पैनलिस्ट के साथ एस जयशंकर (साभार: एनडीटीवी)
महापुरुषों ने कथन कोई कंचे खेलकर नहीं बनाए, अपनी योग्यता और अनुभव के आधार पर बताए। महापुरुषों का कहना है कि शक्तिशाली देश को ख़त्म करने के लिए सबसे पहले उसकी सभ्यता को नष्ट कर दो, देश अपने आप बर्बादी की राह पर चला जाएगा। दूसरे, भोजन, पूजा, मिलन परदे के पीछे होने चाहिए। लेकिन भारत में पिछले कुछ वर्षों से सेकुलरिज्म के लॉलीपॉप से सनातन धर्म की मान्यताओं और विशेषताओं को सेकुलरिज्म के मीठे जहर से सनातन विरोधियों ने रूढ़िवादी और दकियानूसी मानसिकता बताकर धूमिल कर पश्चिमी सभ्यता को लाद दिया।
अभी कुछ दिन पहले पश्चिमी सभ्यता में पागल हुए लोगों ने valentine day, hug day और kiss day मनाया। जो काम परदे के पीछे होने चाहिए खुलेआम हो रहे हैं। लेकिन इन पागलों को नहीं मालूम कि पश्चिमी देशों में केवल दो अथवा तीन त्यौहार होते हैं, लेकिन व्यापार करने के लिए इस तरह के day मनाये जाते हैं। जबकि सनातन पद्धति में ये days मकर संक्रांति से लेकर होली और श्राद्धों से लेकर गंगा नहान तक होते हैं। करवाचौथ पर ऊलजलूल बातें कही जाती हैं क्योकि इन्हे इस त्यौहार तो क्या किसी भी त्यौहार की क, ख और ग तक नहीं मालूम होती। इनका काम किसी न किसी तरह सनातन को अपमानित करना है। जबकि हर हिन्दू त्यौहार का पारिवारिक दृष्टि से लेकर संसारिक, पर्यावरण और आध्यात्मिक महत्व होता है।
आज जब सनातन मुखर होना शुरू हुआ सारे सनातन विरोधी देश को लोकतंत्र खतरे में, संविधान खतरे में, दूसरे मजहबों का अस्तित्व खतरे में आदि ऊलजलूल बातों से गुमराह कर अपनी दुकान चला रहे है। सच्चाई यह है कि जितना सनातन मुखर होगा इनकी दुकानें बंद होती जाएंगी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों को लोकतंत्र को लेकर आइना दिखाया और कहा भारत में यह समय के साथ और भी जीवंत होते जा रहा है। उन्होंने ‘खतरे में लोकतंत्र’ की बात करने वाले पश्चिमी देशों पर बांग्लादेश का नाम लिए बिना कटाक्ष किया। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम ने ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक ताकतों को प्रोत्साहित किया। वे बाकी दुनिया पर अपने लोकतंत्र का मॉडल थोपने में लगे रहते हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पश्चिमी देशों को भी पश्चिम के बाहर के सफल मॉडलों को अपनाना चाहिए। उन्होंने मतदान के दौरान अंगुली पर लगी स्याही को दिखाते हुए कहा, “हमारे लिए लोकतंत्र केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक डिलीवर किया गया वादा है।” उन्होंने पश्चिमी देशों को बताया कि बीतते समय के साथ भारत में लोकतंत्र और भी जीवंत होते जा रहा है।
जयशंकर ने कहा, “भारत ने आजादी के बाद लोकतंत्र को इसलिए अपनाया, क्योंकि यह हमारे परामर्शात्मक (consultative) और बहुलवादी (pluralistic) समाज के मूल्यों से मेल खाता था।” पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में पश्चिम ने लोकतंत्र को सिर्फ अपने तक सीमित रखा और ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक शक्तियों को समर्थन दिया।
In conversation with PM @jonasgahrstore, @ElissaSlotkin and @trzaskowski_ on the topic ‘Live to Vote Another Day: Fortifying Democratic Resilience’ at #MSC2025.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 14, 2025
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जयशंकर ने शुक्रवार (14 फरवरी 2025) को जर्मनी की राजधानी म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान कुछ वक्ताओं ने दुनिया में लोकतंत्र का भविष्य खतरे में बताया। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने इसे खारिज कर दिया और कहा, “मैं लोकतंत्र को लेकर आशावान हूँ। मैं अभी अपने राज्य के चुनाव में हिस्सा लेकर आया हूँ।”
उन्होंने आगे बताया, “बीते साल हमारे देश में राष्ट्रीय चुनाव हुए और कुल मतदाताओं में से करीब दो तिहाई ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।” उन्होंने अंगुली पर मतदान वाली स्याही को दिखाते हुए कहा, “मैं एक अपेक्षाकृत निराशावादी पैनल में आशावादी व्यक्ति हूँ। मैं अपनी अंगुली उठाकर शुरू करूँगा। इसे बुरा मत मानिएगा। जो निशान आप मेरे नाखून पर देख रहे हैं, वह अभी-अभी हुए मतदान का निशान है।”
जयशंकर ने बताया कि राष्ट्रीय चुनावों में लगभग 90 करोड़ मतदाताओं में लगभग 70 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। उन्होंने बताया, “हम एक ही दिन में इन सभी वोटों की गिनती करते हैं। जब परिणाम घोषित होता है तो कोई भी उस पर विवाद नहीं करता। हम अच्छे से मतदान कर रहे हैं और हमारे लोकतंत्र की दिशा के बारे में आशावादी हैं।
इससे जुड़ा तर्क देते हुए उन्होंने कहा, “आधुनिक युग में जब से हमने मतदान करना शुरू किया है, तब से लेकर आज जो मतदान हो रहा है, उसमें 20 प्रतिशत अधिक लोग मतदान कर रहे हैं। इसलिए, पहला संदेश यह है कि लोकतंत्र पर कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए चुनौतियाँ भी हैं। अलग-अलग देशों में हालात अलग-अलग हैं, लेकिन कई देशों में लोकतंत्र अच्छे से काम कर रहा है।
वक्ताओं में शामिल अमेरिकी सीनेटर एलिसा स्लोटकिन ने कहा कि लोकतंत्र ‘खाने की मेज पर भोजन नहीं रखता’। इस पर जयशंकर ने कहा कि भारत 80 करोड़ लोगों को पोषण सहायता देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ ऐसे हिस्से हो सकते हैं जहाँ ऐसा नहीं होता हो, लेकिन कुछ ऐसे हिस्से भी हैं, जहाँ ये सब हो रहा है और इनमें भारत भी शामिल है।

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