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पाकिस्तान की Beauty Cream, भारत में महिलाओं को फैला रही किडनी की गंभीर बीमारी: जानें- क्या है महाराष्ट्र का ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ विवाद और किन देशों में लग चुका है बैन

           पाकिस्तान की गोरा करने वाली क्रीम से महिलाओं की किडनी हुई खराब (फोटो साभार : ChatGPT)
हर कोई खूबसूरत और गोरा दिखना चाहता है। इसी चाहत में लोग अक्सर बिना सोचे-समझे बाजार में मिलने वाली कोई भी ब्यूटी क्रीम चेहरे पर लगाने लगते हैं। लेकिन कभी-कभी गोरा होने का यही शौक जिंदगी पर भारी पड़ जाता है। हाल ही में भारत में एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया। पाकिस्तान में बनी एक मशहूर ब्यूटी क्रीम को लगाने से भारत की कई महिलाओं की सेहत पूरी तरह बिगड़ गई। इस क्रीम ने न सिर्फ महिलाओं के चेहरे को खराब किया, बल्कि सीधे उनकी किडनी पर इतना बुरा असर डाला कि वे गंभीर रूप से बीमार हो गईं।

इस पूरे हंगामे की वजह पाकिस्तान की ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ (Goree Beauty Cream) है। इस क्रीम को लेकर दावा किया जाता था कि इसे लगाने से चेहरा तुरंत गोरा हो जाता है, लेकिन अब इसके पीछे का जहरीला सच सबके सामने आ चुका है। महाराष्ट्र के नागपुर में जब कई महिलाओं ने इस क्रीम को लगाया, तो उन्हें सेहत से जुड़ी गंभीर समस्याएँ होने लगीं। जब इसकी शिकायतें डॉक्टरों और सरकार तक पहुँचीं, तो जाँच टीमें तुरंत अलर्ट हो गईं। लैब में इस क्रीम की बारीकी से जाँच की गई, जिसमें खतरनाक केमिकल मिले। इसके बाद भारत सरकार और महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सच का पता लगाकर इस क्रीम को भारत में पूरी तरह बैन कर दिया है।

नागपुर से हुई जहरीले सच की शुरुआत

यह मामला तब सामने आया जब महाराष्ट्र के नागपुर में कई महिलाओं की तबीयत अचानक खराब होने लगी। जब वे डॉक्टरों के पास पहुँचे, तो पता चला कि ये सभी महिलाएँ पिछले दो साल से गोरा होने के लिए एक ही ब्रांड की क्रीम लगा रही थीं। जाँच में सामने आया कि इस क्रीम की वजह से उनकी किडनी खराब हो चुकी थी और उनके शरीर में खतरनाक जहर फैल गया था।

डॉक्टरों ने जब गहराई से जाँच की, तो मालूम पड़ा कि ये सभी 18 महिलाएँ इंटरनेट और सोशल मीडिया से खरीदकर ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ (जो पाकिस्तान की है) इस्तेमाल कर रही थीं। यह बात पता चलते ही डॉक्टरों ने तुरंत इसकी जानकारी स्वास्थ्य अधिकारियों और प्रशासन को दी। इसके बाद सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए बाजार से इस क्रीम को जब्त कर लिया और जांच के लिए लैब में भेज दिया ताकि पता चल सके कि इसमें कौन से खतरनाक केमिकल मिलाए गए हैं।

प्रयोगशाला की जाँच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जब महाराष्ट्र के सरकारी विभाग (FDA) ने इस ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ की लैब में जाँच की, तो नतीजे बहुत डराने वाले थे। जाँच में पता चला कि इस क्रीम में पारा (Mercury) और शीशा (Lead) जैसे बेहद खतरनाक और जहरीले केमिकल मिले हुए थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इसमें पारे (Mercury) की मात्रा तय कानूनी सीमा से 752 गुना ज्यादा थी।

डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के मुताबिक, कंपनियाँ इस पारे का इस्तेमाल इसलिए करती हैं ताकि त्वचा का रंग बहुत जल्दी गोरा और साफ दिखने लगे। लेकिन यह गोरापन कोई असली निखार नहीं होता, बल्कि केमिकल्स के कारण त्वचा को पहुँचने वाला नुकसान होता है। यह खतरनाक पारा स्किन के छोटे-छोटे छेदों (रोमछिद्रों) के रास्ते बहुत आसानी से शरीर के अंदर चला जाता है और धीरे-धीरे अंदरूनी अंगों को खराब करने लगता है।

किडनी पर सीधा हमला और ‘मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी’ का खतरा

रोज इस प्रतिबंधित (बैन) क्रीम को लगाने की वजह से महिलाओं के शरीर में यह खतरनाक पारा जमा होता गया, जिसने सीधे उनकी किडनी को नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि त्वचा के रास्ते शरीर में पहुँचा यह जहर अंदरूनी अंगों को खराब करता है और शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत (इम्यून सिस्टम) को बिगाड़ देता है। इससे किडनी पूरी तरह काम करना बंद कर सकती है, जिसका इलाज बहुत मुश्किल और महँगा होता है।

मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, ऐसे ज्यादा पारे वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से किडनी की एक गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी में किडनी का फिल्टर करने वाला हिस्सा खराब हो जाता है, जिससे शरीर का जरूरी प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर बहने लगता है। नागपुर की पीड़ित महिलाओं में भी ठीक यही बीमारी और लक्षण पाए गए, जो लंबे समय तक इस जहरीली क्रीम को लगाने की वजह से हुए थे।

