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मालीवाल का दावा- केजरीवाल ने पंजाब में बनाया शीशमहल 2.0, AAP प्रमुख के समर्थन में आया नूपुर शर्मा को विवादित बनाने वाला कुख्यात जेहादी Alt News का जुबैर

 स्वाती मालीवाल (बाएँ), केजरीवाल (बीच में), मुहम्मद जुबैर (दाएँ), (साभार : livetrends, lallantop, Timesnow)
अपनी छोटी सी कार और छोटा सा घर दिखाकर कि मैं इसी कार में चलूंगा, मैं इसी घर में रहूंगा अब वह शीशमहल से कम की बात ही नहीं करता, क्योंकि अब उसे हराम का खाने  की आदत पड़ गई है, उसे भी पता है ऐसा कोई कानून नहीं है कि इस पर कोई कानूनी कार्यवाही हो सके, पहले दिल्ली को लूटा अब पंजाब को यह सब आपिये मिल कर लूट रहे है, दिल्ली में यमुना सफाई के नाम पर अरबों रुपए खा गया उससे हर राज्य में चुनाव लड़ प्रधानमंत्री बनने के सपने पहले दिन से देख रहा हैं। लेकिन इसी की राज्य सभा सांसद स्वाति मालीवाल जिसकी दिल्ली के शीश महल में पिटाई की थी, तभी से वह केजरीवाल के लिए सिर दर्द बन बेनकाब कर इसी का नहीं बल्कि पूरी आम आदमी पार्टी का राजनीतिक जीवन समाप्त करने में पीछे नहीं हट रही। केजरीवाल और इसकी पार्टी भूल गयी कि औरत का इन्तेक़ाम बहुत खतरनाक होता है।  

राजनीति और सोशल मीडिया का रिश्ता हमेशा दिलचस्प रहा है। यहाँ बहसें मिनटों में ट्रेंड बन जाती हैं। कुछ ऐसा ही इन दिनों देखने को मिला राज्यसभा सांसद स्वाती मालिवाल और Alt News के सह-संस्थापक मुहम्मद जुबैर के बीच, जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कथित ‘शीशमहल 2.0’ को लेकर दोनों के बीच X (पहले ट्विटर) पर जुबानी जंग छिड़ गई। यह विवाद दिल्ली से लेकर पंजाब और चंडीगढ़ की सियासत तक चर्चा का विषय बन गया है।

‘दिल्ली से भी शानदार शीशमहल 2.0’: स्वाति मालीवाल

 विवाद की शुरुआत 31 अक्टूबर को हुई, जब स्वाति मालीवाल ने दावा किया कि दिल्ली का ‘शीशमहल’ खाली करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने अब पंजाब में ‘दिल्ली से भी शानदार शीशमहल’ तैयार करवा लिया है। मालीवाल ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ के सेक्टर-2 में मुख्यमंत्री कोटे की 2 एकड़ जमीन पर बनी एक आलीशान 7-स्टार सरकारी कोठी केजरीवाल को मिल गई है।

स्वाती मालीवाल ने सीधे तौर पर पंजाब सरकार पर एक व्यक्ति (केजरीवाल) की सेवा में लगने का आरोप लगाया। स्वाती मालीवाल ने यह भी कहा कि केजरीवाल अंबाला जाने के लिए इसी घर के सामने से सरकारी हेलीकॉप्टर में बैठे और फिर पंजाब सरकार का प्राइवेट जेट उन्हें पार्टी के काम से गुजरात ले गया। मालीवाल के इन दावों ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया।

दावे झूठे और तस्वीर पुरानी: जुबैर का पलटवार

वहीं, केजरीवाल के बचाव में उतरे खुद को ‘फैक्ट चेकर’ बताने वाले मोहम्मद जुबैर। जुबैर ने मालीवाल के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि जिस बिल्डिंग का स्क्रीनशॉट दिखाया जा रहा है, वह हरियाणा के कृषि मंत्री के दफ्तर के बगल में है।
प्रोपेगेंडा फैलाने वाले फैक्ट चेकर जुबैर ने गूगल इमेजेज़ का हवाला देते हुए कहा कि यह बिल्डिंग अभी नहीं बनी है, बल्कि 2013 से 2024 तक यानी सालों से वहीं मौजूद है। इसके साथ ही, जुबैर ने मालीवाल के 2 एकड़ जमीन के आँकड़े पर भी सवाल उठाकर कहा कि बिल्डिंग के सामने की खाली जमीन अधिकतम 20,000 वर्ग फुट हो सकती है, न कि 2 एकड़।

