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‘मौत के समय उत्तेजित था ईसा मसीह का लिंग’: थॉमस मैकहेल, चर्च में पादरी


इंग्लैंड में एक पादरी ने ईसा मसीह की मौत को लेकर बड़ा अजीब सा दावा किया है। थॉमस मैकहेल नाम के पादरी ने कहा है कि यीशु की मौत के समय उनका लिंग (प्राइवेट पार्ट) उत्तेजित अवस्था में था। इस दावे को अश्लील बताते हुए उस समय चर्च में मौजूद लोगों ने पादरी पर कार्रवाई की माँग की है। यह घटना रविवार (5 मई 2024) की है। हालाँकि अभी तक पादरी उसी चर्च में अपने पद पर कायम है, जिससे लोगों में और असंतोष फैल रहा।

यह मामला ब्रिटेन के डरहम का है। यहाँ ब्लैकहिल, कॉन्सेट, काउंटी क्षेत्र में आवर ब्लेस्ड लेडी इमैक्युलेट नाम का एक चर्च है। यह चर्च कैथोलिक विचारधारा के ईसाइयों का है। इस चर्च के पादरी 53 वर्षीय थॉमस मैकहेल हैं। यहाँ रविवार (5 मई) को पादरी ने कथित तौर पर अश्लील उपदेश दिया है।

इस उपदेश के दौरान चर्च में लगभग 100 लोग मौजूद थे। इनके बीच पादरी थॉमस ने अपने उपदेश में ईसा मसीह की मृत्यु के वक्त का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जब यीशु की मौत हुई तो उनका लिंग उत्तेजित अवस्था में था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पादरी ने आगे कहा कि जब ईसा मसीह को क्रूस पर टाँगा गया था तो उनकी बॉडी का पूरा खून शरीर के निचले हिस्से में चला गया था। लिंग में उत्तेजना की थॉमस ने यही वजह बताई।

इस उपदेश के दौरान चर्च में कई लोग अपने परिवार के साथ बैठे थे। उन्होंने इसे अश्लील बयान माना है। बाद में इस बयान पर हंगामा खड़ा हो गया। पादरी थॉमस को उनके पद से हटाने और सजा देने की माँग उठने लगी। हालाँकि तमाम विरोधों के बावजूद पादरी अभी तभी अपने पद पर बना हुआ है। पादरी पर कार्रवाई न होने से कई लोगों में नाराजगी बताई जा रही है।

तेलंगाना : जीसस के कारण कोरोना से बचा भारत, विकास भी उन्हीं की वजह से हुआ: जी श्रीनिवास राव, हेल्थ डायरेक्टर

                                                                                          तेलंगाना के स्वास्थ्य निदेशक
दुनिया भर में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के बीच तेलंगाना के स्वास्थ्य निदेशक जी श्रीनिवास राव का अजीब बयान सामने आया है। उन्होंने क्रिसमस से पूर्व आयोजित एक कार्यक्रम में ईसाइयत का महिमामंडन करते हुए कहा कि ईसा मसीह की वजह से ही भारत में कोविड को नियंत्रित किया जा सका। जीसस के चलते हीं लोग कोरोना महामारी से बच पाए।

श्रीनिवास ने भद्राद्री कोठागुडेम जिले में आयोजित क्रिसमस से पूर्व एक समारोह में यह विवादास्पद बयान दिया। टीवी 9 तेलुगु में छपी रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ”ईसाई धर्म की वजह से ही भारत का विकास हुआ है। ईसा मसीह की कृपा से ही कोविड कम हुआ है। बहुत से लोगों का सोचना है कि कोरोना कम हो गया क्योंकि हम अच्छा काम कर रहे हैं। यह वास्तविकता नहीं है। जीसस क्राइस्ट की वजह से मामले कम हुए हैं।”

श्रीनिवास ने आगे कहा, ”मानव जाति का अस्तित्व खतरे में है। ईश्वर तो बहुत हैं, लेकिन केवल केवल यीशु ही है जो पृथ्वी पर चले थे।” श्रीनिवास ने कहा कि उनके पूर्वजों ने यह सब देखा है और आने वाली पीढ़ियों को यह बताया है। उन्होंने आगे लोगों से जाति और धर्म की परवाह किए बिना ईसा मसीह के संदेश को आगे ले जाने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का आह्वान किया।

आश्चर्यजनक है कि सरकारी पद पर बैठा व्यक्ति एक पादरी की तरह बातें कर रहा है। यह पहली बार नहीं है कि श्रीनिवास विवादों में आए हैं। इससे पहले भी वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के पैर छूने को लेकर विवादों में रह चके हैं। श्रीनिवास के बयान को लेकर तेलंगाना भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। राज्य भाजपा ने स्वास्थ्य निदेशक का बयान को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है।

तेलंगाना भाजपा के नेता कृष्णा सागर राव ने कहा, ”एक तो वह कह रहे हैं कि भारत का जो भी विकास हुआ है वह जीसस क्राइस्ट ने किया है। वह यह भी कह रहे हैं कि कोविड-19 और उसके बाद की स्थितियों को यीशु ने संभाला। यह उनकी निजी आस्था हो सकती है लेकिन सार्वजनिक रूप से वह ऐसा कैसे कह सकते हैं। फिर वह स्वास्थ्य निदेशक क्यों हैं। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और यीशु को इसकी रक्षा करने देना चाहिए।”

वहीं विवाद बढ़ता देख श्रीनिवास ने ट्वीट कर सफाई दी है। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, ”मेरी छवि को खराब करने के लिए लोगों के एक वर्ग द्वारा मेरे भाषण को गलत तरीके से पेश किया गया है। मेरा पूरा वीडियो देखिए, मैंने केवल इतना कहा है कि सरकार के प्रयासों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और सभी धर्मावलंबियों की प्रार्थनाओं की वजह से हम कोरोना पर लगाम कस पाए।”

तेलंगाना के स्वास्थ्य निदेशक के दावों के विपरीत भारत अपनी रणनीति की वजह से कोरोना के घातक लहरों से उबर पाया था। देश में कड़े लॉकडाउन लगाए गए, जिससे सामुदायिक संक्रमण कम हुआ।प्रभावशाली टीकों का निर्माण किया गया और इतनी बड़ी आबादी के लिए सफलता पूर्वक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया। हालाँकि दुनियाभर में फिर से पाँव पसार रहे कोरोना ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है।