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जुमे के दिन 32 साल बाद ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक सलमान रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला

'द सैटेनिक वर्सेज' के लेखक सलमान रुश्दी पर जुमे के दिन चाकू से हमला (तस्वीर-AP)
‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक उपन्यासकार सलमान रुश्दी को न्यूयॉर्क में भाषण देने से पहले पर चाकू से हमला किया गया है। सलमान रुश्दी को 1980 के दशक में ही ईरान से जान से मारने की धमकी मिली थी, वहीं आज शुक्रवार (12 अगस्त, 2022) को उन पर उस समय हमला किया गया जब वह पश्चिमी न्यूयॉर्क में एक व्याख्यान देने वाले थे।

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने न्यूयॉर्क के चौटाउका (Chautauqua) संस्थान में मंच पर उस समय धावा बोल दिया और जब सलमान रुश्दी स्पीच देने वाले थे। रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला किया गया जिससे वह वहीं जमीन पर गिर गए। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है। रुश्दी को हेलीकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया है। स्टेट पुलिस ने बताया कि उन्हें हेड इंजरी भी आई है।

न्यूयॉर्क राज्य पुलिस के मेजर यूजीन स्टैनिज़ेव्स्की के अनुसार, हमलावर की पहचान न्यूजर्सी स्थित फेयरव्यू के 24 वर्षीय हादी मतार के रूप में की गई है। हालाँकि, वह किस देश से ताल्लुक रखता है, इसका अभी पता नहीं चला है।

रीटा लैंडमैन नाम की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने कहा कि रुश्दी के दाहिने गले सहित कई घाव थे और वे खून से लथपथ होकर नीचे गिरे हुए थे। उस महिला डॉक्टर ने कहा कि वे अभी जीवित लग रहे हैं। इसके बाद कुछ लोगो ने उनकी नब्ज देखी और चिल्लाने लगे के यह चल रही है।

घटना के कुछ ही पल में पुलिस पहुँच गई और कुछ देर बाद उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनके कई ऑपरेशन किए गए। पुलिस FBI और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हमलावर के उद्देश्य को जानने की कोशिश कर रही है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि हमलावर अकेला था या और भी लोग थे उसके साथ।

रुश्दी के एजेंट एंड्रयू वायली के अनुसार, मुंबई में जन्मे लेखक रुश्दी वेंटिलेटर पर हैं और वे बोल नहीं सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “खबर अच्छी नहीं है। सलमान की एक आँख खोने की संभावना है। उनकी बाँह की नसें कट गई हैं और उनका लीवर खराब हो गया है।”

रुश्दी की किताब “द सैटेनिक वर्सेज” को ईरान में 1988 से प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि कई मुस्लिम इसे ईशनिंदा मानते हैं। वहीं इस किताब के पब्लिश होने के एक साल बाद, ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने एक फ़तवा जारी किया था, जिसमें रुश्दी की मौत की अपील की गई थी। ईरान ने रुश्दी को मारने वाले को 30 लाख डॉलर से अधिक का इनाम देने की भी घोषणा की थी।

ईरान की सरकार ने लंबे समय से चले आ रहे खुमैनी के फरमान से खुद को अलग कर लिया है, लेकिन रुश्दी विरोधी भावना बनी रही। वहीं 2012 में, एक अर्ध-आधिकारिक ईरानी मजहबी फाउंडेशन ने रुश्दी के लिए इनाम को 2.8 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 3.3 मिलियन डॉलर कर दिया था।

हालाँकि रिपोर्ट के अनुसार, यह कहा जाता है कि रुश्दी ने उस समय उस धमकी को खारिज करते हुए कहा था कि इनाम में लोगों की बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं है। बता दें कि उस वर्ष, रुश्दी ने फतवे के बारे में एक संस्मरण, ‘जोसेफ एंटोन’ प्रकाशित किया।

मुस्लिमों पर मढ़ा जा सकता है दोष: अमेरिकी इस्लामी संस्था

अमेरिका के सबसे बड़े मुस्लिम नागरिक अधिकार समूह ‘काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस’ के प्रवक्ता इब्राहिम हूपर ने विक्टिम कार्ड खेलना अभी से शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि हमलावर की पहचान सामने आने से पहले ही लोग मुस्लिमों या इस्लाम को छुरा घोंपने के लिए दोषी ठहरा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “सभी अमेरिकियों की तरह अमेरिकी मुस्लिम भी समाज में किसी को भी निशाना बनाने वाली हिंसा की निंदा करते हैं।” 14 उपन्यासों के लेखक और 2007 में नाइट की उपाधि से सम्मानित रुश्दी पर हमले को लेकर दुनिया भर में रोष है।

कट्टरपंथियों के निशाने पर थे रुश्दी

मुंबई के एक सफल मुस्लिम व्यवसायी के घर जन्मे रुश्दी ने एक किताब लिखकर दुनिया में सनसनी मचा दी थी। साल 1988 में लिखी गई उनकी पुस्तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ (The Satanic Verses) को लेकर ईरानी क्रांति के नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने उनकी हत्या के लिए फतवा जारी करते हुए लगभग 28 करोड़ रुपए घोषणा की थी।

इस्लामवादियों का कहना था कि इस पुस्तक में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया गया है। इसके बाद उन्हें दुनिया भर में कई जगहों से हत्या की धमकी मिली। उनकी किताब को भी कई देशों ने प्रतिबंधित कर दिया। इनमें से एक देश भारत भी है।

केवल एक ही किताब लिखने पर सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन पर फतवे आ गए, उनकी पुस्तकें प्रतिबंधित हो गयी, लेकिन एक ऐसा भी चमत्कारी लेखक अनवर शेख है जिसने इस्लाम के खिलाफ एक नहीं बल्कि 7/8 पुस्तकें लिखी, जिसके विरुद्ध फतवा देने एवं उनकी एक भी पुस्तक को प्रतिबंधित करने का साहस कोई नहीं कर पाया। मुस्लिम स्कॉलर्स आदि तक उनके विरुद्ध एक भी लब्ज बोलने की हिम्मत कर पाया। क्यों?

खतरे के देखते हुए अल्लाह में विश्वास नहीं करने वाले रुश्दी इसके बाद भूमिगत हो गए। भारत से वे ब्रिटेन चले गए। वहाँ उन्हें किस प्रकार से सुरक्षा दी गई। रुश्दी सार्वजनिक जीवन साल 1990 के अंत में आए, जब ईरान ने घोषणा की कि वह रुश्दी की हत्या का समर्थन नहीं करता। हालाँकि, उन पर खतरा बरकरार रहा और विवाद के 34 साल बाद उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया।