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रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली, सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा: ED, संपत्ति छिपाने में कांग्रेस MP प्रियंका वाड्रा भी नपेंगी?

                               कांग्रेस सांसद पत्नी प्रियंका के साथ रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो, साभार: न्यूज18)
जब से हरियाणा से कांग्रेस सत्ता गयी है तब से आज तक कोई रॉबर्ट वाड्रा ने कोई भूमि सौदा नहीं किया, ये अपने आपमें बहुत बड़ी खबर है। दूसरे यह कि आखिर चुनाव दिनों में ही क्यों घोटालों सामने आते हैं? शेष दिनों में क्या ED और अन्य संस्थाएं आराम फरमाने चली जाती हैं? इतने सालों में अभी कोई सख्त कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की? अगर यही घोटाला किसी आम नागरिक किया होता क्या उसका केस भी इसी तरह तारीख पे तारीख मिल रही होती?     

कांग्रेस महासचिव और वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली थी। बाद में यह जमीन वाड्रा ने 58 करोड़ रुपए में रियल एस्टेट कंपनी DLF को बेच दी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में यह खुलासा किया है।

यह जमीन गुरुग्राम के सेक्टर 83 में है। वाड्रा ने जमीन के बदले 7.5 करोड़ रुपए भुगतान का दावा किया था। लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। चार्जशीट में कहा गया है कि सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा वाड्रा को मिला। इसके कारण हरियाणा के तत्कालीन कांग्रेसी  मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा उनके प्रभाव में थे।

रॉबर्ट वाड्रा पर ED की चार्जशीट

ED ने 17 जुलाई 2025 को यह चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कहा गया है कि ओंकारेश्वर प्रॉप्रटीज प्राइवेट लिमिटेड (OPPL) ने जमीन स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) को रिश्वत के तौर पर दी थी ताकि SLHPL के निदेशक रॉबर्ट वाड्रा अपनी व्यक्तिगत पहुँच का इस्तेमाल कर हरियाणा के तत्कालीन ‘नगर एवं ग्राम नियोजन’ मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से OPPL को उसी गाँव में हाउसिंग लाइसेंस दिला सकें।

इससे पहले ED ने बताया था कि उन्होंने वाड्रा से जुड़ी 37 करोड़ रुपए की संपत्तियाँ अटैच की थी। इसमें वाड्रा और 10 अन्य लोगों पर 58 करोड़ रुपए की ‘अपराध की कमाई’ को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद करने का आरोप है।

प्रियंका गाँधी तक पहुँची जाँच की आँच

इस मामले में वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा तक भी जाँच की आँच पहुँच गई है। ED की चार्जशीट में फरीदाबाद के अमीपुर गाँव में 39.7 एकड़ की 3 हाई-वैल्यू संपत्तियों का जिक्र है, जिनकी जानकारी प्रियंका ने चुनावी हलफनामे में नहीं दी है। यह मामला केरल हाई कोर्ट में है और अदालत ने नोटिस भी जारी किया है। गौरतलब है कि चुनावी हलफनामे में झूठी या अधूरी जानकारी देने को ‘भ्रष्ट आचरण’ के तौर पर देखा जाता है और इसमें अयोग्यता और जेल की सजा हो सकती है।

कैसे खुला रॉबर्ट वाड्रा का फर्जीवाड़ा?

