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उमर खालिद से शरजील इमाम तक, जंतर-मंतर पर Gen Z की रील्स में ही देशविरोधी इरादों का खुलासा


कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर पर चल रहे धरने में प्रदर्शनकारियों में छात्र भी हैं, लेकिन केवल छात्र भर ही नहीं है। सिमी के फाउण्डर से लेकर उमर खालिद, शरजील समर्थक तक सब हैं। ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ वाली पूरी ढपली गैंग, लेफ्ट लिबरल गैंग और पूरी तरह एक्सपोज्ड केजरीवाल टीम भी। देशविरोधी तत्व भी हैं और मोदी सरकार के सियासी विरोधी भी। जंतर-मंतर पर Gen Z के बयानों की रील्स से ही देशविरोधी इरादों का खुलासा हो गया है। पेपरलीक पर प्रदर्शन करने वालों का शर्मनाक और एक संगठित गिरोह है। इसे नेस्तनाबूद करना जरूरी है। दरअसल, नीट पेपरलीक से शुरू हुए आंदोलन का स्वरूप और स्वर धीरे-धीरे बदल गए हैं। परीक्षा सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और युवाओं के भविष्य जैसे मूल मुद्दे पीछे छूटने लगे हैं, जबकि भारत विरोधी, सरकार विरोधी, भाजपा विरोधी, संघ विरोधी, वैचारिक संघर्ष और राजनीतिक नारे केंद्र में आ गए हैं। इससे सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं छात्रों का हुआ है, जिनके लिए आंदोलन शुरू हुआ था।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन किसी भी जनआंदोलन की विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि वह अपने मूल उद्देश्य पर कितना केंद्रित रहता है। अब ये आंदोलनकारी नहीं, बल्कि उपद्रवकारी बनकर कह रहे हैं कि उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे देशद्रोहियों को रिहा करना होगा।

छात्र हितों के नाम पर आंदोलन करने वालों का एजेंडा सामने आने लगा है कि बीजेपी के फोलोअर्स कम करो। ये यहां पर छात्र हितों की बातें कम और बीजेपी-संघ का विरोध करने वाली बातें ज्यादा करते हैं।

छात्र हितों की बात करने के नाम पर जंतर मंतर पर ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारे लग रहे हैं। इससे युवाओं को खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि यहां पर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद या बीजेपी-आरएसएस हो बर्बाद के नारे लगे तो वे इनका यहीं पर इलाज कर देंगे।

जंतर मंतर पर कॉकरोचों की भीड़ में कई ऐसे कॉकरोच भी शामिल हैं, जो न छात्र हैं, न उनका नीट से कोई लेना देना है। न उनको मुद्दे का पता है। बस जंतर-मंतर पर पहुंच गए और बंट रहे मास्क को पहनकर खुद भी कॉकरोच बन गए। 

जंतर मंतर पर जमा जेन जी को छोड़िए कॉकरोज जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके तक गलत नैरेटिव सैट करने में पीछे नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और लड़कियों के पुलिस ने फोटो खींचे और खुद लड़कियों के साथ सेल्फी खिंचवाकर हीरोगिरी करते नजर आए।

जंतर मंतर के मंच पर अब हिंदू-मुस्लिम भी होने लगा है। आंदोलनरत होने के बजाए जेन जी वहां मस्ती में गा रही है- बस नाम रहेगा अल्लाह का! ये दिखावे भर के लिए छात्र हितैषी होने का दम भरते हैं। असल में तो यह लेफ्ट लिबरल गैंग से ही हैं।

जंतर-मंतर में कॉकरोचों की पैरवी में दिन रात एक कर रहे जेन जी कॉकरोचों को उस NEET का फुल फॉर्म तक नहीं मालूम है, जिसके लिए उन्होंने एक महीने बवाल मचाया हुआ है। 

मैडम जी, मैं तो बस यूं ही सपोर्ट करने आ गया। मैं कोई पढ़ाई-वढ़ाई नहीं करता हूं। मैं तो जॉब करता हूं। मुझे तो कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता का नाम तक नहीं मालूम है।

