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हजरतबल दरगाह में अशोक स्तंभ का चिह्न तोड़ने पर हिरासत में लिए गए 26 लोग, बेशर्म मुख्यमंत्री अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने वक्फ बोर्ड पर उठाए सवाल

श्रीनगर में अशोक स्तंभ तोड़ने वालों पर देशद्रोह और राष्ट्रीय अपमान की धाराएँ लागू, 20 लोग हिरासत में, महबूबा मुफ्ती ने वक्फ बोर्ड पर उठाए सवाल (साभार: न्यूज18, एबीपी न्यूज)
क्या कश्मीर में सबकुछ सामान्य है? जिसका जवाब है पहलगाम धर्म पूछकर हिन्दुओं का नरसंहार और अब हज़रतबल दरगाह पर लगे पत्थर से अशोक स्तम्भ को तोडना। बेशर्म मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा इन उपद्रवियों/आतंकी जहनियत के बचाव में खड़ा होना साफ संकेत दे रहा है कि सरकार के संरक्षण में कश्मीर में उपद्रवियों/आतंकियों का बोलबाला है। केंद्र सरकार और गुप्तचर एजेंसियों को अब्दुल्ला की गतिविधियों पर गिद्ध निगाह रखने की जरुरत है। कहीं बहुत देर न हो जाए।     

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में अशोक स्तंभ का चिह्न तोड़े जाने की घटना के बाद पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में पुलिस ने 26 लोगों को हिरासत में लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दरगाह में हाल ही में हुए सौंदर्यीकरण के दौरान एक बोर्ड लगाया गया था, जिस पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ का चिह्न बना था। कुछ लोगों ने इसे इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए पत्थरों से तोड़ दिया। उनका कहना था कि धार्मिक स्थल पर किसी भी तरह का प्रतीक या मूर्ति बनाना इस्लाम में मान्य नहीं है।

इस घटना के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है। वहीं उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने वक्फ बोर्ड पर सवाल उठाया कि धार्मिक स्थल पर अशोक चिह्न क्यों लगाया गया, जबकि देशभर के किसी भी धार्मिक स्थान पर ऐसा नहीं होता।

पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की कई धाराओं और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत केस दर्ज किया है। अब तक 26 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और कुछ अन्य से पूछताछ जारी है।

कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं अगर प्रतीक का अनुचित उपयोग या तोड़फोड़ की जाती है, तो दो साल तक की सजा और 5,000 रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है।

वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन और बीजेपी नेता दरख्शां अंद्राबी ने इसे संविधान और राष्ट्रीय प्रतीक पर हमला बताया है और इसे आतंकी मानसिकता से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई की माँग की है।

वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने वक्फ बोर्ड पर बिना संवेदनशीलता के काम करने का आरोप लगाया है। फिलहाल, पुलिस जाँच कर रही है, लेकिन यह मामला सिर्फ धार्मिक भावना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और राजनीतिक मतभेदों से भी जुड़ गया है।

उमर अब्दुल्ला बोले- INDI Block को खत्म कर देना चाहिए, इसका ना कोई एजेंडा और ना ही लीडरशिप; दिल्ली में कांग्रेस को 2013 वाली गलती नहीं करनी होगी और किसी विधायक को केजरीवाल के हाथ बिकने से भी रोकना होगा


दिल्ली चुनाव अरविन्द केजरीवाल और कांग्रेस के लिए Do or die का चुनाव है। बीजेपी को खोने के लिए कुछ नहीं, क्योकि दिल्ली में बीजेपी अपना जनाधार बढ़ाने में पूरी तरह से असफल है। अगर केजरीवाल पार्टी दिल्ली हारती है, उस हालत में पंजाब में केजरीवाल पार्टी सरकार भी खतरे में आ जाएगी। समय से पहले सरकार गिरने की सम्भावनायें है और कांग्रेस दुबारा से पंजाब पर कब्ज़ा कर सकती है, जो कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। राजनीतिक गलियारों में त्रिशंकु सरकार बनने की शंका व्यक्त की जा रही है। अगर यह शंका सही साबित होती है तो उस स्थिति में केजरीवाल को समर्थन कर 2013 वाली भयंकर गलती कांग्रेस को नहीं करनी होगी। अगर कांग्रेस बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए केजरीवाल को समर्थन देती है उस हालत में कांग्रेस दिल्ली ही नहीं शेष भारत से भी अपना बचा हुआ जनाधार खो देगी। यह भी शंका व्यक्त की जा रही है कि केजरीवाल सत्ता हथियाने के लिए विधायकों की खरीददारी के लिए भी तैयार बैठा है। और इस horse trading से कांग्रेस ही नहीं बीजेपी को भी चुने हुए अपने विधायकों पर गिद्ध निगाह रखनी होगी। 