‘झूठा प्रचार’ और ‘सच का पर्दाफाश’: मालीवाल का जवाबी हमला

फैक्ट चेकर जुबैर के पलटवार के बाद, 1 नवंबर 2025 को स्वाति मालीवाल ने जुबैर को ‘थाकथित फैक्ट चेकर’ कहते हुए जवाबी हमला किया और ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के आर्टिक्ल की एक तस्वीर साझा की, जिसमें केजरीवाल के शीशमहल के बारे में लिखा हुआ है।
स्वाती मालीवाल ने लिखा, “अरविंद केजरीवाल जी के चंडीगढ़ के शीश महल पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की ये रिपोर्ट पढ़ें। कोठी को केजरीवाल जी के लिए तैयार करने के लिए अक्टूबर महीने में युद्ध स्तर पर सरकार ने काम करवाया, केजरीवाल जी इस घर में रहते भी हैं और मीटिंग भी लेते हैं। CM का कैंप ऑफिस कोठी नंबर 43 में है। ये आलीशान कोठी नंबर 50 केजरीवाल जी के लिए है।” इन दावों के साथ ही, मालीवाल ने केजरीवाल को खुली चुनौती दी और कहा, “हिम्मत है तो ये बताओ इस शीश महल में कितना खर्च हुआ है। इस घर को एक दिन के लिए जनता और मीडिया के लिए खोलो।”
मालीवाल ने जुबैर पर ओवरटाइम काम करके यह साबित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया कि केजरीवाल द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा आलीशान बंगला ‘कोई रैंडम बिल्डिंग’ है। स्वाती मालीवाल ने जुबैर के ट्वीट को ‘झूठा प्रचार’ यानि फेक प्रोपेगेंडा करार दिया और उसे अपना ट्वीट डिलीट करने और बिना रिसर्च के पोस्ट करने के लिए माफी माँगने को कहा।

स्वाती मालिवाल के और आरोप

स्वाती मालिवाल यहीं नहीं रुकीं। स्वाती मालिवाल यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने एक और ट्वीट करते हुए कहा कि चंडीगढ़ में सिर्फ केजरीवाल ही नहीं, बल्कि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के लिए भी आलीशान सरकारी बंगले तैयार किए गए हैं। स्वाती मालीवाल ने ट्वीट कर कहा, “चंडीगढ़ में शीशमहल सिर्फ केजरीवाल जी का नहीं है। मनीष सिसोदिया का बंगला नंबर 960, सेक्टर 39 और सत्येंद्र जैन का बंगला नंबर 926, सेक्टर 39 है। ये सब वही आलीशान कोठियाँ हैं जो अब दिल्ली के नेताओं को पंजाब सरकार ने रहने के लिए दी हैं। सरकारी संपत्ति पर इस तरह कब्जा अपराध है।”

बिना विधायक कैसे मिला केजरीवाल को ‘शीशमहल 2.0’: स्वाती मालीवाल

मालीवाल ने अपने एक बयान में पूछा कि केजरीवाल को यह आलीशान ‘शीशमहल 2.0’ किस हैसियत से दिया गया है, क्योंकि वह दिल्ली में विधायक भी नहीं हैं। स्वाती मालीवाल ने मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस बताए जाने के दावे को झूठ बताते हुए सवाल किया, “अगर यह कैंप ऑफिस है, तो यह जनता के लिए क्यों नहीं खुलता? यह अंदर से बंद क्यों रहता है? और पिछले चार सालों में यहाँ कितनी बैठकें हुई हैं?”
अंत में स्वाती मालीवाल ने इस घर पर हुए खर्च का खुलासा करने और इसे एक दिन के लिए जनता और मीडिया के लिए खोलने की चुनौती दी और दोहराया कि यह आलीशान बंगला अब पंजाब के सुपर सीएम अरविंद केजरीवाल का है।

आखिर क्या है ‘शीशमहल’ विवाद?

‘शीशमहल विवाद’ की जड़ें असल में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दिल्ली स्थित सरकारी आवास (6, फ्लैग स्टाफ रोड) के रेनोवेशन पर हुए भारी-भरकम खर्च से जुड़ी हैं। विपक्ष ने उस समय यह गंभीर आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार ने इस सरकारी आवास के सौंदर्यीकरण और रेनोवेशन पर 45 करोड़ रुपए से भी अधिक की राशि खर्च की, जिसके चलते इस आवास को तंज कसते हुए ‘शीशमहल’ का नाम दिया गया।
यह विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। दिल्ली का वह पुराना आवास खाली होने के बाद, अब पंजाब सरकार द्वारा केजरीवाल को चंडीगढ़ में एक और आलीशान सरकारी बंगला दिए जाने के आरोपों ने एक नए विवाद को जन्म दिया है। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस नए बंगले को ‘शीशमहल 2.0’ का नाम दिया है, और यहीं से जुबानी जंग शुरू हुई है। यह पूरा मामला सिर्फ एक बंगले का नहीं है, बल्कि यह सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और सार्वजनिक जीवन में नैतिकता के मानकों पर बड़े सवाल खड़े करता है।

