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करोंड़ों की डोनेशन, US से डील और हादसे पे हादसे… जिस ‘Boeing’ को पोस रही अमेरिका की सरकार, उसकी एक ‘बेईमानी’ से गई थी 300+जानें

                            बोइंग 787 विमान हादसे ने 250+ जिंदगियाँ ले ली हैं (फोटो साभार: Mint)
12 जून, 2025 को अहमदाबाद में दोपहर 1:40 बजे एअर इंडिया के विमान ने उड़ान भरी। 1 ही मिनट के भीतर यह क्रैश हो गया। इस हादसे में 250+ से अधिक लोग मारे गए। विमान में मौजूद मात्र एक यात्री जीवित बचा। जैसे-जैसे हादसे की जानकारियाँ सामने आती गईं, स्थिति साफ़ होने के बजाय और भी विस्मय भरी हो गई। पता चला कि यह एअर इंडिया का 787-8 ड्रीमलाइनर विमान था। यह बोइंग कम्पनी द्वारा निर्मित है और पहली बार विमान का यह मॉडल हादसे का शिकार हुआ है।

बोइंग का नाम आते ही लोगों के दिमाग में इससे जुड़े हादसों का इतिहास घूमने लगा। बोइंग के बीते कुछ सालों में अमेरिकी सरकार के नियमों के साथ खेलने और अपने अनुसार नियम बनाने की घटनाएँ भी दिमाग में कौंधी। वर्तमान में अहमदाबाद हादसे में काल कवलित हुए ड्रीमलाइनर का ब्लैक बॉक्स अमेरिका भेजा गया है। जहाँ इसकी जाँच की जाएगी। इसके बाद ही हादसे के कारण स्पष्ट होंगे। लेकिन इससे पहले बोइंग के पुराने कारनामों पर दुनिया की बाजार एक बार और आ गई है।

1997 का मर्जर और बोइंग की धूमिल होती प्रतिष्ठा

बोइंग वर्तमान में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट निर्माता कम्पनी है। बोइंग ने ही विश्व को पहला जेट यात्री विमान ‘707’ दिया था। इसकी प्रतिष्ठा विश्व की बेहतरीन इंजनियरिंग कम्पनियों में होती थी। इसने 747 जैसा पहला जंबो जेट दिया, जिसने विश्व को जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। सिर्फ यात्री विमान ही नहीं बल्कि मिलिट्री विमानों के मामले में भी बोइंग एक बेहतरीन कम्पनी बनी। इसने विशालकाय C-17 ग्लोबमास्टर जैसे विमान बनाए, जो आज भारतीय वायु सेना उपयोग करती है।

लेकिन 1997 में बोइंग और मैकडोनाल्ड डगलस मर्ज हो गईं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसी के बाद बोइंग का ‘फाल फ्रॉम ग्रेस’ यानी अर्श से फर्श पर गिरना चालू हो गया। बोइंग इसके बाद इंजीनियरिंग पर फोकस रखने वाली कम्पनी से नफे-नुकसान पर फोकस रखने वाली कम्पनी बन गई। इसका फोकस अब दुनिया को बेहतरीन तरीके से बनाए विमान देना नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा नफा कमाना हो गया। जहाँ पहले कर्मचारियों से पारदर्शी रहने को कहा जाता था, अब उन्हें गलतियाँ छुपाने को कहा जाने लगा।
इसके चलते बोइंग की प्रतिष्ठा धूमिल होती गई। वैश्विक बाजार में वह लीडर नहीं रही। एयरबस ने उसे बड़ी पटखनी दी। बोइंग की गिरती प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी से जा सकता है कि बीते 2-3 दशक में वह कोई नया विमान मॉडल नहीं ला पाई है बल्कि पुराने पर ही प्रयोग करके काम चला रही है। इसके चलते सैकड़ों यात्रियों को जान गँवानी पड़ी है। बोइंग, अब जब क्वालिटी में फेल हुई है तो उसका फोकस अमेरिका और बाहर के देशों में नियम और नीतियों को प्रभावित करने और उनमें अपने अनुसार बदलाव करवाने पर रहा है।