INDI अलायंस में लगातार आ रही दरारों के बीच अब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तो इंडिया अलायंस खत्म करने की ही बात कह डाली है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद इसकी कोई बैठक नहीं हुई है। यह गठबंधन लोकसभा चुनाव तक ही था तो इसे खत्म कर देना चाहिए। इसके पास न कोई एजेंडा है और न ही कोई लीडरशिप। इंडी अलायंस की आखिरी बैठक 1 जून 2024 को हुई थी। उसके बाद हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। सभी चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन दोयम दर्जे का रहा है। हरियाणा और महाराष्ट्र में तो उसके करारी हार झेलनी पड़ी। इसके साथ ही इंडी अलायंस में नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठने लगी। ममता बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया कि INDIA ब्लॉक मैंने बनाया, मौका मिला तो इसको लीड करूंगी। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इसका नेतृत्व करने वाले इसे ठीक से नहीं चला सकते, तो मुझे मौका दें। इसके बाद लालू यादव ने भी राहुल की बजाए इंडी गठबंधन का नेतृत्व ममता को देने की वकालत की थी। उनके बेटे तेजस्वी ने तो यह कहकर गठबंधन की कहानी ही खत्म कर दी कि इसको सिर्फ लोकसभा चुनाव तक के लिए ही बनाया गया था।

चुनाव के बाद इंडी गठबंधन टूट कर बिखर जाएगा खटाखट-खटाखट

लोकसभा चुनाव के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ 16 मई को एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भविष्यवाणी की थी- “4 जून को इंडी गठबंधन तितर-बितर हो जाएगा और विपक्ष बलि का बकरा खोजेगा। चुनाव के बाद शहजादे चाहें दिल्ली वाले हों या लखनऊ वाले, ये लोग छुट्टियों पर विदेश चले जाएंगे। पराजय के जिम्मेदार बलि के बकरे को खोजा जाएगा खटाखट-खटाखट। 4 जून के बाद यह इंडी गठबंधन टूट कर बिखर जाएगा खटाखट-खटाखट।” पीएम मोदी के लगातार तीसरे कार्यकाल के कुछ महीनों बाद ही उनकी भविष्यवाणी अक्षरश: सच साबित हो रही है। इंडी अलायंस में शामिल पार्टियों के नेता आपस में ही टकरा रहे हैं। दलों ही नहीं, बल्कि उनके दिलों में दरारें बढ़ती जा रही हैं। लोकसभा चुनाव में उम्मीद से कुछ ज्यादा सीटों के अहंकार में डूबी कांग्रेस और उसके युवराज अकेले पड़ते जा रहे हैं। दिल्ली चुनाव से पहले बी ममता बनर्जी से लेकर लालू यादव तक ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब अखिलेश, तेजस्वी और केजरीवाल ने राहुल की खिलाफत का झंडा उठा लिया है। और राहुल गांधी, भविष्यवाणी के अनुरूप वे विदेश में मौज-मस्ती की छुट्टियां मना रहे हैं। वह भी तब, जबकि उनकी पार्टी अपने एक प्रधानमंत्री के निधन से मातम में डूबी है।

दिल्ली चुनाव से पहले अलग-थलग दिख रहीं इंडी ब्लॉक की पार्टियां
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही I.N.D.I. ब्लॉक की पार्टियां अलग-थलग नजर आ रही हैं। कांग्रेस के खिलाफ AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव एकजुट हो गए हैं। कांग्रेस नेता अजय माकन ने केजरीवाल को देश के लिए खतरनाक और फ्रॉड किंग तक बता डाला है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा है कि दिल्ली में AAP हमारी विरोधी पार्टी है। केजरीवाल जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं कि भाजपा और कांग्रेस का सीक्रेट गठबंधन हो गया है। केजरीवाल का यह दावा भी बेबुनियाद है कि दिल्ली में एक बार फिर उनकी पार्टी दोबारा चुनाव जीतेगी। गहलोत बोले- केजरीवाल कैसे कह सकते हैं भाजपा-कांग्रेस साथ हैं। केजरीवाल जब चुनाव में उतरते हैं तो उनके अपने पैंतरे और गणित होता है, लेकिन वह यह कैसे कह सकते हैं कि भाजपा और कांग्रेस साथ में चुनाव लड़ रहे हैं। वो जानते हैं कि ये असंभव है। काबिले जिक्र है कि दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर 5 फरवरी को वोटिंग होगी। 8 फरवरी को नतीजे आएंगे।

