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2020 में अंकुरित हुआ था जो वामपंथी विष बेल, उसे 5 साल में ही बिहार ने फिर से किया दफन; केजरीवाल पार्टी को भी किया चारों खाने चित


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कई दूरगामी राजनीतिक संदेश देने वाला रहा है। सत्तारूढ़ NDA को मिले स्पष्ट बहुमत ने जहाँ एक और दिखाया कि मतदाता अभी भी नीतीश कुमार की साफ छवि और विकासवादी राजनीति के साथ खड़े हैं। वहीं, RJD के खराब प्रदर्शन ने दिखाया कि उनका कोर वोट बैंक MY (मुस्लिम-यादव) भी उनसे छिटक रहा है। AIMIM को मिली 5 सीटों से उनके मुस्लिम बहुल इलाकों में पैठ बनाने की पुष्टि हुई तो बिहार ने एक बार फिर वामपंथ की ‘विषैली राजनीति’ को नकार दिया।

बिहार चुनाव ने घोटालेबाज़ अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को भी उसकी औकात दिखा दी, जिसे कोई मीडिया नहीं बता रहा। मीडिया को डर है कहीं पंजाब से विज्ञापन मिलने बंद न हो जाए। वामपंथियों के साथ-साथ केजरीवाल को भी बिहार ने पानी की एक बून्द तक नहीं दी। बिहार नहीं चाहता लालू के बाद केजरीवाल जैसे घोटालेबाज़ आए।   

गुणा-गणित से 3 सीटों तक पहुँचीं लेफ्ट पार्टियाँ

इस विधानसभा चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) को जहाँ 2 सीटें मिलीं तो वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) के हाथ केवल एक सीट लगी। इन तीनों सीटों पर भी लेफ्ट के विचार से ज्यादा असर निर्दलीय उम्मीदवारों के गुणा-गणित का दिखाई पड़ा।

काराकाट सीट पर CPI (ML) (L) को 2,836 वोटों से जीत मिली तो इस सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहीं भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह को 23,469 वोट मिले। कमोबेश यही स्थिति लेफ्ट को मिली अन्य 2 सीटों पर दिखाई पड़ी। यानी अगर सीधा मुकाबला होता तो शायद लेफ्ट के हाथ ये सीटें भी ना आतीं।

जब बिहार ने RJD को किया था खारिज

दिलचस्प यह है कि यह पहली बार नहीं है जब वामपंथी दलों या RJD को बिहार ने इस तरह से नकारा हो। 2010 में RJD की ऐतिहासिक हार के बाद माना गया कि बिहार ने जंगलराज को प्रश्रय देने वाली पार्टी को जमीदोज कर दिया था। उसके उस स्मृति से हमेशा के लिए दूरी बना ली है जो उसके पिछड़ेपन का प्रतीक बनी हुई थी। नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल ने उस जनमत को और मजबूत किया। RJD को उस चुनाव में केवल 22 सीटें मिली थीं।

                                2010 बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम (साभार: ECI)

हालाँकि, 2015 आते-आते नीतीश कुमार के राजनीतिक प्रयोगों के कारण RJD फिर जिंदा दिखाई देने लगी और उसकी नीतीश कुमार के साथ सत्ता में वापसी हो गई। इसके अगले चुनाव में भी हालात RJD के अनूकुल दिखाई दिए लेकिन उसके पीछे की बड़ी वजह चिराग पासवान थे। चिराग पासवान 2020 के चुनावों के दौरान नीतीश कुमार से नाराज थे और उनकी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए थे।

इसके कारण RJD को मदद मिली और पार्टी एक बार फिर ताकतवार बनकर वापस लौटी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस-RJD की जीत फिर भी इतनी बड़ी नहीं थी कि उन्हें सत्ता दिला पाती। इसी चुनाव में वामपंथी दलों ने भी वापसी की थी। 2020 के चुनावों में CPI (ML) (L) को 12 तो CPI और CPI (M) को 2-2 सीटें मिलीं। यानी लंबे वक्त पहले जिस वामपंथ को बिहार ने खारिज कर दिया था वो 16 सीटों के साथ उसके फिर से वापसी करने की अटकलें लगने लगी थीं।

                                   2015-2020 बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे (फोटो: PRS India)

