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हिन्दू विरोधी I.N.D.I.A गठबंधन, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल तमिलनाडु की एमएमके पार्टी के अध्यक्ष ने माता सीता का किया अपमान


विपक्षी दलों का I.N.D.I.A गठबंधन हिन्दू विरोधियों का जमावड़ा है। इस गठबंधन का नेतृत्वकर्ता कांग्रेस है, जिसका इतिहास ही हिन्दू विरोध रहा है। इस गठबंधन में वहीं पार्टियां शामिल हैं, जो हिन्दू धर्म और उसके देवी-देवताओं से नफरत करती हैं। I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल और तमिलनाडु सरकार के सहयोगी दल मनिथानेया मक्कल काची(MMK) के अध्यक्ष जवाहिरुल्ला ने सड़कों पर ऐसे पोस्टर लगवाए, जो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला था। यह अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में माता सीता को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है, जिससे करोड़ों हिन्दुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है, लेकिन स्टालिन की सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। 

रविवार (30 जुलाई, 2023) को तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में मणिपुर की घटना को लेकर एमएमके ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़कों पर एक आपत्तिजनक पोस्टर लगाया गया। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भगवान राम और गृह मंत्री अमित शाह को लक्ष्मण दिखाया गया है। वहीं इन दोनों के बीच में माता सीता को निर्वस्त्र दिखाया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय चिन्ह तिरंगे का भी अपमान किया गया है। इस पोस्टर को लेकर हिन्दुओं में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि तमिलनाडु की डीएमके और कांग्रेस गठबंधन की सरकार में हिंदू देवी देवताओं का अपमान करना,उनका अश्लील चित्रण करना क्या कानूनी रूप से वैध है?

हालांकि बाद में विवाद बढ़ते देख एमएमके अध्यक्ष ने इस विवादित पोस्टर को हटा दिया और लोगों की भावनाएं आहत होने के लिए मांफी मांग ली, लेकिन एमएमके पार्टी के इस पोस्टर को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस निशाने पर आ गए। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने दावा किया कि एमएमके प्रमुख को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके साथ चलते हुए देखा गया था। गौरव भाटिया ने ट्वीट किया, “बहुत गहरा दुख पहुंचा है। हम उन्हें इतनी सख्ती से वापस देंगे। कानूनी युद्ध शुरू किया जाएगा। क्या यह धर्मनिरपेक्षता है? सिर्फ इसलिए कि हम सहिष्णु हैं, इससे भारत को हमारी धार्मिक भावनाओं को बेरहमी से कुचलने का अधिकार नहीं मिल जाता।” 

राजस्थान : ‘सीता की सुंदरता से पागल थे राम और रावण’: राजेन्द्र सिंह गुढ़ा, गहलोत सरकार के मंत्री के बिगड़े बोल, भगवान राम को ‘मनहूस’ भी बता चुके हैं

मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने किया हिंदू अराध्यों का अपमान (फोटो साभार: Patrika, BoldSky)
हिंदू देवी-देवताओं का अपमानित करने का कांग्रेसियों का इतिहास पुराना रहा है। राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही एक कांग्रेस नेता ने माता सीता को अपमानित करने वाला बयान दिया है। गहलोत सरकार में मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने न केवल खुद की तुलना माता सीता से की है, बल्कि यह भी कहा है कि भगवान राम और रावण दोनों ही माता सीता की सुंदरता के चलते पागल थे।

राजस्थान के होमगार्ड और सैनिक कल्याण राज्य मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा झुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी सीएचसी में एक्सरे मशीन का उद्घाटन करने पहुँचे थे। इस दौरान गुढ़ा ने कहा, “सीता माता की सुंदरता की कोई कल्पना नहीं की जा सकती। उनके आकर्षण के कारण ही श्रीराम और रावण जैसे अद्भुत इंसान पागल हो गए। उनकी सुंदरता की कोई कल्पना नहीं की जा सकती। इसी तरह गहलोत और पायलट दोनों आजकल मेरे पीछे भाग रहे हैं। मुझमें कोई तो क्वालिटी होगी।”