ED की जाँच के दौरान हरियाणा सरकार के अधिकारियों और OPPL के प्रमोटरों सहित कम से कम 20 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इन लोगों ने शुरू में दावा किया था कि वाड्रा ने जमीन के लिए 7.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया था, लेकिन ED ने इस बयान को झूठा बताया है।

ED ने गुरुग्राम पुलिस से वाड्रा के इस कथित भुगतान की जाँच करने को कहा। जाँच में पुलिस उपायुक्त ने पाया कि SLHPL ने OPPL से 3.53 एकड़ ज़मीन 12 फरवरी 2008 को सेल डीड नंबर 4928 के जरिए खरीदी थी। कागजों में दिखाया गया कि भुगतान चेक नंबर 607251 से किया गया है, लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। इसके 6 महीने बाद एक और चेक से रकम दी गई।

यह चेक Skylight Realty Pvt Ltd (SLRPL) का था, न कि खरीददार कंपनी SLHPL का। SLHPL की पूँजी केवल 1 लाख थी और SLRPL के खाते में भी 7.5 करोड़ रुपए नहीं थे। 45 लाख का स्टांप ड्यूटी भी बेचने वाले ने दी थी, न कि वाड्रा की कंपनी ने। ईडी के अनुसार, रजिस्ट्री में झूठा भुगतान दिखाकर सौदा बेनामी तरीके से किया गया।

ये चुनावी दिनों में ही क्यों घोटाले की जाँच सामने आती है? इतने सालों से चल रही जाँच लेकिन कोई सजा नहीं? ED ने गुरुग्राम की विवादित लैंड डील में रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट: 43 संपत्तियाँ हो चुकी हैं कुर्क

ये चुनावी मौसम में जो घोटालों की जाँच सामने आती है, शंका पैदा करती है कि 'क्या घोटाला हुआ था या नहीं, इतने सालों की जाँच में क्या पाया? किसी भी नेता का घोटाला हो चुनावी दिनों में सुनने को मिलते हैं। अगर यही घोटाले किसी सामान्य नागरिक ने किये होते कभी जाँच पूरी कर दोषी पाए जाने पर जेल हो गयी होती, लेकिन जहाँ सियासत हो तो ये सब ड्रामेबाज़ी। अगर घोटाला है जल्दी जाँच पूरी कर भेजो जेल।  
दूसरे, दिल्ली के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ कितने घोटालों पर शोर हुआ, जेल जाना और आना पर्यटन बन गया था। चुनाव होने के बाद सारे घोटाले क्या ठंठे बस्ते में चले गए हैं? क्या हुआ CAG रिपोर्ट्स का? क्या कार्यवाही हुई? या फिर यही समझा जाए कि जिस तरह केजरीवाल चुनावी रैलियों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घोटालों को दिखाकर जेल भेजने की बात करते थे शीला स्वर्ग सिधार गयी लेकिन कुछ नहीं किया, मतलब क्या वही दौर दोहराया जा रहा है? मसला सिर्फ केजरीवाल का ही नहीं, कई नेता हैं जिन पर किसी न किसी घोटाले में जो जमानत हुई मामला शांत हो गया। अगर यही घोटाले किसी आम नागरिक ने किये होते क्या उनके साथ भी सरकार से लेकर कोर्ट तक ऐसी ही नरमी बरतती? क्या नेताओं और आम नागरिक के अलग कानूनी प्रक्रिया होती है?

             
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिखोपुर लैंड डील मामले में कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा सहित 11 लोगों और संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट गुरुवार (17 जुलाई 2025) को नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल की गई।

रिपोर्टस के अनुसार, यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें वाड्रा की कंपनी पर भारी मुनाफा कमाने और नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

मामला वर्ष 2008 में गुरुग्राम के शिखोपुर गाँव (अब सेक्टर 83) की 3.53 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा है। ED के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा लि ने यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से महज 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।

कुछ ही महीनों में हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी के लिए लाइसेंस दे दिया, जिससे जमीन की कीमत लगभग 700% बढ़ गई। इसके बाद सितंबर 2012 में इस जमीन को DLF को करीब 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।

उस वक्त हरियाणा में कॉन्ग्रेस की भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार थी। इस सौदे की जाँच तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका ने शुरू की और म्यूटेशन रद्द कर दिया। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का मामला बताया।

इसी के आधार पर 1 सितंबर 2018 को गुरुग्राम पुलिस ने FIR दर्ज की। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की। कहना है कि इस सौदे से जो मुनाफा हुआ, उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर घुमाया गया।

