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उत्तर प्रदेश : कोर्ट ने महाभारत कालीन लाक्षागृह हिंदुओं को सौंपा, कहा- ये मजार और कब्रिस्तान नहीं: 100 बीघा जमीन पर मुस्लिम कर रहे थे दावा, बता रहे थे बदरुद्दीन की दरगाह

                        लाक्षागृह की जमीन पर विवाद में हिंदू पक्ष की जीत (फोटो साभार : News18)
महाभारत में जिस लाक्षागृह की चर्चा है, वो लाक्षागृह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बागपत में स्थित है। ये वही लाक्षागृह है, जिसे दुर्योधन ने पाण्डवों को मारने के लिए एक साजिश के तहत बनवाया था। अब मुस्लिम पक्ष साल 1970 से ये दावा कर रहा है कि जिस टीले पर लाक्षागृह का होना बताया जाता है, वहाँ बदरुद्दीन की मजार है। कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर पूरी जमीन और मजार हिंदुओं को सौंप दी।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि बदरुद्दीन के कथित मजार के आसपास मुस्लिमों का कब्रिस्तान भी है। उनका दावा है कि ये जमीन मुस्लिम वक्फ बोर्ड की है। ये मामला पिछले 53 साल तक कोर्ट में चला। अब इस मामले में फैसला आ गया है। कोर्ट ने माना कि यह लाक्षागृह ही है, मजार नहीं। कोर्ट ने 100 बीघे की पूरी जमीन और मजार को हिंदुओं को सौंपने का आदेश दिया है।

हिंदू पक्ष के वकील रणवीर सिंह ने बताया कि मुस्लिम पक्ष 100 बीघा भूमि को कब्रिस्तान और मजार बताकर उस पर कब्जा करना चाह रहा था। उसको लेकर उन्होंने कोर्ट के समाने सारे सबूत पेश किए थे। उन्होंने कोर्ट बताया था कि लाक्षागृह का इतिहास महाभारत कालीन है। इस टीले पर संस्कृत विद्यालय और महाभारत कालीन सुराग भी मौजूद हैं।

यह मामला बागपत के एडीजे की कोर्ट में चल रहा था। बागपत के बरनावा में लाक्षागृह टीले की पहचान हुई है। साल 1953 में खुदाई के दौरान यहाँ पर लगभग 4500 साल पुराने पुरातात्विक महत्व के सामान भी मिले थे। अब इस जगह की पहचान दुर्योधन द्वारा बनाए गए लाक्षागृह से होती है। यह जगह अब भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण (ASI) के कब्जे में है।

हालाँकि, साल 1970 में उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड ने इस जगह पर अपना दावा ठोक दिया। वक्फ बोर्ड की तरफ से मुकीम खान ने लाक्षागृह टीले को बदरुद्दीन शाह की मजार और आसपास कब्रिस्तान बताया और इस पर मालिकाना हक जताते हुए एक मुकदमा दायर कर दिया। इस मामले में मुकीम खान ने ब्रह्मचारी कृष्णदत्त को प्रतिवादी बनाया था।

मुकीम खान ने कहा था कि ये जमीन वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में है, जिसमें शेख बदरुद्दीन की मजार और एक बड़ा कब्रिस्तान मौजूद है। वहीं, प्रतिवादी पक्ष की तरफ से यह कहा जा रहा था कि ये पांडवों का लाक्षागृह है। यहाँ महाभारत कालीन सुरंग है, पौराणिक दीवारे हैं और प्राचीन टीला मौजूद है। पुरातत्व विभाग यहाँ से महत्वपूर्ण पुरावशेष भी प्राप्त कर चुका है।

अब इस मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है, लेकिन कोर्ट का फैसला देखने के लिए अब इस दुनिया में ना ही मुकीम खान हैं और न ही ब्रह्मचारी कृष्णदत्त। यह मुकदमा 53 साल से चलता रहा। साल 1970 में यह मुकदमा तत्कालीन मेरठ (बागपत तब जिला नहीं था, बागपत को 1997 में जिला बनाया गया) जिला एवं सत्र न्यायालय में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम के यहाँ चल रही थी।

बताया जाता है कि यह टीला वही लाक्षागृह है, जहाँ पांडवों को जलाने का प्रयास किया गया था। कौरवों ने पांडवों को मरवाने के लिए यह लाक्षागृह बनवाया था और इसमें आग लगवा दी थी, लेकिन पांडव एक सुरंग से बाहर आ गए थे। ये सुरंग बरनावा में आज भी मौजूद है। यहाँ ASI दिल्ली द्वारा सन 2018 में ट्रेंच लगाकर टीले का उत्खनन किया जा चुका है, जिसमें राजपूत काल की पॉटरी और साक्ष्य भी मिले हैं।

कुरुक्षेत्र में ही क्यों लड़ा गया था महाभारत का युद्ध


महाभारत के अनुसार, भरतवंश में राजा कुरु ने जिस भूमि को बार-बार जोता, वह स्थान कुरुक्षेत्र कहलाया। राजा कुरु को देवराज इंद्र ने वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति इस स्थान पर युद्ध करते हुए मरेगा, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी। यही कारण है कि महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में लड़ा गया ?