गुढ़ा ने आगे कहा,”आजकल लोग चर्चा कर रहे हैं कि गुढ़ा इस बार कौन सी पार्टी से टिकट लाएगा। मैं उन लोगों को बताना चाहता हूँ कि मुझे तो मेरे काम के आधार पर, मेरे खुद के चेहरे पर वोट मिलते हैं। किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं।” बता दें कि राजेन्द्र सिंह गुढ़ा इससे पहले भी अपने बयानों के चलते विवादों में रहे हैं। नवंबर 2021 में उन्होंने कहा था कि उनके गाँव की सड़कें ‘हेमा मालिनी के गाल’ की तरह होनी चाहिए। कुछ देर रुकने के बाद उन्होंने हँसते हुए आगे कहा था कि हेमा मालिनी अब बूढ़ी हो चुकी हैं। इसलिए उनके गाँव की सड़कें ‘कैटरीना कैफ के गाल’ की तरह होनी चाहिए।

गहलोत सरकार में मंत्री गुढ़ा के इस बयान पर BJP ने कड़ा एतराज जताते हुए उन्हें बर्खास्त करने की माँग की है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कहा है, “यह बयान चौकाने वाला है। इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता। अशोक गहलोत के मंत्री ने कहा कि प्रभु राम माता सीता की सुंदरता के पीछे पागल थे। माता सीता और प्रभु राम पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी कांग्रेस का असली हिंदू विरोधी चेहरा दिखाती है। श्रीराम के अस्तित्व को नकारा, राम मंदिर का विरोध किया, हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव तैयार किया, गीता प्रेस का विरोध और अब प्रभु राम और माता सीता का अपमान। कांग्रेस को इस व्यक्ति को बर्खास्त करना चाहिए।”

हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते रहे हैं कांग्रेसी 

इससे पहले इसी साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस नेता चताराम देशबंधु ने कथित तौर पर भगवान राम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। चताराम ने भगवान राम को ‘घटिया मनहूस आदमी’ कहा था। वहीं राजस्थान की मंत्री शकुंतला रावत ने फरवरी 2023 में अशोक गहलोत की तुलना भगवान से की थी। अक्टूबर 2022 में राजस्थान सरकार में मंत्री परसादी लाल मीणा ने राहुल गाँधी को भगवान राम से बड़ा बता दिया था। मीणा ने कहा था कि राहुल गाँधी 3500 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं और वह भगवान राम से अधिक पैदल चल रहे हैं। त्रेता युग में वनवास के समय भगवान राम ने भी इतनी लंबी यात्रा नहीं की थी। मीणा ने आगे कहा था कि भगवान राम अयोध्या से श्रीलंका तक पैदल गए थे और उससे भी ज्यादा राहुल गाँधी की यह ऐतिहासिक पदयात्रा जो कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक जाएगी।

महिला द्वारा खुले बाल रखना शोक और अशुद्धि की प्रतीक

आजकल महिलाएं फैशन के चलते खुले केश रख कैसा अनर्थ कर रही है, शायद वह पश्चिमी सभ्यता के आगे अपनी ही भारतीय संस्कृति का उपहास कर रही हैं। या फिर फैशन के नाम पर वेद एवं पुराणों का अनादर कर, महिला अपना ही नहीं बल्कि अपने ही परिवार को संकट में डाल रही हैं। वेदों एवं पुराणों में महिला को खुले केश सोना भी निषेध बताया गया है। पहले के लोग घर में किसी कन्या के जन्म लेने पर लक्ष्मी का रूप मानते थे। घर में बहु आने पर उसे भी लक्ष्मी मानने का कारण था, क्योकि बहु एक बहु नहीं बल्कि धर्मपुत्री होती है, जिसका स्थान सगी पुत्री से भी ऊपर होता है, जिस कारण पुत्री एवं धर्मपुत्री(बहु) बहनों की तरह रहती थीं। यही कारण है कि पहले संयुक्त परिवार प्रथा प्रचरित थी। रामायण, भागवत गीता एवं महाभारत मात्र धार्मिक ग्रन्थ ही नहीं बल्कि जीवनशैली, संस्कार और मार्गदर्शन का भंडार हैं।