अमेरिका में लॉबीइंग पर हजारों करोड़ खर्च करती है बोइंग

बोइंग एक अमेरिकी कम्पनी है और इसकी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी सरकार से मिलने वाले ठेकों से आता है। बोइंग अमेरिका के लिए कई सैन्य विमान बनाती है। इसके अलावा अमेरिका के ही नियम एवं नीतियाँ बोइंग पर लागू होते हैं। यह अमेरिकी नीतियाँ कैसे उसके हित में रहें, इसके लिए वह हजारों करोड़ खर्च करती है।
अमेरिका में स्टॉक बाजार के नियामक SEC की एक रिपोर्ट कहती है कि बोइंग ने 2010-2022 के लॉबीइंग पर 20 करोड़ डॉलर (₹1700 करोड़+) से अधिक खर्च किए हैं। अकेले 2021 और 2022 में 2.6 करोड़ डॉलर (₹225 करोड़) खर्च किए हैं। SEC की ही एक रिपोर्ट बताती है कि 1998 से बोइंग ने लॉबीइंग पर 32 करोड़ डॉलर(₹2700 करोड़) से अधिक खर्च किए हैं। SEC बताती है कि बोइंग अमेरिका के भीतर लॉबीइंग पर खर्च करने के मामले में 9वें नम्बर पर है।
बोइंग इस काम में 9वें नम्बर पर तब है जब मार्केट कैप यानी हैसियत के मामले में वह अमेरिका में 70-80वें नम्बर पर है। इसका सीधा मतलब है कि बोइंग अपनी हैसियत से कहीं अधिक खर्च लॉबीइंग के लिए करती है। बोइंग अपने अनुसार नियम तोड़ने-मरोड़ने के लिए अमेरिका की दोनों पार्टियों यानी डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन को पैसा देती है। यह खर्च, उसके लॉबीइंग पर खर्च से इतर है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग ने वर्ष 2004-2024 के बीच 43 मिलियन डॉलर (₹3500 करोड़+) खर्च किए हैं।
बोइंग यह भी ध्यान रखती है कि वह किसी एक पार्टी को ज्यादा फेवर ना करे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि बोइंग दोनों पार्टियों को लगभग बराबर ही फंडिंग करती है। हालाँकि, बोइंग ने बीते वर्षों में अधिक फंडिंग डेमोक्रेट्स को दी है। अमेरिका में इस प्रक्रिया को लॉबीइंग कहा जाता है। वैसे तो अमेरिका में लॉबीइंग कोई गैर-कानूनी काम नहीं है, लेकिन बोइंग की एक लॉबीइंग ने 300+ लोगों की जान ली है। यह बोइंग के इतिहास में काला धब्बा है।