ऐसे आगे बड़ा कुरुवंश
राजा कुरु का विवाह शुभांगी से हुए, जिनसे उनके पुत्र विदुरथ हुए, विदुरथ के संप्रिया से अनाश्वा, अनाश्वा के अमृता से परीक्षित, परीक्षित के सुयशा से भीमसेन, भीमसेन के कुमारी से प्रतिश्रावा, प्रतिश्रावा से प्रतीप, प्रतीप के सुनंदा से तीन पुत्र देवापि, बाह्लीक एवं शांतनु का जन्म हुआ। देवापि किशोरावस्था में ही संन्यासी हो गए एवं बाह्लीक युवावस्था में अपने राज्य की सीमाओं को बढ़ाने में लग गए। इसलिए सबसे छोटे पुत्र शांतनु को गद्दी मिली।
शांतनु के गंगा से देवव्रत हुए, जो आगे चलकर भीष्म के नाम से प्रसिद्ध हुए। भीष्म का वंश आगे नहीं बढ़ा, क्योंकि उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की थी। शांतनु की दूसरी पत्नी सत्यवती से चित्रांगद और विचित्रवीर्य हुए। चित्रांगद की मृत्यु के बाद विचित्रवीर्य का विवाह काशी की राजकुमारी अंबिका व अंबालिका से हुआ। इनसे धृतराष्ट्र व पांडु हुए। धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव कहलाएं और पांडु के पुत्र पांडव।
इसलिए इंद्र ने दिया राजा कुरु को वरदान
महाभारत के अनुसार, कुरु ने जिस क्षेत्र को बार-बार जोता था, उसका नाम कुरुक्षेत्र पड़ा। कहते हैं कि जब कुरु इस क्षेत्र की जुताई कर रहे थे तब इन्द्र ने उनसे जाकर इसका कारण पूछा। कुरु ने कहा कि जो भी व्यक्ति इस स्थान पर मारा जाए, वह पुण्य लोक में जाए, ऐसी मेरी इच्छा है। इन्द्र उनकी बात को हंसी में उड़ाते हुए स्वर्गलोक चले गए। ऐसा अनेक बार हुआ। इन्द्र ने अन्य देवताओं को भी ये बात बताई। देवताओं ने इन्द्र से कहा कि यदि संभव हो तो कुरु को अपने पक्ष में कर लो। तब इन्द्र ने कुरु के पास जाकर कहा कि कोई भी पशु, पक्षी या मनुष्य निराहार रहकर या युद्ध करके इस स्थान पर मारा जायेगा तो वह स्वर्ग का भागी होगा। ये बात भीष्म, कृष्ण आदि सभी जानते थे, इसलिए महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में लड़ा गया।
कुरुक्षेत्र का महत्व
महाभारत एवं अन्य पुराणों में कुरुक्षेत्र की महिमा के बारे में बताया गया है। महाभारत के वनपर्व के अनुसार, कुरुक्षेत्र में आकर सभी लोग पापमुक्त हो जाते हैं और जो ऐसा कहता है कि मैं कुरुक्षेत्र जाऊंगा और वहीं निवास करुंगा। यहां तक कि यहां की उड़ी हुई धूल के कण पापी को परम पद देते हैं। नारद पुराण में आया है कि ग्रहों, नक्षत्रों एवं तारागणों को कालगति से (आकाश से) नीचे गिर पड़ने का भय है, किन्तु वे, जो कुरुक्षेत्र में मरते हैं पुन: पृथ्वी पर नहीं गिरते, अर्थात् वे पुन:जन्म नहीं लेते। भगवद्गीता के प्रथम श्लोक में कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र कहा गया है

ममता बनर्जी का नया शिगूफा : महर्षि वेद व्यास ने नहीं ‘नज़रुल इस्लाम ने लिखी महाभारत’

वास्तव में नरेंद्र मोदी/भाजपा विरोध में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बुद्धि जरूर भ्रष्ट हो गयी है। ऐसा लगता है कि इन्हें किसी मनोवैज्ञानिक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। अन्यथा शायद वह दिन भी दूर नहीं, कहीं कभी भारत को पाकिस्तान ही न बोल दें, शंका है। 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने अनोखे और अजीबोगरीब बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं। अभी चंद्रयान-3 को लेकर उनके दिए अटपटे बयान को चंद दिन ही गुजरे हैं कि अब फिर से उन्होंने एक अजीबोगरीब बयान दे डाला है।