रामायण में बताया गया है, जब देवी सीता का श्रीराम से विवाह होने वाला था, उस समय उनकी माता सुनयना ने उनके बाल बांधते हुए उनसे कहा था, विवाह उपरांत सदा अपने केश बांध कर रखना।
बंधे हुए लंबे बाल आभूषण सिंगार होने के साथ साथ संस्कार व मर्यादा में रहना सिखाते हैं।
ये सौभाग्य की निशानी है, एकांत में केवल अपने पति के लिए इन्हें खोलने, लेकिन पति से दूर होते ही बांधने की मान्यता है।
हजारो लाखो वर्ष पूर्व हमारे ऋषि मुनियो ने शोध कर यह अनुभव किया कि सिर के काले बाल को पिरामिड नुमा बनाकर सिर के उपरी ओर या शिखा के उपर रखने से वह सूर्य से निकली किरणो को अवशोषित करके शरीर को ऊर्जा प्रदान करते है। जिससे चेहरे की आभा चमकदार , शरीर सुडौल व बलवान होता है।
यही कारण है कि गुरुनानक देव व अन्य सिक्ख गुरूओ ने बाल रक्षा के असाधारण महत्त्व को समझकर धर्म का एक अंग ही बना लिया। लेकिन वे कभी भी बाल को खोलकर नही रखे ,
ऋषी मुनियो व साध्वीयो ने हमेशा बाल को बांध कर ही रखा। भारतीय आचार्यो ने बाल रक्षा का प्रयोग , साधना काल में ही किया इसलिय आज भी किसी लंबे अनुष्ठान , नवरात्री पर्व , श्रावण मास , तथा श्राद्ध पर्व आदि में नियम पूर्वक बाल रक्षा कर शक्ति अर्जन किया जाता है।
महिलाओं के लिए केश सवांरना अत्यंत आवश्यक है उलझे एवं बिखरे हुए केश अमंगलकारी कहे गए है। - कैकेई का कोपभवन में बिखरे बालों में रुदन करना और अयोध्या का अमंगल होना।
पति से वियुक्त तथा शोक में डुबी हुई स्त्री ही बाल खुले रखती है --- जैसे अशोक वाटिका में सीता
रजस्वला स्त्री , खुले बाल रखती है ,जैसे ---
चीर हरण से पूर्व द्रोपदी , उस वक्त द्रोपदी रजस्वला थी ,जब दुःशासन खींचकर लाया
तब द्रोपदी ने प्रतीज्ञा की थी कि-- मैं अपने बाल तब बाँधुंगी जब दुःसासन के रक्त से धोऊँगी ---
जब रावण देवी सीता का हरण करता है तो उन्हें केशों से पकड़ कर अपने पुष्पक विमान में ले जाता है। अत: उसका और उसके वंश का नाश हो गया।
महाभारत युद्ध से पूर्व कौरवों ने द्रौपदी के बालों पर हाथ डाला था, उनका कोई भी अंश जीवित न रहा।
कंस ने देवकी की आठवीं संतान को जब बालों से पटक कर मारना चाहा तो वह उसके हाथों से निकल कर महामाया के रूप में अवतरित हुई।
कंस ने भी अबला के बालों पर हाथ डाला तो उसके भी संपूर्ण राज-कुल का नाश हो गया।।
सौभाग्यवती स्त्री के बालों को सम्मान की निशानी कही गयी है।
दक्षिण भारतीय की कुछ महिलाएं मनन्त - संकल्प आदि के चलते बाळा जी में केश मुंडन करवा लेती हैं ।
लेकिन भारत के अन्य क्षेत्रो में ऐसी कोई प्रथा नहीं है । कोई महिला जब विधवा हो जाती हैं तभी उनके बाल छोटे करवा दिए जाते हैं। या जो विधवा महिलाये अपने पति के अस्थि विसर्जन को तीर्थ जाती है। वे ही बाल मुंडन करवाती /कटवाती है ।
अर्थात विधवा ही मुण्डन करवाती हैं , सौभाग्यवती नहीं।
गरुड पुराण के अनुसार बालों में काम का वास रहता है | बालों का बार बार स्पर्श करना दोष कारक बताया गया है। क्योकि बालों को अशुध्दी माना गया है इसलिय कोई भी जप अनुष्ठान ,चूड़ाकरण , यज्ञोपवीत, आदि-२ शुभाशुभ कृत्यों में क्षौर कर्म कराया जाता है |
तथा शिखाबन्धन कर पश्चात हस्त प्रक्षालन कर शुद्ध किया जाता है।
दैनिक दिनचर्या में भी स्नान पश्चात बालों में तेल लगाने के बाद उसी हाथ से शरीर के किसी भी अंग में तेल न लगाएं हाथों को धो लें।
भोजन आदि में बाल आ जाय तो उस भोजन को ही हटा दिया जाता है।
मुण्डन या बाल कटाने के बाद शुद्ध स्नान आवश्यक बताया गया है। बडे यज्ञ अनुष्ठान आदि में मुंडन तथा हर शुद्धिकर्म में सभी बालो (शिरस्, मुख और कक्ष) के मुण्डन का विधान हैं ।
बालों के द्वारा बहुत सा तन्त्र क्रिया होती है जैसे वशीकरण यदि कोई स्त्री खुले बाल करके निर्जन स्थान या... ऐसा स्थान जहाँ पर किसी की अकाल मृत्यु हुई है.. ऐसे स्थान से गुजरती है तो अवश्य ही प्रेत बाधा का योग बन जायेगा।
अनेक वैज्ञानिको जैसे इंग्लैंड के डॉ स्टैनले हैल , अमेरिका के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ गिलार्ड थॉमस आदि ने पश्चिम देश के महिलाओ की बडी संख्या पर निरीक्षण के आधार पर लिखा कि केवल 4 प्रतिशत महिलाय ही शारीरिक रूप से पत्नी व माँ बनने के योग्य है शेष 96 प्रतिशत स्त्रिया , बाल कटाने के कारण पुरुष भाव को ग्रहण कर लेने के कारण माँ बनने के लिये अयोग्य है
भारतीय महिलाओ में भी इस फैशन रुपी कुप्रथा का प्रवाह शुरु हो चुका है।!

