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WHO की ‘इंटरनेशनल वॉर्निंग’: इबोला वायरस का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन बरपा रहा कहर, कांगो-युगांडा से लेकर केन्या तक अलर्ट

                                                                                                                             साभार - आज तक
कांगो में इबोला वायरस तेजी से कहर बरपा रहा है। यहाँ इस वायरस के चलते करीब 80 लोगों की मौत हुई है और इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सतर्क हो गया है। WHO ने इसे इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। हालाँकि, WHO का कहना है कि अभी यह महामारी की श्रेणी में नहीं है।

यह बीमारी बंडिबुग्यो स्ट्रेन से फैल रही है, जो बेहद खतरनाक मानी जाती है और शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है।

कांगो में सबसे ज्यादा असर, सैकड़ों केस सामने आए

कांगो के इतुरी प्रांत के बुनिया, रवामपारा और मोंगब्वालू जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहाँ करीब 80 संदिग्ध मौतें और 246 से ज्यादा संदिग्ध केस दर्ज किए गए हैं, जबकि 8 मामलों की लैब में पुष्टि हुई है। अफ्रीका CDC के अनुसार, कुल मौतों की संख्या 87 तक पहुँच गई है और संक्रमण अब समुदाय के भीतर फैल रहा है, जिससे रोकथाम मुश्किल हो रही है।

बुनीया में लोगों के बीच डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासी जीन मार्क असिम्वे ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से लगातार लोगों की मौत हो रही है। कई बार एक ही दिन में दो-तीन या उससे अधिक लोगों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रकोप एक नर्स के मामले से शुरू हुआ और धीरे-धीरे कई इलाकों में फैल गया। मोंगब्वालू में सक्रिय केस ज्यादा होने से ट्रैकिंग और इलाज की प्रक्रिया और कठिन हो गई है।

हालात तब और चुनौतीपूर्ण हो गए जब पड़ोसी देश युगांडा में भी एक मामला सामने आया, जहाँ संक्रमित व्यक्ति की मौत हो चुकी है। हालाँकि सरकारें और स्वास्थ्य एजेंसियाँ स्क्रीनिंग, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और निगरानी बढ़ाकर इसे रोकने की कोशिश कर रही हैं।

अफ्रीका की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यह बीमारी युगांडा और दक्षिण सूडान तक फैल सकती है। वहीं, क्षेत्र में लोगों की लगातार आवाजाही को देखते हुए केन्या ने भी सतर्कता बढ़ा दी है।

इथियोपिया से दिल्ली तक पहुँची ‘काँच वाली’ राख: 12000 साल बाद फटा ज्वालामुखी: फ्लाइट्स के लिए बनी संकट, माना जा रहा ‘साइलेंट किलर’

               अफ्रीका के इथियोपिया में हायली गुब्बी ज्वालामुखी फटा, प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार : Grok)

अफ्रीका के इथियोपिया में एक बड़ा ज्वालामुखी फटा है। इस ज्वालामुखी का नाम है हायली गुब्बी। यह ज्वालामुखी करीब 10 से 12 हजार साल बाद फटा है। विस्फोट के बाद राख का एक बड़ा बादल उठा। यह राख लगभग 4000 किलोमीटर दूर भारत तक आ गया है।

राख का यह बादल 130 किलोमीटर प्रति घंटे की बहुत तेज रफ्तार से आया। यह लाल सागर और अरब सागर को पार करते हुए आया। सोमवार (24 नवंबर 2025) रात करीब 11 बजे यह राख दिल्ली पहुँचा। सबसे पहले यह पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर के ऊपर देखी गई। इसके बाद यह दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के बड़े हिस्सों में फैल गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह राख जमीन से 25,000 से 45,000 फीट की बहुत ऊँचाई पर है। इसलिए, अभी लोगों की सेहत को खास खतरा नहीं है। लेकिन इस राख से हवाई उड़ानों पर असर पड़ा है। अकासा एयर, इंडिगो और KLM जैसी कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं या उनके रास्ते बदल दिए हैं। भारत सरकार के विमानन नियामक DGCA ने सभी एयरलाइंस को चेतावनी दी है। उन्हें राख वाले खतरनाक इलाकों से दूर रहने को कहा गया है।

इथियोपिया में ज्वालामुखी कैसे फटा और राख इतनी दूर कैसे पहुँची?