भारतीय प्रशासनिक तंत्र और सरकार का कड़ा एक्शन

इस बड़े खतरे को देखते हुए भारत सरकार और महाराष्ट्र के विभाग (FDA) ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया है। प्रशासन ने ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ के साथ दो और खराब ब्यूटी प्रोडक्ट्स- ‘फेस फ्रेश गोल्ड’ (क्रीम और सीरम) और ‘कॉस्मेटिक गोल्डन स्टार ब्यूटी क्रीम’ को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया है। अब इन पर पूरी तरह बैन लगा दी गई है और लोगों से अपील की गई है कि वे इन्हें भूलकर भी न खरीदें।

इसके साथ ही, पूरे महाराष्ट्र में नकली और खराब कॉस्मेटिक्स बेचने वालों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया गया है। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की देखरेख में सिर्फ जून के महीने में ही 34 जगहों पर छापे मारे गए। इस कार्रवाई में 4 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकली दवाएँ और खतरनाक ब्यूटी प्रोडक्ट्स जब्त किए गए हैं। साथ ही, नियम तोड़ने वाले दुकानदारों के खिलाफ 9 FIR दर्ज की गई हैं और दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

नियमों का सरेआम उल्लंघन और मुंबई में क्रिमिनल केस

जाँच करने वाले अधिकारियों को पता चला कि इन पाकिस्तानी क्रीमों के पैकेट पर कानून के मुताबिक कोई भी जरूरी जानकारी नहीं लिखी थी। पैकेट पर न तो बनाने वाली कंपनी का नाम-पता था, और न ही यह लिखा था कि क्रीम कब बनी है और कब खराब (Expire) होगी। यह पूरी तरह से कानून का उल्लंघन था, जिससे ग्राहकों को धोखे में रखकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा था।

इसी बीच, मुंबई पुलिस ने चेंबूर इलाके के एक दुकानदार पर केस दर्ज किया है। इस दुकानदार पर आरोप है कि पाकिस्तान से सामान मँगाने पर रोक होने के बावजूद, वह छिपकर यह खतरनाक ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ बेच रहा था। अब पुलिस और एजेंसियाँ इस बात की गहराई से जाँच कर रही हैं कि रोक होने के बाद भी यह प्रतिबंधित क्रीम भारतीय बाजारों और दुकानों तक किस रास्ते से पहुँच रही थी।

ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के जरिए भारत में एंट्री

इस मामले में एक और बड़ी चिंता की बात यह है कि रोक होने के बाद भी यह पाकिस्तानी क्रीम लोगों के घरों तक कैसे पहुँची। जाँच में पता चला कि इसे बेचने के लिए इंस्टाग्राम पेजों, रील्स और इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा था। यहाँ तक कि मीशो (Meesho) जैसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर भी कुछ बाहरी दुकानदारों (थर्ड-पार्टी सेलर्स) द्वारा यह खतरनाक क्रीम धड़ल्ले से बेची जा रही थी, जहाँ से आम महिलाओं ने इसे आसानी से ऑनलाइन ऑर्डर कर दिया।

सोशल मीडिया पर इसके विज्ञापनों और झूठे दावों को देखकर सीधी-सादी महिलाएँ इसके जाल में फँस गईं और इसे चेहरे के लिए बहुत अच्छा मान बैठीं। इंटरनेट पर इस क्रीम से बहुत जल्दी गोरा होने का झूठा प्रचार किया गया था, जिसे देखकर लोगों ने इसे खरीदा। अब सरकार ने सभी ऑनलाइन वेबसाइटों और छोटे-बड़े दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी है कि वे इस क्रीम को तुरंत बेचना बंद कर दें, वरना उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लग चुके हैं इस क्रीम पर प्रतिबंध

इस पाकिस्तानी क्रीम का यह सच सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सामने आ चुका है। यह ब्रांड विदेशों में भी अपनी बदनामी के लिए जाना जाता है। साल 2021 में न्यूजीलैंड की सरकारी दवा संस्था ने अपने लोगों को चेतावनी देते हुए इस क्रीम को लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी, क्योंकि वहाँ की लैब जाँच में भी इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में जहरीला पारा और शीशा पाया गया था।

इसके बाद, साल 2025 में फिलीपींस सरकार ने भी इस क्रीम के सभी प्रोडक्ट्स को सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए चेतावनी जारी की थी। फिलीपींस सरकार का कहना था कि इस क्रीम को देश में बेचने की कोई कानूनी मंजूरी नहीं थी। दुनिया भर में बार-बार बैन होने के बाद भी, यह पाकिस्तानी ब्रांड तस्करी और इंटरनेट के गलत रास्तों के जरिए दुनिया के बाजारों में छिपकर बिकने की कोशिश कर रहा है।

सोशल मीडिया पर दिखा भारी आक्रोश और जनता का रिएक्शन

इस खुलासे के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लोग बहुत गुस्से में हैं और इस पर बड़ी बहस छिड़ गई है। इस मामले को सबसे पहले ‘X’ (ट्विटर) पर चिराग बरजात्या नाम के एक व्यक्ति ने पोस्ट शेयर करके सामने लाया था, जिसके बाद यह खबर तेजी से फैल गई। इस पोस्ट को देखकर हजारों लोगों ने गुस्सा जताया और इसे भारतीयों के खिलाफ एक तरह का ‘केमिकल हमला’ (केमिकल टेररिज्म) कहा।

