Showing posts with label #MP Nishikant Dubey. Show all posts
Showing posts with label #MP Nishikant Dubey. Show all posts

AI वीडियो-अप्रकाशित किताब के प्रोपेगेंडा को निशिकांत दुबे ने किताबों के सत्य से धोया, नेहरू-इंदिरा-सोनिया सबकी एक साथ पोल खुलने से बौखलाई कांग्रेस

बिना छपी किताब से सरकार को बदनाम करने की साजिश करने वाले राहुल गाँधी को निशिकांत दुबे की छपी हुई किताबों से क्यों दिक्कत? (साभार: SansadTV)
लोकसभा में बहस होनी थी महामहिम राष्ट्रपति के भाषण और बजट पर, लेकिन LoP राहुल गाँधी ने उन मुद्दों पर न बोलकर लोकतंत्र को तार-तार कर दिया। राहुल जब भी विदेश जाकर अपने आकाओं से मिलकर आते कोई न कोई बिनसिर पैर के विवाद खड़ा कर माहौल ख़राब करते हैं। फरवरी 4 को जिस तरह प्रधानमंत्री की कुर्सी को महिला सांसदों द्वारा घेरा गया लोकतंत्र के लिए कलंक है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में होते और कोई अप्रिय घटना हो गयी होती कौन जिम्मेदार होता?     

पिछले चार दिनों से संसद में राहुल गाँधी और उनके कांग्रेसी नेता बवाल मचाए हुए हैं। मुद्दा है चीन का। राहुल गाँधी संसद के भीतर एक ऐसी किताब के अंशों का हवाला दे रहे हैं, जो अभी तक छपी ही नहीं है। उसी किताब के आधार पर सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि चीन के मुद्दे पर सच्चाई छुपाई जा रही है।

लेकिन बुधवार (04 फरवरी 2027) को तस्वीर अचानक बदल गई। बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने राहुल गाँधी की पूरी हवाबाजी महज एक मिनट में धराशायी कर दी। उन्होंने सदन में पहले से छपी हुई किताब के कुछ अंश पढ़कर सुनाए। इसके बाद न सिर्फ राहुल गाँधी, बल्कि कांग्रेस के बाकी नेता भी सन्न रह गए।

बिना छपी किताब और AI वीडियो के सहारे सरकार को बदनाम करने की कोशिश

मामले की शुरुआत 02 फरवरी 2026 को हुई, जब राहुल गाँधी अचानक संसद में कुछ पन्ने निकालकर पढ़ने लगे। उन्होंने इसे सीधे तौर पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जुड़ा मुद्दा बताया। राहुल गाँधी ने दावा किया कि ये अंश पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की किताब से हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि इस किताब में लिखा है कि चीन के साथ युद्ध जैसे हालात में सरकार ने कोई आदेश नहीं दिया। राहुल गाँधी का दावा है कि नरवणे उस वक्त अकेले पड़ गए थे और सरकार ने जानबूझकर पीछे हटने का फैसला लिया।
राहुल गाँधी के इस दावे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत सवाल उठाए। उन्होंने साफ पूछा कि ये कहानी आखिर आ कहाँ से रही है? राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस किताब के अंश संसद में पढ़े जा रहे हैं, वह किताब अब तक छपी ही नहीं है। जब किताब छपी ही नहीं, तो उसके अंशों के आधार पर सरकार पर सवाल कैसे खड़े किए जा सकते हैं?
इसके बाद संसद में जोरदार हंगामा शुरू हो गया, जो अगले दिन के सत्र तक चलता रहा। विपक्ष के नेता टेबल पर चढ़े, स्पीकर की ओर कागज उछाले गए और नारेबाजी से सदन का कामकाज ठप हो गया।
लेकिन सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने की कोशिश संसद तक ही सीमित नहीं रही। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से एक AI वीडियो जारी किया, जिसमें उसी बिना छपी किताब की कहानी को विजुअल के रूप में दिखाया गया। इस वीडियो के सहारे से सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की गई।

