ईरानी उड़ाए पाकिस्तान का मजाक, कहे अमेरिका का ‘दलाल’: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच घुसे पाकिस्तान को हर ओर से पड़ रही लात, दोनों देशों को गुमराह करने में आतंकिस्तान का हाथ

                                                                                                      साभार : BBC, Nationalherald
अमेरिका और ईरान के बीच 6 हफ्तों से चल रही भीषण जंग पर दो हफ्ते के लिए ‘ब्रेक’ तो लग गया है, लेकिन इस ब्रेक के पीछे ‘शांतिदूत’ बनने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान की अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थू-थू हो रही है। खुद को मध्यस्थ बताने वाला पाकिस्तान अब ‘दलाली’ के आरोपों और सोशल मीडिया पर भद्दी गालियों का सामना कर रहा है। वजह है… सीजफायर की शर्तों को लेकर पैदा की गई वो गफलत, जिसने ईरान और इजरायल को फिर से आमने-सामने खड़ा कर दिया है।

प्रस्तावों की गफलत: ईरान के 10-सूत्रीय प्लान में लेबनान का जिक्र

 ईरान ने युद्धविराम के लिए 10 शर्तों का एक प्रस्ताव रखा था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए एक सही आधार माना। इस प्रस्ताव में ईरान ने मुख्य रूप से तीन बड़ी माँगें रखी थीं, पहली यह कि अमेरिका भविष्य में दोबारा हमला न करने की पक्की गारंटी दे, दूसरी यह कि व्यापार के लिए बेहद जरूरी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ वाले समुद्री रास्ते पर ईरान का ही कब्जा बना रहे, और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह थी कि लेबनान में हिजबुल्लाह समेत तमाम मोर्चों पर चल रही जंग को तुरंत रोका जाए।

यही लेबनान वाला मुद्दा इस पूरे समझौते में विवाद और फजीहत की सबसे बड़ी वजह बन गया। दरअसल, पाकिस्तान ने बीच में पड़कर ईरान को यह यकीन दिला दिया था कि अमेरिका लेबनान में भी हमले रोकने के लिए तैयार है। लेकिन जैसे ही सीजफायर शुरू हुआ और इजरायल ने लेबनान पर ताबड़तोड़ बमबारी जारी रखी, वैसे ही पाकिस्तान के दावों की पोल खुल गई। इससे यह साफ हो गया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच तालमेल बैठाने के बजाय गलत जानकारी फैलाई थी, जिसके कारण अब उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी किरकिरी हो रही है।

जेडी वेंस का करारा जवाब: ‘लेबनान शामिल ही नहीं था’

जब लेबनान हमलों पर सवाल उठा, तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान ने ‘कन्फ्यूजन’ पैदा की है। जेडी वेंस ने कहा, “लेबनान का मुद्दा सीजफायर की शर्तों में शामिल ही नहीं था। ईरानियों को शायद गलतफहमी हुई या गलत जानकारी दी गई।” ट्रंप और नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया कि यह सीजफायर सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच है, लेबनान के हिजबुल्लाह के लिए नहीं। पाकिस्तान ने अपनी ‘पीठ थपथपाने’ के चक्कर में दोनों पक्षों को अलग-अलग बातें बता दीं, जिसका नतीजा अब गालियों के रूप में सामने आ रहा है।

सोशल मीडिया पर ‘आतंकिस्तान’ की शामत: ईरानियों ने भी लताड़ा

पाकिस्तान को केवल भारत ही नहीं, बल्कि अब ईरानी नागरिक भी जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं। सोशल मीडिया पर #FuckPakistan ट्रेंड कर रहा है। खुद को ईरानी बताने वाले अकॉउंट्स पाकिस्तान को जमकर लताड़ रहे हैं और साथ ही भारत की तारीफ कर रहे हैं।

ی (Sana Ebrahimi) ने साफ लिखा, “ईरानियों के पाकिस्तान से नफरत करने के कई कारण है।” फिर, “पाकिस्तान को फिर से भारत बना दो। मैं उस देश पर भरोसा नहीं करती जिसने ओसामा बिन लादेन को पनाह दी।” उन्होंने यहाँ तक कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर भारत का है।’

کاپیتان (The Captwin) ने लिखा, “पाकिस्तानी बिना इंटरनेट के शहबाज का बचाव करने कैसे आएँगे?”, अन्य पोस्ट में लिखा, “पाकिस्तान बम।” इन्होंने भारतीय मीम्स की तारीफ की और 1971 में भारत के सामने 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर की याद दिलाई।

صادُقِ زَمَند (Zamandaam) ने तंज कसा, “एक ऐसा देश जो आतंकवाद का पालना है और परमाणु बम की धमकी देता है, वो शांति कराएगा? पाकिस्तान और शांति? मज़ाक है क्या! पाकिस्तान, बांग्लादेश और मौजूदा पाकिस्तान को ‘ग्रेटर भारत’ (Greater India) में मिला देना चाहिए।”

इसके अलावा, यूजर ने लिखा, “ईरान का सबसे ज़्यादा परेशान करने वाला पड़ोसी पाकिस्तान है। यह सचमुच एक बेकार और घटिया देश है। पाकिस्तान से हमेशा एक गंदी, पिछड़ी, अंधविश्वासी और प्रदूषित सी वाइब आती है। सच कहूँ तो, मुझे हमेशा से पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से नफरत रही है। मुझे उम्मीद है कि भारत इस बेकार और गंदे देश का किस्सा हमेशा के लिए खत्म कर देगा।”

डूब मरने की सलाह और कड़वा सच

पाकिस्तान की हालत आज उस बिन बुलाए बाराती जैसी है जो शादी में क्रेडिट लेने के चक्कर में जूते खा रहा है। एक तरफ उसका अपना मुल्क आर्थिक तंगहाली में डूबा है, और दूसरी तरफ वह दो परमाणु शक्तियों के बीच ‘शांतिदूत’ बनने का स्वांग रच रहा था। पाकिस्तान ने सोचा था कि वह इस मध्यस्थता के जरिए दुनिया में तारीफ बटोरेगा, लेकिन उसकी ‘कॉपी-पेस्ट’ कूटनीति ने उसे दुनिया के सामने एक ‘मैसेंजर बॉय’ और ‘दलाल’ बनाकर छोड़ दिया है।

ईरानियों का यह कहना कि ‘पाकिस्तान उनके पड़ोस का सबसे गंदा और बेकार देश है’, यह बताने के लिए काफी है कि मजहब के नाम पर भी पाकिस्तान की कोई इज्जत नहीं बची है। भारत की विदेश नीति जहाँ स्वतंत्र और अडिग है, वहीं पाकिस्तान आज भी ‘किराए के बिचौलिए’ से ज्यादा कुछ नहीं बन पाया। कुल मिलाकर, पाकिस्तान के लिए यह सीजफायर ‘गले की हड्डी’ बन गया है, न निगलते बन रहा है, न उगलते।

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