जंतर-मंतर पर इस बंदे ने तो सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का भी एजेंडा खोलकर रख दिया। जम्मू-कश्मीर का रहने वाला सोनम क्या यह कभी कश्मीरी पंडितों पर हमले के खिलाफ धरने पर बैठा। क्या यह कभी आतंकियों के खिलाफ धरने पर बैठा। क्यों नहीं बैठा, क्योंकि उस समय कोई एजेंडा नहीं था।

ये कॉकरोच जनता पार्टी नहीं है, बल्कि असल में टुकड़े-टुकड़े गैंग है। इसमें भारत से ही नहीं, बल्कि अमेरिका और विदेशों से भी लोग आए हैं। ये बांग्लादेशी हैं, ये नारे लगा रहे हैं कश्मीर की आजादी-भारत की बर्बादी। इनका भारत से कोई लेना-देना नहीं है।

जंतर मंतर पर जमा जेन जी को कुछ भी पता नहीं कि मुद्दा कहां से शुरू हुआ। पार्टी कैसे अस्तित्व में आई। जेन जी ने कहा कि मंत्री ने हमें कॉकरोच बोला है। जब इनसे पूछा कि किस मंत्री ने तो चुप्पी साध ली।

विपक्ष इनको निर्दोष बच्चे बता रहा है, जबकि जंतर-मंतर पर एक आंदोलनकारी महिलाओं को अश्लील इशारे करता नजर आया। महिला पत्रकार से बदसलूकी का मामला भी सामने आया है।

अभिजीत दीपके को पांच बजे तक परमीशन मिली थी, लेकिन दो बजे ही भाग छूटा। मतलब पसीने छूट गए, एसी में बैठाया। ये वहां का वाशरूम इस्तेमाल नहीं करता। वहां खाना नहीं खाऊंगा, फाइव स्टार का खाना खाऊंगा। मैं अनशन पर नहीं बैठूंगा, सोनम अनशन करें। असल में यह जार्ज सोरोस फंडेड हैं। जो लोग नीट के पेपर लीक पर राजनीति कर रहे हैं, उन्हे चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी के कर्ताधर्ता अभिजीत दीपके को अब निहंगों ने भी चेतावनी दे दी है। उन्होंने साफ-साफ कहा के कि दीपके या तो तत्काल माफी मांग ले, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

 

जनता कॉकरोचों का मजाक बना रही है और कॉकरोचों का मुखिया अपने ही समर्थकों का मजाक उड़ाने में मशगूल है। अभीजीत दीपके एक वीडियो में तंज कसते नजर आता है और कहता है- सबसे फनी चीज क्या है कि मैं सुबह उठता हूं तो ये लोग चिल्लाना शुरू कर देते हैं। धर्मेंद्र प्रधान आउट। मैं कहता हूं अरे अभी उठने तो दो। इनका बस चले तो ये प्रधान को भी न उठने दें।

बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं कि अगर मुद्दा शिक्षा व्यवस्था है तो इसका मोदी को पीटेंगे…मोदी को उखा फेंकेगे इससे क्या लेना-देना है। मोदी का लास्ट डे होगा- इसका शिक्षा व्यवस्था से क्या लेना-देना है। और  प्रेमानंद महाराज पाखंडी हैं इसका शिक्षा से क्या लेना-देना है। वहां गाना गाया जाता है कि नाम रहेगा अल्लाह का….इसका धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या लेना-देना है।

कॉकरोचों के बर्बर आंदोलन की पोल कांस्टेबल अंकित कसाना ने खोली। वे आंदोलनकारियों की पत्थरबाजी में जख्मी हो गए थे। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शांत रखने के लिए कहा गया था। लेकिन अचानक हम पर पथराव शुरू हो गया। यह पथराव सुलभ शौचालय की छत से पत्थरबाजी हो रही थी। टाइलों को घिस-घिसकर वैपन के रूप में फेंक रहे थे। वे किसी भी तरह छात्र नहीं लग रहे थे। से वे लोग तो मुझे जान से मारने वाले थे।

पाकिस्तान : मुस्लिम Gen Z ने खोली पोल, फौज-सरकार ने लेख डिलीट करवा खुद के पैर पर मारी कुल्हाड़ी