कांग्रेस की साजिश, निशिकांत दुबे ने की धराशायी

कांग्रेस की सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की साजिश का जवाब देने संसद में बीजेपी नेता निशिकांत दुबे मैदान में उतरे। 04 फरवरी 2027 को उन्होंने राहुल गाँधी को सीधे-सीधे जवाब देते हुए जवाहर लाल नेहरू, सोनिया गँधी और इंदिरा गाँधी समेत गाँधी परिवार के अतीत को सदन के सामने खोलकर रख दिया, वह भी सारी छपी हुई किताबों से।

निशिकांत दुबे हाथ में छपी हुई किताबें लेकर आए और कहा कि अगर बिना छपी किताब के पन्ने लहराकर तीन दिन तक संसद ठप की जा सकती है, तो फिर उन किताबों पर भी चर्चा होनी चाहिए जो छप चुकी है और जिनमें कांग्रेस और नेहरू के कारनामें दर्ज हैं। उन्होंने ‘नेहरू: ए बायोग्राफी’, ‘एडविना एंड नेहरू’ और दूसरी पुस्तकों के अंश पढ़ते हुए नेहरू पर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और निजी जीवन की अय्याशियों की पोल खोली।

निशिकांत दुबे ने कहा कि देश को गुमराह करने की कांग्रेस की आदत पुरानी है और आज वही पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी झूठे नैरेटिव के सहारे प्रधानमंत्री और सरकार को बदनाम करने में लगी है। निशिकांत दुबे का हमाल यही नहीं रुका। उन्होंने राहुल गाँधी से सीधा सवाल किया क्या कांग्रेस इन किताबों को भी फर्जी बताएगी या फिर सच सामने आने पर चुप्पी साध लेगी?

इस पर कांग्रेस बौखला गई। प्रियंका गाँधी ने दुबे के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संसद में इस तरह कि किताबें पढ़ना नियमों के खिलाफ है और बीजेपी जानबूझकर नेहरू का नाम उछालकर ध्यान भटकाना चाहती है। कांग्रेस नेताओं ने इसे निजी हमला बताया और हंगामा शुरू कर दिया।

कांग्रेस का असली चेहरा

इससे पता चलता है कि कांग्रेस अब हर उस हद तक जाने को तैयार दिख रही है, जहाँ से सरकार और प्रधानमंत्री को नीचा दिखाया जा सके। पहले संसद में बिना छपी किताब के पन्ने लहराए गए, फिर उसी झूठी कहानी को सच साबित करने के लिए कांग्रेस ने AI वीडिया बनाकर चलाया। सवाल साफ है, जिस किताब का अस्तित्व ही सार्वजनिक तौर पर नहीं है, उसके सहारे कांग्रेस ने सरकार और प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की पूरी कोशिश की। यह सोची-समझी साजिश नजर आती है।

लेकिन जैसे ही बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में छपी हुई किताबों का जिक्र कर दिया, कांग्रेस घबरा गई। जिन किताबों को कोई नकार नहीं सकता, जिनका रिकॉर्ड मौजूद है, जिनके लेखक और पन्ने सबके सामने हैं। उन्हीं से कांग्रेस को सबसे ज्यादा डर लगने लगा। साफ है, जो पार्टी अप्रकाशित किताब और AI वीडियो के सहारे झूठ गढ़ सकती है, वही पार्टी सच सामने आते ही बौखला जाती है। यही कांग्रेस का असली चेहरा है।

राजीव गाँधी ने भारत-पाकिस्तान में सुलह के लिए अमेरिका से माँगी थी मदद, राष्ट्रपति रीगन को लिखा था पत्र: भाजपा MP निशिकांत दुबे ने 1987 का पत्र दिखा पूछे सवाल

    राजीव गांधी-रोनाल्ड रीगन, तस्वीरें इंस्टाग्राम पर Rememberingrajiv और यूट्यूब पर रीगन लाइब्रेरी से ली गई हैं
2014 में मोदी सरकार बनने से पहले कांग्रेस पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा हमला करने पर डोसियर-डोसियर खेलती थी। अमेरिका के आगे रोती थी की पाकिस्तान ने हमें मारा लेकिन मोदी सरकार सीधे पाकिस्तान की छाती पर बैठ मारती है। और आज वही पाकिस्तान अमेरिका के आगे रो रहा है "बचा लो मोदी से।" मोदी सरकार से पहले तक जो पब्लिक पाकिस्तान से डरी-डरी रहती थी लेकिन आज वही पाकिस्तान उसकी भाषा में जवाब मिलने पर डरा हुआ है।      

