दोहा में सभी इस्लामी देशों की मीटिंग में इजराइल के खिलाफ NATO की तर्ज पर Islamic NATO नहीं बन पाया; अध्यक्ष बनने के नाम पर सभी पीछे हटे


भारत में मुस्लिम कट्टरपंथी मुसलमानों को इजराइल के खिलाफ भड़काते रहते हैं। कोई फिलिस्तीन का थैला लेकर, कोई हमास और गाज़ा के लिए घालियाली आंसू बहा गुमराह करते रहते हैं। भारत का मुसलमान इतना ज्यादा डरा हुआ है कि किसी में इनसे यह पूछने की हिम्मत नहीं कि इतने मुस्लिम मुल्क हैं कोई फिलिस्तीनियों को अपने-अपने मुल्क में क्यों रख लेते? बस कट्टरपंथियों की तरह victim card खेल खुद भी पागल बनने के साथ दूसरों को भी पागल बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। आखिर आतंकियों को कोई अपने मुल्क में रख क्यों अपने मुल्क का माहौल ख़राब करना चाहेगा? ध्यान हो, जिया-उल-हक़ के समय पाकिस्तान ने 30,000 फिलिस्तीनियों को रख तो लिया लेकिन फिलिस्तीन का माहौल शांत होने पर जब उन्हें वापस अपने मुल्क जाने को कहा कोई तैयार नहीं हुआ, फिर जिया ने जिस तरह उनको बन्दूक की नोक पर धक्का दिया किसी से नहीं छुपा। 

इजराइल पर कीजड़ फेंकना आसान है। आतंकवाद के खिलाफ कोई बोलने को तैयार नहीं, क्यों? शायद जिया द्वारा फिलिस्तीनियों को पनाह देने से पाकिस्तान में आतंकवाद के बीज फ़ैल गए थे। आखिर हमास कौन है? सभी मुस्लिम अच्छी तरह जानते हैं।

            

कतर की राजधानी दोहा में सोमवार (15 सितंबर 2025) को 60 मुस्लिम देशों की इमरजेंसी मीटिंग हुई है बैठक में ऑर्गेनाजेशन ऑफ इस्लामिक कर्पोरेशन (OIC) के सदस्य देश और अरब मुल्क शामिल हुए थे ओआईसी की यह इमरजेंसी बैठक कतर में इजरायली हमले को लेकर की गई है, जिसमें सभी देशों से अपील की गई कि इजरायल के खिलाफ कानूनी और प्रभावी कदम उठाए जाएं साथ ही इजरायल के साथ अपने रिश्तों पर भी एक बार फिर से गौर करें

पाकिस्तानी अखबार द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले हफ्ते इजरायल ने कतर में हमास के नेताओ को निशाना बनाकर स्ट्राइक की थी बैठक में कहा गया कि ये अधिकारी गाजा सीजफायर प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन इजरायल ने यह हमला करके सभी प्रयासों को विफल कर दिया है इसलिए उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाना चाहिए हमास का कहना है कि इजरायल के हमले में छह लोग मारे गए हैं हालांकि, हमास के टॉप अधिकारी बच गए हैं

इजरायल के खिलाफ OIC का जॉइंट स्टेटमेंट
ओआईसी देशों ने जॉइंट स्टेटमेंट में अपील की है कि सभी को इजरायल के खिलाफ कानूनी और सख्त कदम उठाने की जरूरत है, साथ ही सभी मुल्कों को उसके साथ अपने डिप्लोमेटिक और आर्थिक रिश्तों पर भी गौर करना चाहिए क्योंकि वह करीब दो साल से फिलिस्तीनी लोगों पर हमले कर रहा है
 संयुक्त राष्ट्र में इजरायल की सदस्यता खत्म करवाने के लिए प्रयास करने की भी इन देशों ने अपील की है बैठक का मकसद इजरायल पर दबाव बनाना था ताकि गाजा में जारी उसके हमलों पर लगाम लगाई जा सके

बैठक में 60 देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति शामिल हुए, लेकिन संयुक्त अरब अमीरातबहरीन और मोरक्को ने अपने प्रतिनिधियों को बैठक के लिए भेजा था इन तीनों देशों ने पांच साल पहले अब्राहम समझौते के तहत इजरायल क मान्यता दी थी इनके अलावा, उसे मान्यता देने वाले देशों में कतर, मिस्त्र और जॉर्डन भी शामिल हैं

मुस्लिम देशों ने की इजरायल की यूएन सदस्यता खत्म करने की अपील
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी ने कहा कि सीजफायर पर बात कर रहे हमास के वार्ताकरों पर हमला करके इजरायल ने साबित कर दिया कि उसका इरादा सीजफायर का नहीं है
 अमीर ने अरब देशों को आगाह करते हुए यह भी कहा कि इजरायल ने कतर में हमास अधिकारियों पर हमला करके गाजा पर बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश की है और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अरब को इजरायली क्षेत्र में बदलने का सपना देख रहे हैं, जो एक खतरनाक बात है

बैठक में 60 देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति शामिल हुए, लेकिन संयुक्त अरब अमीरातबहरीन और मोरक्को ने अपने प्रतिनिधियों को बैठक के लिए भेजा था इन तीनों देशों ने पांच साल पहले अब्राहम समझौते के तहत इजरायल क मान्यता दी थी इनके अलावा, उसे मान्यता देने वाले देशों में कतर, मिस्त्र और जॉर्डन भी शामिल हैं