राख बादल ने सबसे पहले राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर के आसमान को ढका, फिर धीरे-धीरे दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की ओर बढ़ गया। क्योंकि यह राख जमीन से लगभग 25,000 से 45,000 फीट की ऊँचाई पर थी, इसलिए लोगों को यह सीधे दिखाई नहीं दी, लेकिन इसके असर ने हवा को भारी और जहरीली बना दिया।

दिल्ली के आनंद विहार में AQI 400 के ऊपर चला गया और यह ‘सीवियर’ श्रेणी में पहुँच गया। एम्स और सफदरजंग के आसपास भी घना जहरीला स्मॉग दिखाई दिया। हवा में चुभन, सांस लेने में भारीपन और आँखों में जलन महसूस होने लगी। यह स्थिति स्थानीय प्रदूषण और ज्वालामुखी राख के ऊपरी परत में मिलने से बनी।

सुबह का सूरज सामान्य से ज्यादा लाल और चमकीला दिखा क्योंकि राख के सूक्ष्म कण रोशनी को अलग तरह से मोड़ते हैं। इस तरह का दृश्य बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों के बाद आम होता है।

उड़ानों पर असर क्यों पड़ा और क्या खतरा है?

ज्वालामुखी राख विमान के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। राख दिखती भले धूल जैसी हो, लेकिन असल में यह बारीक कांच और जली चट्टानों के कण होते हैं। ये गर्म इंजन में जाते ही पिघलकर कांच जैसी परत बना देते हैं, जिससे इंजन बंद हो सकता है। इसके अलावा राख विंडशील्ड को धुंधला कर देती है, सेंसर खराब कर सकती है और पंखों की सतह पर चिपककर विमान की लिफ्ट भी प्रभावित कर सकती है।

1982 में ब्रिटिश एयरवेज की एक फ्लाइट ऐसे ही राख के कारण चारों इंजन फेल होने के बाद 25,000 फीट नीचे गिर गई थी, हालांकि बाद में पायलट इंजन को दोबारा स्टार्ट करने में कामयाब रहे थे।

यही कारण है कि अकासा एयर, इंडिगो, KLM और कई एयरलाइंस को उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। कुछ उड़ानों को बीच में डायवर्ट किया गया। DGCA ने तत्काल एडवाइजरी जारी करके एयरलाइंस को राख वाले क्षेत्रों से बचकर उड़ान भरने और पोस्ट-फ्लाइट इंजन जाँच अनिवार्य करने को कहा। एयर इंडिया और इंडिगो ने भी यात्रियों को सतर्क करते हुए कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

क्या राख भारत में जमीन पर गिरेगी और सेहत को कितना खतरा है?

अच्छी बात यह है कि राख अभी ऊपरी वायुमंडल में है। जमीन पर यह भारी मात्रा में गिरने की संभावना बहुत कम है। मौसम विभाग ने कहा है कि कुछ इलाकों में हल्की परत दिख सकती है, लेकिन फिलहाल इसका सीधा खतरा मामूली है। हालाँकि, हवा की गुणवत्ता पहले से खराब होने के कारण दिल्ली-NCR में स्मॉग और भारी हो गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन लोगों को अस्थमा, सीओपीडी, दिल की बीमारी या एलर्जी की समस्या है, उन्हें ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए। आँखों में जलन, गले में खराश, सांस फूलना और सिरदर्द जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं।

क्या आगे भी खतरा हो सकता है?

यह पूरा राख का गुबार हवा के साथ पूर्व की ओर खिसकता रहेगा और धीरे-धीरे बंटकर खत्म हो जाएगा। अगर ज्वालामुखी में दूसरा बड़ा विस्फोट होता है या राख की ऊँचाई और बढ़ती है, तो उड़ानों पर असर लंबे समय तक रह सकता है। मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं।

राख का वैज्ञानिक असर: आखिर यह हवा और मौसम को कैसे बदलती है?