रॉबर्ट वाड्रा को अप्रैल 2025 में तीन दिनों तक पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहाँ उनके बयान PMLA के तहत दर्ज किए गए। वाड्रा ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और कहा है कि उन्होंने जाँच में पूरा सहयोग किया है और 23000 से ज्यादा पेज के दस्तावेज भी सौंपे हैं।

इस चार्जशीट में रॉबर्ट वाड्रा के अलावा उनकी कंपनियों, सत्यनंद याजी, केवल सिंह विर्क और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि. को आरोपित बनाया गया है। इसके अलावा बुधवार (16 जुलाई 2025) को ED ने वाड्रा और उनकी कंपनियों की कुल 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनकी कीमत लगभग 37.64 करोड़ रुपए बताई गई है।

फिलहाल कोर्ट ने इस चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है। अगली सुनवाई की तारीख तय की जा चुकी है, जिसके बाद यह तय होगा कि आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलेगा या नहीं।

कांग्रेस को आईना दिखाना रास नहीं आया, राहुल-वाड्रा की सच्चाई बताई तो दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह को कांग्रेस से निकाला; चापलूस कांग्रेस को डुबोकर ही रहेंगे

यह कहना कि कांग्रेस पार्टी में सब कुछ भगवान भरोसे चल ही रहा है और भविष्य में भी भगवान भरोसे ही चलता रहेगा। ऐसा कुछ नहीं है।  वास्तविकता यह है कि कांग्रेस में सब कुछ चापलूसों और चमचों के भरोसे चल रहा है। राहुल गांधी के इर्द-गिर्द इन लोगों के गुट ने ऐसा घेरा बना लिया है, जिसके कारण वरिष्ठ नेताओं सहित पार्टी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी से दूरी बना ली है। यदि कभी-कभार कांग्रेस का कोई नेता हिम्मत करके राहुल गांधी को सच्चाई का आईना दिखाता है तो उसकी बात पर विचार-मंथन किए बिना ही उसको पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। इसके एक नहीं, अनेक उदाहरण हैं। अगर कांग्रेस में तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ने परिवार को ऐसा करने से नहीं रोका बहुत जल्दी कांग्रेस की हैसियत किसी क्षेत्रीय पार्टी से भी नीचे चली जाएगी। जिस पार्टी में चापलूसों की भरमार होगी उस पार्टी को डूबने से कोई नहीं बचा सकता। 
कांग्रेस परिवारभक्ति में इतना ज्यादा डूब चुकी है, उससे बाहर निकलना मुश्किल दिखाई पड़ता है। आज कांग्रेस में राष्ट्रप्रेम की भी जरुरत से ज्यादा कमी आ गयी है। 2014 चुनावों से पहले देश में होते आतंकी हमलों को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" से जोड़ हिन्दू को बदनाम करने वाली कांग्रेस आज वर्तमान की मोदी सरकार द्वारा आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने पर पाकिस्तान से ज्यादा परेशान कांग्रेस है। Operation Sindoor होने पर पाकिस्तान ने हमारे कितने राफेल गिराए पूछ पाकिस्तान की बोली बोलना। इससे पहले एयर और सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत। आखिर कांग्रेस क्यों पाकिस्तान के आगे घुटने टेके हुए है? लगता है पाकिस्तान ने कांग्रेस की कोई नस पकड़ी हुई है। जिसे देख शंका होती है कि कांग्रेस आतंकवाद के सहारे भारत में राज कर रही थी। असलियत सामने आने में कांग्रेस में जो भगदड़ मची है उसे देख समझा जा सकता है, कुछ कहने की जरुरत नहीं।
दूसरे, देश में होते हिन्दू विरोधी दंगों में हिन्दुओं पर होते जानलेवा हमले होने पर चुप्पी साध ली जाती है, लेकिन इजराइल द्वारा गाज़ा पर हमले होने पर बेशर्म प्रियंका वाड्रा संसद में फिलिस्तीन का थैला लेकर पहुँच जाती है। मुर्शिदाबाद, संदेशखली और 24 परगना में हिन्दुओं के होते नरसंहार पर चुप्पी क्यों?             
 

