Showing posts with label #Morigaon. Show all posts
Showing posts with label #Morigaon. Show all posts

असम : 142 लोगों ने ईसाई मजहब को अलविदा कह हिन्दू धर्म अपनाकर की घर वापसी

असम में 142 लोगों ने घर वापसी कर ली। इन सभी ने ईसाइयत छोड़ सनातन धर्म को अपनाया है। इसे असम में हुई अब तक सबसे बड़ी घर-वापसी कहा जा रहा है। इसको लेकर राज्य की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार भी चर्चा में है। चर्चा का कारण यह है कि घर-वापसी को भाजपा हिमंता सरकार की नीतियों का प्रभाव बता रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घर-वापसी का यह कार्यक्रम सोमवार (27 फरवरी, 2023) को मोरीगाँव जिले के जागीरोड़ के तिवासोंग गाँव में हुआ। यहाँ सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार यज्ञ तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सभी लोगों ने हिंदू धर्म अपना लिया।

इस घर-वापसी को लेकर गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई का कहना है कि इस घर-वापसी कार्यक्रम में जनजाति समुदाय के 142 लोगों ने अपनी इच्छा से घर वापसी की है। स्थानीय तिवा जनजाति के लोगों ने प्रलोभन व अन्य कारणों के चलते ईसाई मजहब अपना लिया था। लेकिन। अब इन लोगों ने गोबा देवराजा राज परिषद संस्था से संपर्क किया था। इसके बाद यह कार्यक्रम आयोजित कर घरवापसी कराई गई।

बोरदलोई ने यह भी कहा कि घर-वापसी करने वाले इन सभी लोगों ने हमेशा हिंदू धर्म में आस्था और विश्वास रखने का वचन दिया है। घर-वापसी करने वाले तिवा जनजाति के ये लोग जन्म से हिंदू थे। लेकिन इनके दादा-दादी ने गरीबी तथा शिक्षा की कमी के चलते भ्रमित होकर ईसाई बन गए थे। बोरदलोई ने यह भी कहा है कि वह और उनका संगठन घरवापसी करने वाले सभी लोगों का हरसंभव सहयोग करेंगे।

गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई ने यह भी कहा है कि कहा है कि सभी 142 लोगों के जीवन में किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए वह प्रयास करते रहेंगे। सभी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बोरदलोई ने दावा किया है कि तिवा जनजाति के करीब 1100 परिवार के लोगों ने सनातन धर्म में घर-वापसी करने का फैसला किया है। घर-वापसी करने वालों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए तिवा परिषद द्वारा स्कूलों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा इन सभी के नाम मतदाता सूची में जोड़ने तथा राशनकार्ड बनवाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

जनजातियों के हित की बात करने वाले जनजाति सुरक्षा मंच असम और तिवा देवराजा परिषद ने माँग की है कि असम सरकार ईसाई धर्म अपनाने वालों का अनुसूचित जनजाति का दर्जा रद्द कर दे, ताकि उन्हें अल्पसंख्यक और अनुसूचित जनजाति होने का दोहरा लाभ ना मिल सके। वहीं, भाजपा विधायक पीयूष हजारिका ने दावा किया है कि हिमंता सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर इन सभी ने घर-वापसी की है।

असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ्तार: 8 मौलवी हिरासत में :

 मुफ्ती मुस्तफा को किया गिरफ्तार (फोटो साभार: @azad_nishant)

असम पुलिस ने आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य की पुलिस ने मोरीगाँव में सक्रिय एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। ताजा जानकारी के मुताबिक यहाँ के एक मदरसे में जिहादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था।

यह आतंकी मॉड्यूल एक मदरसे से संचालित हो रहा था और कथित तौर पर राज्य में बड़े हमले की योजना बना रहा था। असम पुलिस को इसके बारे में खुफिया एजेंसी से जानकारी मिली। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संदिग्ध जिहादी को गिरफ्तार किया। इसकी पहचान मुफ्ती मुस्तफा के रूप में हुई है।  

मोरीगाँव पुलिस ने 27 जुलाई 2022 रात मोइराबारी में मदरसा और अन्य आवासों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गिरफ्तार किया। मदरसे को भी पुलिस ने सील कर दिया है।

मुफ्ती मुस्तफा को ही आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह मोइराबारी में 2018 से जामी-उल-हुदा मदरसा चलाता है। पुलिस ने मुफ्ती मुस्तफा के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और अन्य सामग्री के साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए। इसके साथ ही पुलिस ने पूछताछ के मदरसे के 8 मौलवियों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि उसे बांग्लादेश से अंसरुल्ला फंडिंग कर रहा था। इसके अलावा भी मदरसे को कई अन्य देशों से फंडिंग हो रही थी।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मुस्तफा को किस वजह से गिरफ्तार किया गया है, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। स्थानीय लोगों में से एक ने कहा, “मोरीगाँव पुलिस, सेना और अन्य अधिकारियों ने कल रात मुस्तफा के आवास और मदरसा में कम से कम दो घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। मुस्तफा को पुलिस ने पकड़ लिया। हमें नहीं पता कि उसे क्यों गिरफ्तार किया गया।”

फिलहाल पुलिस घटना के संबंध में आगे की जाँच कर रही है। इस बीच, इस मामले पर बोलते हुए, असम के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने कहा, “आतंकवादी संगठन धीरे-धीरे असम को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे बांग्लादेश के रास्ते राज्य में प्रवेश कर रहे हैं। वे राज्य के मुस्लिम युवाओं को ‘हदीस’ की शिक्षा देकर भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।”

पिछले दिनों मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा ने मदरसा शब्द ही खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि मदरसे में बच्चों को दाखिला दिलवाना ही मानवाधिकार का उल्लंघन है। सीएम सरमा ने मदरसों को मानवता का दुश्मन बताते हुए कहा था कि ये मदरसा शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए। जब तक मदरसा दिमाग में घूमेगा तब तक बच्चा कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएगा। यदि ये बातें बच्चों को सिखाई जाएँ तो बच्चे खुद ही मदरसे में न जाएँ। मदरसे में बच्चों का दाखिला ही मानवाधिकार के उललंघन के लिए करवाया जाता है। 

इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि लगभग सात सौ मदरसे बंद हो चुके हैं, बाकी मदरसों को नर्सिंग स्कूल और मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में बदलने का इरादा है। वो चाहते हैं कि मेरे मुसलमान भाई मदरसों में ना जाए और उसकी जगह लोग डॉक्टर-इंजीनियर बनें, समाज को रोशन करें।