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‘बृजभूषण को हटाना है, कुश्ती फेडरेशन पर कब्जा करना है...ससुर को कोच बता विनेश ने दिलवाए 30 लाख’ रूपए : योगेश्वर दत्त

विनेश फोगाट और योगेश्वर दत्त 
आन्दोलनजीवियों के समर्थन से जैसे-जैसे जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना लम्बा चलता जा रहा है, नितरोज इनके घोटाले भी सामने आने लगे हैं कि किस तरह अपने सम्मानों का इन्होने दुरुपयोग किया है, और अब जब सरकार इन घोटालों की जाँच करवाएगी आन्दोलनजीवी उन घोटालों को अनुचित बता पहलवानों के धरने को कुचलने का सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग बता चिल्लाते नज़र आएंगे। 

भारतीय कुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरने पर बैठने वाले पहलवानों को चैंपियनशिप के ट्रायल में छूट मिलने के बाद विवाद हो गया है। इस छूट को नए पहलवानों के साथ अन्याय बताया जा रहा है। इस फैसले पर सवाल उठाने वाले ओलंपियन योगेश्वर दत्त धरना देने वाले पहलवानों के निशाने पर आ गए हैं।

जो कोई इन पहलवानों के हाँ में हाँ नहीं मिला रहा है, उनको ये निशाने पर ले रहे हैं। चाहे वह सरकार हो, खेल मंत्री हों, दिल्ली पुलिस हो, भारतीय ओलंपिक संघ और उसकी अध्यक्ष पीटी उषा हों या योगेश्वर दत्त। ट्रायल में छूट के फैसले का विरोध करने पर विनेश फोगाट ने योगेश्वर दत्त को अपमानित करने की कोशिश की है। इसके बाद दत्त लाइव आए और कई खुलासे किए।

फर्जीवाड़ा कर पति के मामा को दिलवाई सरकारी ग्रांट

शुक्रवार (23 जून 2023) की रात को योगेश्वर दत्त अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लाइव आए और विनेश फोगाट के भ्रष्टाचार का खुलासा किया। योगेश्वर दत्त ने कहा कि विनेश फोगाट ने अपने पति के मामा को कोच बताकर हरियाणा सरकार से 25-30 लाख रुपए ग्रांट दिलाई।
विनेश फोगाट को लेकर योगेश्वर दत्त ने कहा, “आपका गुरु आपका ताऊ महावीर फोगाट है। आपको अभी हरियाणा सरकार से 25-30 लाख रुपए ग्रांट मिली थी, वह आपने कोच ओमप्रकाश दहिया को दिलवाई, जबकि वह आपका कोच नहीं है। आपने उसे कोच बनाकर उसे इतनी बड़ी ग्रांट दिलवा दी।”
योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “आपने उसे पैसे क्यों दिलवाए यह भी मैं बता देता हूँ। पूरे देशवासियों को पता होना चाहिए। जिस सोमबीर राठी से आपकी शादी हुई है, उनके मामा हैं ओमप्रकाश दहिया। इसलिए आपने अपने ताऊ को यहाँ पर छोड़ दिया और अपनी रिश्तेदारी निभाई। इन 25 लाख के लिए आपने क्या भूमिका सेट की, मुझे इसका नहीं पता।

रेलवे की नौकरी में फर्जीवाड़ा

योगेश्वर दत्त यहीं नहीं रूके। उन्होंने रेलवे में नौकरी में फर्जीवाड़ा का भी खुलासा किया। दत्त ने कहा, “आप सरकार से जाकर मिले और आपने अपनी ट्रांसफर मनमर्जी से रेलवे में करवाई। रेलवे में जो हमारे कुश्ती के सीनियर अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी रहे हैं, उनका आपने ट्रांसफर करवाया और उनकी जगह पर आप खुद बैठ गए।”
ओलंपियन ने आगे कहा, “ऐसा कौन सा आंदोलन आपने किया कि आपके मन मुताबिक सारी बातें हो रही हैं? जिस लड़ाई को लेकर आप आए थे, वह लड़ाई कहाँ है आपकी? मेरी सभी खाप प्रतिनिधियों और किसान संगठनों से आग्रह है कि वह इस धरने की सच्चाई को जानिए। इस धरने के बाद से जो इन पहलवानों को बेनिफिट मिल रहा है, इसका क्या कारण है।”

