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करौली दंगा : कांग्रेस के फरार पार्षद मतलूब अहमद के घर से मिले हिन्दुओं पर हमले में इस्तेमाल हुए जैसे हथियार

                    करौली हिंसा के बाद से फरार कांग्रेस पार्षद मतलूब अहमद (चित्र साभार: फेसबुक)
राजस्थान के करौली में हिंदुओं के जुलूस पर मुस्लिम बहुल इलाके में हमला किया गया था। इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता कांग्रेस पार्षद मतलूब अहमद बताया जाता है। वह फरार चल रहा है। इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस तरह के हथियारों से हिंदुओं के जुलूस को निशाना बनाया गया था, उसी तरह के हथियार कांग्रेस नेता मतलूब अहमद के घर से मिले हैं।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट की माने तो हिंसा से पहले ही घरों में हथियार जुटा लिए गए थे। इन हथियारों में पत्थर, लाठी और डंडे शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों ने हमलावरों को रोकने के प्रयास नहीं किए। अपने इन दावों की पुष्टि के लिए टाइम्स नाउ ने कुछ वीडियो का भी हवाला दिया है। इस पर करौली के SP ने कहा है, “हम फुटेज की जाँच करेंगे और अगर कोई पुलिसकर्मी कर्तव्यों में लापरवाही बरतता पाया गया तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।”

इससे पहले एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ था कि जिस इलाके में हिंदुओं पर पत्थर बरसाए गए वहाँ की मस्जिद, घरों की छतों पर पहले से ही भारी-भारी ईंट-पत्थर इकट्ठा कर रखे गए थे। हिंसा के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया था। 7 अप्रैल (गुरुवार) को लोगों को जरूरी सामान खरीदने के लिए सुबह 9 बजे से 11 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई।

करौली में हिंदू नव वर्ष के जुलूस पर 2 अप्रैल 2022 (शनिवार) को हिंसा हुई थी। इसके बाद दुकानों में आगजनी की गई। इस पूरे घटनाक्रम में पुष्पेंद्र नाम का एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। उनके शरीर पर चाकू से हमले के निशान हैं। उपद्रवियों को काबू करते हुए पुलिस के 4 जवान भी घायल हुए थे। कुल 43 लोगों के घायल होने की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद मामले में जाँच शुरू हुई और पीएफआई का एक पत्र सामने आया जिसने इस हिंसा के सुनियोजित होने की ओर इशारा किया। बाद में कांग्रेस नेता मतबूल की भूमिका भी पूरी हिंसा में पाई गई।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी इस हिंसा को सुनियोजित बताया था। उन्होंने कहा था कि करौली हिंसा के दौरान जिस तरह से पथराव किया गया, उससे साबित होता है कि इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया और इसे रोका जा सकता था।

क्या हिंदू नववर्ष पर करौली में हिंसा के पीछे PFI? अब RSS को दोषी बता रहे कांग्रेस के मंत्री

                               हिंसा से 2 दिन पहले PFI ने गहलोत सरकार और DGP को लिखी थी चिट्ठी
राजस्थान के करौली में हिंदू नव वर्ष पर 2 अप्रैल 2022 को हिंसा हुई थी। क्या इसके पीछे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) का हाथ है? यह सवाल एक पत्र से खड़ा हुआ है जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस हिंसा से ठीक पहले लिखी गई थी।

1 अप्रैल को PFI ने एक प्रेस रिलीज जारी कर विवाद की बात कही थी। इस संबंध में राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ द्वारा सीएम को चिट्ठी लिखने की बात बताई थी। य​ह चिट्ठी राज्य के पुलिस महानिदेशक को भेजे जाने की बात भी कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि हाल के समय में देश के कई हिस्सों में सुनियोजित हिंसा में पीएफआई का नाम सामने आया है।

इस पत्र में लिखा गया था, “दिनांक 2 से 4 अप्रैल तक राजस्थान के तमाम जिलों, तहसीलों और कस्बों में RSS और उनके अन्य संगठनों द्वारा हिन्दू नववर्ष के अवसर पर भगवा रैली आयोजित की जा रही है। इन रैलियों में धार्मिक उन्माद फैलाने वाले नारों को प्रतिबंधित करने, साम्प्रदायिक सौहार्द को बचाने, कानून-व्यवस्था को कायम रखने और इन आयोजनों को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करवाने की माँग की जाती है।”

                                                         1 अप्रैल को पीएफआई की प्रेस रिलीज

इस संबंध में पूछे जाने पर राजस्थान सरकार के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, “सरकार के पास इनपुट था। पुलिस ने उसकी तैयारी भी की थी। सब जगह पुलिस साथ में चल रही थी। हम बहुत सख्त हैं और आगे कार्रवाई भी होगी। लेकिन जिस तरफ से BJP के लोग जुलूस निकाल रहे हैं, तो अगर BJP और RSS अपने कार्यालय में बैठ कर तय करवाते हैं कि राजस्थान में दंगे करवाने हैं तो इसका कोई इलाज ही नहीं है। इनका एजेंडा तय है कि दंगे करवाने हैं।”

भाजपा एवं संघ विरोधियों को किसी भी दंगे में भाजपा या आरएसएस ही क्यों दिखती है? क्या छतों से पत्थर बीजेपी और आरएसएस वाले फेंक रहे थे? आखिर कब तक ये छद्दम सेक्युलरिस्ट्स दंगाइयों को संरक्षण देते रहेंगे? इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने में भाजपा विरोधी हाशिए पर आने लगे हैं, उसके बावजूद अभी भी कोई अपनी गलती को सुधारने को तैयार नहीं।  

वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने करौली हिंसा के मामले में एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद उन्होंने कहा, “अपराधी चाहे किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का हो। उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। SIT की टीम मौके से सबूत जुटा रही है। पुलिस ने अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी बताई है। लगभग 15 लोग हिरासत में हैं जिनसे पूछताछ की जा रही है। CCTV फुटेज चेक कर बाकी आरोपितों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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करौली हिंसा में कुल 43 लोग घायल हुए थे। अभी भी इंटरनेट बंद हैं। जिन छात्रों की क्लास 12 बोर्ड की परीक्षाएँ चल रही हैं, उनके प्रवेश पत्र ही उनके पास के तौर पर काम आएँगे। बच्चों को परीक्षा केंद्र तक ले जाने के लिए उनके अभिभावकों को भी छूट दी गई है। सरकारी कर्मचारी अपना पहचान-पत्र दिखा कर ऑफिस जा सकते हैं।