इस बार तृणमूल कॉन्ग्रेस की स्टूडेंड विंग (TMCP) के स्थापना दिवस पर सोमवार (28 अगस्त, 2023) उन्होंने विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम को महाभारत का रचियता बता डाला है। उनके इस बयान को लेकर भाजपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास को विकृत करना सीएम बनर्जी की पुरानी आदत रही है।

‘हमारे महापुरुषों को पढ़िए’

बांग्ला साहित्य के कवि काजी नजरुल इस्लाम को बंगाल के विद्रोही कवि के तौर पर जाना जाता है। उनके औपनिवेशिक शासन के खिलाफ और सांप्रदायिक सौहार्द पर लिखे गीत और कविताएँ खासे मशहूर हैं। TMCP के स्थापना दिवस पर सीएम ममता बनर्जी ने इन्हीं नज़रुल इस्लाम को महाभारत का रचियता बता दिया।
इस दौरान सीएम बनर्जी ने कहा कि केवल पढ़ाई जिंदगी के सही मायने नहीं सिखा सकती है, इसके लिए बड़ा दिल होना चाहिए। उन्होंने का कि हमें इसके लिए अपने महापुरुषों को लिखे को पढ़ना और समझना चाहिए। उन्होंने लोगों को रविंद्रनाथ टैगोर, नजरुल और विवेकानंद को पढ़ने की सलाह दे डाली। इसी दौरान उन्होंने कह दिया कि काजी नजरुल इस्लाम ने महाभारत लिखी थी।
ये पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपने बयान में ऐतिहासिक चीजों के बारे में गलत जानकारी दी है। इससे पहले चंद्रयान-3 मिशन के कामयाब होने पर भी वो ऐसा ही अटपटा बयान दे चुकी हैं। इसके लिए उन्हें खासा ट्रोल भी किया गया।

इंदिरा गाँधी चाँद पर गईं

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के 23 अगस्त को चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की कामयाबी के बाद भी सीएम बनर्जी ने ऐसा ही बयान दिया था। दरअसल, ममता बनर्जी ने राकेश शर्मा की जगह बॉलीवुड के डॉयरेक्टर राकेश रोशन को भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री बता डाला था।
उन्होंने ये भी कहा था कि इंदिरा गाँधी चाँद पर गई थीं और उन्होंने राकेश रोशन से पूछा था कि भारत वहाँ से कैसा दिखता है। यहीं नहीं उन्होंने सोयुज टी-11 को चंद्रयान कहा था, जबकि ये एक अंतरिक्ष कार्यक्रम था। तब उन्हें नेटिजन्स ने ये कहकर ट्रोल किया था कि कहीं उन्होंने चंद्रयान-3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण देखने की जगह राकेश रोशन की फिल्म ‘कोई मिल गया’ तो नहीं देख ली।

क्या है सीएम ममता बनर्जी का इरादा?

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी इस तरह के अटपटे और गलत बयानों पर पता नहीं क्या साबित करना चाहती है। विपक्षी दलों के महागठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA)’ की मुंबई में गुरुवार 31 अगस्त से तीसरी बैठक शुरू हो रही। ये 1 सितंबर तक चलेगी। इसमें 2024 लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों में पीएम पद की उम्मीदवारी पर चर्चा होने वाली है। ऐसे में सीएम बनर्जी की कहीं ये सभी का ध्यान खींचने की कोशिश तो नहीं की?

बनर्जी पर बीजेपी का वार

माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स पर बीजेपी एमएलए और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इतिहास को विकृत करना ममता बनर्जी की पुरानी आदत रही है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के ऐतिहासिक घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करना सार्वजनिक जानकारी का विषय है।
उन्होंने कहा कि यह आम तौर पर लोगों को हँसने का मौका देता है, कोई भी नाराज नहीं दिखता क्योंकि हर कोई जानता है कि सीएम का सामान्य ज्ञान वास्तव में खराब है, लेकिन हाल ही में उनमें हिंदू धर्म से संबंधित तथ्यों को विकृत करने की प्रवृत्ति विकसित हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि 4 जुलाई, 2023 को उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू पर टिप्पणी की कि उन्होंने या उनकी सरकार ने तारकेश्वर, कालीघाट, दक्षिणेश्वर और अन्य हिंदू तीर्थ स्थलों जैसे पवित्र मंदिरों का निर्माण किया है। 28 अगस्त, 2023 को अपने स्थापना दिवस के अवसर पर टीएमसीपी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे महान महाकाव्य महाभारत काजी नजरुल इस्लाम ने लिखा था।
अवलोकन करें:-
उन्होंने लिखा, “मुझे लगता है कि वह बहुत अच्छी तरह से जानती है कि महान ऋषि महर्षि वेदव्यास महाभारत के रचयिता हैं, लेकिन उन्होंने जानबूझकर कहा कि महाभारत के रचयिता काजी नजरुल इस्लाम हैं। ऐसा लगता है कि वह हमारे महान धर्म के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करके संतुष्टि की विकृत भावना महसूस करती है।”