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काशी में ज्ञानवापी मस्जिद का अंजाम क्या होगा, भविष्य के गर्भ में छुपा है, लेकिन मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ सुरताल वह लोग मिला रहे हैं जो चुनाव में अपनी जमानत भी नहीं बचा सकता। बाबरी विवाद में भी यही हुआ था जब मुस्लिमों से अधिक भारतीय संस्कृति के दुश्मन जयचन्दी हिन्दू विरोध कर रहे थे। ठीक वही स्थिति अब काशी और मथुरा में भारतीय संस्कृति को संजोयने के विरुद्ध देखने को मिल रहा है।
विवादित ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे में मिले शिवलिंग और मंदिर होने के अपार साक्ष्य मिलने पर मुस्लिम कट्टरपंथियों के जेहादी चेहरा उजागर देखने को मिल रहा है। बौखलाहट में इन्हें नहीं मालूम कि क्या बोलना है। Republic Bharat पर चर्चा पर एक मुस्लिम वकील ने ज्ञानवापी को अरबी का ही लब्ज बताने पर तुरन्त हिन्दू पक्ष की साध्वी ने बताया "वकील साहब यह किसी अरबी, फ़ारसी, सऊदी अरब, तुर्की या मुगलिस्तान का नहीं संस्कृत शब्द है। दूसरे, India TV पर सौरभ शर्मा के शो में इस्लामिक स्कॉलर ने यह कहते हुए कि "अब एक इंच भी जमीन नहीं देंगे", नारा-ए-तकबीर के नारे लगा दिए; यह वही शख्स है जिसने तीन तलाक कानून पर किसी चैनल पर चल रही चर्चा के दौरान तीन तलाक कानून के समर्थक को जूता दिखाया था। इसी चैनल पर मीनाक्षी जोशी के शो में भी एक मुस्लिम स्कॉलर ने कहा कि "80%(हिन्दू) इस्लाम कबूलेंगे।" लेकिन कोई भी मस्जिद पक्षकार एक बात का जवाब देने में पूर्णरूप से असफल रह रहे हैं कि "वह विदेशी आक्रांताओं की क्रूरता के साथ हैं या विरुद्ध?"
एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने 19 May 2022 को यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि हिंदू समुदाय जब बहुमत में नहीं रहेंगे तो उन्हें अपने पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर को फिर से हासिल करने को लेकर इस्लामवादियों के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।
NDTV की न्यूज एंकर निधि राजदान से बात करते हुए योगेंद्र ने दावा किया, “जब उन्होंने (मुस्लिमों ने) शासन किया तो हम 500 वर्षों तक इनकी अवहेलना करते रहे और आज शासन है तो हम तय करेंगे कि क्या होगा। हमें मत रोको, क्योंकि 500 साल पहले आप किसी और को नहीं रोक सकते थे।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “मैं उन सभी दोस्तों और उत्साही लोगों से हाथ जोड़कर कहना चाहता हूँ कि कृपया याद रखें, यदि आप आज कुछ करना चाहते हैं क्योंकि आप बहुमत में हैं और आप अपना 500 साल पुराने अतीत को हासिल करना चाहते हैं। कृपया उसके बारे में सोचें, जब इसके 500 साल बाद क्या हो सकता है।”
योगेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि वाराणसी में विवादित ज्ञानवापी मस्जिद पर दावा करने के कारण 500 साल बाद इस्लामवादियों के हाथों हिंदुओं को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने पूछा, “क्या हम चाहते हैं कि इस खेल में हमारे बच्चे, हमारी आने वाली पीढ़ियाँ साल 2022 में जो हुआ उसकी कीमत चुकाएँ?।”
सीएए विरोधी उपद्रव, जिसके कारण दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे हुए, उसमें सक्रिय भागीदार रहे एक्टिविस्ट यादव ने इस्लामिक आक्रमणकारियों द्वारा हिंदू मंदिरों के विध्वंस पर भी पर्दा डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कई मंदिर पवित्र बौद्ध और जैन मंदिरों के खंडहरों पर बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई कहता है कि जैन मंदिरों पर कई हिंदू मंदिर बने हैं तो क्या यह माँग करनी चाहिए कि सत्य की खोज के लिए उनकी खुदाई की जाए?
योगेंद्र यादव ने कहा कि इस देश को कहीं एक रेखा खींचनी है और वह रेखा 15 अगस्त 1947 होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “इस देश को कहना चाहिए कि हम अतीत में जाना बंद करें। उस समय जो कुछ भी हुआ- अच्छा या बुरा, वहां मौजूद है और हमें आगे बढ़ना चाहिए।”
इस बयान के बाद उन्होंने हिंदुओं को अपनी उन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासतों को, जिन्हें मुगलों ने ध्वस्त और बर्बाद कर दिया, फिर से हासिल करने के लिए परोक्ष रूप से धमकी दी। योगेंद्र यादव ने हिंदुओं को उस दौरान प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी, जब देश में मुस्लिम 500 साल पहले की तरह बहुसंख्यक हो जाएँगे। दरअसल, यादव हिंदुओं को अपनी धार्मिक विरासत को पुनः प्राप्त करने की कोशिश करने के लिए डरा रहे थे।
दिलचस्प बात यह है कि योगेंद्र यादव द्वारा हिंदुओं को परोक्ष धमकी देने के बाद नकली हार्वर्ड प्रोफेसर निधि राजदान ने कहा कि वह यह बहस इसलिए नहीं कर रही हैं, कि उनका हिंदुओं या उनकी आस्था के प्रति कोई विशेष संबंध नहीं है, बल्कि इसलिए कि उन्हें ‘अंतर्धार्मिक सद्भाव’ की चिंता है।
