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कांग्रेस इकोसिस्टम फैला रही भ्रम : ‘ईरान ने हॉर्मूज की खाड़ी को भारत के लिए किया ब्लॉक’

                                         होर्मुज स्ट्रेट और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (साभार-x@congress)
होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए बंद नहीं है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने साफ कर दिया है कि ये समुद्री रास्ता इजरायल अमेरिका, यूरोप के उसके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए बंद किया गया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कांग्रेस का प्रोपेगेंडा जारी है।

कांग्रेस फैला रही झूठ

कांग्रेस का कहना है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद कर दिया है। वहाँ से सिर्फ रूस और चीन के जहाज ही जा सकते हैं। इस लिस्ट में भारत का नाम नहीं है। कांग्रेस का ये भी कहना है कि इस समुद्री रास्ते के बंद होने से 10 हजार करोड़ का भारतीय सामान, 38 जहाज और 1100 नाविक फँसे हुए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि इंडियन नेशनल शिप ओनर्स एसोसिएशन ने भारत सरकार से मदद की गुजारिश की है, लेकिन सरकार मदद करने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि भारत सरकार ने ईरान के साथ बातचीत के सारे रास्ते बंद कर लिए हैं।

अब कांग्रेस को कौन समझाए कि ईरान ने जिसके जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने पर हमला करने की बात कही है, उसमें भारत का नाम नहीं है। ईरान सिर्फ उन देशों के जहाजों को पार नहीं होने देगा जिसने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से युद्ध में इजरायल और अमेरिका का साथ दे रहा है।

भारत ने विश्व शांति की अपील की है। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा है कि वैश्विक स्थिरता को अभी सबसे ज्यादा खतरा है और शांति ही एकमात्र हर विवाद को सुलझाने का तरीका है। भारत ने ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर शोक भी जताया है। ऐसे में भारत के जहाज पर ईरानी आक्रमण का खतरा नहीं है।

बीमा कंपनियों की मनाही का असर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यूएस-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से इस रास्ते पर कई दिनों से अनिश्चितता बनी हुई है और कमर्शियल ट्रैफिक रुक गए हैं। अब रहा सवाल वहाँ भारतीय सामानों के फँसे होने का, तो इसकी वजह बीमा कंपनियों का होर्मुज स्ट्रेट से होकर जाने वाले जहाजों पर से हाथ खींच लेना है। ब्रिटिश बीमा कंपनियों ने बीमा करना बंद कर दिया है, इसलिए आवाजाही रुकी है।

इंश्योरेंस कंपनियों ने शिपिंग कंपनियों को नोटिस दिया था कि वे ईरान पर इजराइल-US हमलों को देखते हुए इंश्योरेंस रोक देंगी और प्रीमियम बढ़ा देंगी। नॉर्थस्टैंडर्ड, अमेरिकन क्लब, स्वीडिश क्लब, स्कल्ड, गार्ड और लंदन पी एंड आई क्लब सहित प्रमुख बीमा कंपनियों ने पोत सुरक्षा के बढ़ते खतरों का हवाला देते हुए युद्ध जोखिम बीमा वापस ले लिया था।

ये खतरा इजरायल और अमेरिका की ईरान पर किए गए हमले में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मारे जाने के बाद बढ़ा। ईरान ने इसके बाद स्ट्रेट होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की चेतावनी दी थी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने जहाजों को सुरक्षा देने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (DFC) को खाड़ी में काम करने वाली शिपिंग लाइनों को तुरंत ‘बहुत सही कीमत’ पर पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो US नेवी टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से एस्कॉर्ट करना शुरू कर सकती है। ऐसी परिस्थिति में जब भारत अपने लिए रास्ता तलाश रहा है, कॉन्ग्रेस लोगों को डरा रही है।

देश को भयभीत करने की कोशिश कर रही कांग्रेस 

कांग्रेस का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण देश के लोगों को खामियाजा उठाना पड़ेगा, क्योंकि एलजीपी, एलएनजी उसी रास्ते से आता है। मिडिल ईस्ट में होने वाले युद्ध का असर देश के फर्टिलाइजर, ट्रांसपोर्ट, माइनिंग, रेलवे, पॉवर, एग्रीकल्चर समेत कई सेक्टर्स पर पड़ेगा। आने वाले समय में जिस तरह से महँगाई बढ़ेगी और मंदी आएगी, हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।