लोग न सिर्फ इस पाकिस्तानी क्रीम को कोस रहे हैं, बल्कि भारत की ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर भी सवाल उठा रहे हैं कि उन्होंने बिना जाँच-पड़ताल के इसे अपनी साइट पर कैसे बिकने दिया। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन वेबसाइट्स को कोई भी विदेशी सामान बेचने से पहले उसकी सरकारी मंजूरी और लैब रिपोर्ट जरूर चेक करनी चाहिए। इसके साथ ही, लोग इंटरनेट पर अभियान चलाकर अपील कर रहे हैं कि अपने रिश्तेदारों और घर के काम करने वाले सहायकों को इसके बारे में सावधान करें, और अगर किसी के पास भी यह क्रीम दिखे, तो उसे तुरंत कचरे के डिब्बे में फेंक दें।

गोरेपन का जानलेवा भ्रम और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

पाकिस्तानी क्रीम का यह मामला दिखाता है कि गोरा होने की चाहत, टीवी-इंटरनेट के झूठे विज्ञापन और हमारी आज की आदतें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। कुछ ही दिनों में गोरा करने का दावा करने वाली ये क्रीम असल में खूबसूरती बढ़ाने की चीज नहीं, बल्कि बोतलों में बंद धीमा जहर हैं, जो धीरे-धीरे हमारे शरीर के अंगों को खराब कर रही हैं। इस घटना से साफ है कि बिना डॉक्टर की सलाह या बिना सरकारी मंजूरी के इंटरनेट से कोई भी क्रीम या कॉस्मेटिक खरीदना जानलेवा हो सकता है।

अब समय आ गया है कि हम सिर्फ सरकार या पुलिस के भरोसे न बैठें, बल्कि खुद भी सोचें। हमें यह समझना होगा कि जैसा हमारा प्राकृतिक रंग है, वही सबसे अच्छा और सेहतमंद है। गोरा होने की अंधी दौड़ में पड़कर अपनी जान जोखिम में डालना बहुत बड़ी बेवकूफी है। सरकार का इस क्रीम को बैन करना और छापे मारना बहुत अच्छा कदम है, लेकिन यह समस्या तभी पूरी तरह खत्म होगी जब हम खुद समझदार बनेंगे, झूठे विज्ञापनों के बहकावे में नहीं आएँगे और चोरी-छिपे आने वाले ऐसे जहरीले विदेशी सामानों को पूरी तरह ना कह देंगे।

क्या दूध भी नॉन-वेज होता है? भारत ने खरीदने से किया इनकार: अमेरिका के साथ क्यों नहीं बन रही बात, ट्रेड डील पर पड़ेगा क्या असर

                                        अमेरिका में गायों की डेयरी फर्म (फाइल फोटो, साभार - रॉयटर्स)
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुँच गया है, लेकिन ऐन मौके पर एक अनचाही समस्या सामने आ गई है। ये है मांसाहारी दूध, जो सौदे की राह में अड़चन बनकर उभरा है।

भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात को यह कह कर खारिज कर दिया है कि उनमें ऐसी गायों का दूध होता है जिन्हें मांसाहारी या पशुओं के अवशेष युक्त आहार खिलाया जाता है। ये भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध है।

नॉन-वेज दूध क्या है?

मांसाहारी दूध से का मतलब उन गायों का दूध और डेयरी उत्पाद है, जिन्हें माँस, खून या चर्बी जैसे पशु-आधारित चारे खिलाए जाते हैं। 2004 में प्रकाशित हुई सिएटल पोस्ट-इंटेलिजेंसर की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में गायों को ऐसा चारा दिया जा सकता है, जिसमें सूअर, मछली, मुर्गी, घोड़े, यहाँ तक कि बिल्ली और कुत्ते के अंग भी शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा, उन्हें सूअर और घोड़े का खून और मवेशियों के अंगों से बनी चर्बी भी खिलाई जा सकती है। हालाँकि गायें स्वभाव से शाकाहारी होती हैं, फिर भी अमेरिकी नियमों के अनुसार, उन्हें जानवरों से बनी चीजें खिलाने की अनुमति होती है। चाहे वे मांस के लिए पाली जा रही हों या दूध के लिए।

भारत में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। यहाँ गायों को पौधों पर आधारित आहार ही दिया जाता है और जानवरों या मांस से बनी कोई चीज नहीं खिलाई जाती। इसी वजह से भारत ने अमेरिका से डेयरी उत्पादों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

भारत का इनकार: धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ

वर्ल्ड एटलस की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लगभग 38% जनसंख्या शाकाहारी है। यहाँ दूध और घी को पवित्र माना जाता है। ये हिंदू और जैन धर्म में दैनिक पूजा और प्रसाद में इस्तेमाल किए जाते हैं।

इन धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले दूध से बने उत्पाद शुद्ध (सात्विक) होने चाहिए। लेकिन अगर गाय को ऐसा चारा खिलाया गया हो जिसमें जानवरों के अंग, खून या मांस शामिल हों, तो उस गाय से प्राप्त दूध और उससे बने उत्पाद धार्मिक रूप से अशुद्ध और अस्वीकार्य माने जाते हैं।

नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक GTRI के अजय श्रीवास्तव ने एक उदाहरण देते हुए कहा, “कल्पना कीजिए, आप उस गाय का मक्खन खा रहे हैं जिसे किसी दूसरी गाय का मांस और खून खिलाया गया हो। भारत शायद ऐसा दूध उत्पाद कभी स्वीकार नहीं करेगा।”