                                            पाकिस्तानी छात्र का लेख सेना ने किया डिलीट
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख अमेरिका को ‘खुश’ करने में लगे हैं। वहाँ जोरदार लॉबिंग की जा रही है ताकि छवि सुधारी जा सके। ऑपरेशन सिंदूर के बाद हर महीने $50,000 यानी 45 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। छवि सुधारने में अब तक 9 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। लेकिन Gen Z हुक्मरानों को ये बता रहे हैं कि ‘तुमसे ना हो पाएगा’।

तंगहाली के बीच लॉबिंग में खर्च किए करोड़ों

FARA के दस्तावेज बता रहे हैं कि पाकिस्तान सरकार और उसके थिंक टैंक अमेरिका में अपनी छवि सुधारने में लगे हुए हैं। इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने यूनाइटेड स्टेट्स में लॉबिंग और पब्लिक पॉलिसी आउटरीच पर $900,000 यानी ₹80864097.30 खर्च किए। इस दौरान पाकिस्तानी दूतावास ने अमेरिकी फर्म एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटजी ग्रुप LLC के साथ समझौता किया, ताकि हर अमेरिकी सांसद, अधिकारियों और नीति बनाने वालों तक पहुँच बन सके। मीडिया में नैरेटिव बदलने के लिए एक अमेरिकी कंपनी, कॉर्विस होल्डिंग इंक को लगाया गया ताकि पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाया जा सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने के लिए अमेरिकी दौरे के दौरान आर्मी चीफ आसीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रेयर अर्थ मिनरल्स भी गिफ्ट किए। इसका नतीजा ये रहा कि रेयर अर्थ मिनरल्स और मेटल्स पर पाकिस्तान और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच करार हुआ। दस्तावेज में खोज, माइनिंग, प्रोसेसिंग और ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर सहयोग के बारे में बताया गया है, जिसकी $1 ट्रिलियन यानी करीब 8.9 लाख करोड़ रुपए तक इंडिकेटिव कमर्शियल वैल्यू होगी।

बुजुर्गों की इतनी ‘कोशिश’ के बावजूद Gen Z इन्हें देश के लिए ‘बेकार’ बता रहे हैं।

बगावत के लिए तैयार पाकिस्तान के Gen Z

पाकिस्तान के Gen Z का गुस्सा भड़क रहा है। ये लोग सत्ता पर काबिज नेताओं और सेना के अधिकारियों को चुनौती दे रहे हैं। सेना ने एक वायरल लेख को हटवा दिया है, जिसमें उनकी पोल पट्टी खोली कर रख दी गई थी।

देश के हर हिस्से में हो रहे विरोध को कुचलने वाली असीम मुनीर की सेना को एक लेख ने विचलित कर दिया। कैसे पाकिस्तान के सोशल मीडिया यूजर इस मुद्दे पर अपनी सरकार-सेना को घेर रहे हैं, ट्विटर पर इस ट्रेंड को देख कर समझा जा सकता है।

इसमें कहा गया है कि ‘जितना चाहें, आप लोगों को लड़वाएँ’, जेन जी इस पर मीम बनाएगा। दरअसल अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ अर्कांसस में PhD स्टूडेंट जोरैन निजमानी के एक लेख को डिलीट कर दिया गया। इसमें उसने पाकिस्तान के हुक्मरानों को साफ-साफ बताया था कि Gen Z अब उनकी बातों में आने वाला नहीं है और न ही उनके झूठे दावों को मानने वाला है।

इसमें बताया गया है कि नौजवान और जेन जी अब पुराने नेताओं की बातों में नहीं आने वाले हैं। पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था से यह बगावत की शुरुआत है। लेख देखते ही देखते वायरल हो गया। इससे घबराकर लेख को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया।

पाकिस्तान में अब Gen Z बगावत करने जा रहे हैं। इस बगावत में हिंसा नहीं बल्कि विचार है। विचारों को रोकने के लिए पाकिस्तानी शासन के प्रयास को भी ये लेख बता रहा है। जबरदस्ती चुप करने की कोशिश की जा रही है। बगावत की शुरुआत एक युवा पाकिस्तानी छात्र के विचार से शुरू हुआ है। उसने बताया है कि कैसे देश की युवा पीढ़ी पुराने नेताओं के आदेश मानना ​छोड़ चुकी है।