धरना लीड करने पर हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष का लालच

योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “मुझे जंतर मंतर पर धरने का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था। इसके लिए मुझे हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद का लालच भी दिया गया था। यह सारा खेल फेडरेशन पर कब्जे को लेकर किया गया है।”
योगेश्वर दत्त ने कहा कि जब पहलवानों के आरोपों के बाद जाँच कमिटी बनी थी, तब उसमें उन्हें सदस्य चुना गया था। उस समय 4 पहलवान और 3 कोच देर रात 9 बजे उनके घर पर आए और धरने को लीड करने के लिए कहा। दत्त ने कहा कि उन लोगों ने हरियाणा कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनवाने का लालच देते हुए कहा कि बृजभूषण सिंह को हटाना है और फेडरेशन पर कब्जा करना है।
योगेश्वर दत्त आगे बताते हैं, “मैंने कहा था कि लड़कियों पर शोषण के मामले के बीच मुझे कोई पद नहीं चाहिए। इस बातचीत का मकसद सिर्फ यही था कि बृजभूषण सिंह को हटाना है।” उन्होंने कहा कि अभी जो कष्ट निवारण कमेटी बनी थी, उसी में से एक कोच उनके घर आया था। दत्त ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे उन पहलवानों और कोचों के नामों का खुलासा करेंगे।

धरने के लिए पहलवानों पर डलवाया गया दबाव

योगेश्वर दत्त ने कहा, “पहले धरने में आपने रवि दहिया, दीपक पूनिया समेत तमाम पहलवानों को किस तरह से बुलाया था, वह भी हमें पता है। उन पहलवानों पर कहाँ-कहाँ से आपने कितना दबाव डलवाया, यह सब भी हम जानते हैं। इस बार भी आपने खूब कोशिश की, लेकिन आप के आंदोलन में कोई नहीं आया। सभी को सच्चाई मालूम हो गई है। यह सच्चाई मुझे पहले दिन से ही पता थी।”
धरना देने वाले पहलवानों को लेकर दत्त ने आगे कहा, “आज हरियाणा का कोई भी पहलवान आपके साथ नहीं है। पहले भी कोई नहीं था। खाप पंचायतों और किसान संगठनों को जो आपने बताया, वह आपके बहकावे में आ गए। वे आपसे बिना कुछ पूछे आपके साथ लगे रहे। आज वे अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।”

पहलवानों के माँ-बाप पर बनाया गया दबाव

विनेश फोगाट ने आरोपों का जवाब देते हुए योगेश्वर दत्त ने कहा, “उन्होंने लगाए कि मैंने कई शिकायतकर्ता खिलाड़ियों और उनके माँ-बाप को फोन किया और उनसे शिकायत वापस लेने के लिए कहा। मैं विनेश से यही कहूँगा कि जिन लड़कियों के पास मैं गया, उन्हें सामने आना चाहिए। जिन पहलवानों के माँ-बाप को मैंने फोन किया, उन्हें भी सामने आना चाहिए।”
योगेश्वर दत्त ने कहा कि उनसे खुद मिलने के लिए कई खिलाड़ी और उनके माँ-बाप आए थे। उन्होंने कहा, “वे लो मुझसे बोले कि योगेश्वर जी, हमें इस मामले में फँसाया जा रहा है। हमें नहीं पता था कि यह ऐसे करेंगे। हमारी बेटियों को बहला-फुसलाकर यहाँ लेकर आए थे। तीसरी पहलवान ने भी यही बात कही थी कि हमें फेडरेशन में जाकर अपनी बातें मनवानी है, यह कहकर वहाँ ले जाया गया था और हमें जंतर मंतर पर ले जाकर बैठा दिया।”
योगेश्वर दत्त ने आगे बताया, “इसी पहलवान के पिता ने मुझे फोन करके बताया कि विनेश फोगाट ने उस पहलवान की मम्मी के पास फोन किया था और भला-बुरा कहते हुए कहा कि तुमने शिकायत से नाम वापस क्यों लिया? तुम पीछे क्यों हट गई?” योगेश्वर दत्त ने फिर जोर देकर कहा कि ये सारा खेल फेडरेशन पर कब्जे को लेकर था।

