इजरायल का फॉस्फोरस बम धमाका ( फोटो साभार-abp)
इजरायल ने ईरान के साथ लेबनान पर भी हमले किए हैं। इस बीच दावा किया जा रहा है कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर शहर के रिहायशी इलाकों में व्हाइट फॉस्फोरस से बने बमों का इस्तेमाल किया। ये बम रिहायशी इलाकों में इस्तेमाल नहीं किए जा सकते, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है।
ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, इजरायल की सेना ने 3 मार्च 2026 को दक्षिणी लेबनान के योहमोर शहर में घरों के ऊपर सफेद फॉस्फोरस से बने गोला बारूद का इस्तेमाल किया।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने आठ तस्वीरों को वेरिफाई करने और उसकी लोकेशन की पुष्टि करने के बाद कहा कि शहर के एक रिहायशी हिस्से में सफेद फॉस्फोरस से बने बम गिराए गए। स्थानीय सुरक्षाकर्मी उस इलाके में कम से कम दो घरों और एक कार में लगी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे।
ह्यूमन राइट्स वॉच के एनालिसिस से पता चलता है कि आग शायद सफेद फॉस्फोरस लगे फेल्ट वेजेज की वजह से लगी होगी, क्योंकि घर और कार उस इलाके के बहुत पास थे जहाँ विस्फोट हुए थे। जिससे पता चलता है कि सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल आम लोगों पर गैर-कानूनी तरीके से किया गया था।
ह्यूमन राइट्स वॉच में लेबनान के रिसर्चर रामजी कैस ने कहा, “इज़राइली सेना का रिहायशी इलाकों में सफेद फॉस्फोरस का गैर-कानूनी इस्तेमाल बहुत चिंताजनक है और इसके आम लोगों के लिए गंभीर नतीजे होंगे।” “सफेद फॉस्फोरस की वजह से मौत का आँकड़ा बढ़ सकता है और गंभीर चोटें लग सकती हैं, जिसका असर जिंदगी भर रह सकता है।”
गाजा-लेबनान पर 2023 में इस्तेमाल का दावा
मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, रिहायशी इलाके में कम से कम दो गोले ऐसे तोप से दागे गए जिसकी तस्वीरों से साफ था कि इनमें सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया था, क्योंकि इस गोले के हवा में फटने से धूएँ का पैटर्न एम825-सीरीज के 155 एमएम तोपखाने के गोले के फटने से बनने वाले उंगली के जोड़ के शेप से मिलता जुलता था। ये तोपखाना सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल के लिए जाना जाता है।
3 मार्च की सुबह 5:27 बजे इजरायल के अरबी मिलिट्री प्रवक्ता अविचाय अद्राई ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया था कि योहमोर और 50 दूसरे गाँवों और कस्बों के रहने वाले तुरंत अपने घर खाली कर दें और गाँवों से कम से कम 1000 मीटर दूर खुली जगह पर चले जाएँ। अद्राई ने उसी दिन दोपहर 12:12 बजे फिर लोगों को घरों से दूर जाने के लिए कहा। ह्यूमन राइट्स वॉच ने यह वेरिफाई नहीं किया है कि उस इलाके में लोग थे या व्हाइट फॉस्फोरस के इस्तेमाल की वजह से उनकी मौत हो गई या बुरी तरह घायल हुए।
इससे पहले साल 2023 में ह्यूमन राइट्स वॉच ने इजरायल पर गाजा और लेबनान में सैन्य अभियान के दौरान सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। ह्यूमन राइट्स वॉच ने अक्टूबर 2023 और मई 2024 के बीच दक्षिणी लेबनान के बॉर्डर वाले गाँवों में इजराइली सेना के सफेद फॉस्फोरस के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के सबूत पेश किए थे। इस हमले में बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति हुई थी और आम लोगों बड़ी संख्या में घायल हुए और उन्हें बेघर होना पड़ा।तब इजरायली सिक्योरिटी फोर्सेज ने इन आरोपों का खंडन किया था।
क्या है सफेद फॉस्फोरस
सफेद फॉस्फोरस एक केमिकल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है। यह हवा में खुद ही तेजी से जल उठता है। ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर इसका तापमान 815 डिग्री तक सेल्सियस तक पहुँच जाता है यानी यह 815 डिग्री तक गर्मी पैदा करता है। यह तब तक जलता रहता है, जब तक यह पूरी तरह खत्म न हो जाए। इसलिए जब तोप के गोले, बम और रॉकेट में इस्तेमाल किया जाता है, तो बम के फटते ही ये ऑक्सीजन के संपर्क में आ जाता है और तेजी से जलता है।
इससे आसपास के घरों, खेतों और लोगों के झुलसने की आशंका ज्यादा होती है। दरअसल ये स्किन को झुलसा कर शरीर के खून में मिल जाता है और अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है। कई अंग काम करना बंद कर देती हैं और पैरालाइज होने का खतरा होता है। अगर फॉस्फोरस का अंश मात्र भी शरीर में रह गया है और वह भाग हवा के संपर्क में आ गया, तो फिर से झुलसा सकता है। फॉस्फोरस बम से लगी आग पानी से नहीं बुझती, बल्कि इस पर रेत आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
प्रतिबंधित है सफेद फॉस्फोरस से बने बम का इस्तेमाल करना
इंटरनेशनल मानवाधिकार कानून के तहत, आबादी वाले इलाकों में सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल धुआँ पैदा करने, रोशनी करने या टारगेट तक पहुँचने के दौरान बंकरों और इमारतों को जलाना, मिलिट्री के लोगों और सामान को छिपाना, निशान बनाना, सिग्नल देना या सीधे हमला करना शामिल है। लेकिन इसका इस्तेमाल रिहायशी इलाकों में नहीं किया जा सकता यानी यह सुनिश्चित करना होता है कि इसके इस्तेमाल से आम लोगों को नुकसान नहीं होगा।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने ‘दी कन्वेंशन ऑन सर्टन कन्वेंशनल वेपन्स’यानी सीसीडब्लू में खास तरह के हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें कई युद्ध सामग्रियों के बारे में बताया गया है, जिसका सिर्फ सैन्य उद्देश्यों के लिए सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें आम लोगों पर कभी भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र के इन शर्तों को इजरायल नहीं मानता। उसने इस प्रस्ताव पर साइन भी नहीं किए हैं।
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