेरने की नाकाम कोशिश की। लेकिन सपा मुखिया का झूठ कुछ पल भी नहीं टिक पाया।  अकाट्य सबूत ये साबित कर रहे हैं कि बार-बार झूठ की इंडी गठबंधन की मंशा कितनी घिनौनी है। यहां तक कई बार तो झूठ फैलाते-फैलाते खुद इनकी ही कलई खुल जाती है, लेकिन कहते हैं ना कि शर्म इनको आती नहीं! 

समाजवादी पार्टी के मुखिया और सांसद अखिलेश यादव ने हाल ही में एक युवक की आत्महत्या को लेकर झूठ फैलाया। उन्होंने वाराणसी में फांसी लगा आत्महत्या करने वाला हरीश और इसी kii सूचना पर आत्महत्या करने वाली उनकी पत्नी संचिता शरण को लेकर यह झूठे दावे किए।

अखिलेश यादव ने दावा किया कि 28 वर्षीय हरीश बागेश ने अपनी नौकरी जाने और दूसरी नौकरी ना मिलने के दबाव के कारण आत्महत्या की है। यादव ने भाजपा को इसमें घसीटते हुए दावा किया कि पति-पत्नी की आत्महत्या उत्तर प्रदेश में भाजपा की विफलता का प्रमाण है।

यूं तो इंडी गठबंधन का इतिहास झूठ का पुलिंदा है। चुनाव में संविधान बदलने की झूठी बातें, चुनाव के बाद फोन से ईवीएम अनलॉक और अब ऐसी झूठी बातों से कांग्रेस खुद ही एक्सपोज हो रही है। 

बेरोजगारी के चलते यूपी में युवक ने आत्महत्या की
7 जुलाई 2024
समाजवादी पार्टी के मुखिया और सांसद अखिलेश यादव झूठ पर झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं। अब यादव ने झूठ फैलाया है कि वाराणसी में एक युवक ने फांसी लगा आत्महत्या कर ली। अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट में दावा किया कि 28 वर्षीय हरीश बागेश ने अपनी नौकरी जाने और दूसरी नौकरी ना मिलने के दबाव के कारण आत्महत्या की है। यादव ने भाजपा सरकार को इसमें घसीटते हुए कहा कि आत्महत्या उत्तर प्रदेश में भाजपा की विफलता का प्रमाण है। 

सपा मुखिया ने बगैर सच्चाई जाने ही सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए इतना बड़ा झूठ बोल डाला। दरअसल, विपक्ष लाशों पर राजनीति का कोई मौका नहीं छोड़ता, भले ही इसके लिए उसे झूठ का सहारा लेना पड़े। मीडिया से बात करते हुए हरीश की पत्नी संचिता के पिता डॉ. रामशरण ने अखिलेश के दावे को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, “सपा नेता दंपत्ति की आत्महत्या पर राजनीति कर रहे हैं। यह बिल्कुल झूठ है कि उनका दामाद बेरोजगार था, जिससे उसने आत्महत्या की। वास्तव में हरीश मुंबई में नौकरी करते थे और उनकी सैलरी करीब एक लाख रुपये थी। उन्होंने स्वयं हरीश को गोरखपुर वापस बुलाया था, क्योंकि वे यहां अकेले थे। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा यूके में है। मैंने ही हरीश को यहां आकर काम करने के लिए कहा था। इसलिए अखिलेश यादव का दावा एकदम निराधार है।”

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नौकरी छूटने और फिर न लग पाने के दबाव में पति की आत्महत्या की सूचना मिलने पर पत्नी द्वारा भी आत्महत्या करने का दुःखद समाचार मिला। भाजपा सरकार की नाकामी का इससे बड़ा कोई और हलफ़नामा चाहिए क्या। भाजपा को सिर्फ़ सत्ता की राजनीति से मतलब है, जनता के दुख-दर्द, बेरोज़गारी या महंगाई से नहीं। भाजपा राज में हताश जनता से विनम्र आग्रह है कि ऐसा कोई भी क़दम न उठाएं क्योंकि आत्महत्या कोई समाधान नहीं है, समाधान है भाजपा सरकार का बदलना।”

इसी तरह के दावे कई सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्ष समर्थक ‘पत्रकारों ने भी किए, जिनमें रणविजय सिंह भी शामिल हैं। रणविजय सिंह ने लिखा, ”ये संचिता और हरीश हैं। इनकी शादी 2 साल पहले हुई थी। हरीश ने एमबीए किया था, फिर उसकी नौकरी चली गई। काफी तलाश करने के बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली। अब खबर है- बेरोजगारी से तंग आकर हरीश ने बनारस में आत्महत्या कर ली। यह खबर सुनकर पत्नी संचिता ने गोरखपुर स्थित अपने घर पर आत्महत्या कर ली। साल 2022 में देश में 15,783 लोगों ने बेरोजगारी के कारण आत्महत्या की।”

