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सांसद संतोष पांडेय ने पूछा –प्रवीण नेट्टारू और कन्हैया लाल को काटने वाले कौन थे?

                 राजनांदगाँव के सांसद संतोष पांडेय ने राहुल गाँधी पर हिंदुस्तान को बदनाम करने का लगाया आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले संसद सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने संपूर्ण हिन्दू समाज को हिंसक बता दिया। कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने इस दौरान भगवान शिव की तस्वीर दिखाई और कहा कि वो त्रिशूल का उपयोग नहीं करते बल्कि उसे जमीन में गाड़ कर रखते हैं। छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव से भाजपा के सांसद संतोष पांडेय ने उनके इस प्रोपेगंडा का करारा जवाब दिया है, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

संतोष पांडेय ने कहा कि सोमवार (1 जुलाई, 2024) को रात के 12 बजे तक संसद चला और राहुल गाँधी ने जिस तरह की बातें की, इसके अगले दिन अखिलेश यादव ने शेरो-शायरी से बातचीत की, उसका जवाब देते के लिए भी वो शायरी का इस्तेमाल करना चाहते हैं। संतोष पांडेय ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए शबीना अदीब की गजल की पंक्तियाँ पढ़ीं – “जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है।”

उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने बार-बार भगवान शिव की तस्वीर दिखाई, वो भगवान भोलेनाथ हैं, भगवान शंकर हैं, ये कॉन्ग्रेस की फितरत है कि उसके पूर्व मुख्यमंत्री (भूपेश बघेल) जिन्हें छत्तीसगढ़ की जनता ने निपटा दिया और जो लोकसभा में निपट गए, वो ‘महादेव’ के नाम से सट्टा चला रहे थे। उन्होंने ‘महादेव’ सट्टेबाजी एप घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि ये 6000 करोड़ रुपए का था और इसका संचालन भूपेश बघेल कर रहे थे। संतोष पांडेय ने चेताया कि भगवान शिव को मजाक में न लें और बार-बार उनका चित्र दिखाने की कोशिश न करें।

‘महादेव’ सट्टेबाजी एप घोटाले के तार छत्तीसगढ़ से लेकर दुबई तक गए थे। इस मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यंत्री भूपेश बघेल, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के अलावा 16 अन्य के नाम FIR में आए थे। आरोप लगा कि UAE स्थित ‘महादेव’ सट्टेबाजी एप के प्रमोटरों से भूपेश बघेल ने CM रहते 508 करोड़ रुपए लिए। इस एप को बनाने वाला सुआरभ चंद्राकर भिलाई का रहने वाला है। इस मामले में रणबीर कपूर, श्रद्धा कपूर, साहिल खान, संजय दत्त, बादशाह, तमन्ना भाटिया, कपिल शर्मा, हुमा कुरैशी और हिना खान जैसों का नाम भी आया था, जिन्हें कार्यक्रमों में बुलाया गया था।

संसद में बोलते हुए संतोष पांडेय ने आगे कहा, “राहुल गाँधी ने जो शुरुआत की है, जिस तरह हिंदुत्व और BJP को हिंसक कहा था, उनसे मेरे कुछ सवाल हैं। क्या हिन्दू हिंसक हो रहा है? भाजपा हिंसा की बात करती है? हिंदुस्तान में हिंसा कौन फैला रहा है, हिन्दू कितना हिंसक है – पूरा भारत जानता है। कर्नाटक में BJYM कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू और राजस्थान के टेलर कन्हैया लाल की गला रेत कर हत्या हिन्दू समाज ने की है? जम्मू कश्मीर में बम विस्फोट करने वाले कौन से समाज के हैं?”

