पश्चिम बंगाल में नई BJP सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित उस याचिका को वापस लेने का निर्णय किया है, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने 75 मुस्लिम और 2 हिंदू समुदायों समेत कुल 77 समुदायों का OBC दर्जा रद्द कर दिया था।
22 मई 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इन समुदायों को बिना उचित सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे के केवल धार्मिक आधार पर OBC सूची में शामिल किया गया था, जो संविधान के खिलाफ है। ये समुदाय 2010 से 2012 के बीच पहले वाम मोर्चा सरकार और बाद में TMC सरकार के दौरान OBC सूची में जोड़े गए थे।
जबकि मुसलमानों में शिया, सुन्नी, पठान, अहमदी, वहाबी और पासमांदा आदि अनेकों फिरकों में इतना ज्यादा भेदभाव है कि कोई एक दूसरे की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकता दूसरे के कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़न नहीं कर सकने के अलावा जातियों को मानते ही नहीं फिर सिर्फ वोट की सियासत में यह काम एकदम गलत है।
कोर्ट ने 2010 के बाद जारी सभी OBC प्रमाणपत्रों को अमान्य कर दिया था और नौकरी व एडमिशन में उनके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके तुरंत बाद ममता बनर्जी की सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी।
सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने की तैयारी
आनंदबाजार पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार के वकील कुनाल मिमानी ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर इस मामले को वापस लेने की अनुमति माँगी है। सरकार ने मामले की जल्द सुनवाई की भी माँग की है। इस फैसले से 2010 के बाद जारी हुए करीब 5 लाख OBC प्रमाणपत्र प्रभावित हो सकते हैं।
इससे पहले वाम मोर्चा सरकार ने 42 मुस्लिम समुदायों और TMC सरकार ने 35 अन्य समुदायों को OBC सूची में शामिल किया था। बाद में 2023 में OBC रिजर्वेशन एक्ट भी लाया गया था।
1.69 करोड़ जाति प्रमाणपत्रों की होगी दोबारा जाँच
नई सरकार ने इसके साथ ही 2011 के बाद जारी सभी SC, ST और OBC प्रमाणपत्रों की दोबारा जाँच का आदेश भी दिया है। इसमें करीब 1.69 करोड़ दस्तावेज शामिल हैं। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अधिकारी सभी प्रमाणपत्रों की जाँच करें और फर्जी या अनियमित पाए जाने पर कार्रवाई करें।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष तपस राय ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, “TMC सरकार ने मनमाने ढंग से काम किया। उसने किसी कानून, संविधान या नियम का पालन नहीं किया। ओबीसी आरक्षण के मामले में भी यही हुआ है। नई सरकार ने सही कदम उठाया है।”
वहीं TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा है, “पिछली सरकार ने जनता के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाए थे। पार्टी नेतृत्व द्वारा नई सरकार के इस फैसले की कानूनी स्तर पर जाँच की जाएगी।”
भाजपा ने इस पूरी प्रक्रिया को ‘वोट बैंक की राजनीति’ और पिछली सरकार के दौरान हुई अनियमितताओं का अंत बताया है। सरकार ने संकेत दिया है कि OBC सूची को संशोधित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचे, एक नया, संवैधानिक रूप से अनुपालन करने वाला पिछड़ापन सर्वेक्षण कराया जाएगा।
No comments:
Post a Comment