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खात्रा हाशमी को तालिबान ने बनाया ‘जिंदा लाश’

अफगानिस्तान की खात्रा हाशमी को तालिबानियों ने अँधा कर दिया,
अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद महिलाओं की स्थिति खासी दयनीय हो गई है। तालिबान से पीड़ित रहीं एक महिला अधिकारी ने अपना दर्द बयाँ किया है। वो फ़िलहाल दिल्ली में रह रही हैं। पैसों के लालच में उसके अब्बू ने मात्र 7 साल की उम्र में बड़े उम्र के व्यक्ति के साथ उसकी शादी तय कर दी थी और 12 साला की उम्र में निकाह करा दिया था। अब्बू द्वारा न पढ़ाने-लिखाने के बावजूद वो अपनी मेहनत से अफगानिस्तान में पुलिस अधिकारी बनीं।

हालाँकि, अफगानिस्तान में एक महिला का इस तरह से तरक्की करना तालिबानियों को रास नहीं आया और वो फोन कॉल कर-कर के धमकियाँ देने लगे। 2020 के शुरुआत में पुलिस थाने से घर जाते समय उन पर गोलीबारी की गई। 9 गोलियाँ उनके शरीर पर लगीं। ये वो समय था, जब तालिबान मुल्क पर कब्जे की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। उनके शरीर में 10 बार चाकू से वार किया गया। बेहोशी की हालत में उनकी दोनों आँखें निकाल ली गईं। महिला ने कहा कि अब वो ‘ज़िंदा लाश’ बन कर रह गई हैं।

उक्त महिला का नाम खात्रा हाशमी है, जो फ़िलहाल ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (NAB)’ के लिए काम करती हैं। ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनके साथ ये दरिंदगी हुई थी, तब वो गर्भवती थीं। जब उन्हें होश आया, तो वो पूरी तरह अंधी हो चुकी थीं। वो अपना पहला वेतन भी अपने आँखों से नहीं देख पाई थीं। मात्र 3 महीने की नौकरी के बाद उनके साथ ये वीभत्स्ता हुई थी। उनके शरीर में अब भी बुलेट के टुकड़ों की वजह से दर्द रहता है, जिसका इलाज भी चल रहा है।

 उनकी 2 साल की बेटी भी है, जो उनके साथ ही रहती है। उनका कहना है कि महिलाओं-बच्चों की तालिबान से हिफाजत के लिए ही पुलिस फ़ोर्स जॉइन किया था, लेकिन हुआ कुछ और ही। उनका कहना है कि तालिबानी ये नहीं चाहते कि महिलाएँ नौकरी करें, वो चाहते हैं कि लड़कियाँ घर में कैद रहें। 3 नकाबपोश तालिबानियों ने उन पर हमला किया था। उनके पहले पति, दो बेटे और एक बेटी अफगानिस्तान में ही रहती है।

तालिबानी उनसे पूछने आते हैं कि उनकी अम्मी लौटी या नहीं। दिल्ली में खात्रा हासमी ने दूसरी शादी भी की है। पहले पति की उम्र 80 साल से अधिक हो गई है और वो उन्हें तलाक भी दे चुके हैं। फिर भी वो और बच्चे पैदा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उन बच्चों से मिलने का उनका दिल करता है, लेकिन ये सम्भव नहीं हो पाता। खात्रा हाशमी को तालिबानी अब भी खोज रहे हैं। जब उन पर हमला हुआ था, तब उन्होंने अपनी साँसें रोक ली थीं और तालिबानी उन्हें मरा हुआ समझ कर चले गए थे।


अमेरिका : मस्जिद में चल रही थी रमजान की नमाज, चाकू निकाला और इमाम को घोंप दिया

अमेरिका में इमाम को सेरिफ जोरबा (बाएँ) ने चाकू घोंपा (चित्र साभार: NJ.com)
अमेरिका में रमजान की नमाज पढ़ रहे एक इमाम को चाकू घोंप दिया गया। घटना न्यूजर्सी के पेटरसन स्थित उमर मस्जिद की है। हमला रविवार (9 अप्रैल 2023) की सुबह किया गया। 65 साल के इमाम पर जब हमला हुआ, उस वक्त नमाज के लिए मस्जिद में करीब 200 लोग जमा थे। हमलावर की पहचान 32 साल के सेरिफ जोरबा के तौर पर हुई है। वह मूल रूप से तुर्की का रहने वाला है।