भारत का पशुपालन और डेयरी विभाग विदेशों से आने वाले दूध और खाद्य उत्पादों के लिए पशु चिकित्सा प्रमाणपत्र (Veterinary Certificate) अनिवार्य करता है। इस प्रमाणपत्र की एक जरूरी शर्त है कि “ऐसे पशुओं को कभी भी मांस, हड्डी, खून, अंगों या सूअर से बने किसी भी पदार्थ वाला चारा नहीं खिलाया गया हो।” यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि भारत में केवल शाकाहारी आहार पर पली हुई गायों से प्राप्त दूध उत्पाद ही आयात किए जा सकें।

भारत का इनकार: सिर्फ संस्कृति नहीं, अर्थव्यवस्था भी है वजह

भारत का अमेरिका से डेयरी उत्पादों का विरोध केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा कारण देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा करना भी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।

2023-24 में भारत ने 239 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन किया, जिससे 7.5 से 9 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2.5% से 3% है। भारत का डेयरी सेक्टर 8 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है।

इनमें से ज्यादातर छोटे किसान हैं जिनके पास सिर्फ 2 या 3 गाय/भैंस होती हैं। उनके लिए यही आमदनी का मुख्य जरिया है। अगर भारत ने अमेरिका जैसे देशों से सस्ते, सब्सिडी वाले डेयरी उत्पादों को आने की इजाजत दे दी, तो भारतीय बाजार में सस्ती विदेशी चीजें भर जाएँगी।

2024 में अमेरिका ने 8.22 बिलियन डॉलर का डेयरी निर्यात किया और अगर उसका भारत में आयात हुआ तो इसका भारी असर भी होगा। भारतीय स्टेट बैंक के एक विश्लेषण के अनुसार, इससे घरेलू दूध की कीमतों में कम से कम 15% गिरावट आ सकती है। इससे किसानों को हर साल लगभग 1.03 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

महाराष्ट्र के किसान महेश सकुंडे ने कहा, “सरकार को यह देखना होगा कि हम सस्ते विदेशी दूध से प्रभावित न हों। अगर ऐसा हुआ तो पूरे डेयरी उद्योग को और हम जैसे छोटे किसानों को बड़ा नुकसान होगा।”

बातचीत में रुकावट

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तय समय सीमा 1 अगस्त नजदीक आने पर समाचार सुनने को मिल रहा है कि सीमा आगे बढ़ा दी गयी है। अगर तब तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ (शुल्क) बढ़ा सकता है। डेयरी क्षेत्र को लेकर जारी विवाद भारत और अमेरिका के बीच 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने के बड़े लक्ष्य पर भी असर डाल सकता है।

हालाँकि बातचीत चल रही है, लेकिन भारतीय पक्ष अब भी अपने रुख पर अडिग है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने साफ कहा, “डेयरी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। यह हमारे लिए एक स्पष्ट सीमा है।” इस बीच, अमेरिका ने यह मामला विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भी उठाया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कहा कि नवंबर 2024 से लागू होने वाला भारत का नया डेयरी सर्टिफिकेशन नियम उनकी समस्याओं को पूरी तरह हल नहीं करता।

मोरक्को : घोषित ‘इस्लामी मुल्क’ में बकरीद पर पशुओं की नहीं होगी कुर्बानी: सुल्तान मोहम्मद VI ने क्यों लगाया है प्रतिबंध?

                  बकरीद पर मोरक्को में नहीं दी जाएगी कुर्बानी ( फोटो साभार moroccoworldnews.com)
अफ्रीका के इस्लामी मुल्क मोरक्को में बकरीद पर कुर्बानी पर रोक लगा दी गई है। मोरक्को में 99 फीसदी मुस्लिम आबादी है इसके बावजूद ये फैसला किंग मोहम्मद VI ने लिया है। इस रोक की दुनियाभर में चर्चे हैं। मोरक्को ने अपना पशु बाजार बंद कर दिया है। किंग ने अपने आदेश में बकरे समेत किसी भी पशु की कुर्बानी नहीं देने का आदेश दिया है। इस आदेश को लागू कर दिया गया है।

क्यों लगाई गई पशु की कुर्बानी पर रोक?

किंग मोहम्मद VI ने रोक के पीछे आर्थिक और पर्यावरण संकट की बात कही है। देश में पिछले 7 साल से गंभीर सूखा पड़ा हुआ है। फसलों की पैदावार नहीं हो पा रही है। पशुओं को चारे और पानी की किल्लत हो रही है। इसकी वजह से पशुओं की संख्या में 33 फीसदी की कमी आई है। वहीं चारे की कीमत 50 फीसदी बढ़ गए हैं। इसका असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ा है। इसके अलावा माँस की कीमत में इजाफा हुआ है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ‘कुर्बानी’ की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है।

किंग मोहम्मद VI मोरक्को के मजहबी प्रमुख भी हैं। उनका कहना है कि इस साल बदहाली की स्थिति है ऐसे में बकरीद पर कुर्बानी नहीं देना इस्लाम के सिद्धांतों के अनुरूप है। किंग के मुताबिक इस्लाम में कुर्बानी को अच्छा माना गया है लेकिन ये अनिवार्य नहीं है। इसलिए ‘प्रतिकात्मक कुर्बानी’ भी दी जा सकती है।

पशुओं की खरीद-बिक्री बंद

पशुओं की खरीद-बिक्री को रोकने के लिए पशु बाजारों और मंडियों को बंद कर दिया गया है। देशभर के गवर्नरों और स्थानीय प्रशासन को इसे सख्ती से लागू करने के आदेश दिये गये हैं। बकरीद से पहले आम तौर पर जिन बाजारों में जबरदस्त भीड़भाड़ होती थी और पशुओं की खरीद बिक्री होती थी वहाँ अब शांति छाई हुई है।