कांग्रेस ऐसा कह कर सरकार को आगाह करना चाहती है या देश को डराना चाहती है। मिडिल ईस्ट के देशों के साथ भारत के मधुर संबंध हैं और व्यापारिक रिश्ते भी काफी मजबूत हैं। भारत के लिए जब होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं है, तो फिर ऐसा संकट क्यों आएगा। भारत को रूस ने तेल देने की पेशकश भी कर चुका है। बाकी रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का बयान

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए बंद है। यह घोषणा गुरुवार 5 मार्च 2026 को ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के जरिए की गई है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि इंटरनेशनल कानून और संबंधित प्रस्तावों के मुताबिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान युद्ध के समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने को रेगुलेट करने का अधिकार रखता है। इसलिए इस रास्ते से अगर अमेरिका, इजराइल, यूरोप और उनके ‘समर्थकों’ का कोई भी जहाज इस रास्ते पर दिखेगा तो उसपर निश्चित रूप से हमला किया जाएगा।

इससे पहले ईरान ने साफ किया था कि वह चीनी झंडे लगे जहाजों को स्ट्रेट इस्तेमाल करने देगा। अब उसने दुनिया के बाकी देशों को भी ग्रीन सिग्नल दे दिया है, जो इस युद्ध में शामिल नहीं है या उसके खिलाफ नहीं लड़ रहे हैं। ये पूरी दुनिया के लिए राहत भरी खबर है।

जर्मनी जाकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लगा दी पश्चिमी देशों की क्लास, दो टूक बोले- हमारा लोकतंत्र खतरे में नहीं, अपना मॉडल न थोपें

                                           पैनलिस्ट के साथ एस जयशंकर (साभार: एनडीटीवी)
महापुरुषों ने कथन कोई कंचे खेलकर नहीं बनाए, अपनी योग्यता और अनुभव के आधार पर बताए। महापुरुषों का कहना है कि शक्तिशाली देश को ख़त्म करने के लिए सबसे पहले उसकी सभ्यता को नष्ट कर दो, देश अपने आप बर्बादी की राह पर चला जाएगा। दूसरे, भोजन, पूजा, मिलन परदे के पीछे होने चाहिए। लेकिन भारत में पिछले कुछ वर्षों से सेकुलरिज्म के लॉलीपॉप से सनातन धर्म की मान्यताओं और विशेषताओं को सेकुलरिज्म के मीठे जहर से सनातन विरोधियों ने रूढ़िवादी और दकियानूसी मानसिकता बताकर धूमिल कर पश्चिमी सभ्यता को लाद दिया। 

अभी कुछ दिन पहले पश्चिमी सभ्यता में पागल हुए लोगों ने valentine day, hug day और kiss day मनाया। जो काम परदे के पीछे होने चाहिए खुलेआम हो रहे हैं। लेकिन इन पागलों को नहीं मालूम कि पश्चिमी देशों में केवल दो अथवा तीन त्यौहार होते हैं, लेकिन व्यापार करने के लिए इस तरह के day मनाये जाते हैं। जबकि सनातन पद्धति में ये days मकर संक्रांति से लेकर होली और श्राद्धों से लेकर गंगा नहान तक होते हैं। करवाचौथ पर ऊलजलूल बातें कही जाती हैं क्योकि इन्हे इस त्यौहार तो क्या किसी भी त्यौहार की क, ख और ग तक नहीं मालूम होती। इनका काम किसी न किसी तरह सनातन को अपमानित करना है। जबकि हर हिन्दू त्यौहार का पारिवारिक दृष्टि से लेकर संसारिक, पर्यावरण और आध्यात्मिक महत्व होता है। 

आज जब सनातन मुखर होना शुरू हुआ सारे सनातन विरोधी देश को लोकतंत्र खतरे में, संविधान खतरे में, दूसरे मजहबों का अस्तित्व खतरे में आदि ऊलजलूल बातों से गुमराह कर अपनी दुकान चला रहे है। सच्चाई यह है कि जितना सनातन मुखर होगा इनकी दुकानें बंद होती जाएंगी।     