ज्वालामुखी राख सूर्य की रोशनी को रोकती है, इसलिए जिस क्षेत्र में यह पहुँचती है, वहाँ अस्थायी रूप से धुंध जैसा माहौल बन जाता है। बड़े विस्फोटों में तापमान तक गिर सकता है, हालाँकि इस बार ऐसा असर नहीं दिखेगा क्योंकि राख की मात्रा बहुत बड़ी वैश्विक स्तर की नहीं है।

राख में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड गैस बाद में सल्फेट एयरोसोल बनाती है, जो हवा की गुणवत्ता खराब कर सकते हैं। UP के तराई इलाके और नेपाल के ऊपर इन गैसों का असर थोड़ा बढ़ सकता है क्योंकि राख वाले बादल हिमालय से टकराकर दिशा बदलेंगे।

कैसे करें बचाव और क्या है लोगों के लिए जरूरी सलाह?

अगर हवा में चुभन या भारीपन महसूस हो तो सुबह बाहर निकलने से बचें। N-95 मास्क मददगार है क्योंकि यह सूक्ष्म कणों को फिल्टर करता है। आँखों में जलन हो तो साफ पानी से धोएँ और बच्चों या बुजुर्गों को अनावश्यक यात्रा से बचाएँ। हवाई यात्रा करने वाले लोग उड़ानों की स्थिति लगातार चेक करते रहें क्योंकि रूट बदलने या देरी होने की संभावना बनी रहेगी।

ज्वालामुखी दूर, असर पास तक आया

इथियोपिया के ज्वालामुखी में हुआ विस्फोट भले अफ्रीका में हुआ हो, लेकिन उसकी राख भारत के आसमान तक पहुँचकर यह दिखा चुकी है कि प्रकृति की घटनाएँ सीमाओं की मोहताज नहीं होतीं। दिल्ली-NCR में स्मॉग बढ़ा, कई उड़ानें बाधित हुईं और मौसम का रंग बदल गया। फिलहाल खतरा गंभीर नहीं है, लेकिन निगरानी और सावधानी जरूरी है, क्योंकि ऐसी राख हवा और उड़ानों पर बड़ा असर डाल सकती है।

जिन rare earth minerals को लेकर चीन दुनिया को सता रहा, उन्हीं पर मोदी ने की घाना से डील: दोनों देश मिलकर करेंगे खनन, UPI पर भी हुआ MoU

              पीएम मोदी और घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ( फोटो साभार- X @narendramodi)
जिस प्रगति पर भारत 2014 के बाद चला है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए कीर्तिमान स्थापित कर देश की दिशा और दशा ही बदलकर सबको चकाचौंध कर दिया है। जबकि विपक्ष मोदी को सत्ता से हटाने भारत विरोधी ताकतों के हाथ कठपुतली बन जनता में सुरमा भोपाली बन पागल बना रहा है। 2014 से पहले देश के इतनी प्रगति नहीं करने का मुख्य कारण था भ्रष्टाचार। राफेल पर कितना शोर मचाया जा रहा है, क्योकि इस राफेल पर कमीशन नहीं मिलने की वजह से आगे सौदा नहीं हो पाया था। आटे में नमक खा लिया जाता है लेकिन नमक में आटा नहीं।  

प्रधानमंत्री मोदी पाँच देशों की ऐतिहासिक दौरे पर हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने घाना से की है। पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ये पहली घाना यात्रा है। पीएम ने यहाँ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें रेयर अर्थ मिनरल्स और माइनिंग से जुड़ा समझौता भी शामिल है।

ये समझौता ऐसे समय हुआ है जब अवैध सोने के खनन को लेकर चीन और घाना आमने-सामने हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति जॉन ड्रमानी महामा की रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन को लेकर सहमति भी बनी है। ये भारत के लिए काफी अहम है क्योंकि चीन ने रेयर मैग्नेट के निर्यात पर लगाम लगा दिया है। चीन में रेयर अर्थ मिनरल्स काफी हैं जिसका भारत में भी निर्यात होता है।

इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माण में किया जाता है। चीन के फैसले की वजह से भारत को धक्का लगा है। भारत ने इसका करारा जवाब देते हुए अफ्रीकन देश से रेयर अर्थ मिनरल्स पर समझौता कर चीन के एकाधिकार को चुनौती देने की शुरुआत कर दी है।

इसके अलावा भारत और घाना द्विपक्षीय संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ कहा है यानी संबंधों में नए आयाम जुड़ने वाले हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति महामा के बीच चार अहम समझौते हुए हैं। ये संस्कृति, पारंपरिक चिकित्सा, खनिज संसाधन और रक्षा सहयोग को लेकर है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत अब केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि घाना की राष्ट्र-निर्माण यात्रा में एक सहयात्री है.’

