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‘कांग्रेस नेता फैला रहे भ्रम, अमित शाह ने 150 जिलाधिकारियों को किया कॉल तो सबूत दिखाएँ’ : जयराम रमेश को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस; याद करवा दिया booth capturing mastermind नेहरू की

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार (1 जून 2024) को अपने X हैंडल पर एक विवादित पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया था कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई जिलों के DM को सीधे कॉल करके धमका रहे हैं। जयराम रमेश ने यह भी दावा किया था कि अब तक 150 जिलाधिकारियों से अमित शाह की बात हो चुकी है। अब इस पोस्ट का चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने नोटिस जारी करके जयराम रमेश से इस दावे के सबूत माँगे हैं। इन सबूतों के साथ कांग्रेस नेता को जवाब देने के लिए रविवार (2 जून) तक का समय दिया गया था। जवाब देने के बजाय जयराम रमेश ने उलटे चुनाव आयोग की ही निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस की इस 'hit & run' पर हैरानीं की बात नहीं, केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर इसी हरकत पर काम कर रही है। दूसरे, कांग्रेस द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर जिलाधिकारियों से बात होने की बात पर देश का पहला चुनाव याद आ जाता है, जिसके विषय में शीर्षक "बूथ कैप्चरिंग का मास्टरमाइंड जवाहर लाल नेहरू" में विस्तार से लिख चूका हूँ। नीचे दिए लिंक पर पढ़िए। जब जवाहर लाल नेहरू देश में हुए प्रथम आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से पराजित घोषित हो चुके कांग्रेसी प्रत्याशी मौलाना अबुल कलाम आजाद को किसी भी कीमत पर जबरजस्ती जिताने के आदेश दिये थे। उनके आदेश पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं गोविन्द वल्लभ पन्त ने रामपुर के जिलाधिकारी पर घोषित हो चुके परिणाम बदलने का दबाव डाला और इस दबाव के कारण प्रशासन ने जीते हुए हिन्दू महासभा के प्रत्याशी विशन चन्द्र सेठ की मतपेटी के वोट मौलाना अबुल के पेटी के डलवाकर दुबारा मतगणना करवाकर मौलाना अबुल को जीता दिया।

जवाहर लाल नेहरू : बूथ कैप्चरिंग का मास्टरमाइंड
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर लाल नेहरू देश में हुए प्रथम आम चुनाव में
  

दरअसल, जयराम रमेश ने शनिवार (1 जून) को अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की थी। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “निवर्तमान गृह मंत्री आज सुबह से ज़िला कलेक्टर्स से फ़ोन पर बात कर रहे हैं। अब तक 150 अफ़सरों से बात हो चुकी है। अफ़सरों को इस तरह से खुल्लमखुल्ला धमकाने की कोशिश निहायत ही शर्मनाक है एवं अस्वीकार्य है। याद रखिए कि लोकतंत्र धमकियों से नहीं बल्कि जनादेश से चलता है। 4 जून को आ रहे जनादेश के अनुसार नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और भाजपा सत्ता से बाहर होगी। I.N.D.I. गठबंधन विजयी होगा। अफ़सरों को किसी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए व संविधान की रक्षा करनी चाहिए। उन पर हमारी नजर है।”

जयराम रमेश द्वारा की गई इसी पोस्ट के अगले दिन रविवार (2 जून) को भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारी सुमन कुमार दास ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि आचार संहिता के दौरान सभी जिलाधिकारी सीधे तौर पर चुनाव आयोग को रिपोर्ट कर रहे हैं लेकिन अब तक किसी ने भी इस प्रकार की कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई है। आयोग ने बताया है कि जयराम रमेश द्वारा किए गए दावों से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस नेता से 2 जून तक उनके दावों को प्रमाणित करने वाले सबूत देने को कहा है।

खुद को मिली इस नोटिस पर जयराम रमेश ने सीधे-सीधे कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने चुनाव आयोग की ही निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए। दावों का सबूत पेश करने के बजाय जयराम रमेश आरोप लगाने लगे कि चुनाव आयोग उन शिकायतों पर ध्यान नहीं देता जो भाजपा के विरोध में की जाती हैं। टाइम्स नाउ से बात करते हुए उन्होंने यह भी साफ़ नहीं किया कि वो चुनाव आयोग की इस नोटिस का क्या और कब जवाब देंगे।