कर्नाटक : ‘माँ सीता के साथ बैठ भगवान राम पीते थे शराब, दोपहर में होता था ये काम…’ : लेखक केएस भगवान ने उगला जहर

केएस भगवान ने भगवान राम के बारे में फिर उगला जहर
(Hastagu Telugu)
हिन्दू धर्म विरोधी सपोलों ने बिलों से निकलना शुरू कर दिया है। इन हिन्दू विरोधी सपोलों का हर स्तर पर परिवार सहित बहिष्कार किया जाना चाहिए। 
कर्नाटक के लेखक और तथाकथित तर्कवादी केएस भगवान (KS Bhagwan) ने एक बार फिर भगवान राम के बारे में जहर उगला है। एक कार्यक्रम में उन्होंने भगवान राम के बारे में बोलते हुए कहा कि वह माँ सीता के साथ हर दोपहर बैठकर शराब पीते थे। उन्होंने साथ ही कहा कि वाल्मीकि रामायण में ऐसा कहा गया है। अपना बचाव करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि ये सब वो नहीं कह रहे हैं बल्कि दस्तावेज कह रहे हैं।

उन्होंने 20 जनवरी 2023 को कर्नाटक के मांड्या में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा, ”भगवान राम की दोपहर में मुख्य गतिविधि माँ सीता के साथ बैठकर शराब पीने की होती थी।” उन्होंने साथ ही अपनी बातों को सही ठहराने के लिए वाल्मीकि रामायण और दस्तावेजों का उदाहरण दिया।

ऐसा नहीं है कि इस लेखक ने पहली बार भगवान राम का अपमान किया। लेखक ने अपनी पुस्तक ‘राम मंदिर येके बेड़ा (Rama Mandira Yake Beda)’ में भगवान राम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि भगवान राम नशा करते थे और माँ सीता को नशा करवाते थे। उस समय कुछ हिंदू संगठनों ने भगवान की इस टिप्पणी का व्यापक विरोध किया था और उनके घर के बाहर पूजा करने की कोशिश की थी। 

