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'22 दिन में मार दूँगा PM मोदी को’: प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने वाला अमन बक्सर से गिरफ्तार, पूछताछ में बताया- विदेश से मिला था काम


आरएसएस प्रचारक से लेकर गुजरात मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री से भारत के प्रधानमंत्री बनने बाद भी नरेंद्र मोदी के जानी दुश्मनों में कोई कमी नहीं आयी। लेकिन देवी-देवताओं का सुरक्षा कवच सभी के होंसले पस्त कर रहा है। काम को अंजाम देने से पहले ही कानून के हत्ते चढ़ जाता है।  

बिहार के बक्सर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक खतरनाक साजिश का खुलासा हुआ। खुफिया एजेंसियों की सूचना पर पुलिस ने छापेमारी कर एक युवक अमन तिवारी को गिरफ्तार किया है।

आरोपित अमन तिवारी कथित तौर पर PM मोदी को नुकसान पहुँचाने की योजना बना रहा था। पुलिस इस मामले में विदेशी कनेक्शन की भी जाँच कर रही है। उसने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को ईमेल भेजकर भारी रकम की माँग की थी।

आरोपित अमन तिवारी ने दावा किया था कि वह 22 दिनों के भीतर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपनी साजिश को अंजाम दे सकता है। कार्रवाई में युवक के पास से मोबाइल, लैपटॉप और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था। बरामद किए गए सभी उपकरणों को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया गया है। मुख्य आरोपित अमन तिवारी से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने दो और लोगों को हिरासत में लिया है।

इन सभी के बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस नेटवर्क के पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन तो नहीं है। फिलहाल मामले की गहराई से जांच जारी है।

बिहार : आधी रात घर में घुस किसानों पर पुलिस की बर्बरता

बक्सर में आक्रोशित किसानों का प्रदर्शन, पुलिस ने पीटा (फोटो साभार: ANI)
बिहार के बक्सर में पुलिस की बर्बरता के बाद शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान उग्र हो उठे हैं। पुलिस की प्रताड़ना से नाराज किसान सड़क पर उतर आए। किसानों ने बसों व पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। जानकारी मिली है कि कई किसानों को हिरासत में लिया गया है। चौसा में पावर प्लांट के लिए ली गई भूमि के मुआवजे को लेकर किसान काफी समय से धरना दे रहे हैं।
कृषि कानूनों को लेकर तथाकथित किसानों द्वारा महीनों सड़क जाम कर जनता को परेशान किया, 26 जनवरी को लाल किले पर उपद्रव करने पर दिल्ली पुलिस और केंद्र में मोदी सरकार ने बहुत ही संयम से काम लिया था, 

क्यों भड़के किसान?

मुआवजे को लेकर कई दिनों से किसान धरना दे रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने आधी रात को धरना दे रहे किसानों के घरों में घुसकर उनके साथ मारपीट की। दावा है कि पुलिस रात 12:00 बजे के करीब किसानों के घरों में दाखिल हुई और सोते हुए किसानों पर लाठीचार्ज किया। जो भी सामने दिखा, उस पर जमकर लाठियाँ तोड़ी गईं। किसानों का दावा है कि उन्होंने पुलिस की बर्बरता अपने स्मार्टफोन में रिकॉर्ड कर ली है। बेरहमी से लाठियाँ बरसाते बिहार पुलिस के जवानों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहे हैं।

लाठी चर्ज पर पुलिस का पक्ष

आधी रात को किसानों के घर में घुसकर लाठीचार्ज पर पुलिस का कहना है कि पावर प्लांट कंपनी एसजेवीएन ने कुछ किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस रात्रि में उन्हें पकड़ने गई थी। पुलिस का कहना है कि पहले किसानों ने हमला किया, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। किसानों को परिवार (महिलाओं-बच्चों) के सामने ही पीटा गया।

ताज़ा हालात क्या हैं?