मुस्लिम देशों ने की इजरायल की यूएन सदस्यता खत्म करने की अपील
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी ने कहा कि सीजफायर पर बात कर रहे हमास के वार्ताकरों पर हमला करके इजरायल ने साबित कर दिया कि उसका इरादा सीजफायर का नहीं है
 अमीर ने अरब देशों को आगाह करते हुए यह भी कहा कि इजरायल ने कतर में हमास अधिकारियों पर हमला करके गाजा पर बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश की है और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अरब को इजरायली क्षेत्र में बदलने का सपना देख रहे हैं, जो एक खतरनाक बात है

बाद में शेख तमीम बिन हमाद अल थानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी पोस्ट किया और कहा, 'दोहा में आज हुई इमरजेंसी अरब-इस्लामिक समिट हमारे क्षेत्र में इजरायल के आतंकवाद के खिलाफ कठोर संदेश है और इसके परिणाम हमारे सामूहिक प्रयासों को तीव्र करने, हमारे देशों की स्थिति में समन्वय स्थापित करने और हमारे रुख और आवाज को एकजुट करने में प्रभावी रूप से योगदान देंगे'

बैठक में कौन-कौन हुए शामिल?
अरब-इस्लामिक समिट में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति मौसाद पेजेशकियान, इराकी पीएम मोहम्मद सिया अल-सुदानीतुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन और फिलिस्तीन के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास भी शामिल हुए थे

ईरानी राष्ट्रपति बोले- कल को किसी और मुस्लिम देश के साथ भी ऐसा कर सकता है इजरायल
ईरानी राष्ट्रपति मौसाद पेजेशकियान ने कहा कि ऐसी स्थिति कल अरब या किसी और इस्लामिक देश के सामने भी आ सकती है, जैसा जुलाई महीने में ईरान के साथ हुआ. जब इजरायल के साथ करीब 12 दिनों तक उसकी जंग चली थी
 ईरान पहले भी मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ सभी रिश्ते खत्म करने की अपील कर चुका है

सभी इस्लामिक देश अपनी पीठ और कपड़े झाड़ते हुए कहे कि देखो इस बार तो हमने इजरायल की पिटाई बर्दाश्त कर लिया लेकिन अगली बार हम इजरायल की पिटाई बर्दाश्त नहीं करेंगे

NATO की तर्ज पर Islamic NATO नहीं बन पाया
चर्चा है, हालाँकि इस समाचार की पुष्टि नहीं हुई है, कि इस बैठक में इजिप्ट ने प्रस्ताव रखा कि हम नाटो की तर्ज पर एक इस्लामी नाटो बनाएं और बारी-बारी से सभी मुस्लिम देश उसके अध्यक्षता करें
फिर सऊदी अरब ने इजिप्ट के राष्ट्रपति से कहा कि ठीक है आप इसके पहले अध्यक्ष बन जाइए
तब इजिप्ट के राष्ट्रपति ने कहा कि इस्लामी नाटो का पहला अध्यक्ष बनने का तो आपको मौका मिलना चाहिए क्योंकि हमारे पवित्र मक्का और मदीना आपके देश में है
फिर सऊदी अरब ने कहा नहीं भाई पहला मौका इराक को मिलना चाहिए क्योंकि शिया संप्रदाय का सबसे पवित्र करबला इराक में है
इराक ने कहा नहीं भाई पहला मौका तो पाकिस्तान को मिलना चाहिए क्योंकि सभी इस्लामी देशों में एकमात्र न्यूक्लियर हथियार पाकिस्तान के पास है
फिर पाकिस्तान ने कहा नहीं भाई पहला मौका तो तुर्की को मिलना चाहिए क्योंकि कभी पूरे इस्लामी उम्मत का नेतृत्व तुर्की के खलीफा ने किया था
तुर्की ने कहा नहीं भाई मैं इसका पहला अध्यक्ष नहीं बनूंगा क्योंकि मैं पहले से अमेरिका के नेतृत्व के नाटो का मेंबर हूं
लेकिन नाटो का पहला अध्यक्ष जॉर्डन को बनना चाहिए
फिर जॉर्डन ने कहा नहीं भाई मेरी सीमाएं इजराइल से लगते हैं और 1976 में मैं अपने देश की 10% जमीन पहले ही इजरायल के हाथों गंवा चुका हूं तब किसी भी इस्लामिक देश ने मेरी मदद नहीं की
यानी कि इजरायल की खौफ और दहशत देखिए इनको मालूम है कि इस वक्त इजरायल के सर पर खून सवार है और जो कोई देश मुस्लिम नाटो का पहला अध्यक्ष बनेगा सबसे पहले इसराइल उसको फोड़ेगा
तो इसीलिए कोई अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हुआ
आप लोगों को बचपन की कहानी याद होगी जब किसी लड़के की खूब पिटाई होती थी बाद में वह कहता था अच्छा इस बार तो मैं बर्दाश्त कर ले रहा हूं लेकिन अगली बार मारोगे तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा
अगली बार फिर कुटाई होती थी अपने कपड़े झाड़ कर कहता था अच्छा इस बार तो बर्दाश्त कर लेता हूं अगली बार कुटोगे तो बर्दाश्त नहीं करूंगा
यही हाल 57 मुस्लिम देशों का है इजराइल 1948 से लगातार इनको कुटता है हर बार यह उठते हैं अपने कपड़ों पर लगी धूल मिट्टी साफ करते हैं और कहते हैं अच्छा इस बार कूट दिए कोई बात नहीं अगली बार अगर कुटोगे तो बर्दाश्त नहीं करेंगे

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