संचिता शरण के पिता ने नकारे दावे

8 जुलाई को मीडिया से बात करते हुए संचिता शरण के पिता डॉ. राम शरण ने अखिलेश यादव के दावों का खंडन कर दिया। उन्होंने कहा कि सपा नेता दंपत्ति की आत्महत्या पर राजनीति कर रहे हैं। शरण ने कहा कि हरीश मुंबई में नौकरी करते थे और उनकी सैलरी करीब ₹1 लाख/महीना थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं हरीश को गोरखपुर वापस बुलाया था, क्योंकि राम शरण और उनकी पत्नी (संचिता के माता-पिता) यहाँ अकेले थे और उनका बेटा इंग्लैंड में रहते हैं।
उन्होंने मीडिया से कहा, “यह अखिलेश यादव की राजनीति है। इस घटना का बेरोजगारी से कोई लेना-देना नहीं है। हरीश मुंबई में नौकरी करता था और उसकी सैलरी ₹1 लाख/महीना से अधिक थी। मैं उसे यहाँ वापस लाया, क्योंकि यहाँ दो बुजुर्ग लोग अकेले थे। मेरा बेटा यूके में रहता है। इसलिए मैंने हरीश को यहाँ आकर काम करने के लिए कहा। इसलिए अखिलेश यादव का दावा एकदम निराधार है।”
हरीश की कथित आत्महत्या से पहले की घटनाओं के बारे में बात करते हुए राम शरण ने बताया कि हरीश बागेश ने शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) को संचिता को बताया था कि वह पटना जा रहा है। संचिता ने उसे रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि दंपति ने आखिरी बार शनिवार शाम को बात की थी। रविवार सुबह पुलिस को परिवार से पता चला कि हरीश वाराणसी के सारनाथ के अटल नगर कॉलोनी में एक होटल के कमरे में लटका हुआ पाया गया।
आगे उन्होंने बताया कि जब संचिता को हरीश के आत्महत्या करने की सूचना मिली, तो उन्होंने फोन लगाया। डॉ शरण ने पुलिस को बताया कि जब वह वाराणसी जा रहे थे तब संचिता ने अपने पिता से बताया कि वह बागेश के बिना नहीं रह सकती और इमारत की दूसरी मंजिल से कूद गई। एसपी सिटी (शहर) केके विश्नोई ने सोमवार को कहा कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि मामले में आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि हरीश ने बेरोजगारी से हताश होकर आत्महत्या की है। इन रिपोर्ट्स में बताया गया था कि मृतक दंपति मुंबई से लौटने के बाद नई नौकरी नहीं पा सके थे। बताया गया था कि जहाँ हरीश HDFC बैंक में काम करते थे, जबकि संचिता पिछले बारह सालों से यहीं रहती थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि संचिता के परिवार को दोनों के शादी करने से कोई समस्या नहीं थी लेकिन हरीश के पिता इससे खुश नहीं थे।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि हरीश किसी कारण से डिप्रेशन में चले गए थे और नशे के आदी हो गए थे। यह भी बताया गया कि संचिता भी बीमार थी और कथित तौर पर उसे नशे की लत लग गई थी। इस कारण से उनके जीवन में आर्थिक तंगी के अलावा आपसी तनाव भी बढ़ गया था। पुलिस को उनके कमरे से नशीला पदार्थ , सिगरेट, एक लाइटर, एक मोबाइल, एक पर्स और फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी मिली थी।
हरीश और संचिता की शादी 2022 में हुई थी। बताया गया कि दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और 11वीं में पढ़ते समय ही दोनों में प्यार हो गया था। जहाँ एक ओर इस मामले में जाँच जारी है, वहीं आत्महत्या के लिए बेरोजगारी को ढाल बनाते हुए अखिलेश यादव इस घटना का राजनीतिकरण कर रहे हैं। जहाँ उन्हें इस शोक की घड़ी में परिवार प्रति संवेदना प्रकट करनी चाहिए थी, वहीं वह इस मामले से अपना राजनीतिक एजेंडा साधने में जुट गए।
गोद लिए गांवों की दस साल में भी तस्वीर नहीं बदली
2 जुलाई 2024
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने संसद में राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए झूठ का पिटारा खोल दिया। यादव ने बगैर किसी तथ्य या सबूत के आधार पर कहा, “पीएम ने बड़े पैमाने पर गांव गोद लिए थे। उन्होंने अपने दो टर्म पूरे कर लिए। इन दस साल में जिन गांवों को उन्होंने गोद लिया था, उनमें से किसी भी गांव की तस्वीर नहीं बदली। अगर दस सालों में तस्वीर बदली हो तो सत्ता पक्ष जरूर इस सदन में अपनी बात रखे।
साल 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के सभी सांसदों से अपने-अपने क्षेत्र के एक-एक गांव गोद लेने की अपील की थी, जिसका सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत विकास किया जा सके। इस मुहिम में पीएम मोदी ने खुद सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के जयापुर गांव को गोद लिया था। जयापुर अब आदर्श गांव में सम्मिलित हो चुका है। पीएम मोदी के जयापुर गांव को गोद लेने के बाद इसका कितना विकास और कायापलट हुआ है, इसका प्रमाण खुद गांव के लोगों ने दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक 10 साल में जयापुर का पूरा नक्शा ही बदल गया है। पीएम मोदी ने इस गांव को गोद लिया है, तब से गांव में दो-दो बैंक, एटीएम, पोस्ट ऑफिस, गांव में सड़क, घर-घर पानी और बिजली की सुविधा है और यहां लोगों को उज्ज्वला योजना के तहत गैस और आयुष्मान कार्ड की सुविधा मिली है। पीएम के गोद लिए दूसरों गांवों में भी ऐसे ही कायाकल्प हुआ है।

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