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राजभवन में ‘भारत माता’ का पोस्टर देख भड़के केरल के 2 कम्युनिस्ट मंत्री, कार्यक्रम का किया बहिष्कार: राज्यपाल बोले- तस्वीर नहीं हटेगी, आपको जाना है तो जाओ

 

केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर भारत माता की फोटो पर पुष्प चढ़ाते हुए (बाएँ), कृषि मंत्री पी प्रसाद (दाएँ), (फोटो साभार : Hindustan Times & The New Indian Express)
केरल में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर राजभवन में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में ‘भारत माता’ की तस्वीर वाम मोर्चा (LDF) सरकार की आँखों में चुभ गई और सरकार ने तस्वीर हटाने को लेकर अड़ियल रवैया अपनाया। इसके अलावा कृषि मंत्री पी प्रसाद और शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने शर्मनाक तरीके से कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया।

अपने चैनलों पर चौपाल लगाने वाले एंकर और चैनल मालिकों को अपनी TRP के चक्कर में जो वामपंथियों को बुलाते हैं शर्म आनी चाहिए। वामपंथी वही पार्टी है जिसने 1962 में चीन के विरुद्ध युद्ध में घायल भारतीय जवानों को खून देने से मना कर दिया था। 

पिनाराई विजयन की सरकार में दो मंत्रियों ने मंच पर लगी ‘भारत माता‘ की तस्वीर को हटाने के लिए जोर दिया, जिसको राज्यपाल ने नहीं माना। इस पर कृषि मंत्री पी प्रसाद ने कहा कि RSS से जुड़ी ‘आईकोनोग्राफी’ वाली यह तस्वीर मानी नहीं जाएगी।

सरकार ने अपनी मानसिकता का परिचय देते हुए राजभवन के कार्यक्रम को छोड़कर अपना आधिकारिक समारोह सचिवालय के दरबार हॉल में शिफ्ट कर लिया। दूसरी ओर, राज्यपाल ने अकेले ही ‘भारत माता’ की तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की गरिमा को बनाए रखा। यह मामला केरल सरकार की राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सरकार का गैर-जिम्मेदाराना रुख

विश्व पर्यावरण दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर, जब देश और समाज को एक साथ आना चाहिए था, केरल सरकार ने एक तस्वीर पर आपत्ति जताकर राजनीतिक द्वेष को प्राथमिकता दी। कृषि मंत्री पी प्रसाद ने खुले तौर पर कहा कि RSS से जुड़ी ‘आइकॉनोग्राफी’ वाली यह तस्वीर स्वीकार्य नहीं है। यह बयान दर्शाता है कि केरल सरकार एक राष्ट्रीय प्रतीक को भी अपनी राजनीतिक विचारधारा के चश्मे से देखती है।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भले ही सीधे तौर पर बयान न दिया हो, लेकिन यह जानकारी सामने आई है कि कृषि मंत्री ने उनकी सहमति से ही राजभवन के कार्यक्रम का बहिष्कार किया। यह मुख्यमंत्री की मौन स्वीकृति को दर्शाता है, जिससे सरकार की मंशा पर संदेह गहराता है।

राज्यपाल ने क्या कहा?

राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर इस बात से खुश नहीं थे कि मंत्री ने ‘भारत माता’ की तस्वीर हटाने को कहा। राज्यपाल ने बताया कि उन्हें मंत्री के दफ्तर से कहा गया था कि ‘भारत माता’ की तस्वीर हटा दी जाए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
राज्यपाल का कहना था कि ‘भारत माता’ उनके लिए बहुत अहम हैं, एक आदर्श हैं, और वे उन्हें हटा नहीं सकते। राज्यपाल ने यह भी बताया कि राजभवन में ‘भारत माता’ की तस्वीर लगाने का ये चलन उनके राज्यपाल बनने के बाद ही शुरू हुआ है।
यह पूरा विवाद ‘भारत माता’ की तस्वीर के इस्तेमाल को लेकर है, जिसे लेफ्ट सरकार RSS की विचारधारा से जोड़कर देख रही है, जबकि राज्यपाल इसे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बता रहे हैं. इस घटना से राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच के रिश्ते फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं।


खड़गे साहब अरुणाचल प्रदेश पर बोलने से पहले अपने गिरेबान में झांको; कांग्रेस और “नेहरू” ने क्या किया? कांग्रेस ने तो देश के साथ “गद्दारी” की है

