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पहलवानों के धरने में घुसा ‘आजादी गैंग’, लगे अखलाक-जुनैद के नारे ;video

                                पहलवानों के प्रदर्शन में घुसा आजादी गैंग (तस्वीर साभार: O News Daily)
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी पहलवानों के धरने में पहले राजनीतिक घुसपैठ हुई। अब एक वीडियो वायरल हो रहा है जिससे पता चलता है कि ‘आजादी गैंग’ भी इनके बीच घुस चुका है। गुरुवार (4 अप्रैल 2023) को यहाँ पीएम मोदी, आरएसएस, ब्राह्मण विरोधी नारे सुनाई पड़े। जब एक पत्रकार ने इसको लेकर सवाल किया तो उसके साथ धक्का-मुक्की हुई। उसे बृज भूषण शरण सिंह का प्रवक्ता, गोदी मीडिया बताकर चुप कराने की कोशिश की गई। आखिर में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और वह पत्रकार को भीड़ से बचाकर ले गई।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि खुद को दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा बताने वाली हिजाब पहनी एक लड़की के नेतृत्व में कुछ लोग आजादी के नारे लगा रहे हैं। इन नारों में मनुवाद से आजादी, आरएसएस से आजादी, ब्राह्मणवाद से आजादी, मोदी सरकार से आजादी वगैरह शामिल थे। इतना ही नहीं कथित मॉब लिंचिंग के शिकार हुए अखलाक और जुनैद के नाम भी नारेबाजी के दौरान सुनाई पड़े। इसके अलावा आप वीडियो में मजहबी और जातिवादी नारे भी सुन सकते हैं।

इन नारों को लेकर जब O News Hindi के पत्रकार प्रभात रंजन मिश्रा ने सवाल किया कि पहलवानों के धरने में इस तरह के नारों का क्या मतलब है तो वहाँ मौजूद लोगों ने उन्हें चुप कराने की कोशिश की। गोदी मीडिया कहकर उनका विरोध किया गया। उन्हें बृज भूषण शरण सिंह का प्रवक्ता बताया गया। उन पर आग लगाने का आरोप लगाया गया। वीडियो में उग्र भीड़ को उनके साथ धक्का-मुक्की करते और पुलिस को उन्हें बचाकर ले जाते हुए आप देख सकते हैं। इस दौरान नारेबाजी करने वाले प्रदर्शनकारी मानते हैं कि वे पहलवानों के समर्थन में जंतर-मंतर पर आए हैं। आश्चर्यजनक है कि वीडियो वायरल होने और सोशल मीडिया में इस संबंध में लगातार सवालों के बावजूद खबर लिखे जाने तक इस तरह के नारों पर बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट या साक्षी मलिक जैसे पहलवानों का, जो इस धरना का चेहरा बने हुए हैं का जवाब नहीं आया है।

अवलोकन करें :-

कौन हैं पहलवानों के धरने को कण्ट्रोल करने वाली आन्दोलनजीवी सुदेश गोयत?

इससे पहले पहलवानों के धरनास्थल पर ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी‘ के नारे भी सुनाई पड़ चुके हैं। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा के साथ पहलवानों के समर्थक बदतमीजी कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि इन पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह (WFI Chief Brij Bhushan Sharan Singh) पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए धरना शुरू किया था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस एफआईआर भी दर्ज कर चुकी है। लेकिन धरनारत पहलवानों का कहना है कि जब तक बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी नहीं होती, वे नहीं उठेंगे। इस बीच 4 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए पहलवानों का केस बंद कर दिया था कि उनकी माँग एफआईआर और सुरक्षा की थी जो अब पूरी हो चुकी है। आगे किसी भी प्रकार की शिकायत या माँग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह भी दी है।

कौन हैं पहलवानों के धरने को कण्ट्रोल करने वाली आन्दोलनजीवी सुदेश गोयत?

अक्सर लेखों में लिखता रहा हूँ कि जब भी देश में चुनाव या विदेशी मेहमानों का आगमन होगा, भाजपा और मोदी-योगी विरोधी आन्दोलनजीवी किसी न किसी बहाने देश में अराजकता फ़ैलाने सड़क पर आते रहेंगे। आखिर एक दबे हुए पुराने मसले को तूल देकर आन्दोलनजीवी उस महिला के सम्मान को बीच चौराहे पर उछाल तार-तार कर अराजकता फैला रहे हैं। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से हुए आंदोलन नहीं उपद्रवों में कुछ चेहरे बेनकाब हो चुके हैं, जिन्हे देख कोई समय बर्बाद किये निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि चुनाव और विदेशी मेहमानों में भारत की छवि धूमिल करने इस आंदोलन का आयोजन किया गया है। प्रमाण सामने है : इस समय चुनाव भी और G-5 समिट भी।

समय आ गया है कि जब इन आन्दोलनजीवियों पर राज्य और केंद्र सरकारों को सख्ती से पेश आने के साथ-साथ इन्हें मिलने वाली हर सरकारी सुविधा को हमेशा के लिए वापस लिया जाए। इनके बैंक खाते सील किए जाएं। इस गंभीर मुद्दे पर निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट को भी इनके साथ कोई सहानुभूति नहीं दिखानी होगी। जब तक इन आन्दोलनजीवियों और इनके गोदियों में खेलने वालों पर सख्ती नहीं होगी, देश से अराजकता समाप्त नहीं हो सकती।  

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी पहलवानों का धरना प्रदर्शन क्या आंदोलनजीवियों के कंट्रोल में है? ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की जो मांग रखी थी, वो पूरा होने के बाद भी वे जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। हालांकि इस बीच बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना देने वाली महिला पहलवानों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मई 4 को पहलवानों का केस बंद कर दिया है यानि सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में आगे सुनवाई नहीं करेगा। लेकिन प्रियंका गांधी वाड्रा सहित तमाम कांग्रेसी नेताओं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के तमाम नेताओं का यहां बारी-बारी से धरने पर बैठने से इसने राजनीतिक रूप ले लिया है।

भाजपा के खिलाफ टूलकिट है पहलवानों का प्रदर्शन, राजस्थान-हरियाणा चुनाव के मद्देनजर जाट-राजपूत में दरार पैदा करने की साजिश

हैरानी की बात यह है कि पहलवानों के प्रदर्शन में ज्यादातर वे लोग शामिल हैं जिन्होंने किसान प्रदर्शन के दौरान दिल्ली को एक तरह से घेरने का काम किया था। इसी में सोशल मीडिया में एक नाम जमकर ट्रेंड कर रहा है। यह नाम है आंदोलनजीवी सुदेश गोयत का। सुदेश गोयत मोदी सरकार के खिलाफ हरेक धरना-प्रदर्शन में शामिल होती रही हैं। सुदेश गोयत किसान आंदोलन के साथ अग्निवीर प्रदर्शन, OROP प्रदर्शन में भी शामिल रही हैं। ये प्रदर्शन के दौरान मीडिया से सामने अपने पक्ष में माहौल बनाने का काम करती है। ऐसे में सुदेश गोयत के शामिल होने से सोशल मीडिया पर लोग पहलवानों के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठा रहे हैं-