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों को लोकतंत्र को लेकर आइना दिखाया और कहा भारत में यह समय के साथ और भी जीवंत होते जा रहा है। उन्होंने ‘खतरे में लोकतंत्र’ की बात करने वाले पश्चिमी देशों पर बांग्लादेश का नाम लिए बिना कटाक्ष किया। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम ने ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक ताकतों को प्रोत्साहित किया। वे बाकी दुनिया पर अपने लोकतंत्र का मॉडल थोपने में लगे रहते हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पश्चिमी देशों को भी पश्चिम के बाहर के सफल मॉडलों को अपनाना चाहिए। उन्होंने मतदान के दौरान अंगुली पर लगी स्याही को दिखाते हुए कहा, “हमारे लिए लोकतंत्र केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक डिलीवर किया गया वादा है।” उन्होंने पश्चिमी देशों को बताया कि बीतते समय के साथ भारत में लोकतंत्र और भी जीवंत होते जा रहा है।

जयशंकर ने कहा, “भारत ने आजादी के बाद लोकतंत्र को इसलिए अपनाया, क्योंकि यह हमारे परामर्शात्मक (consultative) और बहुलवादी (pluralistic) समाज के मूल्यों से मेल खाता था।” पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में पश्चिम ने लोकतंत्र को सिर्फ अपने तक सीमित रखा और ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक शक्तियों को समर्थन दिया।

जयशंकर ने शुक्रवार (14 फरवरी 2025) को जर्मनी की राजधानी म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान कुछ वक्ताओं ने दुनिया में लोकतंत्र का भविष्य खतरे में बताया। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने इसे खारिज कर दिया और कहा, “मैं लोकतंत्र को लेकर आशावान हूँ। मैं अभी अपने राज्य के चुनाव में हिस्सा लेकर आया हूँ।”

उन्होंने आगे बताया, “बीते साल हमारे देश में राष्ट्रीय चुनाव हुए और कुल मतदाताओं में से करीब दो तिहाई ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।” उन्होंने अंगुली पर मतदान वाली स्याही को दिखाते हुए कहा, “मैं एक अपेक्षाकृत निराशावादी पैनल में आशावादी व्यक्ति हूँ। मैं अपनी अंगुली उठाकर शुरू करूँगा। इसे बुरा मत मानिएगा। जो निशान आप मेरे नाखून पर देख रहे हैं, वह अभी-अभी हुए मतदान का निशान है।”

जयशंकर ने बताया कि राष्ट्रीय चुनावों में लगभग 90 करोड़ मतदाताओं में लगभग 70 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। उन्होंने बताया, “हम एक ही दिन में इन सभी वोटों की गिनती करते हैं। जब परिणाम घोषित होता है तो कोई भी उस पर विवाद नहीं करता। हम अच्छे से मतदान कर रहे हैं और हमारे लोकतंत्र की दिशा के बारे में आशावादी हैं।

इससे जुड़ा तर्क देते हुए उन्होंने कहा, “आधुनिक युग में जब से हमने मतदान करना शुरू किया है, तब से लेकर आज जो मतदान हो रहा है, उसमें 20 प्रतिशत अधिक लोग मतदान कर रहे हैं। इसलिए, पहला संदेश यह है कि लोकतंत्र पर कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए चुनौतियाँ भी हैं। अलग-अलग देशों में हालात अलग-अलग हैं, लेकिन कई देशों में लोकतंत्र अच्छे से काम कर रहा है।

वक्ताओं में शामिल अमेरिकी सीनेटर एलिसा स्लोटकिन ने कहा कि लोकतंत्र ‘खाने की मेज पर भोजन नहीं रखता’। इस पर जयशंकर ने कहा कि भारत 80 करोड़ लोगों को पोषण सहायता देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ ऐसे हिस्से हो सकते हैं जहाँ ऐसा नहीं होता हो, लेकिन कुछ ऐसे हिस्से भी हैं, जहाँ ये सब हो रहा है और इनमें भारत भी शामिल है।