विनेश फोगाट कई बार ले चुकी हैं छूट

योगेश्वर दत्त ने कहा कि विनेश फोगाट पहले भी कई बार छूट ले चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 2017 में इंडोनेशिया गेम्स के लिए उनका ट्रायल नहीं लिया गया था। इसके अलावा, विनेश फोगाट ने फेडरेशन से कहा कि 48 की जगह 53 किलोग्राम वर्ग में उनका चयन किया जाए और फेडरेशन ने वह भी किया। योगेश्वर दत्त ने कहा कि इन सब सहूलियत मिलने के बाद भी वह इंडोनेशिया गेम्स खेलने नहीं गईं।
दत्त ने कहा, “जिस खिलाड़ी का 53 वेट था, उसका वेट 48 करना पड़ा और वह वेट चेंज की वजह से हार गई। इस वजह से दोनों वेट कैटेगरी में भारत को कुछ नहीं मिला। इसके बावजूद भी आप पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बस आपको शोकॉज नोटिस देकर छोड़ दिया गया। शोकॉज नोटिस भी दिया या नहीं, यह भी मुझे पक्का नहीं पता।”
दत्त के अनुसार, साल 2018 के एशियन गेम्स के ट्रायल भी विनेश फोगाट ने नहीं दिए थे। फेडरेशन पर दबाव डालकर वह बिना ट्रायल के ही एशियन गेम्स के लिए गई थीं।” उन्होंने आगे कहा, “जहाँ तक मेरा मानना है कि फेडरेशन ने आपका दबाव इसलिए माना, क्योंकि आप अच्छी खिलाड़ी थीं। इसका मैं कोई और मतलब नहीं निकाल सकता।”
योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “2019 ओलिंपिक क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट में आप हंगरी गई थीं। बिना कोच के आप गई थीं। यह सभी चीजें हमें ओवरसाइट कमेटी से पता लगी हैं। वहाँ पर किसी भारतीय कोच के साथ आप नहीं रहीं, उनसे अलग रहीं।”
उन्होंने आगे कहा, “2022 के विश्व चैंपियनशिप प्रतियोगिता में भी आपने ट्रायल न करवाने की जिद की थी। कहा था कि मुझे बिना ट्रायल के भेजो, लेकिन आप की ट्रायल ली गई। आपकी ट्रायल इसलिए हुई, क्योंकि आपके वेट में अंतिम नाम की लड़की थी, जो आपके बराबर की थी। उसके साथ आप की ट्रायल हुई।”
योगेश्वर दत्त ने यह खुलासा तब किया है, जब उन्होंने इन पहलवानों को मिली ट्रायल से छूट पर सवाल उठाया था। इसके बाद विनेश फोगाट ने इन्हें बृजभूषण सिंह की थाली का झूठा खाने वाला, महिला पहलवानों के नाम मीडिया में लीक करने वाला, कुश्ती का गद्दार सहित कई आरोप लगाए थे। इसके बाद योगेश्वर दत्त ने इन सब बातों का खुलासा किया है।

धरना देकर पहलवान खेल संघ के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करवा सकते: भारत सरकार का सीमित दायरा, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति तय करती है नीतियाँ

                                             खेल महासंघ (प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार- हिंदुस्तान)
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवान दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। महिला पहलवानों ने WFI चीफ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। अब वे उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

पहलवानों का कहना है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद POCSO ऐक्ट तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। इसलिए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पहलवानों ने उन्हें संसद की सदस्यता छोड़ने की भी माँग की है। उन्होंने सरकार पर भाजपा सांसद सिंह को बचाने का आरोप लगाया है।

सरकार खेल मामलों में और उसके प्रबंधन में कितनी शामिल है, इसको लेकर हम कुछ तथ्य आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे वर्तमान स्थिति को समझने में मदद मिलेगी कि खेलों में सरकार की कितनी भूमिका है।

सरकार खेलों के प्रबंधन में शामिल नहीं 

भारत में खेलों का प्रबंधन संबंधित राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा किया जाता है, जो स्वतंत्र निकाय होते हैं। ये प्रतिस्पर्धी कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, विभिन्न स्तरों पर राज्य या देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ियों का चयन करते हैं और विभिन्न हिस्सों में खेलों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