मोरक्को का ये कदम दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए उदाहरण है। किंग ने इस साल की शुरुआत में ही मोरक्को की जनता से पारंपरिक बलि से दूर रहने की अपील की थी, ताकि माँस की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाया जा सके और पशुधन की वृद्धि हो।

ऑस्ट्रेलिया से मँगाई जा रही 1 लाख भेड़ें

मोरक्को ने माँस और पशुओं के आयात पर टैक्स में कटौती की है। मोरक्को अब ऑस्ट्रेलिया से 1 लाख भेड़ों का आयात करने जा रहा है। ऐसा देश में माँस की कमी को दूर करने के लिए किया जा रहा है। मोरक्को सरकार ने 6.2 बिलियन दिरहम यानी ₹ 532.66 करोड़ का कार्यक्रम शुरू किया है।

इसका मकसद पशुपालकों को आर्थिक सहायता मुहैया करना और पशुओं की वृद्धि करना है। पशुओं के लगातार कटने से उनकी संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। किंग के इस फैसले का आम तौर पर लोगों ने स्वागत किया है लेकिन कई कट्टरपंथी संगठनों ने इसे मजहबी मामलों में दखल बताया है।

मुस्लिम ताजिकिस्तान में हिजाब और दाढ़ी पर प्रतिबंध; लेकिन भारत में कट्टरपंथी हंगामा कर उपद्रव करते रहते हैं


भारत सहित दुनिया के कई देशों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग होती रही है। इसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर अन्य फोरम पर चर्चा होती रही है। लेकिन भारत में सियासत की रोटियां सेंकने वाले कुछ नेता और विदेशी सोच से संचालित लेफ्ट लिबरल गैंग इसका विरोध करती रही है। Organiser साप्ताहिक के तत्कालीन संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया अपना बहुचर्चित स्तम्भ 'Cabbages & Kings' लिखते थे, जिसमें एक बार नहीं सैंकड़ों बार लिखा कि "बुर्का इस्लामिक प्रथा नहीं ....मुग़ल काल में हसीन लड़कों को भी बुर्के में रखा जाता था'
किसी ने कभी विरोध नहीं किया। जबकि मुस्लिम नेता सैयद शाहबुद्दीन इस स्तम्भ के बहुत प्रशंसक थे। .

आज शैक्षिक संस्थानों में छद्दम सेक्युलरिस्ट कट्टरपंथी मुस्लिमों के इशारे पर हिजाब/बुर्का पर हंगामा करते रहते हैं। पता नहीं भारतीय मुल्लावाद मुसलमानों को कौन-से पुरानी सदी में जीने के लिए मजबूर कर रहे है और मुसलमान भी वक्त से साथ बदलने को तैयार नहीं। जबकि मुस्लिम देश अपनी पुरानी रूढ़ियों को बदल रहे हैं।

अब हिजाब को लेकर एक मुस्लिम देश ताजिकिस्तान ने बड़ा फैसला लिया है। अफगानिस्तान के पड़ोसी देश ताजिकिस्तान ने अपने देश में महिलाओं के हिजाब पहनने पर पाबंदी लगा दी है। ताजिकिस्तान में लगभग 98 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। नए कानून के मुताबिक, देश में हिजाब पहनने और दाढ़ी रखने पर बैन लगा दिया गया है। अगर कानून का उल्लंघन करते हुए कोई पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। ताजिकिस्तान के अधिकारियों का मानना है कि यह इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हैं। हिजाब को उन्होंने पराया परिधान करार दिया है। भारत के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक के खिलाफ चल रहे विवाद के बीच एक मुस्लिम देश से नजीर बनने वाला फैसला सामने आया है।

हिजाब पहनने पर लगेगा भारी जुर्माना

ताजिकिस्तान सरकार का कहना है कि महिलाओं को हिजाब नहीं पहनना चाहिए। ताजिकिस्तान सरकार द्वारा कानून में किए गए नए संशोधनों के अनुसार, कानून के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर ताजिक महिलाएं हिजाब पहनती हैं तो उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। इन कानूनी संशोधनों का उल्लंघन करने वालों पर ताजिक मुद्रा सोमोनी में 7,920 सोमोनी और 39,500 सोमोनी के बीच जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, कानून चेतावनी देता है कि इस अपराध को करने वाले सरकारी अधिकारियों और धार्मिक अधिकारियों पर क्रमशः 54,000 सोमोनी से 57,600 सोमोनी तक जुर्माना लगाया जाएगा।

हिजाब को बताया गया ‘पराया परिधान’एशिय प्लस की रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में पारित बिल में हिजाब को ‘पराया परिधान’ कहा गया है, जिसका ट्रेंड हालिया सालों में मध्य पूर्व के देशों से ताजिकिस्तान में आना शुरू हुआ है। इस कानून में हिजाब, इस्लामी स्कार्फ, इस्लामी परिधान की अन्य पारंपरिक वस्तुओं के पहनने पर बैन लगाया गया है। ताजिकिस्तान के अधिकारियों का मानन है कि यह इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हैं।

2007 से शिकंजा कसा जा रहा है हिजाब पर

ताजिकिस्तान में साल 2007 से इस्लामी हिजाब पर शिकंजा कसा जा रहा है। उस साल शिक्षा मंत्रालय ने इस्लामी कपड़ों और पश्चिमी शैली की मिनी स्कर्ट के स्कूल-कॉलेजों में पहनने पर बैन लगा दिया था। बाद में यह बैन सार्वजनिक संस्थानों में भी लागू कर दिया गया। उस समय यह बैन अनौपचारिक था, जिसे लागू करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाई गई थी। अब ताजिक सरकार ने इस बैन को संसद में कानून के जरिये पूरी तरह वैध बना दिया है और सख्ती के साथ लागू करने का दावा किया है।