2024 में लोकसभा चुनावों में भी CPI (ML) (L) ने बिहार में 2 सीटों पर जीत दर्ज की और लगने लगा की लेफ्ट की पार्टियाँ बिहार में एक बार फिर दम दिखा रही हैं। CPI-ML ने यह संकेत दिया कि बिहार के कुछ हिस्सों में उसकी जमीन अब भी सुरक्षित है।

                                                2024 बिहार लोकसभा चुनाव परिणाम (ECI)

चिराग द्वारा दी गई ऑक्सीजन जब इस वार वामपंथियों और RJD से हटी तो उन्हें अपनी असलियत दिख गई। बिहार की जनता से RJD और वामंपथी दलों की एक बार फिर से सूपड़ा साफ कर दिया। जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अपना विश्वास और पुख्ता किया है। जिस तरह से एकजुट होकर NDA ने चुनाव लड़ा उससे अगर वोटरों के मन में कोई शंका थी भी तो वो भी दूर हो गई। जनता ने स्पष्ट और एक तरफा मत दिया, वोटों की इस सुनामी में वामपंथी दल साफ हो गए।

फिर से ना पनपे ‘विष बेल’: अब NDA की जिम्मेदारी

अब NDA के सामने भी चुनौती है कि वो इस जनादेश का सम्मान करे। जनता ने उसे सिर्फ ‘विकल्प’ नहीं बनाया है बल्कि पूर्ण ‘विश्वास’ भी दिया है। यह विश्वास इस बात पर आधारित है कि NDA बिहार को उन पुराने दौरों में वापस नहीं ले जाएगा जिनमें वामपंथी उग्रवाद, जातीय हिंसा, आपराधिक राजनीति और संस्थागत दुर्बलता हावी रहती थी।

NDA को भी यह समझना होगा कि आगे वो ऐसे किसी भी राजनीतिक प्रयोग से बचें जिससे वामपंथी दलों को फिर से ताकत मिल सके। यह जनमत अतीत को दफन करने का विश्वासमत है। यह जनमत दिखाता है कि बिहार के लोग अपने सुरक्षित भविष्य के लिए NDA पर भरोसा कर रहे हैं। PM मोदी और नीतीश कुमार पर भरोसा कर रहे हैं।

जनता ने स्थिरता और विकास के नाम पर फैसला सुनाया है। यह फैसला सिर्फ NDA के पक्ष में नहीं है बल्कि यह फैसला उस बिहार के पक्ष में है जो आगे बढ़ना चाहता है, जो अपने युवा को अवसर देना चाहता है और जो किसी भी कीमत पर अराजकता के दौर में वापसी नहीं चाहता। 

बिहार चुनाव INDI गठबंधन की अग्निपरीक्षा : महागठबंधन में तनातनी और तेज, RJD की लिस्ट के बाद I.N.D.I.A. में खींचतान, आपस में ही होगी चुनावी लड़ाई

बिहार विधान सभा के 14 नवम्बर को जो भी परिणाम आए, इतना तय है कि ये  INDI गठबंधन के किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं। अगर INDI गठबंधन सरकार नहीं बनाया तो इसका टूटना निश्चित है कोई रोक नहीं पाएगा। अगर सरकार बन भी गयी तो मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर फूट होगी अगर तेजस्वी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया तब भी गठबंधन के तार-तार होने की अटकलों का बाजार बहुत गर्म है। झाड़खंड मुक्ति मोर्चा वो अलग हो गया। अपने दम पर चुनाव लड़ रहा है। हकीकत में गठबंधन को शुरू से कांग्रेस को बाहर रखना था। जिस राहुल को सफल बनाने की कवायत की जा रही है धूल में लठ पीटने से कम नहीं। दूसरे, कांग्रेस अपने साथ गठबंधन को डुबो रहा है। इस समय अरविन्द केजरीवाल सही की सियासत खेल रहे है, जो अपना वजूद बनाए रखने के लिए अपने आपको गठबंधन से अलग कर चुनाव लड़ रहे हैं।     