सरकार देश के इन खेल संघों की मदद करती है, ताकि उनके आयोजनों और संचालन को सुगम बनाया जा सकते। इसके अलावा, खेल के बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना और खेल पुरस्कार देना सरकार की भूमिका के तहत आता है। इसके अलावा, सरकार का विशेष हस्तक्षेप नहीं रहता है।

खेल संघ स्वायत्त गैर-सरकारी निकाय

संबंधित राष्ट्रीय खेल संघ स्वायत्त निकाय हैं, जो आमतौर पर BCCI की तरह ही भारत में सोसायटी के रूप में पंजीकृत होते हैं। इन संघों के प्रशासन या सदस्यों की नियुक्ति में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। सिर्फ संपर्क अधिकारियों को खेल मंत्रालय नियुक्त करता है, जो परामर्श से नियुक्त किए जाते हैं।

इन राष्ट्रीय संघों के बाद राज्य स्तर के खेल संघ आते हैं, जिनमें से सभी के अपने नियम, उप-कानून होते हैं। इन राज्य खेल संघों के अपने स्वयं के खेल संविधान या चार्टर होते हैं, जो उनके कामकाज और प्रबंधन में मार्गदर्शन का काम करते हैं।

कोई भी बना सकता है खेल महासंघ

यदि आप ऐसे लोगों के समूह हैं, जो किसी खेल से जुड़े हैं और आपको लगता है कि यह खेल भारत में प्रचार के लायक है तो आप एक महासंघ बना सकते हैं। हालाँकि, यह स्वचालित रूप से आपको कोई विशेषाधिकार नहीं देता है। कुछ विशेषाधिकार प्राप्त करने के लिए इसे संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल महासंघ से संबद्ध होना जरूरी है।

जैसे कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ फीफा (FIFA) से संबद्ध है। यदि संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल संघ IOC (अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति) से संबद्ध है तो आपका संघ IOA (भारतीय ओलंपिक संघ) का सदस्य बनने और सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल संघ के रूप में मान्यता प्राप्त करने के योग्य हो जाता है।

मान्यता प्राप्त खेल संघों को सरकार से मिलती है सहायता

सरकार खेलों के प्रचार और विकास के लिए काम करती है। खेल मंत्रालय विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के खेल संघों के आवेदन का आकलन करता है और उन्हें मान्यता देता है। इसके बाद वे वित्तीय अनुदान (विभिन्न योजनाओं के तहत) और अन्य सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

इसके तहत खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और विकास के लिए स्टेडियम उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेल उपकरण जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने की अनुमति शामिल है। समय-समय पर इन खेल संघों को सरकार अन्य प्रकार की सुविधाएँ भी प्रदान करती है।

गैर-ओलंपिक खेल संघों को भी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो सकती है

यदि राष्ट्रीय खेल संघ IOA से संबद्ध हैं तो उसे सरकार से मान्यता प्राप्त करना आसान होता है। हालाँकि, यह अनिवार्य शर्त नहीं है। गैर-ओलंपिक खेल संघ भी मान्यता ले सकते हैं।

साल 2016 में 49 राष्ट्रीय खेल संघों को मान्यता दी गई। इनमें ‘रस्साकशी’ और ‘बॉडी बिल्डिंग’ जैसे गैर-ओलंपिक खेल भी शामिल हैं। खो-खो और कबड्डी गैर-ओलंपिक खेलों के लोकप्रिय उदाहरण हैं, जिन्हें सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और वे सरकार से सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं।

BCCI ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ बनने के लिए आवेदन नहीं किया

क्रिकेट अन्य गैर-ओलंपिक खेलों से अलग है। क्रिकेट के लिए राष्ट्रीय खेल संघ के तौर पर BCCI ने कभी भी सरकार से मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया। यही कारण है कि वह तर्क देता है कि उसे RTI के दायरे से बाहर रखा जाए।

BCCI का तर्क है कि वह उसे सीधे सरकारी सहायता नहीं मिलती है। इसलिए RTI में दायरे में नहीं आने चाहिए। साल 2011 में तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने उसे राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में पंजीकरण कराने के लिए कहा था, लेकिन BCCI ने ऐसा नहीं किया।

