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बच्चों की तस्वीरें, गुलाब और मृतकों के जूते…. मिनाब में मारे गए स्कूली छात्रों की यादें लेकर पाकिस्तान पहुँचा ईरानी दल

                  मृतक बच्चों की तस्वीरें लेकर पाकिस्तान पहुँचे ईरानी दल (साभार : X_ @mb_ghalibaf)
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए शनिवार (11 अप्रैल 2026) को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता होगी। इस बैठक के लिए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) देर रात पाकिस्तान पहुँचे। जेडी वेंस भी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं।

ईरानी स्पीकर गालिबाफ ने इस्लामाबाद पहुँचते ही सोशल मीडिया पर एक भावुक तस्वीर शेयर की। गालिबाफ ने ‘मिनाब-168’ लिखकर दुनिया को उस जख्म की याद दिलाई, जब 28 फरवरी को एक स्कूल पर हुए हमले में 168 बच्चों और स्टाफ की मौत हो गई थी।

पाकिस्तानी आतंकियों की तरह हमास, हिजबुल और अन्य आतंकवादी संगठन अलग से अपना कोई ठिकाना बनाने की बजाए स्कूलों, कॉलेज, हॉस्पिटल और मॉल आदि में ही अपना ठिकाना बनाते हैं ताकि उन पर होने वाले हमलों में छात्र, मरीज और आम नागरिकों के मरने पर उनको मोहरा बनाकर victim card खेल सहानुभूति बटोरी जा जाके। और यही सीख ईरान की दी हुई है। इसका नमूना भारत में भी देखने को मिलता है। कश्मीर में होती पत्थरबाज़ी में बच्चों और महिलाओं को आगे रखना और वैसे भी जहां-जहां दंगे होते हैं वहां बच्चे और महिलाओं को ही आगे रखा जाता है। शंका है मृतक बच्चों की तस्वीरों और जूतों का बातचीत पर कोई असर पड़ने वाला है। 

सरकारों को आतंकी संगठनों द्वारा स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल और मॉल में बने आतंकी ठिकानों को बंद करना होगा अन्यथा बेकसूर अकाल मौत मरते रहेंगे।       

ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने जान-बूझकर स्कूल को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका इसे मिलिट्री बेस पर किया गया हमला बताता है। ईरान ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया है और हमले के जिम्मेदार अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

‘ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं’

इस्लामाबाद पहुँचने के बाद गालिबाफ ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे शांति के लिए ‘अच्छी नीयत’ के साथ आए हैं, लेकिन उन्हें अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। उन्होंने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने हमेशा समझौतों का उल्लंघन किया है। गालिबाफ के साथ इस डेलिगेशन में विदेश मंत्री और रक्षा परिषद के सचिव जैसे कई बड़े अधिकारी शामिल हैं, जो आज अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टीम के साथ आमने-सामने बैठेंगे।