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‘FCRA बिल वापस लें या JPC को भेजें’: अमित शाह से मिले ईसाई प्रतिनिधियों ने की माँग, गृह मंत्री से मिलकर मिजोरम के CM बोले- 12 अगस्त से संसद में इस पर होगी चर्चा


विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Bill) को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) को ईसाई समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात की। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री के साथ बैठक के दौरान विधेयक से जुड़े अपने मुद्दों और आशंकाओं पर चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने प्रतिनिधियों की बात ध्यान से सुनी और उनकी चिंताओं को नोट किया। गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उठाए गए मुद्दों को देखेंगे और इस मामले पर सरकार के अन्य सदस्यों के साथ भी चर्चा करेंगे।

वहीं, CNN News18 की एक पत्रकार ने X पर इस मुलाकात को लेकर लिखा कि शाह से मुलाकात करने वाले ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा, “प्रतिनिधियों ने माँग की कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर आगे की संसदीय जाँच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए।”

FCRA बिल को लेकर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अमित शाह से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री के सामने विधेयक से जुड़े 6 मुद्दे उठाए थे।

लालदुहोमा के मुताबिक, इन छह मुद्दों में से एक पर अमित शाह ने उन्हें स्पष्ट आश्वासन दिया कि FCRA संशोधन विधेयक पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। यानी कानून बनने से पहले की अवधि पर इसके प्रावधान लागू नहीं होंगे।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने बताया कि बाकी मुद्दों पर गृह मंत्री ने लिखित जवाब देने की बात कही है। अमित शाह की ओर से इन बिंदुओं पर लिखित प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही विधेयक को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। लालदुहोमा ने यह भी बताया कि अमित शाह 12 अगस्त से संसद में FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू करने वाले हैं।

क्या है बिल के संशोधन और क्यों परेशान हैं मिशनरी

मार्च 2026 में पेश किया गया FCRA संशोधन विधेयक मुख्य रूप से उन संस्थाओं से जुड़ा है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो चुका है, जिन्होंने अपना लाइसेंस खुद सरेंडर कर दिया है या जिनका लाइसेंस रीन्यू नहीं हुआ है। इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकारी को ऐसी संस्थाओं की विदेशी फंडिंग और उस पैसे से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य विदेशी फंड के दुरुपयोग और उसके अवैध तरीके से किसी दूसरे को हस्तांतरित किए जाने पर रोक लगाना है।

इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने 22 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी कर विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 में भी बदलाव किया। इसके तहत धार्मिक समुदायों के कई वर्गों के लिए धर्मांतरण यानी Proselytisation को इन नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार की शक्तियाँ केवल उन्हीं संपत्तियों तक सीमित रहेंगी, जो विदेशी फंड से बनाई गई हैं और जिन पर FCRA लाइसेंस खत्म होने जैसी निर्धारित परिस्थितियाँ लागू होती हैं। साथ ही, ऐसे मामलों में सरकार के आदेश की समीक्षा और उसके खिलाफ अपील करने का अधिकार भी मौजूद रहेगा।

पिछले कई दशकों से अमेरिका स्थित कई ईसाई प्रचारक और मिशनरी नेटवर्क भारत में चर्च स्थापित करने, गरीबों, खासकर जनजातीय और दलित समुदायों के बीच धर्मांतरण अभियान चलाने और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए फंडिंग करते रहे हैं। Compassion International, World Vision India और Joshua Project जैसे कई विदेशी ईसाई संगठन भारत में सक्रिय रहे हैं। इन संगठनों की गतिविधियों को धार्मिक कामों के साथ-साथ उनके मूल देशों के रणनीतिक हितों से भी जोड़ा जाता रहा है।

अब यही विदेशी और भारतीय मिशनरी संगठन FCRA संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इस कानून से उन संस्थाओं तक विदेशी फंड पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा, जिन पर भारत की धार्मिक जनसांख्यिकी बदलने और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले एजेंडे पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं।