हमले में इमाम सैयद एल्नाकिब घायल हो गए। उनका इलाज चल रहा है। मस्जिद में मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पूछताछ में उसने इमाम पर इस्लाम के नाम पर पैसे वसूलने का आरोप लगाया। यह बात भी सामने आई है कि हमलावर पहले भी इस मस्जिद में कई बार आ चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के उमर मस्जिद जिस इलाके में है, वह अमेरिका में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में एक है। रविवार को इमाम सैयद एल्नाकिब सुबह के करीब 5:30 बजे पर मस्जिद में 200 लोगों के साथ नमाज पढ़ रहे थे। इसी बीच सेरिफ जोरबा ने उन्हें 2 बार चाकू घोंप दिया। हमले के बाद आसपास के नमाजियों ने उसे पकड़ लिया।

इमाम को नजदीकी अस्पताल सेंट जोसेफ मेडिकल सेंटर में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। चाकू लगने से इमाम के फेफड़े में छेद हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार हमलावर मूल रूप से तुर्की का है। उसने पूछताछ में हमले की बात कबूली है। बताया है कि वह एक रात पहले ही इमाम को उनके घर में घुस कर मारना चाहता था। उसका कहना है कि इमाम इस्लाम का अपमान कर रहा था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सेरिफ जोरबा मस्जिद का सदस्य नहीं है। हालाँकि उसके द्वारा इस मस्जिद में पहले भी नमाज़ पढ़े जाने की बात सामने आ रही है। इस घटनाक्रम के 2 वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं। पहले वीडियो में आरोपित नमाज़ के ही दौरान इमाम पर हमला करते दिखाई दे रहा है। हमले के बाद वह भागने का प्रयास करता है। दूसरे वीडियो में नमाज़ी पकड़कर उसकी पिटाई करते दिखाई दे रहे है।

रमज़ान के महीने में मस्जिद में इमाम पर हुए इस हमले पर वहाँ के स्थानीय पार्षद अल अब्देल-अजीज ने चिंता जताते हुए मुस्लिमों से एकजुटता की अपील की है। घटना के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसपास के इबादतगाहों की सुरक्षा बढ़ा दी है।


जुमे के दिन 32 साल बाद ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक सलमान रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला

'द सैटेनिक वर्सेज' के लेखक सलमान रुश्दी पर जुमे के दिन चाकू से हमला (तस्वीर-AP)
‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक उपन्यासकार सलमान रुश्दी को न्यूयॉर्क में भाषण देने से पहले पर चाकू से हमला किया गया है। सलमान रुश्दी को 1980 के दशक में ही ईरान से जान से मारने की धमकी मिली थी, वहीं आज शुक्रवार (12 अगस्त, 2022) को उन पर उस समय हमला किया गया जब वह पश्चिमी न्यूयॉर्क में एक व्याख्यान देने वाले थे।

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने न्यूयॉर्क के चौटाउका (Chautauqua) संस्थान में मंच पर उस समय धावा बोल दिया और जब सलमान रुश्दी स्पीच देने वाले थे। रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला किया गया जिससे वह वहीं जमीन पर गिर गए। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है। रुश्दी को हेलीकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया है। स्टेट पुलिस ने बताया कि उन्हें हेड इंजरी भी आई है।

न्यूयॉर्क राज्य पुलिस के मेजर यूजीन स्टैनिज़ेव्स्की के अनुसार, हमलावर की पहचान न्यूजर्सी स्थित फेयरव्यू के 24 वर्षीय हादी मतार के रूप में की गई है। हालाँकि, वह किस देश से ताल्लुक रखता है, इसका अभी पता नहीं चला है।