IOA से संबद्ध खेल महासंघों को खिलाड़ियों और अधिकारियों को आयोजनों में भेजने का अधिकार

कई लोगों के विचारो के विपरीत, सरकार खिलाड़ियों और सहायक कर्मचारियों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में न तो चुनती है और न ही भेजती है। भारत में IOA खेल आयोजनों के सरकार और स्थानीय संघों के साथ मिलकर काम करता है।

IOA एक गैर-सरकारी स्वायत्त निकाय है जो राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों या ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के साथ-साथ राष्ट्रीय खेलों के लिए खिलाड़ियों को चुनने के लिए सदस्य खेल महासंघ के साथ काम करता है। भारतीय ओलंपिक संघ IOC का सदस्य है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वायत्त निकाय है।

खेलों का आयोजन और प्रबंधन विभिन्न स्टेक होल्डर द्वारा किया जाता है

चाहे ओलंपिक हो या राष्ट्रमंडल जैसे खेल, इसमें एक आयोजन समिति होती है। इस समिति में IOA या IOC जैसे शीर्ष निकायों के सदस्य शामिल होते हैं।

इसके अलावा, स्थानीय सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए नगरपालिका जैसे स्थानीय प्राधिकरण, सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकार और मंजूरी एवं बुनियादी सुविधाओं के लिए स्थानीय प्राधिकरण के सदस्य इसमें शामिल होते हैं। अनुदान सरकारी और गैर सरकारी स्रोतों से आता है। संबंधित खेल संघ भाग लेने वाले खिलाड़ियों और दल के मामलों का प्रबंधन करते हैं।

सरकार खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती

भले ही संघों को सरकार से सहायता प्राप्त हो, लेकिन सरकार के पास उनके प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोई कार्यकारी शक्ति नहीं होती है। हालाँकि, वास्तव में इसके विपरीत होता है।

उदाहरण के लिए जब IOC को पता चला कि भारत सरकार IOA के चुनाव में हस्तक्षेप कर रही है तो साल 2012 में उसने IOA को निलंबित कर दिया था। इसका मतलब यह हुआ कि अगर निलंबन वापस नहीं लिया जाता तो भारत ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाता।

खेल महासंघों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं IOA या अंतरराष्ट्रीय महासंघ

अगर कोई खेल महासंघ सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती, क्योंकि वे स्वतंत्र निकाय हैं। हालाँकि, सरकार चाहे तो उन्हें सहायता और अनुदान से वंचित कर सकती है।

दूसरी तरफ, IOA या उस खेल का अंतरराष्ट्रीय महासंघ संबंधित खेल महासंघ पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। उदाहरण के लिए, भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को साल 2012 में उसके अंतर्राष्ट्रीय महासंघ ने निलंबित कर दिया था। वहीं, IOA ने साल 2008 में भारतीय हॉकी महासंघ को निलंबित कर दिया था।

सरकार खेलों के लिए नियम और कानून बना सकती है

सरकार खेल संघों के कामकाज या प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। हालाँकि, वह ऐसे नियम और कानून बना सकती है, जिनका पालन करने के लिए इन संघों को कहा जा सकता है।

हालाँकि, ये संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संघों के नियमों और उप-नियमों के विपरीत नहीं होने चाहिए, अन्यथा राष्ट्रीय संघों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों से निलंबित होने का जोखिम बना रहेगा। उदाहरण के लिए, फीफा ने कुवैत पर उस वक्त प्रतिबंध लगा दिया, जब उसे लगा कि इसके द्वारा पारित कानून खेल संघों की स्वायत्तता के लिए अच्छा नहीं है।

कई खेल निकाय और संघ राजनेताओं द्वारा नियंत्रित होते हैं 

सरकार भले ही खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है, लेकिन यह भी सच है कि हर राजनीतिक दल के नेता किसी न किसी राष्ट्रीय खेल महासंघ या उससे संबद्ध निकायों के सदस्य होते हैं। कई नेता तो कई खेल संघों के सदस्य होते हैं।

