पाकिस्तानी जासूस नोमान (फोटो साभार - अमर उजाला)
जिस तरह 1965 इंडो-पाक के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सरकार भारत में बैठे पाकिस्तानी sleeper cells को पकड़ रही थी ठीक शास्त्री जी के मार्ग पर मोदी सरकार चल रही है। देश में बैठे ये स्लीपर सेल आतंकवादियों और घुसपैठियों से ज्यादा खतरनाक हैं। अगर ताशकंत से शास्त्री जी का मृतक शरीर की बजाए जीवित आ गए होते देश के कई धुरन्धर जेलों में होते। देश की स्थिति आज जैसी नहीं होती। शायद उनकी रहस्यमयी मौत का यही कारण हो। यह देश का दुर्भाग्य है कि अपनी कुर्सी की खातिर छद्दम देशप्रेमी नेता और उनकी पार्टियां घुसपैठियों और sleeper cells को संरक्षण दे रही है। और जनता ऐसे लोगो को अपना नेता मानती है।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ बेगमपुरा मोहल्ले का नोमान इलाही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करते पकड़ा गया। नोमान पहले बेरोजगार था और अपने अब्बू के साथ पासपोर्ट और दस्तावेज बनवाने का काम करता था। अब्बू की मौत के बाद उसने यह धंधा संभाला, लेकिन लालच में आकर ISI के जासूसी नेटवर्क से जुड़ गया।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, नोमान पासपोर्ट सेवा केंद्र की आड़ में उन लोगों के दस्तावेज तैयार करता था, जो सऊदी अरब, पाकिस्तान या अन्य देशों में जाने की योजना बनाते थे। नोमान के घर से आठ संदिग्ध पासपोर्ट बरामद हुए हैं।
पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़कर दस्तावेजों को बनवाने के दौरान ही नोमान ISI एजेंट इकबाल काना के संपर्क में आया और देश की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने लगा। नोमान चार बार पाकिस्तान जा चुका है, जहाँ उसने ISI हैंडलरों से मुलाकात की। उसकी बुआ और मौसी पाकिस्तान में रहती हैं, जिसका बहाना बनाकर वह वहाँ जाता रहा। हाल ही में हरियाणा पुलिस ने उसे पानीपत से गिरफ्तार किया, जहाँ वह चार महीने से अपनी बहन के घर रहकर फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था।
पूछताछ में नोमान ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ISI सक्रिय थी और वह भारतीय सेना की गतिविधियों की जानकारी मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए भेजता था। उसके घर से आठ संदिग्ध पासपोर्ट बरामद हुए हैं। जाँच में पता चला कि वह जन सुविधा केंद्र के जरिए फर्जी दस्तावेज भी बनवाता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद जाँच यूपी, हरियाणा, दिल्ली, देहरादून और पानीपत तक फैल गई है।
जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह अकेले नोमान का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा जासूसी नेटवर्क है, जिसमें कैराना, शामली और अन्य क्षेत्रों के युवक शामिल हो सकते हैं। यह नेटवर्क फेरीवालों, प्राइवेट नौकरी करने वालों और दस्तावेज सेवाओं से जुड़े लोगों के जरिए चल रहा है। नोमान को यूपी पुलिस को सौंप दिया गया है और उसके सभी संपर्कों की जाँच जारी है।
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