बकरीद में बच्चों के शामिल होने पर रोक

संसद के ऊपरी सदन मजलिसी मिल्ली में जिस विधेयक को मंजूरी दी गई है, उसमें दो सबसे महत्वपूर्ण इस्लामी छुट्टियों, ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अजहा के लिए बच्चों के उत्सवों में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यानी बकरीद की कुर्बानी में बच्चों के शरीक होने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन मुस्लिम त्योहारों को ईदगर्दक के नाम से जाना जाता है, जिसके दौरान बच्चे लोगों को बधाई देने के लिए अपनी गलियों में घरों से निकलते हैं।

सरकार दे रही नेशनल ड्रेस को बढ़ावा

रिपोर्ट के मुताबिक हाल के वर्षों में सरकार ने ताजिक नेशनल ड्रेस को बढ़ावा देने के लिए एक अभियान चलाया। 6 सितंबर, 2017 को, लाखों सेल फोन यूजर्स को सरकार की ओर से मैजेस भेजे गए, जिसमें महिलाओं से ताजिक नेशनल ड्रेस पहनने की अपील की गई। संदेशों में कहा गया कि ‘नेशनल ड्रेस पहनना अनिवार्य है! राष्ट्रीय पोशाक का सम्मान करें, हमें नेशनल ड्रेस पहनने की एक अच्छी परंपरा कायम करनी चाहिए।’ इस कैंपन का समापन 2018 में हुआ जब सरकार ने 376 पन्नों का मैनुअल पेश किया – ताजिकिस्तान में अनुशंसित पोशाकों की मार्गदर्शिका – जिसमें बताया गया था कि ताजिक महिलाओं को अलग-अलग अवसरों पर क्या पहनना चाहिए।

दाढ़ी पर अनौपचाहिक बैन

ताजिकिस्तान ने अनौपचारिक रूप से घनी दाढ़ी रखने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले एक दशक में हज़ारों पुरुषों को कथित तौर पर पुलिस ने रोका और उनकी इच्छा के विरुद्ध उनकी दाढ़ी कटवा दी।

ताजिकिस्तान में 98 प्रतिशत मुस्लिम

ताजिकिस्तान में सुन्नी इस्लाम सबसे बड़ी आबादी का धर्म है। 2022 में शिक्षाविदों के अनुसार, ताजिकिस्तान की आबादी 98 प्रतिशत मुस्लिम है (मुख्य रूप से हनफी सुन्नी और इस्माइली शिया की एक छोटी आबादी इसमें कुछ सूफी संप्रदायों के साथ ताजिक भी शामिल हैं। वहीं 2009 के अमेरिकी विदेश विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, ताजिकिस्तान की आबादी 98 प्रतिशत मुस्लिम है, जिसमें लगभग 95 प्रतिशत सुन्नी और 3 प्रतिशत शिया कुछ सूफी संप्रदायों को मानने वाले शामिल हैं।

फ्रांस, रूस सहित कई मुस्लिम देशों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध

फ्रांस और बेल्जियम में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध हैं। फ्रांस के पूर्व राष्‍ट्रपति निकोला सारकोजी ने हिजाब पर प्रतिबंध लगाया था। फ्रांस में नियम के उल्लंघन पर जुर्माने का भी प्रावधान है। वहीं, बेल्जियम ने जुलाई 2011 में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया था। साथ ही रूस में 2012 में सार्वजनिक स्‍थानों पर हिजाब पहनने पर बैन लगाया था इसके अलावा नीदरलैंड्स और चीन में भी हिजाब पहनने पर रोक है। अगर मुस्लिम देशों की बात की जाए तो सीरिया और इजिप्ट जैसे देशों के विश्वविद्यालयों में पूरा चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगा रखा है। कोसोवो में लड़कियां हिजाब पहन कर स्कूल नहीं जा सकतीं। इसके अलावा ट्यूनीशिया, मोरक्को अज़रबैजान, लेबनान और सीरिया जैसे देशों में हिजाब को लेकर कड़े नियम बनाए गये हैं।

पंजाब में Zee News बैन : डिक्टेटर/हिटलर कौन मोदी या केजरीवाल?


पंजाब में ‘Zee News’ के सभी चैनलों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। चैनल ने खुद इसकी जानकारी दी है। चैनल ने कहा कि Zee मीडिया के सभी चैनलों को पंजाब में बंद कर दिया गया है, वहाँ लोग अपने घर में Zee के चैनल नहीं देख पा रहे हैं। मीडिया संस्थान ने इसे प्रेस की आज़ादी पर हमला करार देते हुए कहा है कि उसे पंजाब में ब्लैकआउट कर दिया गया है। पंजाब में AAP (आम आदमी पार्टी) की सरकार है और भगवंत मान राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

अरविन्द केजरीवाल की पार्टी द्वारा पंजाब में Zee News को बैन करने से 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा प्रेस पर censorship लगा दी थी कि बिना सरकार की मर्जी से कोई समाचार प्रकाशित नहीं किया जायेगा। और इस censorship का शिकार बना आरएसएस का अंग्रेजी दैनिक The Motherland, क्योकि इमरजेंसी लगाते ही मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी को आधी रात को गिरफ्तार कर लिया था। दूसरा असर पड़ा Indian Express पर। संपादक अरुण शोरी ने न्यूज़ रोके जाने पर, उस न्यूज़ के स्थान पर censored प्रकाशित कर दिया जाता था।   