1982 से पहले भारत के पास नहीं था युवा मामले एवं खेल मंत्रालय

युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय की स्थापना भारत ने साल 1982 के एशियाई खेलों की मेजबानी मिलने के बाद की थी। सरकार ने इन खेलों के लिए कुछ नए स्टेडियमों का निर्माण किया और कुछ पुराने का जीर्णोद्धार किया।

इसके बाद इन स्टेडियमों का प्रबंधन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) नामक संगठन बनाकर उसे स्थानांतरित कर दिया। खेल मंत्रालय और SAI को खेल महासंघों और ‘अखिल भारतीय खेल परिषद’ जैसे सलाहकार निकायों के परामर्श से विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढाँचे की निर्माण का काम सौंपा गया है।

रियो ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष पर रहने वाले USA में खेल मंत्रालय नहीं  

अमेरिका में कोई खेल मंत्रालय या केंद्रीय निकाय नहीं है। वहाँ खेलों के विकास की देखरेख करने का काम स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग है।

अमेरिका का यह विभाग स्थानीय निकायों और स्कूलों को खेलों पर खर्च करने की सलाह देता है। खेल भी अमेरिका में शिक्षा के साथ महत्वपूर्ण रूप से से जुड़ा हुआ है। वहाँ संगठित खेल आयोजन अधिकांश हाई स्कूलों और कॉलेजों का हिस्सा हैं।

संघ के महासचिव राकेश कोच का आरोप : विनेश फोगाट और साक्षी के साथ कुछ भी गलत नहीं हुआ।; क्या सुप्रीम कोर्ट से ऊपर खाप पंचायत? विनेश फोगाट के वीडियो पर बवाल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच विनेश फोगाट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह खाप पंचायत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से पहले बता रही हैं। वहीं, जाट समाज ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर गुरुवार (4 मई, 2023) को जानकारी दी कि 7 मई को सभी खाप जंतर-मंतर जाएँगी। जाट समाज ने ट्वीट किया, “सोरम मुजफ्फरनगर में सर्वखाप मुख्यालय पर आयोजित खाप चौधरियों की बैठक के निर्णयानुसार, 7 मई को सभी खाप जंतर-मंतर जाएँगी।

दिल्ली पुलिस द्वारा खिलाड़ियों से अभद्रता करने वाले तैनात पुलिस कर्मियों को सस्पेंड करने के लिए 2 दिन का वक्त दिया गया है। बाकी सभी निर्णय जंतर-मंतर पहुँचकर लिए जाएँगे।”

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विनेश फोगाट के वीडियो को सबसे पहले ट्विटर पर रवि भदौरिया नाम के एक इन्फ्लुएंसर ने शेयर किया था। वीडियो में भारतीय पहलवान को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “हमारे बुजुर्ग और खाप पंचायतें ही हमारे सभी बड़े फैसले लेती आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से पहले हमारा जो भी फैसला होता है, वह हमारी खाप पंचायत लेती है। इसलिए खाप पंचायत जो भी फैसला करेगी, हम उनका पालन करेंगे।”

भारतीय पहलवान द्वारा देश के सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से ऊपर खाप पंचायत के फैसले को बताने से विवाद गहरा गया है। लेकिन, पूरी वीडियो में विनेश को यह कहते हुए भी सुना गया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती हैं और सभी कानूनी विकल्पों की तलाश कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को महिला पहलवानों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई बंद करने का फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए याचिका दाखिल की थी। दिल्ली पुलिस ने सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है, इसलिए अब इस मामले में आगे की सुनवाई बंद की जाती है।

दरअसल, बबीता फोगाट, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट, साक्षी मलिक सहित 7 महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर खिलाड़ियों का यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। इन खिलाड़ियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर कहा था कि दिल्ली पुलिस उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं कर रही है।

7 मई को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की तक़रीबन एक दर्जन खाप देशवाल, राठी, बुड़ियांन, दुड्डा, बेनीवाल, कुंड, निर्वाल, बालियान, घनघस, लाटीयान, अहलावत और बत्तीसा के चौधरी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे खिलाड़ियों के विरोध प्रदर्शन पर एकजुट होंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। इससे पहले खाप पंचायतों ने पहलवानों की माँगे जल्द पूरी नहीं करने पर बंद की धमकी दी थी।