लेख में साफ कहा गया है कि “आप जितना चाहे उतना लड़ाइयाँ करवा सकते हैं, Gen Z उससे मीम बनाएगा। सभी मेनस्ट्रीम मीडिया को सेंसर कर दो, Gen Z अपनी राय बताने के लिए रंबल, यूट्यूब और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर चला जाएगा। बूमर्स, अब आप विचारों को सेंसर नहीं कर सकते। वे दिन गए जब आप लोगों को बेवकूफ बना सकते थे। अब किसी को बेवकूफ नहीं बनाया सकता है।”

यह लेख एक्सप्रेस ट्रिब्यून के डिजिटल एडिशन पर था, जो अब मौजूद नहीं है यानी जैसा लेखक जोरैन निजमानी ने कहा, ठीक वैसा ही हुआ है। यहाँ सच बताने के लिए यूट्यूब से लेकर दूसरे सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। चैनल पर सेना प्रमुख असीम मुनीर और शहबाज सरकार के खिलाफ खबरें आनी बंद हो गई हैं। इस पर ही Gen Z कह रहा है कि इस तरह की घटिया तरीकों से हुक्मरान नहीं बच सकते। सच को ज्यादा देर तक दबाया नहीं जा सकता।

पाकिस्तानी सेना के हुक्म से हटाया गया लेख

अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी PhD स्टूडेंट जोरैन निजमानी का ‘इट इज ओवर’ टाइटल वाला यह लेख असल में 1 जनवरी को एक जाने-माने पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर था। हालाँकि कुछ घंटों बाद ही इसे हटा दिया गया। इसके पीछे पाकिस्तान की आर्मी का दबाव था।

दरअसल निजमानी जेन जी के बीच इस लेख की वजह से ‘हीरो’ बन गया। लेख पर रोक के बाद इसका स्क्रीन शॉट जेन जी शेयर कर रहे हैं। जेन जी का गुस्सा आसीम मुनीर की पाकिस्तानी आर्मी पर दिख रहा है। इसे सेंसरशिप कहा जा रहा है और बेबाक लेखन के लिए एक्टर फाजिला काजी और कैसर खान निजमानी के बेटे जोरैन निजमानी की तारीफ की जा रही है।

देशभक्ति जबरन पढ़ाई-सिखाई नहीं जाती- जोरैन निजमानी

लेख में बताया गया है कि पाकिस्तान के सत्ताधारी वर्ग का अब युवा पीढ़ी पर अपना असर खत्म हो गया है। देश के हुक्मरान देशभक्ति को बढ़ाने के लिए स्पॉन्सर लेक्चर, सेमिनार और कैंपेन चला रहे हैं, इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। सरकार के ये सारे प्रयास बेकार हैं।

उन्होंने लिखा, “सत्ता में बैठे बड़े-बूढ़ों पर से युवा पीढ़ी यकीन नहीं कर रही है। ये लोग समझ रहे हैं कि सत्ताधारी बस आम जनता को बरगला रहे हैं। ये लोग स्कूलों और कॉलेजों में देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए चाहे कितने भी वाद-विवाद और सेमिनार कर लें, यह काम नहीं कर रहा है।”

सेना का नाम लिए बिना सारी बातें कही गई है। पीएचडी छात्र निजमानी कहते हैं कि देशभक्ति भाषणों या नारों से नहीं सिखाई जा सकती, बल्कि यह अपने आप बढ़ती है, जब नागरिकों को समान अवसर, भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर, काम करने वाले सिस्टम और गारंटी वाले अधिकार दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा, “जब बराबर मौके, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और अच्छे सिस्टम हों तो देशभक्ति अपने आप आती ​​है। जब आप आम जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरी करते हैं। उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि उनके अधिकार सुरक्षित हैं, तब आपको स्कूलों या कॉलेजों में जाकर देशभक्ति सिखाने की जरुरत नहीं होती। लोग खुद ही अपने देश को पसंद करते हैं।”