पीएम के बयान से भारत की अफ्रीका नीति की स्पष्टता साफ झलकती है। घाना के साथ भारत अगले 5 सालों में व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। भारतीय कंपनियों ने अब तक घाना में 17138 करोड़ रुपए का निवेश किया है। पीएम ने कहा है कि भारत घाना के साथ फिनटेक सेक्टर में सहयोग करने जा रहा है। यूपीआई डिजिटल भुगतान सिस्टम को भी साझा करने जा रहा है।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत घाना के साथ रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज में मदद करेगा। दरअसल रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर पूरी दुनिया में घमासान मचा हुआ है। चीन के एकाधिकार और मनमाने रवैये का असर भारत के ऑटो सेक्टर और डिफेंस पर पड़ सकता है इसलिए पीएम ने अफ्रीका से चीन को संदेश दिया है।

इससे पहले घाना ने पहलगाम आतंकी हमले का कड़ा विरोध किया था और भारत के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया था। पीएम मोदी और राष्ट्रपति राष्ट्रपति जॉन ड्रमानी ने बैठक के दौरान यूरोप और पश्चिम एशिया में चल रहे जंग पर चिंता जताई और संवाद के जरिए कूटनीतिक प्रयास से समस्या के समाधान पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी 2 जुलाई से 9 जुलाई के बीच त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया भी जाने वाले हैं। घाना में उन्हें ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से भी सम्मानित किया गया और घाना के बच्चों ने ‘हरे राम हरे कृष्ण’ का मंत्रोच्चार कर स्वागत किया गया।

अवलोकन करें:-

21 तोपों की सलामी के साथ पीएम नरेंद्र मोदी को मिला ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार’ सम्मान: घाना में ‘हरे राम हर
21 तोपों की सलामी के साथ पीएम नरेंद्र मोदी को मिला ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार’ सम्मान: घाना में ‘हरे राम हर
 

पीएम मोदी का घाना में शानदार स्वागत हुआ। घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। पीएम मोदी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर‘ मिला। 21 तोपों की सलामी भी दी गई। पीएम मोदी की घाना की पहली सरकारी यात्रा थी। वह घाना जाने वाले तीसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी गए थे।

मोरक्को : घोषित ‘इस्लामी मुल्क’ में बकरीद पर पशुओं की नहीं होगी कुर्बानी: सुल्तान मोहम्मद VI ने क्यों लगाया है प्रतिबंध?

                  बकरीद पर मोरक्को में नहीं दी जाएगी कुर्बानी ( फोटो साभार moroccoworldnews.com)
अफ्रीका के इस्लामी मुल्क मोरक्को में बकरीद पर कुर्बानी पर रोक लगा दी गई है। मोरक्को में 99 फीसदी मुस्लिम आबादी है इसके बावजूद ये फैसला किंग मोहम्मद VI ने लिया है। इस रोक की दुनियाभर में चर्चे हैं। मोरक्को ने अपना पशु बाजार बंद कर दिया है। किंग ने अपने आदेश में बकरे समेत किसी भी पशु की कुर्बानी नहीं देने का आदेश दिया है। इस आदेश को लागू कर दिया गया है।

क्यों लगाई गई पशु की कुर्बानी पर रोक?