हालाँकि तब राज्य सरकार ने उनके आवास के बाहर सुरक्षा काफी कड़ी कर दी थी। वहीं भगवान राम के अस्तित्व पर बार-बार सवाल उठाने के विरोध में फरवरी 2021 में बेंगलुरू की एक अदालत में एक महिला वकील ने उनके चेहरे पर कालिख पोत दी थी।

बिहार के शिक्षा मंत्री ने किया रामचरितमानस का अपमान

इनके अलावा कुछ दिन पहले बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ करार दिया था। ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए RJD नेता रामचरितमानस को समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बता दिया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। संबोधन के बाद मीडिया के सामने भी बिहार के शिक्षा मंत्री अपने बयान पर कायम नजर आए थे।
अवलोकन करें:-
मूल में हो रही भूल के चलते बिहार के शिक्षा मंत्री कितने गलत ?
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घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम
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पटना ज्ञान भवन में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चंद्रशेखर ने छात्र छात्राओं को संबोधित किया था। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा था कि यह समाज में नफरत फैलानेवाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा था कि दोहे में अधम का अर्थ नीच होता है जिसे उन्होंने जाति से जोड़ते हुए कहा कि इस दोहे के अनुसार नीच जाति अर्थात दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं था।

संकट में श्रीलंका को आई ‘भगवान श्री राम’ की याद, रामायण से जुड़े स्थानों का हो रहा विकास


चीन के मकरजाल में फंस गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे श्रीलंका को अपने आर्थिक संकट से निकलने के लिए हिन्दुत्व की शरण में आशा की किरण दिखनी शुरू हो गयी है। श्रीलंका की अर्थव्‍यवस्‍था बड़े पैमाने पर टूरिज्‍म पर निर्भर थी। मगर आर्थिक संकट के चलते पर्यटन का कारोबार भी चौपट हो चुका है। भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा यह द्वीपीय देश अब आर्थिक सुधार के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहता है। इस देश से रामायण का भी गहरा नाता है। श्रीलंका के नवनियुक्त पर्यटन दूत और क्रिकेट खिलाड़ी सनत जयसूर्या ने कहा है कि उनका देश भारतीय पर्यटकों के लिए रामायण से जुड़े स्थलों की यात्रा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस संदर्भ में जयसूर्या ने हाल में ही कोलंबो में भारत के उच्चायुक्त गोपाल बागले से मुलाकात की। बैठक भारत और श्रीलंका के लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक सुधार के लिए एक माध्यम के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देने पर केंद्रित थी। जयसूर्या ने कहा कि उनका देश भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रामायण ट्रेल (राम पथ गमन) को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक संकट में घिरे देश में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से आर्थिक मदद मिलेगी।

संकट में श्रीलंका का मददगार बना भारत

श्रीलंका इस समय गंभीर आर्थिक संकट, ऐतिहासिक मंदी और भयानक महंगाई का सामना कर रहा है। लोगों को अब ईंधन और रोजाना की जरूरत की चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रह है। लोगों को खाने-पीने का सामान नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संकटमोचक रूप में सामने आए हैं। श्रीलंका की सरकार और विपक्ष, दोनों मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी की ओर देख रहे थे। संकट काल में भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद कर रहा है। भारत की ओर से 40 मिट्रिक टन डीजल और 50 हजार टन चावल श्रीलंका भेजा गया। इसके साथ ही भारत ने श्रीलंका को 3.8 अरब डॉलर की मदद देने का ऐलान किया है।

अशोक वाटिका में बना है माता सीता मंदिर

माता सीता का हरण करने के बाद रावण ने उन्हें अपने महल की अशोक वाटिका में रखा था। यह जगह आज भी श्रीलंका में मौजूद है। यहां पर सीता माता का एक प्राचीन मंदिर भी बनाया गया है। इस जगह को सेता एलीया के नाम से जाना जाता है। ये नूवरा एलिया नामक जगह के पास स्थित है। मंदिर के पास ही एक झरना भी है। माना जाता है कि इस झरने में सीता माता स्‍नना करती थीं। इस झरने के आसपास की चट्टानों पर हनुमान जी के पैरों के निशान भी मिलते हैं। यही वो पर्वत है जहां हनुमान जी ने पहली बार कदम रखा था। इसे पवाला मलाई कहते हैं। ये पर्वत लंकापुरा और अशोक वाटिका के बीच में है