उल्लेखनीय है कि खाप पंचायतें अक्सर गलत कारणों से चर्चा में रही हैं, जिसमें अंतर-जातीय विवाह को ‘अवैध’ घोषित करने का प्रयास और ऑनर किलिंग को लेकर उनके फैसले शामिल हैं।

हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव ने पहलवानों पर आरोप लगाया

वहीं, हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव राकेश कोच ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन किया है। उन्होंने महावीर फोगाट परिवार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। राकेश कोच ने बीते दिनों कहा था कि उनका परिवार कुश्ती संघ पर कब्जा करना चाहता है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को WFI का अध्यक्ष बनवाना चाह रहे हैं। इसलिए वे खिलाड़ियों को भड़का रहे हैं।
अवलोकन करें:-
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों पर निशाना साधते हुए राकेश कोच ने यह भी कहा था कि ये खिलाड़ी किसी कार्यक्रम में आने के लिए पैसे लेते हैं। बजरंग पुनिया सरकारी अधिकारी हैं और रेलवे की अनुमति के बिना वे धरने पर बैठे हैं। विनेश फोगाट और साक्षी के साथ कुछ भी गलत नहीं हुआ।

पहलवानों के धरने में घुसा ‘आजादी गैंग’, लगे अखलाक-जुनैद के नारे ;video

                                पहलवानों के प्रदर्शन में घुसा आजादी गैंग (तस्वीर साभार: O News Daily)
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी पहलवानों के धरने में पहले राजनीतिक घुसपैठ हुई। अब एक वीडियो वायरल हो रहा है जिससे पता चलता है कि ‘आजादी गैंग’ भी इनके बीच घुस चुका है। गुरुवार (4 अप्रैल 2023) को यहाँ पीएम मोदी, आरएसएस, ब्राह्मण विरोधी नारे सुनाई पड़े। जब एक पत्रकार ने इसको लेकर सवाल किया तो उसके साथ धक्का-मुक्की हुई। उसे बृज भूषण शरण सिंह का प्रवक्ता, गोदी मीडिया बताकर चुप कराने की कोशिश की गई। आखिर में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और वह पत्रकार को भीड़ से बचाकर ले गई।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि खुद को दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा बताने वाली हिजाब पहनी एक लड़की के नेतृत्व में कुछ लोग आजादी के नारे लगा रहे हैं। इन नारों में मनुवाद से आजादी, आरएसएस से आजादी, ब्राह्मणवाद से आजादी, मोदी सरकार से आजादी वगैरह शामिल थे। इतना ही नहीं कथित मॉब लिंचिंग के शिकार हुए अखलाक और जुनैद के नाम भी नारेबाजी के दौरान सुनाई पड़े। इसके अलावा आप वीडियो में मजहबी और जातिवादी नारे भी सुन सकते हैं।

इन नारों को लेकर जब O News Hindi के पत्रकार प्रभात रंजन मिश्रा ने सवाल किया कि पहलवानों के धरने में इस तरह के नारों का क्या मतलब है तो वहाँ मौजूद लोगों ने उन्हें चुप कराने की कोशिश की। गोदी मीडिया कहकर उनका विरोध किया गया। उन्हें बृज भूषण शरण सिंह का प्रवक्ता बताया गया। उन पर आग लगाने का आरोप लगाया गया। वीडियो में उग्र भीड़ को उनके साथ धक्का-मुक्की करते और पुलिस को उन्हें बचाकर ले जाते हुए आप देख सकते हैं। इस दौरान नारेबाजी करने वाले प्रदर्शनकारी मानते हैं कि वे पहलवानों के समर्थन में जंतर-मंतर पर आए हैं। आश्चर्यजनक है कि वीडियो वायरल होने और सोशल मीडिया में इस संबंध में लगातार सवालों के बावजूद खबर लिखे जाने तक इस तरह के नारों पर बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट या साक्षी मलिक जैसे पहलवानों का, जो इस धरना का चेहरा बने हुए हैं का जवाब नहीं आया है।

अवलोकन करें :-

कौन हैं पहलवानों के धरने को कण्ट्रोल करने वाली आन्दोलनजीवी सुदेश गोयत?

