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एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन - 2 में रायता फैला दिया - मीलॉर्ड, किसान ट्रैक्टर ट्रॉली और JCB के बगैर आएंगे, क्या आप गारंटी लेंगे ? पहले बताएं कि पहली किसान समिति की रिपोर्ट का क्या हुआ -

सुभाष चन्द्र

किसान आंदोलन 2 भी राजनीति का अखाड़ा बन गया लगता है, और जैसे पहले  सुप्रीम कोर्ट ने रायता फैलाया था, उसी तरह इस बार भी फ़ैलाने का कार्यक्रम बना दिया है जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने। बगैर जमीनी हकीकत को जाने आर्डर पर आर्डर दिए जाते हैं।

किसान आंदोलन पार्ट-1 में भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा ही किया था, किसी बॉर्डर को खाली कराने के लिए कोई पहल नहीं की जबकि कई बार लोगों ने याचिका लगाई। लेकिन आज शम्भू बॉर्डर को खुलवाने के लिए उतावले हैं।

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यह शंभू बॉर्डर सुरक्षा को ध्यान में रख कर हरियाणा सरकार ने बंद किया हुआ है।

10 जुलाई को पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा को आदेश दिया कि 7 दिन में शंभू बॉर्डर से barricades हटा दिए जाएं;

12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट पूछता है कि “कोई राज्य हाईवे कैसे बंद कर सकता है, Traffic Regulate करना राज्य का काम है। हम कह रहे हैं कि बॉर्डर भी खोलिए और Control भी कीजिए”। ये सभी टिप्पणियां अपनी आदत के अनुसार “मौखिक रूप” से की।

आज मीलॉर्ड ने तुषार मेहता से पूछा कि अगर किसान बगैर ट्रैक्टर के दिल्ली आते हैं तो?

लेकिन मीलॉर्ड क्या आप गारंटी ले सकते हैं कि किसान बिना ट्रेक्टर आएंगे और वादा करके भी वे न आये और दंगा किया तो आप क्या जिम्मेदारी लेंगे? तुषार मेहता ने कहा कि “नेशनल हाईवे पर JCB और ट्रैक्टर ट्रॉली की इजाजत नहीं दे सकते। बॉर्डर की दूसरी तरफ 500 ट्रैक्टर ट्राली बख्तरबंद के रूप में मौजूद हैं। उन्होंने एसी लगा रखा है गाड़ियों में। हम उस बात से चिंतित हैं कि टैंक के रूप में उन्होंने जो गाड़ियों को बनाया है, वो चिंता का विषय है”। 

मीलॉर्ड कहते हैं किसी ऐसे व्यक्ति को किसानों से बातचीत के लिए भेजा जाए जो किसानों का भरोसा जीत सके, तो मीलॉर्ड, एक बार आप ही जाकर देख लीजिए वो कितना सुनते हैं आपकी, और आप किसानों को दिल्ली क्यों लाना ही चाहते हैं?

किसान आंदोलन-1 में भी दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी 26 जनवरी 2021 के किसानों के मार्च पर बैन लगा दीजिए लेकिन चीफ जस्टिस शरद बोबडे ने मना कर दिया ये कहते हुए कि कानून व्यवस्था संभालना आपका काम है। फिर जो तांडव किसानों ने किया वह सब जानते है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली।

आज फिर वही  दोहराना चाहते हैं मीलॉर्ड कि बॉर्डर खोल दो लेकिन कंट्रोल करो मतलब बॉर्डर की दूसरी तरफ जो 500 ट्रैक्टर ट्राली बख्तरबंद के रूप में मौजूद हैं उनसे मुकाबला करो जो कभी भी बेकाबू हो सकते हैं।

आज हरियाणा सरकार की अपील पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए मीलॉर्ड ने और एक विशेषज्ञों की समिति बनाने के आदेश दिए जिसकी रिपोर्ट आने तक यथास्थिति बनी रहेगी। केंद्र और दोनों राज्यों से विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा है।

ऐसा रायता समिति बनाने का CJI बोबडे ने भी फैलाया था और समिति की रिपोर्ट पर 8 महीने तक कोई फैसला नहीं लिया गया, शायद किसी ने रिपोर्ट पढ़ी ही नहीं और अब एक बार फिर वही समिति का राग शुरू कर रायता फैलाने का काम किया है मीलॉर्ड ने।