जब बोइंग के लालच ने ले लीं 300 से अधिक जिंदगियाँ

बोइंग हजारों करोड़ का खर्च लॉबीइंग और पार्टियों पर करती है। बोइंग कोई समाज कल्याण संस्था नहीं है जो वह इतने पैसे फालतू में देती हो। यह सब कुछ फायदे के लिए किया जाता है। बोइंग के लालच और लॉबीइंग से बचने के चलते कुछ सालों पहले 300 से अधिक जानें गई थीं। यह कहानी चालू होती है 2010 के आसपास। कभी विश्व के एयरक्राफ्ट मार्केट पर राज करने वाली बोइंग को यूरोप से निकली कम्पनी एयरबस लगातर पटखनी दे रही थी। एयरबस की सफलता का राज उसके नए A320 नियो विमान थे।
यह बोइंग के 737 विमानों की तुलना में आधुनिक थे और कम तेल खपत करते थे। लगातार एयरलाइन्स इसके चलते एयरबस को आर्डर दे रहीं थी और बोइंग की हार हो रही थी। बोइंग ने ऐसे में एक नया विमान बनाने की सोची। लेकिन बोइंग नए विमान के डेवलपमेंट में पैसा नहीं लगाना चाहता था। ऐसे में उसने एक नया आइडिया निकाला। उसने प्लान बनाया कि 1960 के दशक में डिजाइन किए गए बोइंग 737 को ही नया रूप देना है। बोइंग ने इस नए प्लेन का नाम 737 मैक्स रखा।
बोइंग ने इसके बाद विमान के डिजाइन में कुछ बदलाव किए। विमान के विंग्स में भी बदलाव किए गए। विमान के कॉकपिट में बदलाव हुआ। इसका लैंडिंग गियर भी बदला गया। नए विमान में नए लीप-1 इंजन भी लगाए गए जो 14% अधिक तेल बचाते थे। यह इंजन पुराने इंजनों के मुकाबले बड़े थे। जहाँ पुराने इंजन 737 के विंग्स (पंख) के नीचे लगाए जाते थे तो वहीं नए इंजन बड़े होने के चलते इन्हें पंखों पर खिसका दिया गया। ऐसा ना करने पर इंजन जमीन में टकरा रहे थे।
यहीं से सारी कहानी बिगड़ गई। नए इंजन पुराने के मुकाबले अधिक भारी थे। ऐसे में इनके चलते विमान का अगला हिस्सा हवा में ज्यादा उठता था जो विमान को नियंत्रित करने के लिए एक समस्या था। बोइंग ने इसका हल निकाला और एक सिस्टम MCAS लाया। MCAS विमान के अगले हिस्से को अपने आप नीचे की तरफ दबा देता था। यह काम सेंसर के जरिए होता था। जैसे ही विमान के सेंसर को लगता कि विमान का अगला हिस्सा अधिक हवा में उठ रहा है, तुरंत ही वह उसे नीचे गिरा देता।
बोइंग का यह विमान पूरी दुनिया में हिट हुआ। इसके हजारों आर्डर मिले। लेकिन बोइंग ने इस पूरे मामले में एक बेईमानी कर ली। बोइंग ने 737 को पूरी तरह बदल दिया था। लेकिन उसने दावा किया कि इसे फिर से अमेरिकी विमान नियामक FAA से प्रमाणन लेने की जरूरत नहीं है। दरअसल, विमान के हर सिस्टम के लिए प्रमाणन लेना बड़ा खर्च होता है। इससे विमान की डिलीवरी टाइमलाइन भी बढ़ जाती। इसके अलावा नए सिस्टम्स के ऊपर पायलटों को भी ट्रेनिंग देनी पड़ती।
बोइंग ने इन सब से बचने के लिए FAA के सामने दावा किया कि यह मूलतः एक पुराना विमान ही है, ऐसे में इसके लिए अलग से प्रमाणन लेने की आवश्यकता नहीं है। उसने कानूनों के लूपहोल्स का भी फायदा उठाया। बोइंग ने पूरा नया विमान बना कर तैयार कर दिया लेकिन FAA को उसके सिस्टम्स का प्रमाणन नहीं करने दिया। यहाँ तक कि बोइंग ने अमेरिका में बड़े स्तर पर लॉबीइंग की और 2018 में एक कानून भी प्रभाव से पास करवाया।

DRDO बनाएगी 5th जेनेरेशन का विमान ‘AMCA’, निजी कम्पनियाँ भी हो सकेंगी शामिल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी हरी झंडी, फाइटर जेट बनाने को मोदी सरकार ने दिए थे 15000 करोड़ रूपए

            रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AMCA के निर्माण कार्यक्रम का जानकारी एक्स पर साझा की (photo- rmoX)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को बनाने वाले कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। ये पाँचवी जेनेरेशन का फाइटर जेट होंगे। इसके जरिए स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा मंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की गई है।

