Showing posts with label # Myanmar. Show all posts
Showing posts with label # Myanmar. Show all posts

30 दिन के भीतर करो पहचान, दस्तावेज देखो और निकालो देश से बाहर: बांग्लादेशी और म्यांमार के घुसपैठियों पर गृह मंत्रालय हुआ और सख्त; क्या घुसपैठियों पर कार्यवाही ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जान ली थी?

सर्वदलीय मीटिंग में भारत सरकार को समर्थन देना वाला विपक्ष बाहर दूसरा तानपुरा क्यों बजाने लगता है? इसका असली कारण है देश में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे विपक्षी नेता का नहीं होना। क्योकि विपक्षी नेता सिर्फ विपक्षी नेता ही नहीं होता उसकी गरिमा देश के प्रधानमंत्री से कम नहीं होती, कि देश पर संकट के समय प्रधानमंत्री अपने विपक्षी नेता से सलाह कर सके। सरकार द्वारा घुसपैठियों को निकालने से विपक्ष बौखलाया हुआ है। जिस दिन सरकार सारे घुसपैठियों को बाहर निकालने में सफल हो गयी देश में आशाओं से अधिक सुख समृद्धि होगी। 

भारत सरकार ने जिस दिन पत्थरबाजों और पेट्रोल बम फेंकने पर blind firing के आदेश देने शुरू कर दिए देश के दुश्मनों की कमर टूटनी शुरू हो जाएगी। कोई यह कहने की हिम्मत नहीं कर पाएगा कि बाहरी लोगों ने आकर नफरत फ़ैलाने की कोशिश की है। जख्मियों पर सियापा करने वाले कोई बाहरी नहीं स्थानीय ही मिलेंगे।   

आज विपक्ष को देश से ज्यादा चिंता रहती है अपने वोटबैंक की। आज विपक्ष जनता को गुमराह करने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की हत्याओं को याद करता है, लेकिन भूल जाते हैं कि भारत ने एक सपूत को भी इसी समस्या से लड़ते खोया है और वह थे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री। जिनकी अकाल मृत्यु आज तक रहस्यमयी बनी हुई है। क्यों नहीं उनके शरीर पर पड़े नीले निशानों की जाँच की गयी? क्यों उनके परिवार को उनके पास नहीं जाने दिया था? अगर उनकी विधवा हुई श्रीमती ललिता शास्त्री ने हंगामा नहीं किया होता परिवार के किसी भी सदस्य को अपने पति एवं पिता से दूर रखा गया था। उनकी अकाल मौत का असली कारण शायद इंडो-पाक युद्ध के दौरान भारत में दुश्मन देश के sleeper cells को पकड़ना।        
भारत का केंद्रीय गृह मंत्रालय बांग्लादेशी और म्यांमार के घुसपैठियों के खिलाफ और सख्त हो गया है। मंत्रालय ने घुसपैठियों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की है। गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि सभी राज्यों को अपनी वैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए घुसपैठियों की पहचान करनी होगी और उनकी जाँच के बाद निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

इसके साथ ही, हर राज्य को जिला स्तर पर पर्याप्त डिटेंशन सेंटर स्थापित करने का आदेश दिया गया है, जहाँ संदिग्ध प्रवासियों को निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक रखा जाएगा। इन केंद्रों में उनकी बायोमेट्रिक जानकारी भी ली जाएगी ताकि आगे भी ये लोग किसी तरह की धोखाधड़ी न करें। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और असम राइफल्स जैसे सुरक्षा बलों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है ताकि सीमाओं पर अवैध घुसपैठियों पर नजर रखी जा सके।

अपने निर्देश में मंत्रालय ने कहा है कि जिन लोगों पर संदेह है कि वो घुसपैठिए हैं, उनके दस्तावेजों का वेरिफिरेशन 30 दिन के भीतर होना जारूरी है। यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक होने का दावा करता है, तो उस राज्य की सरकार का दायित्व होगा कि वो उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी एकत्र करनी होगी।

गौरतलब रहै कि पिछले कुछ समय से भारत में घुसैठियों को पकड़कर वापस भेजने की दिशा में जाँच एजेंसिया लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में राजस्थान में 30 अप्रैल 2025 से शुरू हुए विशेष अभियान में अब तक 1,000 से ज्यादा घुसपैठिए पकड़े गए हैं। यही संख्या गुजरात से भी सामने आई थी। इसी तरह हरियाणा के तीन जिलों- नूहँ, झज्जर और हाँसी में 237 से अधिक बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में लिए गए हैं। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में पिछले कुछ दिनों में 300 से अधिक घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है। मुंबई में 1 जनवरी 2025 से अब तक 650 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