पाकिस्तानी सच्चाई को बता रहा ये लेख हुक्मरानों को इतना कड़वा लगा कि उन्होंने इसे हटवा दिया, क्योंकि जनता असलियत को समझ रही है। हालाँकि लेख Gen Z और Gen Alpha को सेंटर में रख कर लिखा गया है।

इसमें कहा गया है, “युवा दिमाग, Gen Z, Alphas अच्छी तरह जानते हैं कि क्या हो रहा है। देशभक्ति के विचार को ‘बेचने’ की कोशिशों को वे अच्छी तरह समझ रहे हैं। इंटरनेट की वजह से, हमारे पास जो भी थोड़ी बहुत एजुकेशन बची है, उसकी वजह से लोगों तक बातें पहुँच रही हैं। वरना लोगों को अनपढ़ रखने की सत्ता पर बैठे लोगों ने पूरी कोशिश की, लेकिन फेल हो गए। हालाँकि जनता अपनी बात डर की वजह से नहीं कह पा रही है, क्योंकि उसे साँस लेना ज्यादा पसंद है।”

इंटरनेट और सोशल मीडिया ने दुनिया की जानकारी लोगों तक पहुँचाना आसान बना दिया है, इसलिए लोगों की सोच को कंट्रोल नहीं किया जा सकता। युवाओं में काफी बेचैनी है, जो लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने आगे कहा, “युवा समझ रहे हैं कि वे सत्ता में बैठे लोगों को चैलेंज नहीं कर सकते, इसलिए देश छोड़ रहे हैं। वे चुपचाप निकल जाना पसंद करेंगे। पीछे मुड़कर भी नहीं देखेंगे क्योंकि उनके दोस्तों ने आवाज उठाई तो उन्हें चुप करा दिया गया।”

पाकिस्तान में लेख हटाने का हो रहा विरोध

डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेख हटाने का पाकिस्तान में काफी विरोध हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की कनाडाई विंग ने दावा किया कि आर्टिकल हटाने से यह पक्का हो गया है कि जबरदस्ती की देशभक्ति अब काम नहीं करती।

पार्टी ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “ज़ोरेन निज़ामानी का आर्टिकल ‘इट इज ओवर’ को हटाया जाना, ये बताता है कि पाकिस्तान का सच क्या है। जबरदस्ती की देशभक्ति अब काम नहीं करती। Gen Z करप्शन, गैर-बराबरी और दोहरे चरित्र को समझती है। इंसाफ़, नौकरी और इज्जत के बिना प्रोपेगैंडा फेल हो जाता है। पुराने कंट्रोल के तरीके खत्म हो गए हैं, युवा आगे बढ़ गए हैं।”

पाकिस्तानी एक्टिविस्ट मेहलका समदानी ने लिखा, “हैरानी की बात नहीं है कि यह लेख अब एक्सप्रेस ट्रिब्यून के डिजिटल एडिशन से एक्सेस नहीं हो रहा है – ठीक वैसी ही सेंसरशिप जिसके बारे में ज़ोरेन बात करते हैं।”

वकील अब्दुल मोइज़ जाफ़री ने कहा, “यह बहुत बढ़िया लेख है। पाकिस्तान में अपनी नौकरी में फेल हो रहे हर जवान से लेकर हर बूढ़े आदमी के दिल से लिखा गया है।” पाकिस्तान की मानवाधिकार आयोग ने भी लेख हटाने की आलोचना की है और कहा है कि एक्सप्रेस ट्रिब्यून से जोरीन निजमानी का लेख हटाना पाकिस्तान में बोलने की आजादी पर बढ़ती पाबंदियों का उदाहरण है।

पाकिस्तान की ये हालत है कि बलूचिस्तान, पीओके समेत कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। खाने-पीने के लाले पड़े हैं। आम जनता को दो जून की रोटी नसीब नहीं हो रही। सबकुछ काफी महँगा हो गया है। देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। इस बीच जेन जी का गुस्सा भड़कने लगा है। हुक्मरानों के ऐशो आराम जेन जी को दिख रहे हैं। ऐसे में भारत का एक और पड़ोसी देश जेन जी के गुस्से का शिकार होने के लिए तैयार है।