पुलिस की पिटाई के खिलाफ किसान सड़कों पर उतर आए। नाराज किसानों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। आक्रोशित किसानों ने पावर प्लांट में भी बवाल काटा। किसानों ने पावर प्लांट में जमकर तोड़-फोड़ की और आग लगा दिया। खबर है कि किसानों ने पुलिस पर भी हमला किया है। हमले में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है। साथ ही जानकारी मिली है कि पुलिस ने कुछ किसानों को हिरासत में लिया है। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा जा रहा है और जल्द ही हालात काबू में कर लिए जाएँगे।

क्या है मामला ?

दरअसल, चौसा में वर्ष 2010-11 से पहले ही बनारपुर गाँव में पावर प्लांट बनाने के लिए किसानों का भूमि अधिग्रहण किया गया था। किसानों को 2010-11 के सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा दिया गया। कंपनी ने वर्ष 2022 में जमीन अधिग्रहित करने का काम शुरू किया। किसान अब वर्तमान दर से जमीन का मुआवजा माँग रहे हैं। किसानों का आरोप है कि पावर प्लांट बनाने वाली कम्पनी एसजेवीएन पुराने दर पर ही मुआवजा देकर जमीन हथिया रही है। इसे लेकर किसान तकरीबन 2 महीनों से धरना दे रहे हैं।

बिहार : सोते किसानों पर नीतीश सरकार की पुलिस द्वारा लाठियाँ बरसाने के विरोध में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे द्वारा आंबेडकर की प्रतिमा के सामने रामचरितमानस का पाठ

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने चौसा की घटना और बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर प्रसाद द्वारा रामचरितमानस के अपमान से दुःखी होकर बक्सर में मौन धरना दिया। बक्सर के अंबेडकर चौक पर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा की नीचे बैठकर बक्सर सांसद अश्विनी चौबे ने अपना विरोध जताया। 13 जनवरी, 2023 को धरने पर बैठे अश्विनी चौबे ने आज 14 जनवरी, 2023 को दोपहर 12 बजे अपना धरना समाप्त किया।

रात भर अंबेडकर प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठे अश्विनी चौबे ज्यादातर समय रामचरितमानस का पाठ करते नजर आए। उन्होंने ट्वीट कर धरना समाप्त करने संबंधी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “मेरे बक्सर के किसानों पर बिहार सरकार द्वारा हुए सुनियोजित हिंसा व अत्याचार के विरोध में मेरा मौन धरना आज 12 बजे समाप्त होगा। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम बिहार सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करें।”

इससे पहले चौसा में पीड़ितों का हाल जानने बक्सर पहुँचे बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी भी अश्विनी चौबे से मिले। दूसरी ओर चौसा की घटना को लेकर बक्सर भाजपा यूनिट ने भी धरना दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को पाँच सूत्रीय माँगों वाला ज्ञापन सौंपा।

बक्सर के चौसा में क्या हुआ था ?

दरअसल, बक्सर के चौसा में पावर प्लांट के लिए ली गई भूमि के मुआवजे को लेकर किसान काफी समय से धरना दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने आधी रात को धरना दे रहे किसानों के घरों में घुसकर उनके साथ मारपीट की। दावा है कि पुलिस रात 12:00 बजे के करीब किसानों के घरों में दाखिल हुई थी और सोते हुए किसानों पर लाठीचार्ज किया। बेरहमी से लाठियाँ बरसाते बिहार पुलिस के जवानों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए।
11 जनवरी, 2023 को पुलिस की इसी बर्बरता के बाद शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान उग्र हो उठे थे। पुलिस की प्रताड़ना से नाराज किसान सड़क पर उतर आए। किसानों ने बसों व पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान कई किसानों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिली थी।

रामचरितमानस को लेकर क्यों हो रहा है विवाद?

