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अब कर्नाटक के गृहमंत्री के बिगड़े बोल, कहा- भारत में सिर्फ जैन और बौद्ध धर्म का इतिहास ; पूछ रहे- हिंदू धर्म का जन्म कब हुआ?

                             कर्नाटक में कांग्रेस के नेता G परमेश्वर ने हिन्दू धर्म पर खड़े किए सवाल
अभी तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को खत्म किए जाने और इसे डेंगू-मलेरिया बताने जाने के बाद उपजा विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि कर्नाटक के गृह मंत्री गंगाधरैया परमेश्वर ने हिन्दू धर्म पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता G परमेश्वर ने हिन्दू धर्म की उत्पत्ति पर सवाल खड़े कर दिए। हुबली में एक सभा के दौरान उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में कई धर्म उत्पन्न हुए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे जैन एवं बौद्ध धर्म का जन्म भारत में ही हुआ।

अब चर्चा है कि नरेंद्र मोदी विरोध में विरोधियों विशेषकर कांग्रेस लगता है बुद्धिविहीन हो सनातन विरोधी हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे निम्न वीडियो में कांग्रेस की कार्यशैली को बेनकाब किया है, जो फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस की 1555 में की गयी भविष्यवाणियों से काफी मेल दिखा रही है। जनता को महंगाई और बेरोजगारी की शोर मचाने वाली पार्टियों को जनता को यह भी बताना चाहिए कि पहले आम चुनाव से लेकर 2023 में राज्यों के लिए हुए चुनावों में कितने चुनाव केवल इन्ही मुद्दों पर लड़े गए? 1976 में अभिनेता-निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म 'रोटी,कपडा और मकान' में गीत "हाय हाय महंगाई तू कहाँ से आयी..." को फिल्म से क्यों निकाला गया था? क्यों इसके रेडियो पर प्रसारण पर क्यों प्रतिबन्ध लगाया था? फिर 60 के दशक में एक फिल्म आयी थी, जिसमे कलाकार आगा पर फिल्माया 'दीवाना आदमी को बनाती है रोटी...' यानि उस समय भी रोटी और महंगाई का रोना था।    

वहीं हिन्दू धर्म की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका कब जन्म हुआ और किसने इसे शुरू किया, ये अभी भी सवालों के घेरे में है। G परमेश्वर ने कहा कि भारत में जैन और बौद्ध धर्म का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में इस्लाम और ईसाई मजहब बाहर से आया। साथ ही उन्होंने कहा कि मानवता की भलाई ही सभी धर्मों और मजहबों का सार है। इस पर लोगों ने उन्हें जवाब दिया कि हिन्दू धर्म को सनातन इसीलिए कहा गया है क्योंकि इसका कोई उद्भव नहीं है, ये आदिकाल से है।

जी परमेश्वर ने कहा कि हिन्दू धर्म की उत्पत्ति कैसे हुई और किसने इसे शुरू क़िया, अभी भी इस सवाल का जवाब तलाशा जाना है। कर्नाटक में भाजपा के संयुक्त प्रदेश प्रवक्ता S पारख ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा बहुसंख्यक समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करती रहती हैं। वहीं VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि ये हैरान करने वाला है कि जिस व्यक्ति के नाम में ‘परमेश्वर’ है, हिन्दू धर्म के मूल पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से अब तक उदयनिधि स्टालिन के बयान की भी निंदा नहीं की है।

कर्नाटक के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री CN अश्वनाथ नारायण ने कहा कि वो स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ये लोग वामपंथियों के प्रभाव में हैं और हमारे देश भारत में हमारी संस्कृति एवं परंपराओं का विध्वंस करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जी परमेश्वर को याद रखना चाहिए कि इस किस्म का अहंकार इन्हें शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि वो विद्वान हैं, अगर हिम्मत है तो अन्य धर्मों के बारे में बोल कर दिखाएँ। उन्होंने कहा कि अगर G परमेश्वर खुश नहीं हैं तो इस धर्म को छोड़ कर अन्य धर्म में चले जाएँ, किसी ने उन्हें रोका नहीं है।