कर्नाटक में PFI के गुर्गों ने प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काट डाला था। दक्षिण कन्नड़ में हुई ये घटना प्रतिबंधित संगठन द्वारा 2047 तक भारत में इस्लामी राज्य की स्थापना के लक्ष्य के तहत थी। तुफैल MH और मुहम्मद जाबिर जैसे इसमें गिरफ्तार हुए थे। वहीं भाजपा की प्रवक्ता (अभी निलंबित) नूपुर शर्मा ने TV पर एक बहस के दौरान हदीथ में लिखा एक अंश बताया था जिसके बाद उनका एडिटेड वीडियो शेयर कर मुस्लिमों को भड़काया गया। उनका समर्थन करने पर उदयपुर में कन्हैया लाल का ‘सर तन से जुदा’ कर दिया गया। उनका बेटा 2 साल बाद भी न्याय के इंतज़ार में है, वो चप्पल नहीं पहनता।

संतोष पांडेय ने आगे पूछा कि समाज के अंदर चिल्ला-चिल्ला कर ‘फिलिस्तीन ज़िंदाबाद’ का नारा लगाने वाले किस समाज के हैं? उन्होंने संसद की परंपराओं को तोड़ने की कोशिश पर प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे तत्व सफल नहीं होंगे। बता दें कि शपथग्रहण के दौरान हैदराबाद से AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ‘फिलिस्तीन ज़िंदाबाद’ का नारा लगाया था और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ कहा था। संतोष पांडेय ने इस दौरान सपा सांसद इमरान मसूर द्वारा छत्तीसगढ़ में मॉब लिंचिंग के आरोप लगाए जाने का भी विरोध किया।

सहारनपुर के जिन 2 लोगों की रायपुर में मॉब लिंचिंग हुई थी, उन पर गौ-तस्करी में लिप्त होने के आरोप लगे थे। कॉन्ग्रेस वालों ने उनसे परिजनों से मुलाकात भी की थी। संतोष पांडेय ने पूछा कि ऐसे लोग छत्तीसगढ़ में क्या करने गए थे? उन्होंने इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ‘रग-रग हिन्दू मेरा परिचय’ की पंक्तियाँ भी पढ़ीं और कहा कि हिन्दू व हिंदुस्तान अलग नहीं हैं। संतोष पांडेय ने राहुल गाँधी पर पूरे हिंदुस्तान को बदनाम करने की कोशिश का आरोप लगाया।

उन्होंने पिछले 10 वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा किए गए कार्यों और ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीर में असंभव को संभव किया गया। उन्होंने चेनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊँचे रेलवे पुल का जिक्र करते हुए कहा कि ये 8वाँ अजूबा है। उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ ‘कश्मीर से कन्याकुमारी’ का नारा लगता था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सार्थक किया है। बता दें कि ये पुल एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊँचा है। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान किए गए कार्यों का भी जिक्र किया।

संतोष पांडेय ने कहा कि उस दौरान विदेशी विशेषज्ञ कहते थे कि इतनी बड़ी जनसंख्या वाला भारत इस महामारी से कैसे निकलेगा, लेकिन पीएम मोदी ने वैक्सीन का निर्माण कराया, वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन दिया, लोगों को राशन मुहैया कराया गया और 300 करोड़ टीके की डोज दी गई। उन्होंने कहा कि विपक्षी लोग विदेशी कंपनियों की वकालत कर रहे थे और स्वदेशी वैक्सीन का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों ने सेन्ट्रल विस्टा का भी विरोध किया। कोविड के दौरान PPE किट के निर्माण, ऑक्सीजन प्लांट्स के निर्माण और टेस्टिंग सेंटरों के निर्माण का जिक्र भी किया।

संतोष पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन को ‘अंत्योदय की सरकार’ बताते हुए कहा कि रक्षा, शिक्षा और पेयजल के क्षेत्र में भी इस सरकार ने सर्वांगीण उन्नति का कार्य किया था। संतोष पांडेय लगातार दूसरी बार राजनांदगाँव से सांसद बने हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 44,411 वोटों से हराया। 2019 में उन्होंने कॉन्ग्रेस के ही भोलाराम साहू को 1,11,966 मतों से परास्त किया था। अब उन्होंने संसद में राहुल गाँधी के हिन्दू-विरोध की बखिया उधेड़ी है।

