शुभेंदु अधिकारी और अवैध बांग्लादेशी प्रवासी, BSF को सौंपने का आदेश (फोटो साभार : NDTV & Jagran)
बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने पर बीजेपी सरकार ने घुसपैठ पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एलान किया है कि राज्य में पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अब कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपकर वापस भेजा जाएगा। ‘पता लगाओ, हटाओ और देश-निकाला दो’ अभियान के तहत यह नया नियम 20 मई से लागू हो चुका है।
जिन बांग्लादेशियों को अपनी कुर्सी की खातिर ममता बनर्जी दामाद बनाकर पाल रही थी, अब दामादों को जिस तरह देश-निकाला किया जा रहा है, हर बीजेपी राज्य को शुभेंदु के रास्ते पर चलना होगा। ये अवैध घुसपैठियों की वजह से भारतीयों को मिलने वाली सुविधाएं बाधित हो रही है। जब तक देश से घुसपैठियों- पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या- को बाहर नहीं किया जाएगा देश में असुरक्षा का डर हमेशा बना रहेगा। इन घुसपैठियों का समर्थन करने वाली पार्टियों से पूछना चाहिए कि जिन रोहिंग्यों को जब कोई मुस्लिम मुल्क रखने को तैयार नहीं फिर क्यों भारत में रखने के लिए हिन्दू-मुसलमान कर माहौल ख़राब कर रहे हो? क्या ये घुसपैठिये तुम्हारे दामाद हैं?
अब कोर्ट के चक्कर नहीं, सीधे बॉर्डर पर ‘नो एंट्री’
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हावड़ा में साफ कहा कि पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं। हावड़ा स्टेशन या राज्य में कहीं भी कोई अवैध बांग्लादेशी पकड़ा जाता है, तो उसे अदालत ले जाने की जरूरत नहीं है। पुलिस पहले उसे अच्छे से खाना खिलाएगी और फिर सीधे उत्तर 24 परगना के पेट्रापोल या बशीरहाट बॉर्डर पर BSF के हवाले कर देगी, जहाँ से उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।
किसे मिलेगी राहत और कौन होगा बाहर?
इस नए नियम से उन लोगों को अलग रखा गया है जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में आते हैं। बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थी अगर प्रताड़ना की वजह से भारत आए हैं, तो वे CAA के तहत नागरिकता का दावा कर सकते हैं। लेकिन जो इस दायरे में नहीं आते और अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें तुरंत डिपोर्ट किया जाएगा। हर हफ्ते ऐसे लोगों की रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक (DGP) के जरिए मुख्यमंत्री दफ्तर भेजी जाएगी।
2025 के नए कानून से मिला सरकार को पावर
अब तक का नियम था कि बिना कागजात मिलने वाले विदेशी नागरिक को ‘विदेशी अधिनियम 1946’ के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाता था। यह अदालती प्रक्रिया सालों चलती थी। लेकिन अब सरकार संसद से अप्रैल 2025 में पास हुए ‘प्रवासन और विदेशियों अधिनियम, 2025’ के तहत कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने 14 मई को ही इस संबंध में आदेश जारी किया था, जिसका बंगाल सरकार पालन कर रही है।
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