एक्स पर साझा पोस्ट में लिखा गया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने उन्नत मध्यम युद्धक विमान (AMCA) कार्यक्रम के एक्जीक्यूशन (निष्पादन) मॉडल को मंजूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को इसे बनाने की मंजूरी दे दी है। ADA के साथ इस 5th जेनेरेशन फाइटर जेट को बनाने में निजी कंपनियाँ भी शामिल हो सकती हैं।

पोस्ट में यह भी लिखा गया कि स्वदेशी विशेषज्ञता, क्षमता और योग्यता का उपयोग करके AMCA प्रोटोटाइप विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।इससे एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 5th जेनेरेशन वाले AMCA फाइटर जेट के निर्माण के लिए 15,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी।

सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम की सफलता से भारत को विदेशी फाइटर जेट पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और स्वदेशी कंपनियाँ भी नई और अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर सकेंगी। इससे भविष्य में भारत अपने बनाए फाइटर जेट्स अन्य देशों को बेचने की क्षमता पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल के निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों के लिए जल्द ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया जा सकता है। इसके बाद इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने कि लिए भारतीय सरकारी और निजी कंपनियाँ बिडिंग (bidding) में भाग ले सकती हैं। निजी कंपनियाँ ज्वाइंट वेंचर या कंसोर्टियम की तरह भी सम्मिलित हो सकती हैं।

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी पर रक्षा मंत्रालय काफी ध्यान दे रहा है। देश पर अमेरिका और रूस से 5th जेनेरेशन का लड़ाकू विमान खरीदने का भी काफी दबाव है। ऐसे में स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने वाले इस कार्यक्रम से काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इसके निर्माण के लिए चुनी गई कंपनियाँ भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में महिला पायलटों ने लहराया परचम, पाकिस्तान में घुसकर मारे 200+ आतंकी; क्या यह संख्या हज़ारों में पहुंचेगी?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस मिशन में 200 से अधिक आतंकवादी और पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया। दिलचस्प बात ये है कि भारतीय वायु सेना की महिला पायलटों ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

सीएनएन न्यूज18 ने अपनी एक एक्लुसिव रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया है कि ऑपरेशन सिंदूर में किए गए हमलों से कम से कम 42 पाकिस्तानी सैनिक और 170 आतंकवादी मारे गए हैं।

कुछ समय पहले तक केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तक 100 आतंकवादियों की बात कर रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरने शुरू हो रहे संख्या 200+ तक पहुँच गयी है। शुरू से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि जहाँ एक आतंकी कैंप में 500 से लेकर 600 आतंकी रहते हों वहां सिर्फ 100 के मरने की बात समझ में नहीं आती। जबकि भारत की बहादुर सेना ने 9 अड्डे बर्बाद किए हैं। आतंकी पाकिस्तान के सफ़ेद झंडा खड़ा करना बताता है कि आतंकी मुल्क पाकिस्तान में भारतीय शूरवीर सेना ने 22 मिनट में उम्मीदों से कहीं ज्यादा बहुत नुकसान पहुँचाया है। सच्चाई तो बहुत बाद में सामने आएगी या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। अब अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।     

भारतीय सेना की सभी विंग्स ने मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 100 आतंकी खाक में मिल गए। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें महिला पायलटों ने आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने वाली सटीक हवाई कार्रवाई की।

इसके बाद 9 और 10 मई को पाकिस्तान के रहीम यार खान, सरगोधा और नूर खान एयरबेस पर हमले किए गए। इन हमलों से पाकिस्तान के सैन्य प्रणाली को काफी तगड़ा नुकसान हुआ था।

ऑपरेशन सिंदूर अपनी तरह का पहला अभियान था, जिसमें कई भारतीय महिला पायलटों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सैन्य दृष्टिकोण के साथ-साथ सशस्त्र बलों के बीच के समन्वय के लिहाज से भी यह मिशन काफी महत्वपूर्ण रहा।

कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जब पाकिस्तान की ओर से भारतीय शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रहे थे तो उन हमलों को नाकाम करने की जिम्मेदारी दो महिला सीओ के पास थी। इनमें से एक ने राजस्थान के सूरतगढ़ में और दूसरी सीओ ने पंजाब के पठानकोट में मोर्चा संभाल रखा था।

22 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीकानेर में भी राष्ट्र के नाम संबोधन में इस बात की पुष्टि की कि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर जैसी निर्णायक कार्रवाई की। अपने संबोधन में उन्होंने सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए इसे भारतीय सुरक्षा की ‘नई रणनीति’ बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “22 अप्रैल के बदले में 7 मई को सिर्फ 22 मिनट में हमने पाकिस्तान के 9 बड़े आतंकी ठिकानों को मिटा दिया। जब सिंदूर बारूद बन जाता है, तो इसका अंजाम क्या होगा ये दुनिया ने देख लिया। जिन्होंने हमारा सिंदूर मिटाने की कोशिश की, हमने उन्हें मिट्टी में मिला दिया।”

पीएम मोदी में भारतीयों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हमारी सेनाओं ने एक चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसके कारण पाकिस्तान घुटनों पर आ गया।”

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ कुछ समय के लिए रुका है। अगर पाकिस्तान आगे कोई प्रतिक्रिया करता है तो भारत से भी तुरंत जवाब मिलेगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद The Hindu ने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को बढ़ाया आगे

               The Hindu ने इसी तस्वीर के आधार पर फेक न्यूज चलाई (फोटो साभार: Greater Kashmir)
अंग्रेजी समाचार संस्थान The Hindu ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारतीय वायु सेना को लेकर एक फर्जी खबर चलाई है। झूठा साबित होने पर उसने इससे सम्बन्धित पोस्ट डिलीट कर दिया। कुछ देर बाद उसे सफाई भी जारी करनी पड़ी। लेकिन इस बीच उसने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को खूब हवा दी है।

भारत ने 6-7 मई, 2025 की दरम्यानी रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के भीतर 9 आतंकी कैम्प पर हमला किया। भारत ने इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी कैम्पों को निशाना बनाया।

तगड़ी मार खाने के बाद पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा करने लगे। किसी पाकिस्तानी ने दावा किया कि उनके मुल्क ने भारत के 6 लड़ाकू विमान मार गिराए तो किसी पत्रकार ने यह संख्या 3 बताई। इसी पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा में 7 मई, 2025 की सुबह The Hindu भी शामिल हो गया।

The Hindu ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट की। इसमें उसने लिखा, “एक सरकारी कर्मचारी ने यह जानकारी दी है कि जम्मू-कश्मीर के अखनूर, रामबन और पंपोर इलाकों में कम से कम 3 भारतीय विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं।” The Hindu ने बताया कि यह रिपोर्ट उसके लिए डिप्टी एडिटर विजयता सिंह ने लिखी है।

                                           The Hindu ने यह पोस्ट डिलीट कर दी

इसमें उसने एक जगह के 4 फोटो भी लगाए जिसमें कुछ मलबा दिखाई पड़ता है। यह फोटो असल में पुलवामा के वुयान गाँव की थी। The Hindu ने इस मलबे को भारतीय वायुसेना के गिरे हुए विमान बताने का दावा किया। हालाँकि, पोस्ट के तुरंत बाद ही लोग The Hindu की सच्चाई बताने लगे।

The Hindu के दावे के उलट रक्षा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह कोई गिरा हुआ विमान नहीं बल्कि लड़ाकू विमान में अतिरिक्त ईंधन के लिए लगाए जाने वाले टैंक हैं। उन्होंने बताया कि जिसे The Hindu एयरक्राफ्ट का मलबा बताने का दावा कर रहा है वह संभवतः एयरक्राफ्ट द्वारा गिराया है ताकि उसकी गति बढ़ जाए।