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार (28 मई 2025) को कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि 1987 में भारत-पाकिस्तान के बीच शांति समझौता करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने अमेरिका से मदद माँगी थी। निशिकांत दुबे ने यह दावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा राजीव गांधी को लिखे एक पुराने पत्र के आधार पर किया है, जिसे अब सार्वजनिक कर दिया गया है।

निशिकांत दुबे ने दिखाया 1987 पत्र

निशिकांत दुबे का कहना है कि 1972 के शिमला समझौते के तहत यह तय हुआ था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी विवाद सिर्फ दोनों देशों के बीच बातचीत से सुलझाया जाएगा, इसमें कोई तीसरा देश शामिल नहीं होगा। ऐसे में राजीव गाँधी का अमेरिकी मदद माँगना इस समझौते का उल्लँघन है।
दुबे ने 25 मार्च, 1987 को अमेरिकी राजदूत द्वारा राजीव गाँधी को भेजे गए एक कथित पत्र का हवाला दिया है। निशिकांत दुबे ने बताया कि इस पत्र में गाँधी ने सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत में अमेरिकी विशेषज्ञों की मदद माँगी थी ऐसा लिखा है। रीगन ने कहा था कि अगर भारत और पाकिस्तान की सरकारें मदद माँगती हैं तो उन्हें खुशी होगी।
हालाँकि, रीगन के इस पत्र में सीधे तौर पर 1987 के भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में अमेरिका की दखलअंदाजी का कोई संकेत नहीं मिलता है। पत्र में सिर्फ भविष्य के तनाव को कम करने के लिए पूर्वी और पश्चिमी यूरोप के बीच प्रभावी तरीकों के बारे में कुछ जानकारी देने की बात कही गई है।
यह नया दावा ऐसे समय में आया है जब हाल ही में पहलगाम आतंकवादी हमले और भारत के जवाबी ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है, और तीसरे पक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

इंदिरा गाँधी पर सवाल

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मंगलवार (27 मई 2025) को एक अमेरिकी खुफिया दस्तावेज़ शेयर किया। निशिकांत दुबे ने बताया कि यह दस्तावेज़ 1971 के बांग्लादेश युद्ध से जुड़ा है, जिसमें इंदिरा गाँधी ने संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम के प्रस्ताव को मान लिया था।
दुबे ने पूछा कि क्या भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को वापस लेने और करतारपुर गुरुद्वारा जैसी जगहों को सुरक्षित करने के बजाय बांग्लादेश बनाने को ज़्यादा अहमियत दी। निशिकांत दुबे ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर लिखा कि इंदिरा गाँधी ने अमेरिकी दबाव में आकर 1971 का युद्ध रोक दिया था, जबकि उस समय के रक्षा मंत्री जगजीवन राम और सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ इसके खिलाफ थे।

कॉन्ग्रेस का पलटवार

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर निशाना साधा है। जयराम रमेश ने कहा कि जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत में अमेरिका की मदद और किसी ‘तटस्थ जगह’ पर बात करने की बात कही, तो जयशंकर चुप क्यों रहे।

हालाँकि, भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में मदद की। भारत ने अपनी पुरानी नीति को दोहराते हुए साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा कोई भी मुद्दा भारत और पाकिस्तान मिलकर ही सुलझाएँगे, इसमें किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी नहीं होगी।
निशिकांत दुबे के इस दावे के बाद भारत द्वारा पूर्व में लिए गए इस फैसलों पर राजनीतिक बहस और तेज़ हो गई है।

भाजपा MP निशिकांत दुबे पर चले अवमानना का मुकदमा, वकील अनस तनवीर ने अटॉर्नी जनरल को लिखा पत्र: कहा- उनके बयान भड़काऊ, अनस मियां मौलाना जो भड़काऊ दे रहे हैं उस पर चुप्पी क्यों?


भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाने के लिए देश के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को पत्र लिखा गया है। यह पत्र सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने लिखा है। वकील ने कहा है कि सांसद दुबे के यह बयान भड़काऊ और अपमानजनक हैं। AG वेंकटरमणी से निशिकांत दुबे के खिलाफ यह मामला चलाने की अनुमति माँगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पत्र सुप्रीम कोर्ट में वकील अनस तनवीर ने लिखा है। इस पत्र में लिखा गया है, “उन्होंने लापरवाही से देश में अशांति के लिए CJI को जिम्मेदार ठहराया है और इस प्रकार उन्होंने देश की सबसे बड़ी अदालत को बनाम किया है। उन्होंने इससे जनता में गुस्सा और असंतोष भड़काने का प्रयास किया है।”

AG वेंकटरमणी को भेजे गए गए पत्र में कहा गया है कि सांसद निशिकांत दुबे का बयान निराधार है और यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर हमला है। यही दावे करते हुए निशिकांत दुबे के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए AG वेंकटरमणी से मंजूरी माँगी गई है।

अनस तनवीर ने का अवमानना का यह पत्र दुबे के हाल ही में सुप्रीम कोर्ट पर दिए गए बयानों को लेकर लिखा है। निशिकांत दुबे हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति के लिए डेडलाइन सेट करने और वक्फ कानून के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश देने को लेकर मुखर रहे हैं।

उन्होंने राष्ट्रपति के लिए डेडलाइन सेट करने के मुद्दे पर कहा था, “क़ानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिये।” इसके अलावा ANI को दिए एक बयान में उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियाँ राष्ट्रपति करता है, ऐसे में अदालत उन्हें आदेश कैसे दे सकती है।

निशिकांत दुबे ने इसके अलावा वक्फ मुद्दे के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाने के चलते सुप्रीम कोर्ट को लेकर कहा था, “देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाओं से बाहर जा रहा है। अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना ही पड़े तो संसद और विधानसभाएँ बंद कर देनी चाहिए।”

निशिकांत दुबे के इन बयान के बाद न्यायिक दखल को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। हालाँकि, उनके इन दोनों बयानों से भाजपा ने किनारा कर लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि यह निशिकांत दुबे की निजी राय है और इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।

MP निशिकांत दुबे-दिनेश शर्मा के बयान से BJP ने किया किनारा, बेशर्म नड्डा अध्यक्ष पद ही नहीं पार्टी भी छोड़ो ;‘सीमाओं को लाँघ रहा है सुप्रीम कोर्ट, धार्मिक युद्ध भड़काने का जिम्मेदार’: नड्डा बोले- ये उनके निजी विचार

भाजपा अध्यक्ष नड्डा में शर्म नाम की चीज है तो पार्टी अध्यक्ष ही नहीं पार्टी से त्याग पत्र दो। निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा ने क्या गलत कहा है? भारत को कांग्रेस मुक्त करने से पहले राज करना कांग्रेस से सीखो। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के चुनाव को रद्द कर 6 साल चुनाव न लड़ने वाले जज साहब कहाँ है? नूपुर शर्मा के केस में तो पल्ला झाड़ लिया, क्यों? बेशर्मों मुस्लिम कट्टरपंथियों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए बीजेपी को प्रेस कांफ्रेंस कर कटी-फटी वीडियो और original वीडियो दिखानी चाहिए थी और मीडिया को आदेश देना था कि जो मीडिया नहीं आएगी उसे 3 महीने का और लाइव नहीं दिखाने पर 6 महीने के लिए ban कर दिया जाएगा। दूसरे, तेलंगाना में टी राजा सिंह के मुद्दे पर भी बेशर्म बीजेपी ने पल्ला झाड़ लिया। जिसका नुकसान तेलंगाना विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कम से कम 20 से 25 नुकसान हुआ, इसके जिम्मेदार कोई और नहीं तुम्हारे जैसे दोगले अध्यक्ष जिम्मेदार है। बेशर्म नड्डा जी आंखे खोलकर देखो "सिर तन से जुदा" धमकी के बाद आज भी अपने दम पर आज़ाद घूम रहे है। चुनाव लड़े और जीते भी। तेलंगाना में अगर बीजेपी जिन्दा है तो राजा सिंह और योगी जी के दम पर। नड्डा जैसे अध्यक्ष के दम पर नहीं। 
आखिर बीजेपी को कितना नीचे गिराओगे नड्डा जी? आंखें खोले और देखो social media पर तुम्हारी कितनी थू-थू हो रही है। जज के घर नोटों के बंडल जलते हैं नड्डा जी क्यों चुप हो? क्यों नहीं महामहिम से उस जज के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा? या फिर खुलकर बोलो कि बीजेपी मुस्लिम कट्टरपंथियों और judiciary के आगे नतमस्तक है। सनातन को आरोपित करने वालों पर चुप रहते हो फिर कहते फिरते हो हिन्दुत्व।      
 