बांग्लादेश के लिए ‘बोझ’ बने रोहिंग्या , कहा- अब सीमा में घुसने नहीं देंगे, सुरक्षा के लिए बन गए हैं खतरा: भारत से भी की बात

भारत के मुसलमानों उठो आंखें खोलो और रोहिंग्यों का समर्थन कर रहे नेताओं और उनकी पार्टियों से पूछों जिस रोहिंग्या को कोई मुस्लिम देश रखने को तैयार नहीं, तुम लोग क्यों इनके समर्थन में कभी शाहीन बाग बनाते हो, और अब UCC का विरोध सिर्फ अपनी कुर्सी और तिजोरी के लिए कर, क्यों आम मुसलमान को बदनाम कर रहे हो? क्या विश्व में कोई देश घुसपैठियों को अपने देश में रहने देता है? केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि जिन-जिन रोहिंग्यों के पहचान पत्र और राशन कार्ड आदि सरकारी प्रमाण बने हैं, जाँच करे कब बने थे? कौन-कौन नेता एवं अधिकारी शामिल थे सभी पर सख्त कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। केवल कर्मचारी अथवा अधिकारी पर नहीं, क्योकि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई कर्मचारी अथवा अधिकारी ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता। अगर यह मांग मुस्लिम समाज से नहीं उठती, फिर हिन्दू समाज को मजबूती के साथ आवाज़ बुलंद करनी होगी। 
बांग्लादेश ने रोहिंग्याओं को शरण देने से मना कर दिया है। वहाँ के नेताओं ने कहा है कि म्यामांर के रास्ते वो अब ज्यादा मात्रा में रोहिंग्याओं को बांग्लादेश की सीमा में नहीं आने देंगे क्योंकि इन लोगों के आने से देश की सुरक्षा में खतरा पैदा हो गया है।

बांग्लादेश के सड़क परिवहन और पुल मंत्री ओबैदुल कादिर ने बुधवार (7 फरवरी 2023) को पत्रकारों से कहा, “हम किसी और रोहिंग्या को देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे… वे पहले ही हमारे लिए बोझ बन चुके हैं।” उन्होंने बताया कि देश को मिलने वाली विदेशी सहायता पहले ही कम हो चुकी है ऐसे में उन लोगों को समर्थन कैसे दिया जाएगा।

इसी तरह बांग्लादेश के शरणार्थी राहत और प्रत्यावर्तन आयुक्त मोहम्मद मिजानुर रहमान ने कहा कि म्यांमार में जुंटा शासन व विद्रोहियों के बीच जारी जंग के बीच सैकड़ों लोग बांग्लादेश में प्रवेश करने के लिए म्यांमार की सीमा पर एकत्रित हैं। इनमें ज्यादातर चकमा समुदाय के लोग और रोहिंग्या हैं।

उन्होंने कहा, “बांग्लादेश पहले ही रोहिंग्याओं के अत्यधिक बोझ से दबा हुआ है। 7 साल हो गए हैं और अभी तक जो रोहिंग्या पहले से बांग्लादेश में हैं उन्हें उनकी सीमा में नहीं भेजा जा चुका है। अब ये लोग हमारे लिए, हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं।”

बांग्लादेश का रोहिंग्याओं पर ऐसा बयान तब आया है जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी वहाँ के दौरे पर थे। एस जयशंकर से मिलने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा, “हमने बहुत अच्छी चर्चा की। हमने तमाम मुद्दों समेत क्रॉस बॉर्डर मुद्दे, रोहिंग्या मुद्दे, सुरक्षा मुद्दे समेत कई मुद्दों पर बात की।”

मालूम रहे कि रोहिंग्याओं की संदिग्ध गतिविधियाँ भारत में भी कम नहीं हैं। कुछ साल पहले खबर आई थी कि बांग्लादेश से एक नाव में भरकर 66 रोहिंग्या अंडमान आए थे। पुलिस ने जानकारी होते ही सबको हिरासत में लिया। इनमें 24 पुरुष, 27 औरतें और 15 बच्चे थे। पुलिस ने फौरन उन सबको वापस भेजने की व्यवस्था हुई।