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे फेज के आखिरी दिन तक INDIA गठबंधन में फूट, टिकट बंटवारे पर नाराजगी और अंदरूनी बगावत और तेज हो गई है। आपसी तनातनी से हालात इतने बदतर हो गए हैं कि महागठबंधन ने राज्य की कुल 243 सीटों पर 254 प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। आरजेडी ने 143, कांग्रेस ने 61, सीपीआई (एम) ने 20, सीपीआई ने 9, सीपीएम ने 6 और मुकेश सहनी की पार्टी ने 15 प्रत्याशी हैं। इस तरह इनकी संख्या 254 हो जाती है। 12 प्रत्याशी एक दूसरे के खिलाफ उतारे हैं। बिहार चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ कि INDIA गठबंधन (महागठबंधन) ने टिकट बंटवारे को लेकर कोई ज्वाइंट प्रेस कॉन्फेंस नहीं की। सभी दल नॉमिनेशन के आखिरी समय तक लिस्ट जारी करते रहे। महागठबंधन में सीएम फेस को लेकर खींचतान अब तक चल रही है। उधर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) अपनी ढपली, अपना राग अलाप रही है। महागठबंधन के सभी घटक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सीट बंटवारा अब तक नहीं हुआ है। एनडीए इस बात को मुद्दा बना चुका है। एनडीए के नेता कह रहे हैं कि महागठबंधन में गांठ पड़ चुकी है। वहीं पप्पू यादव ने तो गठबंधन तोड़ने तक की बात कह दी।