स्पष्ट किया गया कि किसी विमान का अपने ईंधन टैंक गिराना वायुसेना के भीतर एक सामान्य प्रक्रिया है। फजीहत होने के बाद चुपके से The Hindu ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन इसके बाद भी उसे लोगों ने लताड़ना बंद नहीं किया। The Hindu ने खबर डिलीट करने के बाद भी अपनी ढिठाई नहीं छोड़ी। उसने ना ही कोई माफी माँगी और ना ही स्पष्ट बात की।

The Hindu ने लिखा, “हमने ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय विमानों के बारे में एक पुरानी पोस्ट हटा दी है। भारत की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए हमने अपने प्लेटफॉर्म से उस पोस्ट को हटाने का फैसला किया है। हमें खेद है कि इसने हमारे पाठकों के बीच भ्रम पैदा किया।”

The Hindu भले ही पोस्ट हटा कर गड़बड़ी की बात मान ली हो लेकिन उसने अपने एक ट्वीट से पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का बढ़ाया। उसके इस ट्वीट के आधार पाकिस्तानियों ने भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा किया। The Hindu ने यह खबर बिना वायुसेना से कोई भी आधिकारिक जानकारी लिए और बिना किसी सत्यापन के ही बना दी थी।

पाकिस्तानी ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही कहीं भारतीय विमान गिराने का तो कहीं भारतीय पायलट पकड़ने की फर्जी बातें चला रहे हैं। भारत के बड़े मीडिया संस्थान होने के बाद भी The Hindu ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी और इसी प्रोपेगेंडा विंग का हिस्सा हो गया।

अज़हर मसूद परिवार के 10 सदस्य गए 72 हूरों के पास; पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछ उजाड़े थे सुहाग, भारतीय सेना ने ‘सिंदूर’ से भरे घाव: विधवाएँ बोलीं- बदला लेने के लिए धन्यवाद PM मोदी, आज मिली सच्ची श्रद्धांजलि

एयर स्ट्राइक के बाद पहलगाम में पति को खो चुकी एशान्या द्विवेदी ने कहा कि ये मेरे पति को सच्ची श्रद्धांजलि (फोटो साभार- इंडिया टुडे/TOI)
प्राप्त समाचारों के अनुसार Operation Sindoor में मसूद अज़हर परिवार के 10 सदस्यों को भी 72 हूरों के पास जाने पर मसूद अपनी भी मौत मांग रहा है। कई आतंकी सरगनाओं के साथ-साथ सैकड़ों आतंकियों के भी 72 हूरों के पास पहुंचा दिया गया है। जबकि पाकिस्तान ने 21 आतंकी ठिकानों पर हुए हमलों में सिर्फ 26 लोगों के मरने की पुष्टि की है। जबकि सोशल मीडिया पर 300 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। पाकिस्तान आर्मी आतंकी ठिकानों के पास जाने से अपनी ही मीडिया को रोक रहा है। देखना यह है कि पाकिस्तान असली संख्या कब बताता है।

पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने बुधवार (7 मई 2025) रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इस ऑपरेशन के दौरान सेना ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा समेत कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस मिशन का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा गया।

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम के बैसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को आतंकी हमला हुआ। चुन-चुन कर हिंदुओं की जान ली गई। हिंदुओं से उनके नाम, उनकी पहचान के प्रमाण पत्र मांगे गए और यहाँ तक कि उनके कपड़े उतार कर हिंदू होने की जाँच की गई।

कुल 24 हिंदुओं समेत 28 लोगों की जान ले ली गई। आतंकवादियों ने सिर्फ पुरुषों को मारा और महिलाओं से कहा, “जाकर मोदी को बता देना।” इनमें से कुछ महिलाओं का विवाह इस घटना से कुछ ही दिन पहले हुआ था। कई पुरुष तो हनीमून के दौरान मारे गए।