किंग मोहम्मद VI ने रोक के पीछे आर्थिक और पर्यावरण संकट की बात कही है। देश में पिछले 7 साल से गंभीर सूखा पड़ा हुआ है। फसलों की पैदावार नहीं हो पा रही है। पशुओं को चारे और पानी की किल्लत हो रही है। इसकी वजह से पशुओं की संख्या में 33 फीसदी की कमी आई है। वहीं चारे की कीमत 50 फीसदी बढ़ गए हैं। इसका असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ा है। इसके अलावा माँस की कीमत में इजाफा हुआ है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ‘कुर्बानी’ की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है।

किंग मोहम्मद VI मोरक्को के मजहबी प्रमुख भी हैं। उनका कहना है कि इस साल बदहाली की स्थिति है ऐसे में बकरीद पर कुर्बानी नहीं देना इस्लाम के सिद्धांतों के अनुरूप है। किंग के मुताबिक इस्लाम में कुर्बानी को अच्छा माना गया है लेकिन ये अनिवार्य नहीं है। इसलिए ‘प्रतिकात्मक कुर्बानी’ भी दी जा सकती है।

पशुओं की खरीद-बिक्री बंद

पशुओं की खरीद-बिक्री को रोकने के लिए पशु बाजारों और मंडियों को बंद कर दिया गया है। देशभर के गवर्नरों और स्थानीय प्रशासन को इसे सख्ती से लागू करने के आदेश दिये गये हैं। बकरीद से पहले आम तौर पर जिन बाजारों में जबरदस्त भीड़भाड़ होती थी और पशुओं की खरीद बिक्री होती थी वहाँ अब शांति छाई हुई है।

मोरक्को का ये कदम दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए उदाहरण है। किंग ने इस साल की शुरुआत में ही मोरक्को की जनता से पारंपरिक बलि से दूर रहने की अपील की थी, ताकि माँस की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाया जा सके और पशुधन की वृद्धि हो।

ऑस्ट्रेलिया से मँगाई जा रही 1 लाख भेड़ें

मोरक्को ने माँस और पशुओं के आयात पर टैक्स में कटौती की है। मोरक्को अब ऑस्ट्रेलिया से 1 लाख भेड़ों का आयात करने जा रहा है। ऐसा देश में माँस की कमी को दूर करने के लिए किया जा रहा है। मोरक्को सरकार ने 6.2 बिलियन दिरहम यानी ₹ 532.66 करोड़ का कार्यक्रम शुरू किया है।

इसका मकसद पशुपालकों को आर्थिक सहायता मुहैया करना और पशुओं की वृद्धि करना है। पशुओं के लगातार कटने से उनकी संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। किंग के इस फैसले का आम तौर पर लोगों ने स्वागत किया है लेकिन कई कट्टरपंथी संगठनों ने इसे मजहबी मामलों में दखल बताया है।

युगांडा : एक दिन में 7 निकाह, 100 बच्चे पैदा करने के लिए खोज रहा और बीवी: अब्बा की 4, दादा की 5, परदादा की थी 6 बीवियाँ

                         बीवियों के साथ हबीब नसिकोनेने (फोटो साभार: FB/ Caleb Canaan)
अफ्रीकी देश युगांडा में रहने वाले हबीब एनसिकोनेने नामक व्यक्ति ने एक दिन में 7 महिलाओं से निकाह करके सनसनी मची दी है। 43 साल की उम्र पार कर चुके हबीब ने कहा है कि वह आगे और भी निकाह करेगा। उसका लक्ष्य 100 बच्चे पैदा करना है। हबीब के गाँव वालों का कहना है कि 7 शादियों के चलते उनके गाँव का नाम रोशन हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हबीब ने ये सभी निकाह 10 सितंबर को की है। वह इस निकाह से बहुत खुश है। हबीब का कहना है कि उसके परिवार में बहुत कम लोग हैं। इसलिए वह कई बच्चे पैदा कर अपने परिवार को बड़ा करना चाहता है। उसने आगे कहा कि वह अब भी जवान है और अल्लाह ने चाहा तो वह आगे और निकाह करेगा।

हबीब पेशे से बिजनेसमैन और पारंपरिक चिकित्सक हैं। निकाह की तैयारियों के दौरान हबीब ने अपनी होने वाली सभी बीवियों को नई कारें और उनके अम्मी-अब्बू को कई गिफ्ट दिए। इनमें से दो बीवियों आपस में सगी बहनें हैं। उनके माता-पिता को गिफ्ट में मोटरसाइकिल दी। निकाह के कार्यक्रम में 40 बड़ी कारों और 30 मोटरसाइकिलों के साथ सातों लड़कियाँ पहुँची थीं।