मजहबी षड्यंत्र के चलते 33 करोड़ हिन्दू देवताओं का भ्रम फैलाया गया

दिव्य अग्रवाल, उगता भारत 

सनातन धर्म इस ब्रह्माण्ड का आधार है। जिसका व्याख्यान असंख्य धर्म पुस्तको व पुराणों में किया गया है। परन्तु इसके विपरीत एक सत्य यह भी है कि सनातन धर्म को कमजोर व धर्म के प्रति हीन भावना को प्रोत्साहित कर सनातनियो में विघटन उत्तपन करने हेतु मुगल काल मे इस्लामिक कट्टरपंथियो ने सनातनी धर्म पुस्तको के भावार्थ व शब्दकोश में व्यापक परिवर्तन किए। जिसके फलस्वरूप बहूत सारे लोग व युवा पीढ़ी के अंतःकरण में सनातन धर्म के प्रति बहूत सारी विकृतियों ने जन्म ले लिया। जिसका एक जीवंत उदहारण सनातन धर्म में 33 करोड़ देवता होने का है। असंख्य लोग आज भी भृमित है कि सनातन धर्म मे 33 करोड़ देवता है तो किस किस की पूजा करें जिसके चलते युवा पीढ़ी का तो पूजा पाठ पर विश्वास ही नही बन पाता है और बुद्धिजीवी व्यक्ति भी इस भृम से ग्रस्त होकर स्वम नए नए धर्म बना लेते हैं। भगवान विष्णु के 24 अवतार और 108 नाम हैं, हर स्थान पर उन्हें उन्ही नामों से पूजा जाता है, जिस रूप में वहां प्रकट हुए थे। विष्णु के अवतार श्री राम उन्ही के 108 नाम है, वही स्थिति श्री राम के परमभक्त हनुमान की है। यदि वेद पुराणों का समुचित एवं सही भावार्थ पढ़ेंगे तो ज्ञात होगा कि धर्म पुस्तको में जिन 33 कोटि देवताओं का उल्लेख किया गया है वो करोड़ नही अपितु 33 प्रकार है। जिस प्रकार कनक , कनक के दो अर्थ होते हैं । उसी प्रकार कोटि का अर्थ प्रकार भी होता है । अब ये 33 प्रकार के देवता कौन है और इनका इस प्रकृति व प्राणधारी जीव से क्या संबंध है इसको भी समझिए। 33 प्रकार के देवताओ में 8 वसु , 12 आदित्य,11 रुद्र , 1 इंद्र व 1 प्रजापति हैं। वसु में वायु ,जल ,पृथ्वी,अग्नि ,सूर्य , चंद्रमा ,आकाश ध्रुव आते हैं। अतः स्वम् समझें क्या इनमें से कुछ भी ऐसा है जिसके बिना जीवन संभव हो सके। यदि नही तो इन सबको देवता स्वरूप मानकर इन सबके प्रति अपनी कृत्यगता प्रकट करने में क्या दिक्कत है । अब बात करते है 12 आदित्यों की जो एक वर्ष के 12 माह व उनकी वैज्ञानिकता का उल्लेख करने के साथ साथ सामाजिक जीवन के 12 सिद्धांतों का वर्णन भी करते हैं। जिसके अनुषार नेतृत्व, अंश/हिस्सा, श्रेष्ठता, धरोहर, अनुष्ठान कौशल, शिल्प कौशल, मित्रता, सम्रद्धि, शब्दज्ञान, सामाजिक नियम, भाग्य व ब्राह्मणीय कानून की महत्वता, निर्वहन व पालन के सिद्धांत का व्याख्यान किया गया है । तत्पश्चात 11 रुद्र देवता की बात करें तो ये सभी एक प्राणधारी की देह व जीवात्मा से सम्बन्ध रखते हैं। जिनके रहते किसी देह को जीवित या न होने पर मृत कहा जाता है जिसमे प्राण, अपान, व्यान, समान उदान, नाग, कर्म, किरकल, देवदत्त, धनंजय,