केजरीवाल के पूर्व साथी मुनीश रायजादा ने गाना बनाकर पोल खोल दी, देखिए वीडियो

 

प्रेषक श्री बी आर भट्ट 

ये मुनीश रायज़ादा हैं। अमेरिका के शिकागो में रहते हैं। Neonatologist यानी नवजात बच्चों के डॉक्टर हैं। लेकिन उनका एक और परिचय है। डॉक्टर रायजादा उन लोगों में से हैं जिन्होंने अन्ना आंदोलन के दौरान देश में बदलाव की उम्मीद देखकर अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था। अमेरिका में प्रैक्टिस के दौरान वो अपने पास आने वाले मरीजों को अन्ना आंदोलन के बारे में बताते और उन्हें चंदा देने के लिए प्रेरित करते। 2011 से 2013 तक डॉक्टर रायजादा ने अकेले दम पर इतने पैसे जुटाए, जितने शायद ही किसी और ने दिलवाए हों। उन्होंने आम आदमी पार्टी की एनआरआई विंग की स्थापना की। देश से प्रेम करने वाले किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह डॉक्टर रायजादा को भी उम्मीद थी कि उनकी ये छोटी सी कोशिश एक दिन देश में बड़े बदलाव में मददगार होगी। लेकिन वो तब बहुत हैरान हुए जब केजरीवाल ने सत्ता के लिए उसी कांग्रेस के साथ गठजोड़ कर लिया, जिससे लड़ाई के लिए आंदोलन शुरू हुआ था। बिहार चुनाव के बाद केजरीवाल ने जब लालू यादव के साथ मंच साझा किया तो रहा नहीं गया। डॉक्टर रायजादा ने अपने निजी ब्लॉग पर एक लेख लिखकर लालू यादव की आलोचना कर दी। केजरीवाल ने लालू की आलोचना को अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया।

कोई भी समझ सकता है कि जिस आदमी ने पिछले 3-4 साल से अपना सबकुछ एक आंदोलन को समर्पित कर रखा था उस पर क्या बीती होगी। डॉक्टर रायज़ादा भारत आए और उन्होंने अपने कुछ साथियों को लेकर चंदा बंद आंदोलन शुरू किया। जिस आदमी ने अमेरिका में रहते हुए अन्ना आंदोलन और फिर आम आदमी पार्टी को करोड़ों रुपये दिलवाए, वही दिल्ली में घूम घूमकर लोगों से अपील कर रहा था कि आम आदमी पार्टी को चंदा न दें। मुनीश रायज़ादा ने गीता ज्ञापन अभियान शुरू किया, जिसमें वो ख़ुद दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों को श्रीमद्भागवत गीता देते और अपील करते कि वो सच की लड़ाई लड़ें और केजरीवाल से चंदे का हिसाब देने को कहें। मज़ेदार बात यह थी कि मीडिया ने डॉक्टर मुनीश रायज़ादा के अभियान की कोई ख़बर नहीं दिखाई। एक बार एक अख़बार ने छोटी सी ख़बर छापी थी, तो उसके एडिटर के पास भी केजरीवाल का फ़ोन पहुँच गया था।

पिछले 5 साल में डॉक्टर रायज़ादा जब भी समय मिला देश में आकर लोगों को समझाते रहे कि अरविंद केजरीवाल किसी का सगा नहीं हो सकता। पता नहीं लोगों पर कितना असर पड़ा, लेकिन डॉक्टर रायज़ादा ने कभी हिम्मत नहीं हारी। वो सोशल मीडिया वग़ैरह के ज़रिए अपना काम करते रहे। पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद वो किसी पत्रकार से ज़्यादा और बेहतर लिखते हैं। एक साल पहले उन्होंने बताया कि मैं केजरीवाल के धोखे पर एक फ़िल्म बनाना चाहता हूँ। वो मुझसे भी कुछ मदद चाहते थे, लेकिन मैं उनके लिए कुछ कर नहीं पाया था। दो दिन पहले उन्होंने एक वीडियो का लिंक शेयर किया जिसमें एक गाना था। बताया कि वो वेब सीरीज़ बना रहे हैं, जिसका गाना रिलीज़ किया है। कैलाश खेर के गाये इस गाने के बोल हैं "झूठ बोलके छली गई तू... बोल रे दिल्ली बोल"। इसे गाना कहना ठीक नहीं है, ये मुनीश रायज़ादा के अंदर का दर्द है... उन सारे लोगों का दर्द है, जिन्होंने अन्ना आंदोलन से कोई भी उम्मीद लगाई थी... इन्हीं उम्मीदों के मलबे पर केजरीवाल पिछले पाँच साल से सत्ता की मलाई खा और खिला रहे हैं। लेकिन ऐसे रावण का अंत ज़रूरी है। नीचे उनके गाने का वीडियो शेयर किया है। हो सके तो इसे शेयर करें ताकि लोग जान सकें और मुफ़्तख़ोरी में डूबे दिल्लीवालों को धिक्कार सकें। शायद कुछ असर पड़े। 