छत्तीसगढ़ : ‘मैं गणपति-गौरी इत्यादि देवी-देवताओं को नहीं मानूँगा’: दिलाई गई हिंदू विरोधी शपथ, कांग्रेस महापौर भी थीं मौजूद

      राजनांदगांव में बौद्ध सम्मेलन में कॉन्ग्रेसी महापौर हेमा सुदेश देशमुख (फोटो साभार: हेमा देशमुख का फेसबुक पेज)
कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ से एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में हिंदू विरोधी शपथ दिलवाई जा रही है। वीडियो राजनांदगांव का है। इस दौरान कांग्रेस की महापौर हेमा सुदेश देशमुख भी मौजूद थीं।

वीडियो राजनांदगांव के वार्ड मोहरा में आयोजित राज्यस्तरीय बौद्ध सम्मेलन का है। यह वीडियो 7 नवंबर 2022 का है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि लोगों को हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानने की शपथ दिलाई जा रही है।

वीडियो में एक व्यक्ति वहाँ मौजूद लोगों को शपथ दिलाते हुए कह रहा है, “मैं गौरी,गणपति इत्यादि हिन्दू धर्म के किसी भी देवी-देवताओं को नहीं मानूँगा और ना ही कभी उनकी पूजा करूँगा। मैं इस बात पर कभी विश्वास नहीं करूँगा कि ईश्वर ने कभी अवतार लिया है।” इस दौरान शपथ दोहराने वाले लोगों में महापौर देशमुख भी दिख रहीं हैं।

जनजातीय मामलों की केन्द्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने यह वीडियो ट्वीट करते हुए कहा है, “कांग्रेस राज में हिंदू विरोध चरम पर है। यहाँ हिंदू आस्था पर खुलेआम प्रहार किया जा रहा है और कांग्रेस की राजनांदगांव महापौर हिंदू धर्म के विरूद्ध शपथ ले रही हैं। कोई सनातन विरोधी कार्यक्रम हो और कांग्रेस से उसके तार ना जुड़े ऐसा हो सकता है क्या?”

छत्तीसगढ़ भाजपा प्रवक्ता नीलू शर्मा ने भी इस आयोजन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “एक तरफ भूपेश बघेल की सरकार छतीसगढ़ में राम गमन पथ निर्माण की बात करती है। दूसरी और कांग्रेस नेता हिंदू विरोधी कार्यक्रमों में शिकरत करते हैं। कांग्रेस महापौर की ऐसे कार्यक्रम में मौजूदगी दुर्भाग्यजनक है।”

कुछ दिन पहले इसी तरह का कार्यक्रम दिल्ली में भी हुआ था। 5 अक्टूबर 2022 को आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 10 हजार लोगों को हिंदू विरोधी शपथ दिलाई गई थी। इसका आयोजन बौद्ध सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर भवन में किया गया था।

इस कार्यक्रम में केजरीवाल सरकार के तत्कालीन मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी शामिल हुए थे। गौतम ने इसकी कुछ तस्वीरें ट्विटर पर साझा करते हुए कहा था, “आज मिशन जय भीम के तत्वाधान में अशोका विजयदशमी पर डॉ. अंबेडकर भवन रानी झाँसी रोड पर 10000 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने तथागत गौतम बुद्ध के धाम में घर वापसी कर जाति विहीन और छुआछूत मुक्त भारत बनाने की शपथ ली। नमो बुद्धाय, जय भीम!”

इस कार्यक्रम में गौतम समेत कई लोग एक शपथ लेते भी दिखे थे। इसमें कहा गया था, “मैं हिंदू धर्म के देवी देवताओं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, श्रीराम और श्रीकृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा, न ही उनकी पूजा करूँगा। मुझे राम और कृष्ण में कोई विश्वास नहीं होगा, जिन्हें भगवान का अवतार माना जाता है।” इस दौरान यह भी कहते हुए सुना गया, “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।” इसके बाद गौतम को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।