इस आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इसके ठीक 15 दिन बाद 7 मई, 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान में चल रहे 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इस मिशन का नाम ‘सिंदूर’ रखने के पीछे भी कारण था।

आतंकियों ने जिन हिंदू स्त्रियों के मांग का सिंदूर उजाड़ा था, भारतीय सेना उन आतंकियों का अस्तित्व ही उजाड़ दिया। इस बदले के बारे में जानकर उन महिलाओं ने भारत सरकार का आभार जताया है और अपने पतियों के लिए इस ऑपरेशन को असली श्रद्धांजलि बताया है।

इस हमले में पुणे के संतोष जगदाले को इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछ कर मार दिया था। उनकी पत्नी प्रगति जगदाले ने इसके बाद कहा कि जिन बेटियों के माँग से सिंदूर उन आतंकियों ने उजाड़ा था, उसका यह बिल्कुल सटीक बदला लिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस ऑपरेशन का नाम सुनते ही मेरी आँखों में आंसू आ गए, उन्होंने इसके लिए सरकार का धन्यवाद किया है।

वहीं संतोष की बेटी असावरी जगदाले ने कहा कि इस ऑपरेशन सिंदूर के बारे में उन्हें न्यूज़ चैनल के माध्यम से पता चला। असावरी ने कहा, “मिशन का नाम सुनकर मैं बहुत रो रही थी। मुझे याद है कि हमले के बाद जब गृहमंत्री अमित शाह श्रीनगर आए थे तब सभी ने कहा था कि हम भारत की बहनें हैं और हमारे पतियों को छीन लिया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “शायद इसी वजह से मिशन का ये नाम रखा गया होगा। जितने लोग उसे हमले में वीरगति को प्राप्त हुए हैं, मुझे लगता है कि उनकी मौत का सही बदला लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैं इस बात के लिए धन्यवाद करती हूँ।”

इस हमले में पुणे के कौस्तुभ गणबोटे को भी मार दिया गया था। कौस्तुभ गणबोटे की पत्नी संगीता ने कहा, “पीएम मोदी ने इस मिशन का नाम सिंदूर रख कर महिलाओं का सम्मान किया है। हमले वाले दिन को याद कर मैं आज भी रोती हूँ। हम इंतजार कर रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी क्या एक्शन लेंगे और उन्होंने मुंहतोड़ जवाब दिया है। आतंकियों को तो जड़ से मिटा देना चाहिए।”

कानपुर में रहने वाले शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने कहा, “मेरे पति का बदला लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत धन्यवाद करती हूँ। पूरे परिवार को उन पर भरोसा था। उन्होंने हमारे विश्वास को जिंदा रखा है। मेरे पति को असली श्रद्धांजलि आज मिली है। वह जहाँ भी होंगे आज उन्हें सुकून मिला होगा।”

कर्नाटक के मंजूनाथ को भी इस्लामी आतंकियों ने मार दिया था। वह कर्नाटक के शिवमोगा के रहने वाले थे। मंजूनाथ राव की माँ सुमथी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस मिशन के लिए सबसे अच्छा नाम है। हमें आशा थी कि प्रधानमंत्री मोदी के हमारे बच्चों की मृत्यु का बेहतर जवाब देंगे और उन्होंने इसका अच्छा एक्शन लिया है।

यह हमला बहावलपुर, मुरीदके, गुलपुर, सवाई कैंप, बिलाल कैंप, कोताली कैंप, बरनाला कैंप, सरजल कैंप और महमूना कैंप पर एयर स्ट्राइक की गई है। इस हमले में 80 से अधिक पाकिस्तानी आतंकी मारे जाने की सूचना है।

भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस ऑपरेशन के बाद लिखा- न्याय हुआ, जय हिंद। भारत सरकार ने बताया है कि उसने किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया है। इस मिशन से बौखलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी में गोलीबारी की है। इससे वहाँ पर 34 लोग घायल हो गए और 6 लोगों की मौत हो गई है।