देशभर के कई राज्यों में चल रहा लव जिहाद भोली-भाली हिंदू युवतियों को प्रलोभन, लालच देकर प्रेम के जाल में फंसाने, मुस्लिम आबादी बढ़ाने और धर्मांतरण को बढ़ावा देने की सुनियोजित साजिश है। वास्तव में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा महीन चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चेहरा है। इसी के चलते उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ‘लव जिहाद’ के मामलों पर लगाम कसने के लिए बेहद सख्त कदम उठाया है। यूपी विधानसभा में ‘लव जिहाद रोकथाम’ का बिल पास कर दिया गया है। अब पूरे प्रदेश में धोखे से या बलपूर्वक कराए गए मतांतरण के मामलों में कानून और सख्त किया है। इस कानून के तहत दोषियों को कड़ी सजा का भी प्रावधान है। यूपी में अब लव जिहाद के दोषियों को पहली बार उम्रकैद तक की सजा होगी। यूपी विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक-2024 पेश किया गया था। अवैध मतांतरण की गंभीर घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकार ने कानून का दायरा और सजा की अवधि बढ़ाई गई है। देशभर में 10 राज्यों में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं।यूपी में अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद की घटनाओं पर लगेगी रोक
यूपी विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन पेश उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक-2024 को पास कर दिया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में रहने वाली किसी महिला को अपने जाल में फंसाकर धर्मांतरण कराकर उत्पीड़न की घटना यानी ‘लव जिहाद’ के दोषियों को पहली बार उम्रकैद तक की सजा होगी। अवैध मतांतरण की गंभीर घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकार ने कानून का दायरा और सजा की अवधि बढ़ाई है। यूपी विधानसभा में एंटी लव जिहाद का बिल पास कर दिया गया है। अब पूरे प्रदेश में धोखे से या बलपूर्वक कराए गए धर्मांतरण के मामलों में कानून और सख्त हो गया है।
क्या है ‘लव जिहाद रोकथाम’ बिल और सजा का प्रावधानइस बिल के तहत अब अगर कोई व्यक्ति धर्मांतरण कराने की नीयत से किसी व्यक्ति को उसके जीवन या संपत्ति के लिए धमकाता है, हमला करता है, विवाह या विवाह करने का वादा करता है अथवा षड्यंत्र करता है, नाबालिग, महिला या किसी व्यक्ति की तस्करी करता है तो उसके अपराध को सबसे गंभीर श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामले में आरोपित को कम से कम 20 वर्ष कारावास या आजीवन कारावास तक की सजा व जुर्माने से दंडित किया जाएगा। न्यायालय पीड़ित के इलाज के खर्च और पुनर्वास के लिए धनराशि जुर्माने के रूप में तय कर सकेगी। गंभीर अपराधों की भांति अब कोई भी व्यक्ति धर्मांतरण के मामले में भी एफआइआर दर्ज करा सकेगा। पहले धर्मांतरण से पीड़ित व्यक्ति, उसके स्वजन अथवा करीबी रिश्तेदार की ओर से ही एफआइआर दर्ज कराने की व्यवस्था की गई थी। यदि कोई धर्म परिवर्तन के लिए किसी व्यक्ति के जीवन या संपत्ति को भय में डालता है, हमला या बल प्रयोग करता है, शादी करने का झूठा वादा करता है, प्रलोभन देकर किसी नाबालिग, महिला या व्यक्ति की तस्करी करता है, तो उसे न्यूनतम 20 साल की सजा होगी। इसे ताउम्र तक बढ़ाया जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश में पहली बार 2020 में बना था लव जिहाद कानूनउत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2020 में लव जिहाद के खिलाफ पहली बार कानून बनाया था। इसके बाद भी लव जिहाद के मामलों में कोई खास कमी नहीं आई। क्योंकि कट्टरपंथी और ट्रेंड युवक भोली-भाली हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने का कुचक्र रच रहे थे। इसे देखते हुए कानून को और सख्त बनाने का फैसला हुआ। अब इस कानून को और सख्त करने के लिए विधानसभा में अध्यादेश पेश किया गया। अब तक इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले को 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया था। लव जिहाद के खिलाफ योगी सरकार के विधेयक के तहत सिर्फ शादी करने के लिए अगर धर्म बदला जाता है तो ये अमान्य माना जाएगा। इसके साथ ही इस मामले में धोखा में रखकर या फिर झूठ बोलकर धर्म परिवर्तन किया जाता है तो इसे अपराध माना जाएगा। अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो ऐसी स्थिति में उसे 2 महीने पहले मजिस्ट्रेट को इस बारे में सूचना देनी होगी। इसमें आजीवन कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, विदेशों से धर्म परिवर्तन के लिए होने वाली फंडिंग पर अंकुश लगाने के लिए भी सख्त प्रावधान किए गये हैं।
यूपी के अलावा इन राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून हैं
उत्तर प्रदेश एकलौता राज्य नहीं है जहां जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून है। जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी कानून अभी तक देशभर में 10 राज्यों में लागू हो चुका है। उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में ये कानून हैं। पिछले साल अगस्त में महाराष्ट्र जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाने का एलान किया था। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि राज्य अन्य राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लेकर आएगा। यूपी सरकार ने इससे पहले नवंबर 2020 में इसके लिए अध्यादेश जारी किया था। इसके बाद फरवरी 2021 में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों से विधेयक पारित किया गया और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 को कानूनी रूप में मान्यता मिली थी।योगी सरकार का मानना है कि गुमराह कर शादी करने और अनुसूचित जाति व जनजाति (एससी- एसटी) के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन्हीं मामलों पर राज्य सरकार अंकुश लगाने जा रही है। बदलाव के लिए लाए गए इस विधेयक में जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े अपराधों में सजा की अवधि को बढ़ाने का प्रावधान है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी नाबालिग, दिव्यांग अथवा मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, महिला, एससी-एसटी का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो दोषी को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा। इसी तरह, सामूहिक रूप से जबरन धर्म परिवर्तन पर भी आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा होगी। विदेशी या गैरकानूनी संस्थाओं से फंडिंग हासिल करने पर 14 वर्ष तक की सजा और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान किया है।
सरकार के मुताबिक, यह संशोधन विधेयक जबरन धर्म परिर्वतन के अपराध की संवेदनशीलता और गंभीरता के मद्देनजर लाया गया है। इससे विदेशी एवं राष्ट्रविरोधी ताकतों की संगठित साजिश रोकी जा सकेगी। सजा और जुर्माने की राशि को बढ़ाने के साथ जमानत की कड़ी शर्तों के प्रावधान भी किए गए हैं। साथ ही, नाबालिग, दिव्यांग, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को भी अपराध का शिकार होने से बचाया जा सकेगा। आरोप सिद्ध होने पर दोषी को पीड़ित के इलाज और पुनर्वास के लिए भी जुर्माना देना होगा। इस नए कानून में कड़े प्रावधानों के चलते प्रदेश में लव जिहाद के मामलों पर अंकुश लगेगा और भोली-भाली लड़कियां ट्रेंड मुस्लिम युवाओं के चंगुल में फंसने से बच सकेंगी।

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