माकन ने अरविंद ‘फर्जीवाल’ से गठबंधन सबसे बड़ी गलती मानी
लोकसभा चुनाव के गलबहियां डालने वाली AAP और कांग्रेस दोनों ने ही ऐलान कर दिया है कि वे दिल्ली चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ेंगे। इसके साथ ही करीब एक महीने पहले दिल्ली चुनावों में AAP और कांग्रेस के गठबंधन की अटकलों पर विराम लग गया। अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट में साफ कहा कि आम आदमी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। उसके कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना नहीं है। इसके कुछ दिन बाद 25 दिसंबर को कांग्रेस नेता अजय माकन ने दिल्ली कांग्रेस की तरफ से आम आदमी पार्टी के खिलाफ 12 पॉइंट का व्हाइट पेपर रिलीज किया था। तब उन्होंने कहा था कि लोकसभा चुनाव के लिए AAP के साथ गठबंधन में आना कांग्रेस की सबसे बड़ी भूल थी, जिसे अब सुधारा जाना चाहिए। इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल को देश का फ्रॉड किंग यानी सबसे बड़ा धोखेबाज बताया था। माकन ने कहा कि अगर केजरीवाल को एक शब्द में परिभाषित करना हो, तो वो शब्द ‘फर्जीवाल’ होगा। मुझे लगता है कि आज दिल्ली की जो हालत है और कांग्रेस जो यहां कमजोर हुई, उसका एक ही कारण है कि हमने 2013 में 40 दिन के लिए AAP को सपोर्ट किया था।

उमर अब्दुल्लाह के मुख्यमंत्री बनने के 10 दिन के अन्दर चौथा आतंकी हमला

                          जम्मू-कश्मीर में सेना के जवानों पर आतंकी हमला (फोटो साभार: iampartha)
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग क्षेत्र में सेना के काफिले पर आतंकवादी हमले की खबर है। घटना 24 अक्टूबर 2024 को घटी। इस दौरान आतंकवादियों ने बोटापथरी के नागिन पोस्ट के पास सेना के वाहनों पर अंधाधुंध फायरिंग की। हमले में दो सैनिक बलिदान हो गए और दो स्थानीय नागरिक भी मारे गए। इसके अलावा, हमले में तीन अन्य सैनिकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि जिस समय सेना का वाहन बोटापथरी इलाके से नागिन चौकी की ओर जा रहा था उसी वक्त ये हमला किया गया। आतंकवादियों ने अचानक से सेना के वाहनों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे चालक ने संतुलन खो दिया और वाहन गहरी खाई में गिर गया। इस हमले की सूचना होने पर अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और हमलावरों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

जम्मू-कश्मीर में हुआ यह हमला पिछले आठ दिनों में जम्मू-कश्मीर में चौथा आतंकवादी हमला है। इससे पहले 20 अक्टूबर को जेड-मोड़ सुरंग के स्टाफ क्वार्टर पर एक बड़ा हमला हुआ था, जिसमें सात लोग मारे गए थे और पाँच घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के ऑफ़शूट टीआरएफ ने ली थी।

इसके अलावा यदि पिछले 10 दिनों की खबरें देखें तो पता चलेगा कि राज्य में उनर अब्दुल्लाह की सरकार बनने के बाद गैर-कश्मीरी मजदूरों पर हमले फिर शुरू हो गए हैं। पिछले हफ्ते तीन अलग-अलग घटनाओं में गैर-स्थानीयों को निशाना बनाकर मारा गया है। सबसे ताजा मामला 24 अक्टूबर का ही है। पुलवामा जिले के त्राल इलाके में भी एक प्रवासी मजदूर शुभम कुमार पर हमला हुआ, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा 18 अक्टूबर को भी शोपियाँ जिले में बिहार के रहने वाले अशोक कुमार चव्हाण की आतंकियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

कश्मीर में गैर-कश्मीरी लोगों पर बढ़ते हमलों की घटनाओं से हर किसी में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। आलम ये है कि गैर-कश्मीरी अपना काम छोड़कर अपने घर लौटने का फैसला ले रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर : उमर अब्दुल्ला की सरकार बनने के 5 दिन में दूसरा आतंकी अटैक, TRF ने ली जिम्मेदारी

 

                                      गंदेरबाल में आतंकी हमला (फोटो साभार: वायरल तस्वीर)
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल के गगनगीर इलाके में आतंकी हमला हुआ है। खबर है कि वहाँ आतंकियों ने एक सुरंग में काम कर रहे लोगों के कैंप पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं जिसके बाद 7 लोगों की मौत हो गई। इन 7 लोगों में 6 सुरंग में काम करने वाले लोग और 1 डॉक्टर की हत्या की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मरने वालों में मैकेनिकल कर्मचारी अनिल शुक्ला थे जो मध्य प्रदेश के रहने वाले थे। वहीं बिहार के फहीम नासिर, मोहम्मद हारिफ और कलीम को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया गया और पंजाब के गुरमीत को भी गोलियों से भून डाला गया। इनके अलावा इस सूची में जम्मू कश्मीर के रहने वाले शशि अब्रोल और डॉ शहनवाज भी शामिल हैं।