ऐसा ही ताजा मामला अब मध्य प्रदेश से आया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और कांग्रेस के दिग्गज नेता लक्ष्मण सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। उनका भी कुसूर सिर्फ इतना ही था कि उन्होंने राहुल गांधी एंड कंपनी को वास्तविकता का आईना दिखाने के लिए नसीहत देने की कोशिश की थी।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में गांधी परिवार के ना शामिल होने को गलत बताया
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी एक बाद फिर घमासान को लेकर सुर्खियों में आ गई है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया है। लक्ष्मण सिंह 5 बार के सांसद, 3 बार के विधायक रहे हैं। इसके साथ ही वह वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह के चाचा हैं। लक्ष्मण सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। ऐसे में हर तरफ यह सवाल तैर रहे हैं कि यह दिग्विजय सिंह और जयवर्धन के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्या राघोगढ़ के छोटे राजा लक्ष्मण सिंह को पार्टी से बाहर करना पूरी राघोगढ़ रियासत का अपमान नहीं है? विधानसभा चुनाव में चाचौड़ा विधानसभा सीट से हारने के बाद से लक्ष्मण सिंह पार्टी की गलत नीतियों को लेकर हमलावर थे। लक्ष्मण सिंह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में गांधी परिवार के ना शामिल होने को गलत ठहराया था।

राहुल गांधी को सोच-समझकर बोलने की भी दी नसीहत
कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह पहलगाम आतंकी हमले पर भी राहुल गांधी और पार्टी के रुख की आलोचना कर चुके हैं। सत्तर वर्षीय पार्टी नेता एक बार फिर साफगोई से बयान दिए हैं, जो कांग्रेस के दिल्ली दरबार में बैठ नेताओं को असहज लग रहे हैं। इससे पहले लक्ष्मण सिंह को तब कारण बताओ नोटिस दिया गया था, जब उन्होंने राहुल गांधी और उनके बहनोई रॉबर्ट वाड्रा को लेकर पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, ‘गांधी और वाड्रा अपरिपक्व हैं। देश उनकी अपरिपक्वता को भुगत रहा है।’ उन्होंने आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आतंकवादियों से मिले हुए हैं। पार्टी को वहां से समर्थन वापस लेना चाहिए। लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी को भी सोच समझकर बात करने की नसीहत देते हुए कहा था कि पार्टी को मुझे निकालना हो तो आज निकाल दे। हमारी पार्टी के नेता सोच समझकर बोले, नहीं तो उन्हें चुनाव में परिणाम भुगतना पड़ेंगे।

राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा का बचपना कब तक झेलेंगे
पार्टी की अनुशासन समिति ने उनके बयानों को अनुशासनहीनता माना। अनुशासन समिति के अध्यक्ष सांसद तारिक अनवर ने बयान के लिए कारण बताओ नोटिस दिया था। जवाब संतोषजनक नहीं होने के चलते उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया गया। इससे पहले दिसंबर 2023 में भी लक्ष्मण सिंह ने कह दिया था कि राहुल गांधी महज एक पार्टी कार्यकर्ता और सांसद हैं। इसके अलावा वह कुछ भी नहीं। राहुल गांधी को ज्यादा तवज्जो नहीं देनी चाहिए। लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा पर भी निशाना साधा था। उन्होंने कहा था- ‘ये हमारा रॉबर्ट वाड्रा, जीजा जी राहुल गांधी का, कहता है कि मुसलमानों को सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने देते इसलिए आतंकवादियों ने हमला किया। इन दोनों का ये बचपना हम कब तक झेलेंगे। राहुल गांधी भी थोड़ा सोच समझकर बात करें। इनकी नादानियों की वजह से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।’