पहली बार रेलवे से जुड़ा मिजोरम: नरेंद्र मोदी ने कहा- नॉर्थ ईस्ट बन रहा है भारत की तरक्की का इंजन


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार, 13 सितंबर को मिजोरम की राजधानी आइजोल को बड़ी सौगात दी। करीब 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि आज का दिन न सिर्फ मिजोरम बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि अब आइजोल आधिकारिक तौर पर भारत के रेलवे नक्शे से जुड़ गया है। मौसम की वजह से प्रधानमंत्री आइजोल नहीं आ सके और उन्होंने लेंगेपुई एयरपोर्ट से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वह इस दूरी के बावजूद जनता का प्यार और आशीर्वाद महसूस कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बैराबी–सैरांग रेल लाइन अब तैयार हो चुकी है और यह सिर्फ एक कनेक्शन नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाली लाइन साबित होगी। पहली बार मिजोरम के सैरांग को दिल्ली से सीधे राजधानी एक्सप्रेस जोड़ेगी। इसके जरिए किसानों और व्यापारियों को देशभर के बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक जाना भी आसान होगा। पर्यटन, ट्रांसपोर्ट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

 उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें वोटबैंक की राजनीति करती थीं और नॉर्थ ईस्ट को नजरअंदाज किया जाता था, मगर अब हालात बदल चुके हैं। अब वही क्षेत्र, जिसे कभी हाशिए पर रखा गया था, देश के विकास की धारा में सबसे आगे हैं। नॉर्थ ईस्ट भारत की तरक्की का इंजन बन रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क, मोबाइल-इंटरनेट, बिजली, पानी और एलपीजी जैसी सुविधाओं ने नॉर्थ ईस्ट के पूरे जीवन को बदलकर रख दिया है। मिजोरम को जल्द ही UDAN योजना से हवाई कनेक्टिविटी भी मिलेगी और राज्य के दूर-दराज इलाकों तक हवाई सेवाओं से पहुंच आसान हो जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी साफ किया कि मिजोरम की भूमिका Act East Policy और उभरते North East Economic Corridor में अहम रहेगी। कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट और सैरांग-ह्मावंगबुच्छुआ रेलवे लाइन से मिजोरम सीधे बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ जाएगा। इससे न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पर्यटन को भी नई ताकत मिलेगी।

युवाओं और खेलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नॉर्थ ईस्ट की युवा प्रतिभा भारत की शक्ति है। मिजोरम में 11 एकलव्य मॉडल विद्यालय शुरू हो चुके हैं और 6 और जल्द खुलने वाले हैं। स्टार्ट-अप की दुनिया में भी नॉर्थ ईस्ट पीछे नहीं है। 4,500 से ज्यादा स्टार्ट-अप और 25 से ज्यादा इनक्यूबेटर यहां काम कर रहे हैं। खेलों के क्षेत्र में मिजोरम की समृद्ध परंपरा और खासतौर से फुटबॉल खिलाड़ियों के योगदान की उन्होंने सराहना की और बताया कि खेलो इंडिया खेल नीति के तहत राज्य में आधुनिक खेल ढांचा विकसित हो रहा है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने नई जीएसटी व्यवस्था को भी जनता के लिए बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि पहले रोजमर्रा की चीजों जैसे तेल, साबुन और टूथपेस्ट पर 27 प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन अब सिर्फ 5 प्रतिशत है। कैंसर जैसी बीमारियों की दवाइयां अब और सस्ती होंगी, वहीं सीमेंट और निर्माण सामग्री भी 22 सितंबर से कम दामों पर उपलब्ध होगी। होटल और ट्रैवल सेक्टर पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत करने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यात्राएं भी पहले से सस्ती होंगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था का हवाला दिया और कहा कि 2025-26 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद के प्रायोजकों को सबक सिखाने में भारतीय सेना ने अद्वितीय साहस दिखाया और Made in India हथियारों की अहम भूमिका रही।

भारत-बांग्लादेश-म्यांमार को काटकर ईसाई मुल्क बनाने की रची जा रही साजिश? जिस अमेरिकी खतरे से शेख हसीना ने किया था आगाह, वही बात मिजोरम के मुख्यमंत्री द्वारा बोलने से क्यों मचा हड़कंप?