 दिलचस्प बात यह है कि यह हबीब की पहली शादी नहीं है। 7 साल पहले उसने मुसानियुसा नामक लड़की से शादी की थी। इस कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि उसे भरोसा नहीं हो रहा है कि कोई 7 शादियाँ कर रहा है। वह पहली बार इस तरह का कार्यक्रम देख रहा है। वहीं इस दौरान हबीब ने कहा कि उसकी बीवियाँ एक-दूसरे से ईर्ष्या नहीं रखती हैं।

युगांडा में बहुविवाह की प्रथा है। हबीब के पिता हज अब्दुल सेमकुला ने कहा, “मेरे दादा ने 6 निकाह किए थे। मेरे अब्बू ने 5 निकाह थे और मेरी खुद की 4 बीवियाँ हैं, जो एक ही घर में रहती हैं।” ऐसा कहा जा रहा है कि हबीब नसिकोनेने ने एक साथ 7 शादियाँ कर युगांडा में नया रिकॉर्ड बनाया है।

संसद में चर्चा के दौरान मुस्लिम नेता का जिक्र, सफेद टोपी वाले सांसद ने गर्भवती महिला MP के पेट पर मारी लात: हुई जेल

                     संसद में गर्भवती सांसद के पेट पर मारी लात (फोटो साभार: Sputnik News)
पश्चिमी अफ्रीकी देश सेनेगल में गर्भवती महिला सांसद के साथ हाथापाई करने और पेट में लात मारने के आरोप में दो सांसदों को 6 महीने की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, दोषी सांसदों को सरकारी खजाने में जुर्माना और पीड़ित सांसद को मुआवजा भी देना होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 दिसंबर 2022 को सेनेगल की संसद में न्याय मंत्रालय के बजट पर बहस चल रही थी। इसी दौरान विपक्षी सांसदों ममदौ नियांग और मसाटा सांब ने सत्ताधारी पार्टी की महिला सांसद एमी नदिये के साथ हाथापाई। जवाब में जब नदिये ने कुर्सी फेंकी तो सफेद टोपी में दिख रहे सांसद ने उनके पेट पर लात मार दी। आप नीचे इसका वीडियो देख सकते हैं। नियांग और सांब चर्चा के दौरान एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता की चर्चा से नाराज थे। यह मुस्लिम नेता संसद के सदस्य नहीं है, लेकिन विपक्ष के समर्थक हैं।

संसद में गर्भवती महिला सांसद के साथ हुई इस घटना की हर तरफ निंदा हुई थी। वीडियो सामने आने के बाद लोग महिलाओं अधिकारों के बारे में भी बात कर रहे थे। अब नियांग और साब को नदिए को 8100 डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

संसद सत्र के दौरानगर्भवती महिला सांसद पर हुए इस हमले की सुनवाई 19 दिसंबर 2022 से शुरू हुई थी। अब सांसदों को दोषी ठहराते हुए 6 महीने की सजा सुनाई गई है। सजा के अलावा दोनों सांसदों को 1 लाख सीएफए फ्रैंक (करीब 13400 रुपए) बतौर जुर्माना और 5 मिलियन सीएफए फ्रैंक (करीब 673400 रुपए) बतौर मुआवजा भरना पड़ेगा।

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरी दुनिया में सांसदों के इस कृत्य की आलोचना हो रही है। लोग इसे महिलाओं की सुरक्षा से लेकर घरेलू हिंसा तक से जोड़ कर देख रहे हैं।

मारपीट होने के बाद एमी नदिये बेहोश हो गईं थीं। उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। नदिये के वकील बाबूकर सिसे का कहना है कि वह गर्भवती थीं और उन्हें इस बात का डर था कि वह अपने बच्चे को खो सकती हैं। उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई है। लेकिन अब भी वह बेहद कठिन स्थिति से गुजर रहीं हैं। एक ओर जहाँ घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वहीं, दोषी ठहराए गए सांसदों के वकीलों ने कोर्ट में कहा था कि दोनों सांसदों ने महिला पर हमला नहीं किया था।