 बिहार में सीटें 243, महागठबंधन ने 254 उम्मीदवार उतारे

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान छह नवंबर और दूसरे चरण का 11 नवंबर को है। अब तक महागठबंधन के सभी दलों ने सीटों का बंटवारा नहीं किया है। ऐसा भी कह सकते हैं कि इस चुनाव में महागठबंधन सीट बंटवारे की घोषणा किए बिना ही चुनावी मैदान में है। सभी दलों ने अपने प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी। राजद ने 143, कांग्रेस ने 60, भाकपा माले ने 20, वीआईपी ने 15, सीपीआई ने नौ, सीपीएम ने चार और आईआईपी ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। यानी कुल मिलाकर 254 सीट। 12 सीटें ऐसी हैं जहां महागठबंधन के सहयोगी एक-दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी फेज के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया खत्म हो गई। चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले फेज के चुनाव के लिए कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं। 300 से अधिक प्रत्याशियों के पर्चे खारिज हो गए। 61 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीटों पर 6 नवंबर और दूसरे फेज की 122 सीटों के लिए 11 नवंबर को मतदान होना है। दूसरे फेज के प्रत्याशियों की स्थिति 23 अक्टूबर तक साफ होगी।
महागठबंधन में एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी समेत सहयोगी दलों में बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। सीट शेयरिंग पर सहमति ना बन पाने से महागठबंधन में कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है, यहां तक कि कार्यकर्ता भी पशोपेश में हैं वे किसका समर्थन करें और किसकी खिलाफत करें? महागठबंधन में पहले ही सीट शेयरिंग को लेकर तनाव है। अब कांग्रेस की कलह भी खुलकर सामने आ गई है। टिकट कटने से नाराज कांग्रेस के एक गुट ने पटना में दावा किया कि ऐसे हालात में जल्द ही महागठबंधन टूटने वाला है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक कांग्रेस प्रदेश प्रभारी की वजह से ही महागठबंधन टूटने के कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने और राहुल गांधी ने सीएम फेस का ऐलान नहीं किया। इससे आरजेदी में दरार पैदा हो गई। इतना ही नहीं कांग्रेस नेताओं ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ की बजाए इसी की तर्ज पर ‘टिकट चोर, पद छोड़’ के नारे भी लगाए।
सहयोगी दलों में सीटों को लेकर मचा घमासान खुलकर सामने आया
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीटों को लेकर कन्फ्यूजन का माहौल बना हुआ है। महागठबंधन में सीटों को लेकर मचा घमासान अब खुलकर सामने आने लगा है। कई सीटों पर सहयोगी दलों के बीच तालमेल बिगड़ गया है। अब हालात ऐसे हैं कि कांग्रेस और आरजेडी जैसे पुराने सहयोगी एक-दूसरे के आमने-सामने उतर आए हैं। पहले चरण के नामांकन के बीच कई सीटें ऐसी हैं जहां गठबंधन की एकता सवालों के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक, बछवाड़ा, वैशाली, गौड़ा बराम, रोसड़ा, लालगंज और राजापाकड़ समेत कई सीटें हैं, जहां अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। कहीं कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, तो कहीं वाम दलों और कांग्रेस के बीच सीट को लेकर असमंजस जारी है।
सांसद पप्पू यादव बोले- इस महागठबंधन तोड़ देना चाहिए
महागठबंधन में पड़े दरार के बाद पूर्णिया के सांसद और खुद को कांग्रेसी घोषित करने वाले पप्पू यादव ने राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो से गठबंधन धर्म निभाने की अपील की है। पप्पू यादव वाकई पप्पू ही है। जिसे राहुल-तेजस्वी यात्रा के दौरान मंच पर ही नहीं चढ़ने दिया फिर भी पिछलग्गू बना फिर रहा है। आखिर और कितने जूते यानि बेइज्जती करवानी है? उन्होंने कहा कि 12 सीटों पर दोहरे उम्मीदवार उतारना गठबंधन की एकता के खिलाफ है। क्या इस तरह गठबंधन चलता है? कांग्रेस को निर्णय लेना चाहिए। जिस तरह से टिकट बाटा गया है, यह बिल्कुल गलत है। मैं बार-बार कह रहा हूं कि गठबंधन को वापस लीजिए। गठबंधन को कमजोर किया जा रहा है। वीआईपी के मुकेश सहनी भी दोतरफा नाराज बताए जा रहे हैं। एक तो उन्हें कम सीटें मिलने से नाराजगी है, दूसरे इंडिया गठबंधन ने उन्हें जो सीटें दी हैं, उनमें से भी कई उनकी मनचाही नहीं है। इसके चलते उनके लिए चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने का संकट पैदा हो गया है।
महागठबंधन में सीटों की खरीद-फरोख्त देख रही है जनता- भाजपा
वहीं बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार के मतदाता महागठबंधन की अंदरूनी लड़ाई और टिकटों की खरीद-फरोख्त को देख रहे हैं महागठबंधन आज तक सीटों का बंटवारा नहीं कर पाया है। कई सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में वह सरकार कैसे चलाएगा? हालात यह है कि इस बार RJD ने तो नॉमिनेशन का समय खत्म होने से 7 घंटे पहले, पहली बार 143 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। इससे पहले उसके प्रत्याशी नॉमिनेशन भरते रहे। पहले फेज के नॉमिनेशन खत्म होने के बाद भी सीट शेयरिंग की घोषणा नहीं हुई थी। तब 10 सीटों पर महागठबंधन की पार्टियों आमने-सामने हैं। राजद ने बाहुबली अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को टिकट दिया है। इस बीच तेजस्वी ने अनीता देवी को पार्टी सिंबल दिया। वो नवादा के वारिसलिगंज से चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस ने इस सीट पर पहले से मंटन सिंह को उतारा है।
महागठबंधन की राह में रोड़ा बने ये अहम सियासी कदम
• RJD इस बार भी सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ रही है, लेकिन कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ शीट शेयरिंग पर तनातनी दिखी।
• कांग्रेस को पिछली बार मिली 66 में से सिर्फ 19 सीटें मिली थीं। इसलिए इस बार उन्हें 61 पर सीमित कर दिया गया।
• CPI(ML) ने पिछली बार शानदार प्रदर्शन किया (19 में से 12 सीटें), इस बार 20 सीटें मिलीं।
• विकासशील इंसान पार्टी (VIP) जो पिछली बार NDA में थी, इस बार INDIA के साथ है। VIP ने जिन 15 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है, उनमें से 2 सीटें ऐसी हैं, जिन पर RJD ने भी अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
• महागठबंधन में टिकट नहीं मिलने से नाराज प्रत्याशियों ने बगावत कर दी और निर्दलीय पर्चा भर दिया। इसमें सबसे प्रमुख नाम है 2020 में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली रितु जायसवाल का। इस बार राजद ने उनका टिकट काट दिया। इसलिए उन्होंने निर्दलीय अपना पर्चा भरा है।
कई सीटों पर महागठबंधन के भीतर ही आपस में ही मुकाबला
हालात यह हैं कि पहले चरण में आरजेडी ने 62 सीटों पर और कांग्रेस ने 24 सीटों पर नामांकन दाखिल किए हैं। हालांकि, सीटों को लेकर सहमति न बन पाने के कारण कई जगहों पर गठबंधन के भीतर ही मुकाबला देखने को मिल रहा है। कांग्रेस ने रोसड़ा से तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी बीके रवि को अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन उनके खिलाफ शुक्रवार को भाकपा प्रत्याशी लक्ष्मण पासवान ने यहां से अपना पर्चा दाखिल कर दिया। 2020 में यहां से कांग्रेस के नरेंद्र कुमार विकल चुनाव लड़े थे। इसी प्रकार राजापाकड़ सीट से कांग्रेस की वर्तमान विधायक प्रतिमा दास उम्मीदवार हैं और अपना नामांकन दाखिल कर चुकी हैं। इसके बावजूद सीपीआई से मोहित पासवान ने भी शुक्रवार को यहां से अपना पर्चा दाखिल कर दिया है।