जीवात्मा का व्याख्यान किया गया है। एवं इंद्र व प्रजापति जी का इस प्रकृति के प्रति क्या दायित्व है यह सर्वविदित है। अब यदि कोई यह कहे कि इन सबके बिना प्रकृति चल सकती है तो यह सर्वथा गलत है। क्योंकि इन सभी के अस्त्तिव की प्रामाणिकता व महत्वता को तो आज तक विज्ञान भी चुनौती नही दे पाया है। अतः अपने भृम को दूर करने हेतु सनातन धर्म की पुस्तकों का स्वम् अध्यन करना चाहिए । रही बात ईश्वर की तो वो तो एकल सर्वव्यापी है साकार भी है और निराकार भी है । जिस प्रकार किसी राष्ट्र की व्यवस्था को चलाने हेतु मंत्रिमंडल में अनेकों मंत्री कार्य करते है परन्तु उनका मुख्या प्रधानमंत्री ही होता है। उसी प्रकार परमपिता पारब्रह्म परमेश्वर , श्रीहरि नारायण , आदिशक्ति माँ जगदम्बा, देवादिदेव महादेव विभिन्न रूपो में विद्दमान होने के पश्चात एक ही स्वरूप हैं। रही बात देवताओं की तो सनातन धर्म मे अपने माता पिता को, महापुरुषों को, पूर्वजो को , गुरुओं को , मार्गदर्शको को , अभिभावकों को , जड़ चेतन आदि उन्ही सबको देवतुल्य माना जाता है जिनके माध्यम से जीवन संचालित होता है जिनकी जीवनशैली से आदर्शों का निर्माण होता है । अतः सनातन धर्म की वैज्ञानिकता व पौराणिकता को पढ़ें तत्पश्चात किसी निष्कर्ष पर पहुंचे।

जिस राम सेतु को तोड़ना चाहती थी UPA सरकार, वो घोषित होगा ‘राष्ट्रीय धरोहर स्मारक’

सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु को ‘राष्ट्रीय धरोहर स्मारक (National Heritage Monument)’ घोषित करने की माँग सम्बंधित याचिका पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। 23 फरवरी, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 9 मार्च को इस मामले की सुनवाई की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना, जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्यीय पीठ ने भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा किए गए निवेदन के बाद ये निर्देश जारी किया।

सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले में त्वरित सुनवाई की माँग की थी। याचिका में माँग की गई है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि राम सेतु को ‘राष्ट्रीय धरोहर स्मारक’ घोषित किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश होकर भाजपा सांसद ने कहा कि इस मामले को हटाया न जाए और इस पर त्वरित सुनवाई हो। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद 9 मार्च को इसे लिस्ट किए जाने की तारीख़ मुकर्रर की और कहा कि इस पर आगे बढ़ना है या नहीं, इसे उसी दिन तय किया जाएगा।

CJI द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में डॉक्टर स्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले में काउंटर-एफिडेविट दायर की है और ये मामला काफी लंबे समय से पेंडिंग पड़ा हुआ है। अप्रैल 2021 में तत्कालीन CJI एसए बोबडे ने इस मामले को अगले CJI के समक्ष सुनवाई के लिए रखे जाने की बात कही थी, जिन्होंने उसी साल 24 अप्रैल से कार्यभार संभाला। बता दें कि राम सेतु ‘लाइमस्टोन शोल्स’ की एक श्रृंखला है, जो तमिलनाडु के दक्षिणी-पूर्वी छोर पर स्थित है।

ये दक्षिण में रामेश्वरम के नजदीक स्थित पम्बन द्वीप से लेकर श्रीलंका के उत्तरी छोर पर स्थित मन्नार द्वीप तक फैला हुआ है। रामायण में इसका जिक्र है कि कैसे माँ सीता को वापस लाने के लिए भगवान श्रीराम की वानर-भालू सेना ने इस पुल का निर्माण किया था। जनवरी 2020 में ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कई लंबित मामलों के कारण इसे तीन महीने बाद लाने के लिए कहा गया था। स्वामी का कहना था कि 2017 में एक केंद्रीय मंत्री ने इस माँग को लेकर एक बैठक बुलाई तो थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं।

2007 में यूपीए की सरकार के दौरान ही सुब्रमण्यम स्वामी ने ‘सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट’ के खिलाफ याचिका दायर करते हुए ये माँग की थी, जिसके बाद राम सेतु की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इस परियोजना पर रोक लगा दी थी। इसके तहत 83 किलोमीटर लंबे वॉटर चैनल का निर्माण किया जाना था, जिससे मन्नार और पाल्क स्ट्रेट को जोड़ा जाता। इसके तहत इस ‘राम सेतु’ को तोडना भी पड़ता। इसके बाद केंद्र सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था की बात कही थी।