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उत्तर प्रदेश : पहली बार ‘कांग्रेस मुक्त’ हुई विधान परिषद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया था। हालांकि उनके नारे का मतलब राजनीतिक रूप से मुख्य विपक्षी दल को समाप्त करने का नहीं बल्कि देश को कांग्रेस संस्कृति से छुटकारा दिलाना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का यह नारा उत्तर प्रदेश में सच साबित होता नजर आ रहा है। 6 जुलाई, 2022 को कांग्रेस के एकमात्र  विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह का कार्यकाल खत्म हो गया। इसके साथ ही पहली बार यूपी विधान परिषद कांग्रेस मुक्त हो गई। यूपी कोटे से राज्यसभा में कांग्रेस पहले ही मुक्त हो चुकी है। इस तरह उत्तर प्रदेश से न तो संसद के उच्च सदन में और न ही विधान परिषद में कांग्रेस का कोई सदस्य है।

कांग्रेस को इस बात पर जरूर मंथन करना चाहिए कि आखिर कांग्रेस की इतनी दुर्दशा क्यों हो रही है? कांग्रेस में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कांग्रेस में कोई परिवार के विरुद्ध बोलने का साहस नहीं कर पा रहा। और हकीकत यह है कि जिस दिन सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के लिए तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर किया था, उसी दिन से कांग्रेस का पतन शुरू हो गया था, और बाकि कसर राहुल और प्रियंका पूरी कर रहे हैं। 

एकलौती विधान परिषद सीट भी हाथ से निकली

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के गठन (5 जनवरी, 1887) के बाद से कभी ऐसा नहीं हुआ कि जब कांग्रेस का सूबे के उच्च सदन में प्रतिनिधित्व न रहा हो। लेकिन अब विधान परिषद में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या जीरो हो चुकी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज दो सीटों पर सिमट गई। इसका नतीजा यह रहा कि कांग्रेस को सूबे में अपनी राज्यसभा सीट गवांनी पड़ी तो अब एकलौती विधान परिषद सीट भी हाथ से निकल गई। जून 2022 में हुए चुनाव में कांग्रेस को एक सीट के लिए 31 विधायकों के वोट जरूरी थी, लेकिन उसके पास मात्र दो विधायक थे।

कांग्रेस का सिलसिला उनकी पांचवीं पीढ़ी पर आकर खत्म

गौरतलब है कि विधान परिषद के 12 सदस्यों का कार्यकाल जुलाई 6 को खत्म हो गया, उनमें 6 सपा के, 3 बसपा के, एक कांग्रेस और दो बीजेपी के सदस्य है। इन 12 सीटों के लिए जून में चुनाव हो चुके हैं। बीजेपी के दोनों सदस्य दोबारा से चुन लिए गए हैं, जिनमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और भूपेंद्र सिंह चौधरी जबकि कांग्रेस सहित बाकी किसी भी सदस्य की वापसी विधान परिषद में नहीं हो पाई। इस तरह से कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे मोतीलाल नेहरू से शुरू हुआ कांग्रेस का सिलसिला उनकी पांचवीं पीढ़ी पर आकर खत्म हो गया।

विधान परिषद में बीजेपी को पहली बार मिला बहुमत

ब यूपी विधान परिषद में कांग्रेस का इत‍िहास समाप्‍त हो चुका है। वहीं यूपी की राजनीति में बीजेपी ने पहली बार विधान परिषद में बहुमत हासिल किया है। विधान परिषद में भी बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद अब योगी सरकार को दोनों सदनों में विधेयक और प्रस्ताव दोनों पारित कराने में आसानी होगी। जून 2022 में यूपी विधान परिषद की 13 सीटों के संपन्न हुए चुनाव में 9 बीजेपी और 4 सपा उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की। इसके साथ ही पिछले पांच वर्ष में उच्च सदन में बीजेपी की सदस्य संख्या 7 से बढ़कर 81 हो गई है। इससे पहले विधान परिषद के 36 सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने 33 सीटें जीती थीं। 2 सीट निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में आई थीं।  

उत्तर प्रदेश में सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस

यूपी की राजनीति में कांग्रेस पार्टी की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रियंका गांधी के नेतृत्व के बावजूद कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। प्रियंका गांधी कांग्रेस की डूबती नाव को बचाने में असफल रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय लल्लू खुद विधायकी का चुनाव हार गए। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद से 15 मार्च को इस्तीफा दिया। इसके बावजूद अभी तक पार्टी एक अध्यक्ष तक नहीं तलाश पाई है। कांग्रेस को पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी मात खानी पड़ी। कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी संसदीय सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा और किसी तरह से रायबरेली सीट पर सोनिया गांधी को जीत मिली थी।