मीडिया संस्थान का कहना है कि कई लोगों की शिकायतें आ रही हैं कि वो अपने घर में Zee मीडिया के चैनल नहीं देख पा रहे हैं। Zee के रिपोर्टर मनोज जोशी ने कहा कि सरकार में कोई भी इस संबंध में कोई जवाब नहीं दे रहा है और कहा जा रहा है कि उनके पास कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताते हुए कहा कि संविधान प्रदत्त अधिकार को रोका गया है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी AAP सरकार के इस रवैए पर सवाल उठाया था।

वहीं एक अन्य रिपोर्टर रवि त्रिपाठी ने दावा किया कि इसी पंजाब में जब इससे पहले अकाली दल की सरकार थी तब भी Zee मीडिया को बैन किया गया था, पार्टी का बुरा हश्र हुआ। उन्होंने इस दौरान आपातकाल को भी याद किया, जब कई अख़बार बंद किए गए और संपादकों को जेल में डाला गया। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई सच दिखाता है तो वो उसे दबाते हैं।

वहीं जदयू के प्रवक्ता KC त्यागी ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि AAP का जन्म मीडिया की फेवरिट संस्था के रूप में हुआ था, रामलीला मैदान में संघर्ष के दौरान मीडिया उन्हें खूब कवर करता था। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर खतरा बताते हुए याद किया कि वो खुद आपातकाल के भुक्तभोगी रहे हैं। वहीं भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ये AAP की असलियत को दिखाता है। वहीं भाजपा नेता तरुण चुघ ने कहा कि AAP में इंदिरा गाँधी की आत्मा घुस गई है।

‘AAP सत्ता में आती है तो खालिस्तान के समर्थन में पंजाब विधानसभा में पारित करेंगे प्रस्ताव’: केजरीवाल के खास राघव चड्ढा का वादा

              राघव चड्ढा पर एसएफजे को पैसे और जनमत संग्रह की पेशकश का दावा (साभार: बिजनेस स्टैंडर्ड)
पंजाब विधानसभा चुनाव-2022 में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) की ऐतिहासिक जीत के अभी 24 घंटे भी नहीं बीते कि अब प्रतिबंधित चरमपंथी खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने राघव चड्ढा को लेकर सनसनीखेज दावा किया है। एक लेटर जारी कर आम आदमी पार्टी ने पंजाब में जीत हासिल करने के लिए खालिस्तान समर्थक वोटों और खालिस्तान समर्थक फंड का इस्तेमाल किया था। एसएफजे के मुताबिक, इन फंड्स में खालिस्तान का समर्थन करने वाले लोगों से की गई विदेशी फंडिंग भी शामिल है।
                                                            एसएफजे के द्वारा जारी किया गया पत्र

एसएफजे द्वारा जारी पत्र में एक बड़ा दावा किया गया है। आतंकी संगठन के पत्र में ये आरोप लगाए गए हैं कि 17 फरवरी 2022 को AAP ने उसके नाम से एक फर्जी पत्र जारी कर दावा किया था कि सिफ फॉर जस्टिस पंजाब के विधानसभा चुनाव में AAP का समर्थन कर रहा है। बता दें कि बाद में एक वीडियो जारी कर एसएफजे के प्रमुख गुरुपतवंत सिंह पन्नू ने आप के इस दावे को खारिज किया था।

अपने लेटेस्ट पत्र में खालिस्तानी संगठन ने द्वावा किया है कि 18 फरवरी को जब उसने इस फर्जी लेटर का खंडन किया था, तो उसके बाद आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा के रूप में पहचाने जाने वाले एक व्यक्ति ने एसएफजे को फोन कर उससे फर्जी पत्र की जिम्मेदारी लेने को कहा था। इसके अलावा राघव चड्ढा के तौर पर पहचाने गए व्यक्ति ने इसके लिए न केवल पैसे देने की बात की, बल्कि उसने ये भी वादा किया था कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आती है तो वे खालिस्तान जनमत संग्रह के समर्थन में पंजाब विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करेंगे।

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‘AAP ने लिया है खालिस्तानी फण्ड और वोट, अब खालिस्तान बनाने में दो साथ’: SFJ के पन्नू की भगवंत मान को च
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‘AAP ने लिया है खालिस्तानी फण्ड और वोट, अब खालिस्तान बनाने में दो साथ’: SFJ के पन्नू की भगवंत मान को च
SFJ के पन्नू (बाएं) ने पंजाब विधानसभा चुनाव में आ

सिख फॉर जस्टिस प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन है, जो कि हमेशा भारत को तोड़ने वाली गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है। इस संगठन का कर्ता-धर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू है। इसे भारत में खालिस्तानी अलगाववादी कार्यों के कारण बैन किया गया है। इसका एकमात्र लक्ष्य पंजाब में ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ करवाकर पंजाब को भारत से अलग करने का है।

मालदा-मुर्शिदाबाद सहित बंगाल के 6 जिलों में इंटरनेट-ब्रॉडबैंड बंद ठप्प

पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कुछ जिलों में कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ‘तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC)’ की सरकार ने फैसला लिया है कि इन जिलों में 7-9 मार्च, 11-12 मार्च और 14-16 मार्च को ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सेवाएँ बंद रहेंगी। संवेदनशील मालदा और मुर्शिदाबाद के अलावा उत्तरी दिनाजपुर, कूच बिहार, बीरभूम और दार्जिलिंग में ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। कहा जा रहा है कि गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसा किया गया है।