सुभाष चन्द्र

कल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर विदेश नीति पर अपना ज्ञान पेलने की कोशिश करते हुए कहा है कि “मोदी सरकार अरुणचल प्रदेश पर चीन के दावे का कड़े तरीके से खंडन करे। चीन के हास्यास्पद दावे जगजाहिर हैं और इसका माकूल जवाब देना जरूरी है सरकार से माकूल जवाब की अपेक्षा रखते हुए यह भी कहा कि दलगत राजनीति से इतर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में हम साथ हैं”

खड़गे साहब एक तरफ आप सरकार के साथ होने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ आप उसी चीन की communist party के साथ MOU साइन करके उसके साथ खड़े रहते हों और हर मामले में सरकार का विरोध करते हो
लेखक 
 ये जो बयान आपने दिया उसके साथ आपने गलवान में सरकार की आलोचना भी कर दी और 20 जवानों के बलिदान पर मोदी को दोष देते हुए यह भी कह दिया कि मोदी ने चीन को उसके लिए clean chit दी थी जबकि मोदी ने ऐसा कुछ नहीं कहा और कांग्रेस ने उनके बयान को आधा अधूरा पेश किया मोदी ने कहा था भारतीय क्षेत्र में कोई विदेश नहीं है जिसका मतलब था चीनी सैनिको को पछाड़ कर भगा दिया है हमारे सैनिको ने 

खड़गे साहब को याद होना चाहिए कि मनमोहन सिंह ने अपनी अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर चीन के विरोध के बाद एक बार कुछ समय के लिए स्थगित कर दी थी उसके बाद फिर जाने का कार्यक्रम बनाया था कांग्रेस शासन में चीन अरुणाचल के लोगों को Stappled Visa देता था कांग्रेस के रक्षा मंत्री अंटोनी ने संसद में कहा था कि चीन से लगते बॉर्डर पर हम सड़कें नहीं बनाते क्योंकि उन सड़कों पर चल कर ही चीनी सैनिक घुसपैठ करेंगे

आज मोदी सरकार ने चीन से लगे पूरे बॉर्डर पर सड़कों का जाल बिछाया है और infrastucture का निर्माण किया है जिसमे हाल ही निर्मित 13000 feet की ऊंचाई पर Sela Tunnel भी शामिल है क्या कभी कांग्रेस ने ऐसा करने की जरूरत समझी और खड़गे जी बात करते हैं चीन के दावे का “कड़े तरीके से खंडन” करने की मनमोहन सिंह की यात्रा के बाद भी चीन के एतराज के बाद कांग्रेस सरकार ने इतना ही खंडन किया था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है अगर इतना खंडन काफी था तो आज कैसा खंडन चाहते हो क्योंकि इससे ज्यादा तो मोदी सरकार कर चुकी है

आज़ादी से पहले के छोड़िए, आज़ादी के बाद “नेहरू कालखंड” में जो भी चीन को “उपहार” में दे दिया गया और 4000 से जयादा सैनिक मरवा दिए गए, उस पर भी कभी बात किया करें खड़गे और कांग्रेस के नेता - क्या क्या दिया गया ये भी सुनो खड़गे साहब -

-चीन को UN की veto दे दी;

-ढोकलाम 1958;

-लोंगजू 1959;

-अक्साई चिन 1962;

-गलवान 1962;

-हॉट स्प्रिंग 1962;

-काराकोरम पास 1963;

“नेहरू कालखंड’ के बाद -

-कोको आइलैंड 1994;

-Tia Pangnak 2008 (मनमोहन सरकार में);

-Chabji Valley 2008 (मनमोहन सरकार में);

-Doom Valley 2009 (मनमोहन सरकार में);

-Demzok 2012 (मनमोहन सरकार में);

-Raki Nalla 2013 (मनमोहन सरकार में);

-Depsang Bulge (मनमोहन सरकार में);

इनके बारे में कभी कुछ नहीं बोलते और मोदी को पढ़ा रहे हो “कड़े तरीके से खंडन” करना क्या होता है? मनमोहन सिंह सरकार में जो भी चीन ने कब्जाया वह Congress-CPC के MOU के बाद हुआ कांग्रेस ने तो देश के साथ “गद्दारी” की है