इससे पहले पहलवानों के धरनास्थल पर ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी‘ के नारे भी सुनाई पड़ चुके हैं। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा के साथ पहलवानों के समर्थक बदतमीजी कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि इन पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह (WFI Chief Brij Bhushan Sharan Singh) पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए धरना शुरू किया था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस एफआईआर भी दर्ज कर चुकी है। लेकिन धरनारत पहलवानों का कहना है कि जब तक बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी नहीं होती, वे नहीं उठेंगे। इस बीच 4 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए पहलवानों का केस बंद कर दिया था कि उनकी माँग एफआईआर और सुरक्षा की थी जो अब पूरी हो चुकी है। आगे किसी भी प्रकार की शिकायत या माँग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह भी दी है।

खेल मंत्रालय के साथ पहलवानों की बैठक बेनतीजा, कहा – जब तक नहीं हटेंगे WFI अध्यक्ष, जारी रहेगा धरना


दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों के डेलीगेशन ने खेल मंत्रालय में बातचीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। पहलवान विनेश फोगाट ने मीडिया से कहा कि हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। बजरंग पुनिया ने कहा है कि हम सरकार से सकारात्मक आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। जब तक संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया जाता हमारा धरना जारी रहेगा। बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन के खिलाफ है, राज्य या केंद्र की सरकार से नहीं।

देश के कई बड़े पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ धरना दे रहे हैं। विनेश फोगाट ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। महिला खिलाड़ियों और महिला कोचों के साथ बदसलूकी और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जा रहा है।

मीडिया से बात करते हुए विश्व चैंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बातचीत में हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हम सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और जब तक माँगे पूरी नहीं होती धरना जारी रहेगा। विनेश फोगाट ने कहा कि हमारे पास लगाए गए आरोपों के सबूत हैं। विनेश ने आगे कहा कि फेडरेशन के अध्यक्ष ने गलत किया है। यदि उनपर कार्रवाई नहीं हुई तो हमें मजबूरन एफआईआर करवानी पड़ेगी।

विनेश ने कहा कि यौन शोषण के कारण यूपी की कुश्ती खत्म हुई है। पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि शोषित लड़कियों के फोन आ रहे हैं। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में दखल देकर न्याय की अपील करते हैं।

पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन से है और हम इसे भंग करना चाहते हैं। बजरंग ने कहा कि राज्यों के कुश्ती संघ में भी उन्हीं के लोग बैठे हैं, हम चाहते हैं फेडरेशन भंग कर के नए सिरे से इसे बनाया जाए। बजरंग ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बैठक में दिए गए आश्वासन से हम खुश नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि हमें हरियाणा की सरकार और देश की सरकार से कोई शिकायत नहीं है। सरकार हमें सपोर्ट करती है।

उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार से नहीं व्यक्ति विशेष है। हम तब तक धरने पर बैठे रहेंगे, जब तक फेडरेशन के अध्यक्ष को हटा कर इसे भंग करने की घोषणा नहीं कर दी जाती। बजरंग ने कहा कि अब तक 6 लड़कियों ने अपने साथ गलत होने का दावा किया है।

आपको बता दें कि बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “ये चाहते हैं कि हम ओलंपिक विजेता हैं, हमारा ट्रायल ना कराया जाए और ट्रायल कराया भी जाए तो पहले नेशनल के विजेता का ट्रायल हो, फिर जो जीत कर आए उनके साथ फाइनल इनका कराया जाए। इससे इन्हें दिक्कत हो रही है। वहीं गुस्सा इनका आज फूटा है।”

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “जहाँ तक इन खिलाड़ियों का सवाल हैं ये ओलंपिक पदक विजेता हैं। उसमें हमारा भी सहयोग है। ओलंपिक के बाद इन्होंने एक भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया और सब सरकार की स्कीमों का फायदा ले रहे हैं। जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता की बात आती है तो इनकी तबीयत खराब हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इनकी तबीयत ठीक हो जाती है। अभी फेडरेशन ने निर्णय लिया कि कोई भी विजेता हो उसे नेशनल खेलना होगा, अगर वे बीमार है तो उसका मेडिकल दे।”