केरल : सबरीमाला मंदिर के तीर्थयात्रियों को शौचालय के पानी में पका खाना खिला रहा था CPIM नेता अब्दुल, रंगे हाथों पकड़ाया

केरल में सत्ताधारी CPIM के यूथ विंग के नेता अब्दुल शमीम पर सबरीमाला मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को शौचालय के पानी में पका हुआ भोजन परोसने का आरोप लगा है। अयप्पा सेवा संघ का दावा है कि शमीम को ऐसा करते हुए उसने रंगे हाथों पकड़ा है। राजस्व सतर्कता दस्ते और स्वास्थ्य विभाग ने आरोपित अब्दुल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

केरल CPIM यूथ विंग नेता अब्दुल शमीम पर सबरीमाला के भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए खाना पकाने में शौचालय का पानी इस्तेमाल करने का आरोप (फोटो साभार:द इंडियन एक्सप्रेस)
दरअसल एरुमेली में अब्दुल शमीम द्वारा एक फूड स्टॉल चलाया जा रहा था। यह फूड स्टॉल केरल के प्रतिष्ठित सबरीमाला मंदिर के रास्ते में हैं। जिस समय तीर्थयात्रा को लेकर भीड़ रहती है, उस समय बड़ी संख्या में तीर्थयात्री अब्दुल के फूड स्टॉल वाले रास्ते से गुजरते और यहाँ खाना भी खाते हैं।

रास्ते में पड़ने वाले इस इलाके का अयप्पा सेवा संघ ने जायजा लिया। संघ का दावा है कि इस स्टॉल में शौचालय के पानी में पका हुआ भोजन तीर्थयात्रियों को परोसा जा रहा है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि ये फूड स्टॉल चाय और नींबू का जूस बनाने के लिए पानी का इस्तेमाल बगल के एक शौचालय से एक पाइप के जरिए कर रहा था।

                   अब्दुल शमीम के फूड स्टॉल में शौचालय से जा रहा पानी का पाइप (फोटो साभार: Republic)

रिपब्लिक टीवी के मुताबिक, बगल के बाथरूम से निकल कर नीले रंग की एक पाइप पेय पदार्थ बेचने वाले स्टॉल तक गई है। शुरू में स्टॉल के मालिक ने दावा किया कि शौचालय के पानी का इस्तेमाल केवल बर्तन धोने के लिए किया जाता था, खाना पकाने के लिए नहीं। वहीं, सामने आए सबूत कुछ और ही कह रहे थे।

अयप्पा सेवा संघ को इस फूड स्टॉल पर तब शक हुआ, जब आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैलनी शुरू हो गई। संघ ने खुलासा किया कि फूड स्टॉल अब्दुल चला रहा था। अब्दुल इस इलाके में सीपीआईएम की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) का सचिव है।

यह भी पता चला कि आरोपित लगभग दो हफ्ते से भगवान अयप्पा के पास दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को शौचालय के पानी का इस्तेमाल करके बनाया हुआ खाना परोस रहा था। इसके बाद, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर इस फूड स्टॉल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के बाद फूड स्टॉल को स्टॉप मेमो जारी किया गया है। एरुमेली के विशेष राजस्व दस्ते के प्रभारी अधिकारी एवं उप तहसीलदार बीजू जी नायर के मुताबिक, जाँच अभी जारी है। नायर ने कहा कि आने वाले दिनों में और निरीक्षण करने का प्लान किया गया है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में जवाबदेही फूड स्टॉल मालिक से आगे भी है। उप तहसीलदार नायर ने कहा कि इस मामले में उस ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिसने शौचालय के नल से पाइप कनेक्शन की मंजूरी दी थी।

वहीं, मनोरमा ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्व विभाग की एक सतर्कता टीम ने सबरीमाला तीर्थयात्रियों का खाना बनाने के पानी के लिए टॉयलेट के नल से पाइप जोड़ने के काम में फूड स्टॉल विक्रेता को पकड़ा था। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत दखल देते हुए इस अस्थाई दुकान को बंद कर दिया और लाइसेंसधारक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