रीटा लैंडमैन नाम की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने कहा कि रुश्दी के दाहिने गले सहित कई घाव थे और वे खून से लथपथ होकर नीचे गिरे हुए थे। उस महिला डॉक्टर ने कहा कि वे अभी जीवित लग रहे हैं। इसके बाद कुछ लोगो ने उनकी नब्ज देखी और चिल्लाने लगे के यह चल रही है।

घटना के कुछ ही पल में पुलिस पहुँच गई और कुछ देर बाद उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनके कई ऑपरेशन किए गए। पुलिस FBI और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हमलावर के उद्देश्य को जानने की कोशिश कर रही है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि हमलावर अकेला था या और भी लोग थे उसके साथ।

रुश्दी के एजेंट एंड्रयू वायली के अनुसार, मुंबई में जन्मे लेखक रुश्दी वेंटिलेटर पर हैं और वे बोल नहीं सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “खबर अच्छी नहीं है। सलमान की एक आँख खोने की संभावना है। उनकी बाँह की नसें कट गई हैं और उनका लीवर खराब हो गया है।”

रुश्दी की किताब “द सैटेनिक वर्सेज” को ईरान में 1988 से प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि कई मुस्लिम इसे ईशनिंदा मानते हैं। वहीं इस किताब के पब्लिश होने के एक साल बाद, ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने एक फ़तवा जारी किया था, जिसमें रुश्दी की मौत की अपील की गई थी। ईरान ने रुश्दी को मारने वाले को 30 लाख डॉलर से अधिक का इनाम देने की भी घोषणा की थी।

ईरान की सरकार ने लंबे समय से चले आ रहे खुमैनी के फरमान से खुद को अलग कर लिया है, लेकिन रुश्दी विरोधी भावना बनी रही। वहीं 2012 में, एक अर्ध-आधिकारिक ईरानी मजहबी फाउंडेशन ने रुश्दी के लिए इनाम को 2.8 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 3.3 मिलियन डॉलर कर दिया था।

हालाँकि रिपोर्ट के अनुसार, यह कहा जाता है कि रुश्दी ने उस समय उस धमकी को खारिज करते हुए कहा था कि इनाम में लोगों की बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं है। बता दें कि उस वर्ष, रुश्दी ने फतवे के बारे में एक संस्मरण, ‘जोसेफ एंटोन’ प्रकाशित किया।

मुस्लिमों पर मढ़ा जा सकता है दोष: अमेरिकी इस्लामी संस्था

अमेरिका के सबसे बड़े मुस्लिम नागरिक अधिकार समूह ‘काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस’ के प्रवक्ता इब्राहिम हूपर ने विक्टिम कार्ड खेलना अभी से शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि हमलावर की पहचान सामने आने से पहले ही लोग मुस्लिमों या इस्लाम को छुरा घोंपने के लिए दोषी ठहरा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “सभी अमेरिकियों की तरह अमेरिकी मुस्लिम भी समाज में किसी को भी निशाना बनाने वाली हिंसा की निंदा करते हैं।” 14 उपन्यासों के लेखक और 2007 में नाइट की उपाधि से सम्मानित रुश्दी पर हमले को लेकर दुनिया भर में रोष है।

कट्टरपंथियों के निशाने पर थे रुश्दी

मुंबई के एक सफल मुस्लिम व्यवसायी के घर जन्मे रुश्दी ने एक किताब लिखकर दुनिया में सनसनी मचा दी थी। साल 1988 में लिखी गई उनकी पुस्तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ (The Satanic Verses) को लेकर ईरानी क्रांति के नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने उनकी हत्या के लिए फतवा जारी करते हुए लगभग 28 करोड़ रुपए घोषणा की थी।

इस्लामवादियों का कहना था कि इस पुस्तक में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया गया है। इसके बाद उन्हें दुनिया भर में कई जगहों से हत्या की धमकी मिली। उनकी किताब को भी कई देशों ने प्रतिबंधित कर दिया। इनमें से एक देश भारत भी है।