वहीं घायल लोगों में इंदर यादव, मोहन लाल, मुश्ताक अहमद लोन और इश्फाक अहमद भट और जगतार सिंह हैं। घटना रात के करीब 8:30 बजे हुई। एक चश्मदीदों ने बताया कि आतंकियों ने हमला उस समय बोला जब खाने की तैयारी चल रही थी तभी अचानक 3 हथियारबंद आतंकी मेस में पहुँचे और वहाँ मौजूद वर्कर्स पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियाँ इतनी मारी गई कि दो गाड़ियाँ भी जलकर खाक हो गई।

अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंट फ्रंट’ ने ली है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ये हमला नई सरकार बनने के मात्र 4 दिन बाद ही किया है। इससे पहले भी उमर अब्दुल्ला की सरकार बनने के बाद पहली बार हमला 18 अक्तूबर को हुआ था। हमले में गैर स्थानीय व्यक्ति अशोक चौहान को गोली मारी गई थी।

इन हमलों के बाद बता दें कि सेना ने भी संयुक्त टीम बनाकर आतंकियों को निशाना बनाया। ये कार्रवाई सेना ने बारामुला में की। वहाँ संयुक्त टीम ने हथियारों से लैस आतंकी को मार गिराया। इसके साथ एक बड़ी आतंकी साजिश नाकाम हुई। सेना ने छानबीन में उसके पास से हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है। कहा जा रहा है कि ये हथियार ऐसे थे जैसे वो किसी युद्ध कि तैयारी के लिए सामान जुटा रहा हो। उसके पास एके 47, दो एके मैग्जीन, 57 एके राउंड, दो पिस्टल के अलावा कई खतरनाक हथियार मिले हैं।

जम्मू कश्मीर : कांग्रेस साफ; दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की हार, जम्मू की दोनों सीटों पर लहराया भगवा, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती हार

PDP की महबूबा मुफ़्ती और JKNC के उमर अब्दुल्ला की जम्मू कश्मीर में हार
जम्मू कश्मीर में बड़ा उलटफेर हो गया है। वहाँ दशकों से प्रभावशाली रहीं दोनों प्रमुख दलों के मुखिया चुनाव है गए हैं। ‘जम्मू एन्ड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस’ (JKNF) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुला और ‘जम्मू एन्ड कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी’ (JKPDP) अपने-अपने सीटों से चुनाव हार गए हैं। उमर अब्दुल्ला बारामूला तो महबूबा मुफ़्ती अनंतनाग-राजौरी से लोकसभा चुनाव 2024 में ताल ठोक रही थीं। जम्मू कश्मीर में भाजपा 2 सीटें जीत रही हैं, JKNF 2 और एक पर निर्दलीय की जीत हो रही है।

सबसे पहले बात करते हैं बारामूला की। यहाँ से निर्दलीय अब्दुल रशीद शेख की जीत हो रही है। खबर लिखे जाने तक उन्हें 3.12 लाख वोट मिल चुके थे, वहीं उमर अब्दुल्ला 1.44 लाख वोटों से पीछे 1.68 लाख वोटों पर अटके हुए थे। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर अपनी हार भी स्वीकार कर ली है। उन्होंने अपने विजय सांसदों रहुल्लाह मेहंदी और मियाँ अल्ताफ को बधाई देते हुए कहा कि वो इसके लिए माफ़ी माँगते हैं कि संसद में उनका साथ नहीं दे पाएँगे, लेकिन उन्हें विश्वास है कि दोनों वहाँ जम्मू कश्मीर का सही तरीके से प्रतिनिधित्व करेंगे।

अब बात करते हैं अनंतनाग-राजौरी सीट की, जहाँ से PDP की मुखिया महबूबा मुफ़्ती लड़ रही हैं। यहाँ से उमर अब्दुल्ला की ही पार्टी के मियाँ अल्ताफ अहमद की जीत हो रही है। उन्हें खबर लिखे जाने तक 4.59 लाख वोट मिले थे, जबकि महबूबा मुफ़्ती 2.22 लाख वोट ही पा सकी थीं। इस तरह से वो 2.36 लाख वोटों से पीछे चल रही हैं। ‘जम्मू एन्ड कश्मीर अपनी पार्टी’ के ज़फर इक़बाल खान मन्हास ने भी इस चुनाव में 1.17 लाख वोट अब तक बटोरे हैं।

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती, दोनों जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 1998, 1999 और 2004 में लगातार जीत कर जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। उनके पिता फारूख अब्दुल्ला भी 4 बार यहाँ से जीत चुके हैं। वहीं महबूबा मुफ़्ती 2004 और 2014 में अनंतनाग से सांसद रही हैं। उनके पिता भी यहाँ से 1998 में जीत दर्ज कर चुके हैं। फारूख अब्दुल्ला और मुफ़्ती मुहम्मद सईद, दोनों मुख्यमंत्री रह चुके हैं।