भाई का निष्कासन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय के लिए बड़ा झटका
दिग्विजय सिंह को राघोगढ़ का राजा माना जाता है। गुना जिले की यह सीट हमेशा दिग्विजय सिंह और बाद में उनके बेटे के नाम रही, जबकि लक्ष्मण सिंह जिले की चाचौड़ा विधानसभा से विधायक रहे। इस बार 2023 के चुनाव में हार गए। माना जाता है कि दिग्विजय सिंह के लिए भाई का पार्टी से निष्कासन बड़ा झटका साबित हो सकता है। काबिले जिक्र है कि लक्ष्मण सिंह ने रैली में साफ कहा था कि चाहे मुझे पार्टी से निकाल दें, लेकिन हमारी पार्टी के नेता सोच समझकर बोले, नहीं तो उन्हें चुनाव में परिणाम भुगतना पड़ेंगे।
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कांग्रेस को आज नहीं तो कल सवालों का जवाब देना ही पड़ेगा
कांग्रेस पार्टी के लक्ष्मण सिंह के खिलाफ एक्शन पर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने कहा- लक्ष्मण सिंह मेरे वर्षों पुराने मित्र हैं। जब उनके भाई मुख्यमंत्री थे तब से आज तक लक्ष्मण सिंह और हम मित्र हैं। बेबाकी से बोलते हैं। आज की तारीख में वे जो सवाल उठा रहे हैं। वो समयानुकूल हैं। इन प्रश्नों का जवाब कांग्रेस को आज नहीं तो कल देना ही पड़ेगा। अगर जवाब नहीं देंगे। तो जनता और कार्यकर्ता उन्हें इतना घेरेंगे कि वो लक्ष्मण सिंह का नाम लेकर पानी पिएंगे। उन्होंने लक्ष्मण सिंह को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सच्चाई की अपनी लाइन को मत छोड़िएगा। सच कहना अगर बगावत है तो समझो हम भी बागी हैं। आप और हम इसी लाइन पर चलते रहेंगे।

2010-11 से टैक्स नहीं भर रहे रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका गाँधी पर भी 11 लाख रूपए बकाया: वायनाड से भरा पर्चा तो खुली पोल; ऐसे लोग जनसेवक या शाही लुटेरे? क्या और लूट करने चुनाव लड़ा जा रहा है? क्या कहे लाचारी या गाँधी परिवार के आगे घुटने टेक, या वित्त मंत्रालय बेबस?

              प्रियंका गाँधी और उनके पति पर 78 करोड़ रूपए से ज्यादा बकाया है (चित्र साभार: Times Of India)
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने बुधवार (23 अक्टूबर, 2024) को केरल की वायनाड लोकसभा सीट उपचुनाव के लिए पर्चा दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के दौरान भाई राहुल गाँधी भी मौजूद रहे। प्रियंका गाँधी के दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी करोड़ों की सम्पत्ति और उन पर इनकम टैक्स के बकाए की जानकारी सामने आई है। सामने आया है कि प्रियंका गाँधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने लगभग 78.5 करोड़ रूपए का इनकम टैक्स नहीं चुकाया है। इसको लेकर मुकदमे भी चल रहे हैं।