केवल एक ही किताब लिखने पर सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन पर फतवे आ गए, उनकी पुस्तकें प्रतिबंधित हो गयी, लेकिन एक ऐसा भी चमत्कारी लेखक अनवर शेख है जिसने इस्लाम के खिलाफ एक नहीं बल्कि 7/8 पुस्तकें लिखी, जिसके विरुद्ध फतवा देने एवं उनकी एक भी पुस्तक को प्रतिबंधित करने का साहस कोई नहीं कर पाया। मुस्लिम स्कॉलर्स आदि तक उनके विरुद्ध एक भी लब्ज बोलने की हिम्मत कर पाया। क्यों?

खतरे के देखते हुए अल्लाह में विश्वास नहीं करने वाले रुश्दी इसके बाद भूमिगत हो गए। भारत से वे ब्रिटेन चले गए। वहाँ उन्हें किस प्रकार से सुरक्षा दी गई। रुश्दी सार्वजनिक जीवन साल 1990 के अंत में आए, जब ईरान ने घोषणा की कि वह रुश्दी की हत्या का समर्थन नहीं करता। हालाँकि, उन पर खतरा बरकरार रहा और विवाद के 34 साल बाद उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया।

मैं भिखमंगा हूँ… देश ने मुझे जूते मारे: राहुल गाँधी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी का विवादों के साथ चोली-दामन का संबंध है। वे जब भी कुछ कहते हैं तो उस पर विवाद हो जाता है। दिल्ली के जवाहर भवन में दलितों पर लिखी पुस्तक ‘द दलित ट्रुथ’ के विमोचन के दौरान ऐसा कुछ उन्होंने कहा, जिससे विवाद हो गया है। लोग उन पर दलितों को उकसा कर समाज में हिंसा फैलाने का आरोप लगा रहे हैं।

दलितों का दर्द बाँटने के लिए पहुँचे राहुल गाँधी ने विमोचन के दौरान उत्तर प्रदेश के उना की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना उनके साथ हुई होती, उनके भाई को मारा गया होता तो वे आत्महत्या करने की जगह आरोपितों का पता लगाते और उन्हें चाकू मार देते। पीड़ित युवकों से मिलने के दौरान हुई बातचीत का जिक्र करते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि जब आत्महत्या करना ही है तो मार कर मरना चाहिए।

राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल द्वारा शेयर किए गए उन्हें वीडियो में 15वें मिनट से लेकर 26वें मिनट तक में इस पूरे प्रसंग को सुना जा सकता है। इस दौरान राहुल गाँधी ने अपने पिता राजीव गाँधी की हत्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे अपने पिता के हत्यारों को माफ कर चुके हैं, लेकिन उना कांड के पीड़ितों में अगर वे शामिल रहते तो आरोपितों को चाकू जरूर मारते।

राहुल गाँधी ने कहा, जब मैं एक पीड़ित से अस्पताल में मिला तो वह बोला कि जब मैंने व्हाट्सएप देखा तो उसमें मेरे भाई को कुत्ते जैसे मारा जा रहा था और मैं उसे सह नहीं पाया और घर घर जाकर कीटनाशक पी लिया। दूसरे से पूछा उसने कहा कि इस हिंसा को सह नहीं पाया और घर के पीछे जाकर कीटनाशक पी लिया।”

कानून के पास जाने के बजाए आरोपितों को चाकू मारने के अपने सुझाव को ‘आइडिया’ बताते हुए राहुल गाँधी ने कहा, “मैंने सोचा कि ये घर के पीछे जाकर क्यूँ कीटनाशक पी रहे थे? जैसे ये मैं सोच रहा था, मेरे दिमाग में एक दूसरा आइडिया आया। कहने से झिझक रहा हूँ। मेरे दिमाग में आई कि अगर मैं इसकी जगह होता और मैं मरने के लिए तैयार होता तो मरने से पहले जिसने मेरे भाई को मारा था उसको मार देता।”