                   लालदुहोमा के बयान पर बवाल मच गया है (चित्र साभार: Swarajya & The Hills Times)
मिजोरम के मुख्यमंत्री पू लालदुहोमा के एक हालिया बयान पर विवाद हो गया है। यह बयान लालदुहोमा ने अमेरिका में दिया था। लालदुहोमा ने इस बयान में उत्तरपूर्व क्षेत्र में एकीकृत जो लोगों का देश बनाने की बात की तरफ इशारा किया। लालदुहोमा ने कहा था कि हमें (जो ईसाइयों) तीन अलग-अलग सरकारों के अंतर्गत रहना पड़ रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। लालदुहोमा के बयान में साफ़ में था कि वह भारत, म्यांमार और बांग्लादेश रहने वाले जो लोगों को एक निजाम के अंतर्गत चाहते हैं।

लालदुहोमा ने यह बयान अमेरिका में 4 सितम्बर, 2024 को दिया था। यह बयान जो समुदाय की एक बैठक में दिया गया जहाँ पर उन्होंने उत्तरपूर्व में एक संगठित चर्च बनाने की चर्चा भी छेड़ी थी। उन्होंने यहीं तीनों देशों में बिखरे ईसाइयों के एक साथ एक देश में होने की बात भी कही।

लालदुहोमा ने क्या कहा?

लालदुहोमा ने कहा, “अमेरिका की यात्रा पर आने का मुख्य कारण हम हमारी एकता का एक रास्ता तलाशना है। हम लोग एक ही हैं और एक दूसरे से अलग रहने का जोखिम नहीं उठा सकते… हमें गलत तरीके से बाँटा गया है और तीन अलग-अलग देशों में तीन अलग-अलग सरकारों के अधीन रहने के लिए मजबूर किया गया है, यह ऐसी बात है जिसे हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे।”
लालदुहोमा का तीन अलग-अलग सरकारों से तात्पर्य भारत, बांग्लादेश और म्यांमार से था। लालदुहोमा के बयान से साफ़ है कि उन्हें ईसाई समुदाय का तीन अलग-अलग देशों में अलग-अलग देशों में रहना पसंद नहीं है और वह इन तीनों क्षेत्रों को एक करने के लिए एक रास्ता तलाशना चाहते हैं।
इसी बयान में लालदुहोमा ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि हम यह दृढ़ विश्वास और इच्छाशक्ति रखें कि एक दिन, ईश्वर की कृपा से, जिसने हमें एक देश बनाया है, उसी के नेतृत्व में हम एक देश बन कर उठेंगे और अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगे।” उन्होंने बाद में यह भी कहा कि कोई एक देश सीमाओं के तौर पर बंटा भी हुआ हो सकता है।
लालदुहोमा की इस बात से साफ़ है कि वह एक ऐसे देश की बात कर रहे हैं जिसमें यह तीनों जगह के लोग शामिल हों लेकिन एकदम अलग होगा और यह ईश्वर की कृपा से बनेगा। लालदुहोमा यह बयान तब दे रहे हैं जब वह स्वयं भारतीय गणराज्य के अंतर्गत एक संवैधानिक पद पर हैं और उन्होंने देश की एकता और अखंडता को लेकर शपथ ली है।

शेख हसीना ने भी इसी की आशंका जताई थी 

जिस तरह की बात लालदुहोमा कर रहे हैं, इसी से सम्बन्धित बात बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना कह चुकी हैं। शेख हसीना ने बांग्लादेश में तख्तापलट से पहले मई 2024 में शेख हसीना ने कहा था कि गोरी चमड़ी वाले देश बांग्लादेश और म्यांमार के एक हिस्से को तोड़ कर ईसाई देश बनाना चाहते हैं।
उन्होंने तब भारत का नाम नहीं लिया था लेकिन साफ़ था कि यह देश भी उसी तर्ज पर बनता, जिसकी दुहाई लालदुहोमा ने दी है। लालदुहोमा का भी कहना है कि ईसाइयों को उत्तर पूर्व में एक होना होगा और ईश्वर ने चाहा तो उनका एक देश का सपना जरूर पूरा होगा।