11 जनवरी, 2023 को ही बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ करार दिया था। वे ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान RJD नेता ने रामचरितमानस को समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बता दिया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। संबोधन के बाद मीडिया के सामने भी बिहार के शिक्षा मंत्री अपने बयान पर कायम नजर आए। उनके इसी बयान को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है।

मी लॉर्ड! ये कैसा न्याय: 8वीं में पढ़ने वाले 13 साल के मुन्ना को नाबालिग मानने में कोर्ट ने बर्बाद किए 33 साल, बरी होने में लगा दिए 10 साल

                     33 साल में नाबालिग, 43 साल में बरी हुए मुन्ना सिंह (फोटो साभार: द​ इंडियन एक्सप्रेस)
बिहार से सामने आए एक अजीब मुक़दमे ने न्याय प्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है कि एक आरोपी को नाबालिग उस समय माना वह अपने पूर्ण यौवन पर था और जेल से रिहा करने में अगले 10 साल।  जबकि बहुचर्चित बलात्कार कांड में 'दामिनी' को मौत के द्वार पर खड़ा करना वाला बस क्लीनर भी नाबालिग ही था, लेकिन बहुत जल्द जेल से बाहर आता है और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल उसे सिलाई मशीन देकर सम्मानित किया जाता हैं। क्या कानून किसी व्यक्ति के प्रभाव को देख न्याय देता है? 

बिहार के बक्सर के रहने वाले मुन्ना सिंह आज 56 साल के हैं। 1979 में जब उन पर हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया, तब वे 13 साल के थे। आठवीं में पढ़ते थे। लेकिन कोर्ट ने उन्हें नाबालिग घोषित करने में 33 साल लगाए। फिर मामले में उनको बरी करते-करते 10 साल और लग गए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अक्टूबर 2022 को मुन्ना सिंह को बरी किया गया। इसके बाद उन्होंने कहा, “इस घटना ने मेरे दिलों दिमाग में गहरे घाव छोड़े हैं। बरी होने के बाद राहत की साँस ली है। भगवान का शुक्र है कि यह फैसला मेरे जिंदा रहते ही आया है।”

क्या है मामला?

तारीख थी 7 सितंबर 1979। मुन्ना सिंह, उनके पिता श्याम बिहारी सिंह और अन्य 8 लोगों पर आईपीसी की धारा 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करने) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब मुन्ना सिंह को लेकर फैसला आया है। सहायक अभियोजन अधिकारी एके पांडे ने कहा कि किशोर बोर्ड ने इस मामले की जाँच की। लेकिन मुन्ना सिंह के खिलाफ कोई गवाह नहीं मिला, इसलिए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
सिंह के वकील राकेश कुमार मिश्रा के मुताबिक घटना के वक्त उनके मुवक्किल केवल 13 वर्ष के थे। आठवीं कक्षा के छात्र थे। लेकिन 2012 तक उन्हें नाबालिग नहीं माना गया था। उन्होंने बताया कि बक्सर की एसीजेएम द्वितीय की अदालत में 2012 में सुनवाई के दौरान मुन्ना सिंह से उनकी उम्र पूछी गई। उन्होंने बताया कि वे अभी वह 46 वर्ष के हैं। इससे यह साफ हो गया कि जब मामला दर्ज किया गया था, उस वक्त वह नाबालिग थे।
इसके बाद नवंबर 2012 को इस मामले को बक्सर किशोर न्याय बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। मुरार पुलिस थाने के चौगाई गाँव निवासी मुन्ना सिंह का कहना है कि उन्होंने इसके बाद लगभग एक महीन जेल में बिताया था। आरोपित बनने के बाद उन्होंने काफी मानसिक प्रताड़ना झेली और अदालत के चक्कर लगाने पड़े।
बताया जाता है कि इस मामले के अन्य 5 आरोपितों जिनमें मुन्ना सिंह के पिता भी हैं, उनकी सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। बक्सर कोर्ट ने कुछ साल पहले इस मामले में 2 लोगों को दोषी करार दिया था और दो अन्य को बरी कर दिया था।