पश्चिम बंगाल में गृह एवं पहाड़ी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि इंटरनेट ट्रांसमिशन और इंटरनेट टेलीफोनी का इस्तेमाल कर के अगले कुछ दिनों में इन क्षेत्रों में गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है। कहा गया है कि इन सूचनाओं का विश्लेषण करने पर पता चला है कि रोकथाम के उपाय किए जाने जरूरी हैं। इसमें लिखा है, “भारत का संविधान यहाँ के नागरिकों को फ्री स्पीच का अधिकार देता है, लेकिन इस पर कुछ उचित प्रतिबंध भी हैं।”

पश्चिम बंगाल की सरकार ने कहा है कि इस दौरान मोबाइल फोन से वॉइस कॉल्स, SMS और समाचार पत्रों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है, अतः सूचनाओं के संचार या प्रसार पर कोई रोकथाम नहीं लगाई गई है। राज्य सरकार ने कहा कि लोगों के जीवन पर खतरों को रोकने के लिए, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर खतरों को रोकने के लिए और कानून के हिसाब से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे लोगों पर खतरे को रोकने के लिए ये फैसला जरूरी है।

हालाँकि, इसका कोई सटीक कारण नहीं बताया गया है कि आखिर इंटरनेट और ब्रॉडबैंड बंद करने का फैसला क्यों लिया गया। किन लोगों से और किस तरह के खतरे हैं, ये भी नहीं बताया गया है। साथ ही ‘पब्लिक आर्डर को मेंटेन करने’ के लिए टेलीग्राफ के जरिए आने वाले ट्रांसमिशंस को भी रोक दिया गया है। CRPC की धारा-144 के तहत ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस बारे में अभी और जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

हाफिज सईद को UN से झटका : प्रतिबंध हटाने की गुहार लेकर UN गया था

Hafiz Saeedमुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों का मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद खुद पर लगे प्रतिबंध हटाने की गुहार लेकर संयुक्‍त राष्ट्र पहुंचा था। लेकिन इस वैश्विक संस्‍था से उसे करारा झटका मिला है। यूएन ने प्रतिबंधित आतंकियों की सूची से नाम हटाने की उसकी याचिका खारिज कर दी। बताया जाता है कि भारत की ओर से मिले विस्‍तृत साक्ष्‍यों के आधार पर यूएन ने यह फैसला लिया है, जिसमें उसकी गतिविधियों को लेकर विस्‍तृत जानकारी दी गई है। परन्तु तुष्टिकरण पुजारी भारतीय नेता भारतीयों की सहनुभूति बटोरने यूएनओ पहुंचे जरूर, उसके विपरीत उसी आतंकवादी हमले को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से दुष्प्रचार करते रहे। काश, कसाब जिन्दा न पकड़ा गया होता, पाकिस्तान समर्थक भारतीय नेताओं अपने दुष्प्रचार में सफल हो गए होते।   
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जबकि संयुक्‍त राष्‍ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति को जैश-ए-मोहम्‍मद सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए नया प्रस्‍ताव मिला है। पाकिस्‍तान में सक्रिय स्थित जैश ने ही पुलवामा हमले की जिम्‍मेदारी ली है, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवानों की जान चली गई।
सूत्रों का कहना है कि भारत ने हाफिज की आतंकी गतिविधियों से जुड़ी 'गोपनीय जानकारियां' यूएन को सौंपी थीं, जिसके आधार पर इस वैश्विक संस्‍था ने उसे प्रतिबंधित सूची से हटाने का उसका आवेदन खारिज कर दिया। हाफिज लश्‍कर-ए-तैयबा का भी सह-संस्‍थापक है, जिसने 2008 में मुंबई हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद ही 10 दिसंबर, 2008 को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने उस पर प्रतिबंध लगाया था।
हाफिज ने लाहौर की संस्‍था मिर्जा एंड मिर्जा के जरिये 2017 में यह अपील दायर की थी, जो पाकिस्‍तान में नजरबंदी में रह रहा है। हालांकि यूएन ने हाफिज के वकील से यह स्‍पष्‍ट कर दिया कि उसके खिलाफ प्रतिबंध जारी रहेंगे। साथ ही यह भी कहा कि उसके खिलाफ प्रतिबंध जारी रखने को लेकर पर्याप्‍त और तर्कसंगत साक्ष्‍य हैं। प्रतिबंध सूची से हटाने के लिए हाफिज के आवेदन का विरोध भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने भी किया था। हालांकि पाकिस्‍तान ने इसका विरोध नहीं किया।
पुलवामा हमले के बाद अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन ने फरवरी में जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को भी प्रतिबंधित करने के लिए प्रस्‍ताव दिया है, जबकि जैश पहले से ही यूएन की प्रतिबंध सूची में शामिल है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने हाल ही में एक इंटरव्‍यू में स्‍वीकार किया था कि जैश सरगना मसूद अजहर पाकिस्‍तान में ही है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी पाकिस्तान को अप्रयत्क्ष रूप से हवाई हमलो.....

पाकिस्तान नेता आतंकी सरगनाओं को बचाने में व्यस्त हैं, उसके विपरीत भारत में मोदी विरोधी मोदी की कार्यवाही पर शंका कर भारतीय जनता और विश्व को भ्रमित कर रहे हैं। समझ नहीं आता इन मोदी विरोधियों में देश भावना कब जागृत होगी।