दिल्ली शराब घोटाला : अब जल्दी सिसोदिया से केजरीवाल का मिलन होगा तिहाड़ में

सुभाष चन्द्र

जब से केजरीवाल सरकार का शराब घोटाला खुला और ED / CBI की जहां भी रेड हुई, केजरीवाल और उसके साथी एक ही गाना गाते रहे, किसी के यहां कुछ नहीं मिला, सब फर्जी केस बनाए जा रहे हैं। 

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना ने मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ED से पूछ लिया था कि आपको यदि सिसोदिया के पास से कोई रकम बरामद नहीं हुई तो Money Laundering का केस कैसे बनता है?

सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर केजरीवाल उछल पड़ा था और बोला था कि जज पूछते रहे पैसा कहां मिला, किसी के पास कोई जवाब नहीं था जी, फिर भी सबको झूठे मुकदमों में फंसा रखा है।  लेकिन उसी सुनवाई में जस्टिस खन्ना ने ED को यह भी पूछा था कि सरकार ने “आप” को आरोपी क्यों नहीं बनाया। 

सुप्रीम कोर्ट का सिसोदिया के घर से पैसा न मिलने का सवाल सुनकर केजरीवाल के दिमाग में फितूर पक्का हो गया था कि अब सारा केस ही ख़त्म हो जाएगा क्योंकि किसी के घर से तो पैसा मिलेगा ही नहीं। 

लेकिन घर से पैसा न मिलना ही सब कुछ ख़त्म नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए कहा है। 

"Legal questions have been answered in a limited way. In the analysis, there are certain aspects, which we said are doubtful. But one aspect, with regard to transfer of money, Rs 338 crores, is tentatively established. We have therefore dismissed the application for bail,"

सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे को fast track court में चला कर 6 से 8 महीने में पूरा करने के लिए कहा और यह भी कहा कि यदि 3 महीने में कोई विशेष प्रगति न हो तो सिसोदिया फिर से जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं। 

इस 338 करोड़ के लेनदेन ने केजरीवाल को चारों खाने चित कर दिया है, अब वह ये नहीं कह सकता कि पैसा मेरे घर में नहीं है या सिसोदिया और जैन या संजय सिंह के घर में नहीं है क्योंकि अदालत ने आगे और साफ़ शब्दों में कहा है कि “रूपए और धन के लेनदेन की कड़ियां साफ़ हैं” (यानी money trail साबित होती है) 

उसके पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने तो सिसोदिया की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए और सख्त लहजे में कहा था कि - “उनके खिलाफ आरोप काफी गंभीर हैं, मनीष का इस मामले में व्यवहार भी सही नहीं रहा है और वो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, इसके पास 18 विभाग रहे हैं, पूर्व उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए उनको अभी जमानत नहीं दी सकती है”। 

अब सिसोदिया के अलावा सत्येंद्र जैन बीमारी की वजह से 11 जुलाई से अंतरिम जमानत पर चल रहा है और 18 अक्टूबर को ये जमानत सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी थी। अब समय आ गया है, उसकी अंतरिम जमानत भी रद्द कर उसे वापस जेल भेजा जाए, संजय सिंह की न्यायिक हिरासत 10 नवंबर तक है लेकिन  सिसोदिया की जमानत ख़ारिज होते देख कर लगता है, उसकी भी जमानत नही अर्जी स्वीकार नहीं होगी। 

ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सरकार “आप” पार्टी को शराब घोटाले में आरोपी बनाने पर विचार कर रही है।  यह काम जल्दी ही होगा क्योंकि घोटाले का बचा खुचा पैसा 3 राज्यों के चुनावों में पेल सकती है “आप’।  एक बार पार्टी आरोपी बनी तो पार्टी संयोजक का नाम तो आपको पता ही है, वह कैसे बचेगा, उसका मिलन शीघ्र होगा सिसोदिया से तिहाड़ में।