जहां गिरे थे माता सीता के आंसू, अब सीता तालाब


रावण जब सीता माता को हरण करके ले जा रहा था तब सीता माता अपने पति भगवान राम के पास जाने के लिए रावण से कह रही थीं। मगर, रावण उन्‍हें जबरन अपने साथ लंका ले जा रहा था। उस दौरान सीता माता के आंसू जिस-जिस स्‍थान पर गिरे वहां पर तलाब बन गया। श्रीलंका में भी एक ऐसा ही स्‍थान है जहां सीता माता के आंसू गिरे थे। तब से इस जगह को सीता अश्रु ताल कहा जाता है। श्रीलंका में कैंडी से लगभग 50 किलोमीटर दूर नम्बारा एलिया मार्ग पर यह तालाब मौजूद है। इसे कुछ लोग सीता टियर तालाब कहते हैं। जब लंका में गर्मी पड़ती है और सारे तलाब सूख जाते हैं तब भी यह तलाब नहीं सूखता। इस तलाब का पानी भी बहुत मीठा है।

माता सीता ने यहां दी थी अग्नि परीक्षा

श्रीलंका में वेलीमड़ा नामक एक जगह है। यहां एक मंदिर डिवाउरूम्पाला है। कहा जाता है कि यहां पर माता सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी। आज भी स्थानीय लोग इस जगह पर सुनवाई करके न्याय करने का काम करते हैं। मान्यता है कि जिस तरह इस जगह पर देवी सीता ने सच्चाई साबित की थी उसी तरह यहां लिया गया हर फैसला सही साबित होता है।

मई में सबसे अधिक भारतीय पर्यटक श्रीलंका पहुंचे

श्रीलंका में रामायण से जुड़े 52 स्थल हैं। श्रीलंका इस वक्त भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते यहां पर्यटन भी ठप पड़ा है। इस साल मई महीने में भारत की ओर से श्रीलंका के पर्यटन सेक्टर में सबसे अधिक योगदान दिया गया है। यहां 5562 पर्यटक भारत से पहुंचे हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर ब्रिटेन है, जहां के 3723 लोग श्रीलंका घूमने गए। भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं से संबंधित विरासत के आदान-प्रदान के लिए वर्ष 2008 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।


सिगिरिया में था रावण का महल

कहा जाता है कि सिगिरिया ही वह स्थान है, जहां रावण रहता था। माना जाता है कि रावण का साम्राज्य मध्य श्रीलंका में, बदुल्ला, अनुराधापुरा, केंडी, पोलोन्नुरुवा और नुवारा एलिया तक फैला हुआ था, मगर रावण सिगिरिया में रहता था। इस महल के लिए कहा जाता है कि यह महल भी कुबेर ने बनाया था, जो उनके भाई हैं। सिगरिया रॉक चट्टान के शीर्ष पर एक प्राचीन महल का अवशेष है, जो किलेबंदी, सीढ़ीदार बगीचे, तालाब, नहर, गलियों और फव्वारों से घिरा हुआ है। ये भी कहा जाता है कि यहां कुछ दिन माता सीता को रखा गया था। इसके बाद दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया था।

आठ हजार फुट की ऊंचाई  पर है रावण की गुफा

साल 2017 में एक रिसर्च हुई थी जिसमें 50 ऐसे स्थानों को खोज निकाले का दावा किया गया था जिनका रिश्‍ता रामायण से था। इसी रिसर्च में कहा गया था कि एक पहाड़ी में बनी गुफा में आज भी रावण का शव सुरक्षित है। रिसर्च में कहा गया है कि श्रीलंका में रैगला के जंगलो में एक चट्टान नुमा पहाड़ी है। इस पहाड़ी में एक गुफा है और गुफा में रावण का शव आज भी सुरक्षित रखा है। यह शोध श्रीलंका के रामायण रिसर्च सेंटर और पर्यटन विभाग ने मिलकर की है। शोध में दावा किया गया कि इसी गुफा में जाकर रावण तपस्या किया करता था। दावा है कि रैगला पहाड़ी में आठ हजार फुट की ऊंचाई पर यह गुफा बनी है जहां रावण का शव रखा गया है।