एक बहुत कहावत है "You show me the man I will show you the rule" इस सन्दर्भ में बिलकुल सटीक बैठती है। अगर आम टैक्सपेयर ने इतनी लापरवाही की होती क्या इतने लम्बे मुकदमा चलता? क्यों भारत सरकार और न्यायालय गाँधी परिवार के आगे जरुरत से ज्यादा कमजोर दिखाई देते हैं? भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और न्यायालय को बताना चाहिए आखिर क्यों आम नागरिक और सियासतखोरों के लिए कानून के दो-रूप क्यों? मुद्दा सिर्फ ये नहीं, किसी भी मुद्दे को ले लो। बिजली विभाग कनेक्शन काटता है अरविन्द केजरीवाल जोड़ देता है, कोई कार्यवाही नहीं। अगर यही काम उपभोक्ता ने खुद किया होता छतीसों कानून लग गए होते। भ्रष्टाचार पर जेल हुई जमानत भी हो गयी लेकिन वसूली नहीं क्यों? ये संविधान की दुहाई देने वाले किस तरह जनता की गर्दन और जेबों पर वार कर रहे हैं और अपनी काली करतूतों को छुपाने बेरोजगारी और महंगाई का रोना रोते नज़र आते है और पागल जनता भी इन लुटेरों पर विश्वास कर अपनी बर्बादी के लिए वोट दे देते हैं। क्या ऐसे लुटेरे एक भी वोट के हक़दार हैं, चाहे वह लुटेरा किसी भी पार्टी से हो?    प्रियंका गाँधी द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, उन्होंने साल 2012-13 का 15.75 लाख रूपए का इनकम टैक्स नहीं चुकाया है और इसको लेकर इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल मुकदमा चल रहा है। उन्होंने CBDT के पास मात्र 3.15 लाख रूपए जमा किए हैं। वर्तमान कार्रवाई के अनुसार, उनके ऊपर 11.11 लाख रूपए की रकम का इनकम टैक्स बकाया और उन्हें यह चुकाना है।

प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने इनकम टैक्स की बड़ी रकम दबा रखी है। उन्होंने 2010-11 के बाद से 2020-21 तक का इनकम टैक्स नहीं भरा है। यानि वह लगभग 12 सालों का इनकम टैक्स नहीं जमा कर रहे हैं। अब यह धनराशि लगभग 78.5 करोड़ रूपए पहुँच चुकी है।

हलफनामे के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा पर साल 2010-11 के लिए 7.15 करोड़ रूपए, साल 2011-12 के लिए 3.02 करोड़ रूपए, साल 2012-13 के लिए 3.39 करोड़ रूपए, साल 2013-14 के लिए 11.05 करोड़ रूपए, साल 2014-15 के लिए 10.02 करोड़ रूपए और 2015-16 का 8.98 करोड़ रूपए बकाया है।

इसके अलावा 2016-17 के 4.12 करोड़ रूपए, 2017-18 के 3.06 करोड़ रूपए, 2018 के लिए 2.39 करोड़ और 2019-20 के 24.16 करोड़ रूपए भी बकाया हैं। रॉबर्ट वाड्रा ने 2020-21 का 1 करोड़ रूपए का इनकम टैक्स भी नहीं जमा किया है।

इस हलफनामे में प्रियंका गाँधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा की संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। हलफनामे में प्रियंका गाँधी ने बताया है कि उनके पास 60 किलो से अधिक सोना चाँदी है। इसके अलावा उनके पास करोड़ों की जमीन भी है।

प्रियंका गाँधी वाड्रारॉबर्ट वाड्रा
आय साल 2023-24रूपए 69,31,660रूपए 55,58,000
आय साल 2022-23रूपए19,89,420रूपए11,38,710
आय साल 2021-22रूपए45,56,940रूपए9,03,810
आय साल 2020-21रूपए47,21,820रूपए9,35,530
आय साल 2019-20रूपए46,39,100रूपए15,09,220
बैंक सेविंग्स अकॉउंटरूपए3,67,281रूपए13,95,604
बैंक करंट अकॉउंटजीरोरूपए2,95,251
बैंक फिक्स्ड डिपोजिटजीरोरूपए35,60,245
शेयरजीरोरूपए65,72,012
म्यूचुअल फंडरूपए2,24,93,988रूपए32,79,998
PPF/LICरूपए17,38,265रूपए6,00,000
विभिन्न कंपनियों को दिया गया पैसाजीरोरूपए35,38,89,724
सोना-चाँदी-जेवरात2.509 किलो सोना (रूपए1,15,79,065) 59.830 किलो चाँदी (रूपए29,55,581)जीरो
कुल चल संपत्तिरूपए4,24,78,689रूपए37,91,47,432
दिल्ली में जमीन3.78 एकड़ (रूपए2,10,13,598)जीरो
व्यावसायिक भवनजीरोरूपए27,64,38,633
आवासीय भवनरूपए7,74,12,598जीरो