इस दुकान को गैर-खाद्य वस्तुएँ बेचने के लिए अस्थाई लाइसेंस दिया गया था। हालाँकि, ये विक्रेता उसका नियम का भी उल्लंघन कर रहा था। इसे लेकर पुलिस को बार-बार कॉल करने के बाद भी कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस टीम मौके पर मौजूद थी, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया। वहीं, भाजपा की स्थानीय इकाई ने आरोप लगाया कि सीपीआईएम और कॉन्ग्रेस दुकान मालिक को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके कारण मामला दर्ज नहीं हो रहा है।

I.N.D.I. गठबंधन की कमिटी से CPI(M) ने खुद को अलग किया, कहा – ये कोई पार्टी थोड़े है

                                    सीपीआई(एम) के महासचिव सीताराम येचुरी (फोटो साभार : हिंदुस्तान टाइम्स)
NDA के मुकाबले खड़ा किया गया I.N.D.I. गठबंधन का दम अभी से फूलता सा दिख रहा है। पंजाब-दिल्ली में कॉन्ग्रेस-आप की सिर-फुटौव्वल शुरू होने के बीच ही सबसे बड़े वामपंथी दल ने भी अपने तेवर दिखा दिए हैं। CPI(M) ने कहा है कि इंडी गठबंधन कोई पार्टी थोड़े ही है, ये सिर्फ प्लेटफॉर्म है। हालाँकि, उसने इस गठबंधन से अलग होने से अभी तो मना कर दिया है, लेकिन उसने खुद को इस गठबंधन के सबसे अहम समूह कोऑर्डिनेशन कमेटी से खुद को अलग कर लिया है। ये कमेटी ही गठबंधन के कामों को आगे बढ़ाने का काम करती है।

लोकसभा चुनाव में साथ, पश्चिम बंगाल में खिलाफ!

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीपीआई(एम) के पोलित ब्यूरो ने साफ कर दिया है कि वो इंडी गठबंधन के कोर्डिनेशन कमेटी से दूर रहेगी। हालाँकि, बाकी कमिटियों में वो शामिल रहेगी। वहीं, पार्टी के सूत्रों के हवाले कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस का विरोध किया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल में पार्टी के नेता चाहते हैं कि वो सिर्फ कॉन्ग्रेस और इंडियन सेकुलर फ्रंट के साथ ही गठबंधन करे और टीएमसी का विरोध करे।
पोलित ब्यूरो की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि CPI(M) की शीर्ष कमेटी ने फैसला किया है कि भारत गणराज्य के सेक्युलर और लोकतांत्रिक पहचान को बचाने की लड़ाई में I.N.D.I.A. ब्लॉक के साथ हैं। ये संविधान, लोकतंत्र, लोगों के मौलिक अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता को बचाने की लड़ाई है। कहा गया है कि इसमें जरूरी है कि भाजपा को केंद्र और राज्य सरकारों की सत्ता से दूर रखा जाए। पोलित ब्यूरो ने इन कोशिशों का साथ देने का फैसला किया है।

कई पार्टियाँ आपस में लड़ेंगी

प्रेस रिलीज में आगे लिखा गया, “जो पार्टियाँ नैतिक और राजनीतिक रूप से एक जैसी नहीं हैं, वो भी मंच साझा कर रही हैं, क्योंकि उनके पास भाजपा को हराने का एक साझा एजेंडा है। लेकिन, भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में आपको यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि सभी दल सभी मुद्दों पर एकजुट होंगे। पंजाब में आम आदमी पार्टी कॉन्ग्रेस के खिलाफ लड़ेगी। दिल्ली में भी ऐसा ही होगा। पश्चिम बंगाल में हम टीएमसी के खिलाफ लड़ेंगे। केरल में सीपीआई (एम) कॉन्ग्रेस के खिलाफ लड़ेगी।”

छोटी समितियों में सीपीआई(एम) के सदस्य शामिल

सीपीआई (एम) ने गठबंधन की अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण समितियों जैसे अभियान समिति और सोशल मीडिया समिति में सदस्यों को नामित किया था, लेकिन अटकलें तब शुरू हुईं जब उसने समन्वय समिति में किसी को नहीं भेजा, जिसने 13 सितंबर को दिल्ली में अपनी पहली बैठक की और निर्णय लिया।