शेख हसीना ने यह भी कहा था कि अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देश उनके चुनाव और सरकार में इसलिए अड़ंगा लगा रहे हैं क्योंकि वह बंगाल की खाड़ी में एक बेस चाहते हैं। हसीना ने कहा था कि इस ईसाई मुल्क में चट्टोगाम भी शामिल होगा, जो खाड़ी का एक प्रमुख बंदरगाह है। उन्होंने कहा था कि एक गोरी चमड़ी वाले आदमी ने उनको यह सारे ऑफर दिए थे।
इसी के कुछ दिनों के बाद शेख हसीना की सत्ता चली गई थी। उन्हें आनन फानन में अपना देश छोड़ कर निकलना पड़ा था। वर्तमान में वह भारत में शरण लेकर रह रही हैं। लेकिन उनके द्वारा जताई गई चिंता एक बार फिर मिजोरम CM के बयान के रूप सामने आई है।

नई नहीं है ईसाई देश की बातें

भारत के उत्तर पूर्व में एक ईसाई देश बनाने की यह बात कोई नई नहीं है। शेख हसीना ने मई में इसको लेकर अपने नेताओं से भी चिंता जताई थी। स्वराज्य की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना ने आवामी लीग के नेताओं से बताया था कि जोगम नाम का एक देश बनाने की साजिश चल रही है। शेख हसीना ने बताया था कि इस देश में म्यांमार के सागाइंग डिवीजन और चिन राज्य का बड़ा हिस्सा, भारत का मिजोरम और मणिपुर के कुकी बहुल इलाके और बांग्लादेश के चटगांव डिवीजन के बंदरबन जिले और आसपास के क्षेत्र शामिल होंगे।
भारत के भीतर भी मिजोरम में सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM), विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) और साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी की राज्य इकाई मिजोरम स्थित ZRO द्वारा की गई एकीकरण की माँग का समर्थन करती है, इसका मुख्य उद्देश्य तीनों देशों में सभी ज़ो-आबादी वाले क्षेत्रों का एकीकरण करना है। बताया गया है कि चर्च और विशेष रूप से अमेरिका स्थित बैपटिस्ट चर्च इस “ज़ो-एकीकरण” की माँग को बढ़ावा दे रहा है। इन चर्च के अमेरिका की CIA से घनिष्ठ संबंध होने की सूचना है।
मणिपुर में हिंसा में बड़ा रोल निभाने वाले कुकी लड़ाके भी धार्मिक आधार जो लोगों के साथ जुड़े हैं। कुकी वर्तमान में म्यांमार के भीतर बड़ा इलाका नियंत्रित करते हैं। मणिपुर में हिंसा फ़ैलाने में म्यांमार से आने वाले घुसपैठियों का बड़ा हाथ रहा है। यह कुकी भी उस कुकी-चिन-जो समुदाय का हिस्सा हैं, जिसका एक वर्ग अलग ईसाई देश चाहता है।

मिजोरम में ईसाइयत का प्रभाव

मिजोरम की लगभग 90% जनसंख्या ईसाई है। मिजोरम में ईसाइयत का प्रभाव 20वीं शताब्दी की शुरुआत से ही चालू हुआ है। इससे पहले यहाँ की अधिकांश जनता जनजातीय परम्पराओं को मानती थी। हालाँकि, मिशनरियों ने यहाँ लम्बे समय तक ईसाइयत का प्रचार किया जिससे राज्य की अधिकांश जनता ईसाई हो गई।
मिजोरम के अलावा नागालैंड और मेघालय भी ईसाइयत की बहुलता वाले राज्य हैं। हालाँकि, मिजो लोगों का फैलाव सीमाओं के पार भी है, ऐसे में इनके एकीकरण के साथ ही एक देश बनाने की बातें भी उठती रही हैं। CM लालदुहोमा का बयान यही कहानी बताता है।