              
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा के सुप्रीम कोर्ट को लेकर दिए गए बयान से पार्टी ने किनारा कर लिया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि दोनों के बयान उनके निजी विचार हैं और इनसे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर न्यायिक दखल का आरोप लगाया था।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा का न्यायपालिका एवं देश के चीफ जस्टिस पर दिए गए बयान से भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना–देना नहीं है। यह इनका व्यक्तिगत बयान है, लेकिन भाजपा ऐसे बयानों से ना तो कोई इत्तेफाक रखती है और ना ही कभी भी ऐसे बयानों का समर्थन करती है। भाजपा इन बयान को सिरे से खारिज करती है।”

गौरतलब है कि झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने वक्फ कानून और राष्ट्रपति को दिए गए फैसले को लेकर बयान दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर शीर्ष अदालत को ही कानून बनाना है तो संसद और राज्य विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि कोर्ट कैसे राष्ट्रपति को आदेश दे सकता है।

सांसद निशिकांत दुबे ने ANI को दिए बयान में कहा, “देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाओं से बाहर जा रहा है। अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना ही पड़े तो संसद और विधानसभाएँ बंद कर देनी चाहिए।”

 उन्होंने चीफ जस्टिस संजीव खन्ना पर भी तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि चीफ जस्टिस संजीव खन्ना इस देश में गृह युद्ध के लिए जिम्मेदार हैं। उनके साथ ही इस पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम और वर्तमान में राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने भी कहा था कि संसद को कोई चुनौती नहीं दे सकता, यह बात संविधान में साफ़ लिखी हुई है।

दिनेश शर्मा ने कहा, “लोगों में यह आशंका है कि जब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान लिखा था, तो उसमें विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार स्पष्ट रूप से लिखे गए थे… भारत के संविधान के अनुसार, कोई भी लोकसभा और राज्यसभा को निर्देश नहीं दे सकता है और राष्ट्रपति पहले ही इस पर अपनी सहमति दे चुके हैं। कोई भी राष्ट्रपति को चुनौती नहीं दे सकता, क्योंकि राष्ट्रपति सर्वोच्च हैं।”

भाजपा के इन सांसदों के बयान से किनारा करने के बाद भी विपक्ष उस पर हमलावर है। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने न्यापालिका को धमकी देने का आरोप लगाया है। वहीं AAP ने भी भाजपा सांसदों पर कार्रवाई की माँग की है।

क्यों हो रहा विवाद?

हाल ही में तमिलनाडु के राज्यपाल के विधेयकों को रोकने से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति की ‘जेबी वीटो’ से जुड़ी शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी। अदालत ने राष्ट्रपति से कहा था कि वह राज्यपाल द्वारा भेजे गए विधेयकों पर तीन माह के भीतर फैसला लें। इस फैसले के कुछ दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून को लेकर कई टिप्पणियाँ की। इसके बाद से ही न्यायपालिका के दखल को लेकर चर्चा चालू हो गई।