आज अयोध्या में राम मंदिर के जीणोद्धार होने पर सनातन विरोधी नितरोज कुछ न कुछ जहर उगल रहे हैं। जो इस बात को स्पष्ट प्रमाणित कर रहा है कि ये लोग बुद्धिविहीन, शिक्षित होते हुए किसी अशिक्षित से कम नहीं। यदि समय रहते इन लोगों ने अपने विवेक का प्रयोग नहीं किया, निश्चितरूप से वह दिन भी बहुत दूर नहीं होगा, जब ये अस्तित्वविहीन हो जायेंगे। इतिहास साक्षी है कि सनातन विरोधियों का कोई नामलेवा नहीं।
गिलहरी बोली प्रभु आप सत्य कह रहे हैं। मै सृष्टि की इतनी लघु प्राणी होने के कारण इस महान कार्य हेतु कर भी क्या सकती हूँ? मेरे कार्य का मूल्यांकन भी क्या होगा? प्रभु में यह कार्य किसी आकांक्षा से नहीं कर रही। यह कार्य तो राष्ट्र कार्य है, धर्म की अधर्म पर जीत का कार्य है। राष्ट्र कार्य किसी एक व्यक्ति अथवा वर्ग का नहीं बल्कि योग्यता अनुसार सम्पूर्ण समाज का होता है। जितना कार्य वह कर सके नि:स्वार्थ भाव से समाज को राष्ट्र हित का कार्य करना चाहिए। मेरा यह कार्य आत्म संतुष्टि के लिए है प्रभु। हाँ मुझे इस बात का खेद अवश्य है कि मै सामर्थ्यवान एवं शक्तिशाली प्राणियों की भाँति सहयोग नहीं कर पा रही। भगवान राम गिलहरी की बात सुनकर भाव विभोर हो उठे। भगवान राम ने उस छोटी सी गिलहरी को अपनी हथेली पर बैठा लिया और उसके शरीर पर प्यार से हाथ फेरने लगे। भगवान राम का स्पर्श पाते ही गिलहरी का जीवन धन्य हो गया।
