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इराक : 13 साल की बच्ची कौसर द्वारा निकाह से मना करने पर अब्बा-मंगेतर ने सीने में उतारी 10 गोलियाँ: बाद में हैवानों ने मनाया जश्न

                                              इराक में बच्ची की हत्या ( फोटो साभार-X@ndtv)
इराक की राजधानी बगदाद में एक 13 साल की मासूम बच्ची कौसर बशर अल हुसैजावी को उसके अब्बा, चचाजान और मंगेतर ने मिलकर हत्या कर दी। बच्ची का कसूर सिर्फ इतना था कि वह निकाह नहीं करना चाहती थी, क्योंकि मंगेतर शराबी और ड्रग्स डीलर था। इतना ही नहीं हत्यारों ने उसकी हत्या कर जश्न मनाया। ढोल-नगाड़े बजाए गए और पुरुषों की जमात उस पर ताल मिलाती नजर आई।

उसे मारने का तरीका भी विभत्स था। मृतक की एक रिश्तेदार के मुताबिक, मेरे कबीले के आदमियों ने मेरी रिश्तेदार 15 साल की कौसर बशर अल-हुसैजावी को एक गड्ढे में फेंक दिया और उसके शरीर पर मिट्टी डाल दी। उन्होंने कुल्हाड़ी से उसका सिर फोड़ दिया और फिर 10 गोलियाँ दाग दी। फिर मेरा परिवार भी दूसरों के साथ सड़कों पर आकर नाचने और उसकी मौत का जश्न मनाने लगा।

दरअसल कौसर की 13 साल की उम्र में पहला निकाह हुआ था। बगदाद के दक्षिण-पूर्व में कवथर जिले के अल-नहरावन में रहती थी। उसे स्कूल छुड़वाया गया और 13 साल की उम्र में उससे कई साल बड़े एक शराबी से निकाह कर दिया गया।

वह एक साल तक हिंसा का शिकार होती रही। मौका पाते ही वह अपने परिवार के पास वापस भाग गई। परिवारवालों ने उसे घर में नजरबंद रखा और उसे अपने पति के पास जाने के लिए मजबूर करता रहा। इस दौरान कौसर ने अपनी जान लेने की धमकी दी और आखिरकार 2025 के आखिर में कोर्ट में उसका तलाक हो गया।

इसके तुरंत बाद उसका कजिन जेल से रिहा हो गया और उसने कौसर के माता-पिता से निकाह करने की बात कही। कौसर ने मना कर दिया। परिजनों को भी पता था कि दूल्हा ड्रग्स और शराब का धंधा करता है। उसके परिवार ने फिर भी कौसर पर निकाह का दबाव डाला। कबीले की नीति के मुताबिक, ‘लड़की किसी आदमी की बात नहीं टाल सकती।’ घर पर उसकी माँ और महिला रिश्तेदार उसके पक्ष में खड़ी नहीं हो सकी। वह अकेली पड़ गई।

जैसे-जैसे निकाह का दिन नजदीक आ रहा था, उसे लगता था कि रेप और हिंसा का एक नया दौर पास आ रहा है। डर के साए में जी रही कौसर ने अपना घर छोड़ दिया। उसने न तो पढ़ाई ठीक से की थी और न ही उसे पैसा कमाना आता था। वह अकेले अपने कुछ कपड़े लेकर घर से निकल गई।

घर से भागते हुए उसे एक पड़ोसी ने देख लिया, फिर क्या था मौके का फायदा उठाकर उसे 3 दिनों तक अपने कब्जे में रखा और उसके साथ ‘बहुत बुरा’ किया। कौसर की रिश्तेदार ने ये नहीं बताया कि उन तीन दिनों में उसके साथ क्या हुआ। परिवार को लगा कि वह उसके साथ जानबूझकर गई है। हालाँकि कौसर ये विश्वास दिलाती रही कि उसका किडनेप हुआ है और वह अपनी मर्जी से वहाँ नहीं थी।

सर्विलांस कैमरों में भी उसे जबरदस्ती घसीट कर ले जाते हुए वीडियो सामने आए, लेकिन परिवार ने लड़की को सजा दी। उसे गड्ढे में फेंक दिया गया और मिट्टी डाल दी गई। सभी वहाँ जमा होने लगे। थोड़ी देर बाद उसे निकाल कर पीटा। सिर फोड़ दिया और अंत में 10 गोलियाँ दाग दी।

इराक : स्वीडन दूतावास में घुस मुस्लिम भीड़ ने की आगजनी और पढ़ी नमाज: कुरान जलाए जाने का विरोध

बग़दाद में स्वीडिश दूतावास के बाहर जमा हुए इस्लामी कट्टरपंथी (फोटो साभार: AFP)
स्वीडन में कुरान जलाए जाने की घटना के बाद से ही इस्लामी मुल्कों में उत्तरी यूरोप में स्थित इस देश के प्रति गुस्सा पनप रहा है। अब इराक की राजधानी बग़दाद में हजारों की संख्या में मुस्लिमों ने स्वीडन के दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। गुरुवार (20 जुलाई, 2023) को स्वीडन के दूतावास परिसर में घुस कर आगजनी भी की गई। इस दौरान इसकी शिया झंडा भी वहाँ पर लहराया गया। प्रदर्शनकारी इराक के नेता मुक्तदा-अल-सद्र के पोस्टर्स भी लहरा रहे थे।

इस घटना के कई वीडियो भी सामने आए हैं। पिछले महीने जिस व्यक्ति ने स्वीडन में कुरान जलाया था, असल में वो इराक का ही शरणार्थी था। अब उसने एक बार फिर से कुरान जलाने के लिए अनुमति माँगी है। वीडियो में देखा जा सकता है कि हजारों मुस्लिम स्वीडन के दूतावास के परिसर की बाउंड्री के ऊपर चढ़ गए और हंगामा करने लगे। एम्बेसी के भीतर भी अपने शर्ट्स खोल कर ये कट्टरपंथी घुस गए। बैकग्राउंड में बजती अलार्म की आवाज को भी सुना जा सकता है।

साथ ही स्वीडन के दूतावास के परिसर के भीतर नमाज भी पढ़ी गई। तड़के सुबह ही ये प्रदर्शनकारी वहाँ पहुँच गए थे। दिन होते ही सुरक्षा बल उन्हें हटाने के लिए पहुँचे। वहाँ से धुआँ निकलते हुए भी देखा गया। एक फायर ट्रक की सीढ़ियों पर चढ़ कर फायरफाइटर्स को आग बुझाते हुए भी देखा गया। स्वीडन ने जानकारी दी है कि दूतावास के कर्मचारी सुरक्षित हैं। स्वीडन के विदेश मंत्रालय ने अपने कर्मचारियों पर हुए हमलों की निंदा भी की है।

स्वीडन ने इसे ‘वियना कन्वेंशन’ का उल्लंघन भी करार दिया है। साथ ही कहा कि ये इराक के प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वहाँ रह रहे विदेशी कर्मचारियों की रक्षा करे। फिनलैंड की एम्बेसी भी बदल में है। वहाँ से भी कर्मचारियों को निकाल कर सुरक्षित जगह पर ले जाया गया। इराक के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की निंदा की, लेकिन ये नहीं बताया कि ये हुआ कैसे। इराक की पुलिस पर भी इस घटना को लेकर देर से हरकत में आने का आरोप है।