अपनी आइडिया को विस्तार से बताते हुए राहुल गाँधी आगे कहते हैं, “मैंने उससे (अस्पताल में भर्ती उना कांड का पीड़ित से) कहा कि जिसने आपके भाई को मारा उसके नाम का पता लगा सकते हो। उसने कहा हाँ। तो मैंने कहा कि आपके रसोई में छुरी है। उसने कहा कि हाँ है। उसने पूछा कि ऐसा क्यों पूछ रहे हो। मैंने कहा कि अगर मैं आपकी जगह होता और मैं अपने आपको लाश बनाने के लिए तैयार होता, आत्महत्या करने के तैयार होता तो उससे पहले ये पता लगाता कि ये कौन है जिसने मेरे भाई को मारा। रसोई से चाकू निकालता, बस में जाता, उसके घर जाता और छाती में छुरा मार देता।”

उन्होंने कहा, “मेरे दिमाग में आया कि अगर मेरी बहन को किसी ने बांधकर कुत्ते जैसे मारा होता तो मैं आत्महत्या करने से पहले उसको एक चाकू तो मार देता। मेेरे पिता के खिलाफ हिंसा किया गया, उन्हें मारा गया। लेकिन मेरे दिल में पिता के हत्यारों के खिलाफ कोई नफरत नहीं है। मगर जब मैं अस्पताल में था तो मैंने सोचा कि अगर मेरे साथ ऐसा होता तो मैं मार देता।”

मैं प्रेमी की तरह देश को समझने की कोशिश कर रहा हूँ

राहुल गाँधी ने कहा कि वह एक प्रेमी की तरह है और उसी भाव से देश को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे सत्ता के बीचों-बीच पैदा हुए हैं, लेकिन वो सत्ता के बजाए देश के बारे में हमेशा सोचते रहते हैं। उन्होंने कहा कि वो रात में सोते समय देश को समझने की कोशिश करे हैं।
राहुल गाँधी ने कहा, “मैं सत्ता के बीच में पैदा हुआ। बिल्कुल बीच में हूँ। बड़ी अजीब से बीमारी है… मुझे उसमें इंटरेस्ट ही नहीं है। क्यों… मैं रात को सोता हूँ, अपने देश को समझने की कोशिश करता हूँ। जैसे एक प्रेमी होता है और जिससे वह प्रेम करता है उसे समझने की कोशिश करता है, वैसे ही मैं सुबह उठकर समझने की कोशिश करता हूँ।”

मैं भिखमंगा हूँ… देश ने मुझे जूते मारे: राहुल गाँधी

इस दौरान राहुल ने कहा, “मैं भिखमंगा हूँ। सुनो क्यों…. क्योंकि मेरे देश ने बिना कोई कारण पूरा का पूरा प्यार मुझे दे दिया। तो मेरे ऊपर एक कर्ज है।” उन्होंने आगे कहा, “देश ने मुझे सिर्फ प्यार ही नहीं दिया, देश ने मुझे जूते भी मारे हैं। आप समझ नहीं सकते कि कितनी जोरों से, कितनी हिंसा से इस देश ने मुझे मारा है, पीटा है। जब मैंने इस पर सोचा तो जवाब मिला कि देश मुझे सिखाना चाह रहा है।”

पुनर्जन्म और भाजपा नेता

इस दौरान राहुल गाँधी ने भगवान राम और पुनर्जन्म की बात की। उन्होंने कहा कि संसद में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से उनकी मुलाकात हुई। खाना-पान और व्यायाम वगैरह की बात हो रही थी। इसी दौरान उन्होंने भाजपा के उस नेता औस राम और पुनर्जन्म की बात भी की।
राहुल गाँधी ने कहा, “मैंने उनसे पूछा कि क्या आप पुनर्जन्म में विलीव करते हो। कहता है मैं तो नहीं करता। फिर मैंने कहा कि जब पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते हो तो राम में विश्वास कैसे कर सकते हो। वह चौंक गया। कहता बात तो सही है, बाहर किसी को मत बता देना।”