ऊपर प्रियंका गाँधी और उनके पति की संपत्तियों का हर एक ब्योरा देखा जा सकता है। प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा के पास कोई नई गाड़ियाँ भी नहीं हैं। इस हलफनामे में बताया गया है कि दोनों के पास 3 कारें और 1 मोटरसाइकिल है। यह सभी गाड़ियाँ 15 वर्ष से अधिक पुरानी हैं।

यानी अगर देखा जाए तो रॉबर्ट वाड्रा- प्रियंका गाँधी पर इनकम टैक्स का बकाया उनकी कुल सम्पत्ति से भी ज्यादा है। हलफनामे के अनुसार, दोनों की कुल सम्पत्ति लगभग 77.5 करोड़ रूपए है जबकि उनके ऊपर 78 करोड़ रूपए से ज्यादा का इनकम टैक्स बकाया है। प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा का कुल इनकम टैक्स बकाया लगभग 78.5 करोड़ रूपए पहुँचता है।

प्रियंका गाँधी चुनावी राजनीति में उतरने वाली गाँधी परिवार की सबसे नई सदस्य हैं। यदि वह चुनाव जीतती हैं तो गाँधी परिवार के सभी सदस्य सांसद होंगे। उनके भाई राहुल गाँधी वर्तमान में रायबरेली जबकि माँ सोनिया गाँधी राज्यसभा की सांसद हैं।

रॉबर्ट वाड्रा पर मेनका गाँधी का सीधा जवाब : देश दामादों से आगे निकल चुका है: राहुल गाँधी पर बोलीं- सलाह उसको दूँ जो सुने

उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा सांसद मेनका गाँधी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास न तो कोई बड़ा लीडर है और न ही कोई बड़ा आइडिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी ने रॉबर्ट वाड्रा पर तंज कसते हुए कहा कि देश दामादों से आगे बढ़ चुका है। रॉबर्ट वाड्रा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति हैं, उन्होंने कुछ दिन पहले ये कहा था कि अमेठी की जनता चाहती है कि वो अमेठी से चुनाव लड़ें। 

ऐसे में सवाल पैदा हो रहा है कि क्या कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल पड़ गया है, जो परिवार भक्त परिवार के दामाद को चुनाव उतार रहे हैं? हकीकत में जिस दिन से सोनिया गाँधी को पार्टी अध्यक्ष बनाया, उसी दिन से कांग्रेस की उल्टी गिनती शुरू हो गयी थी। जिसका नतीजा सबके सामने है कि कम्युनिस्ट पार्टी के बाद सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों की बैसाखियों पर चलना पड़ रहा है। कंगाली में आटा गीला करने पहले राहुल को लाया गया और फिर प्रियंका को और अब दामाद को लाकर बाकि कसर पूरी करने की तैयारी। कांग्रेस कोई ऐसा अध्यक्ष भी बना सकी जो स्वयं निर्णय लेने में सक्षंम हो। 

इंडिया टीवी से बातचीत में मेनका गाँधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से भटक चुकी है। पार्टी के पास न तो कोई बड़ा नेता है और न ही पार्टी के पास कोई आईडिया है। वो घिसे-पिटे नारों से काम चला रही है। इस दौरान उनसे जब पूछा गया कि सुल्तानपुर से सटी अमेठी लोकसभा सीट पर गाँधी परिवार के दामाद चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे हैं, तो उन्होंने जबरदस्त तंज कसा। उन्होंने कहा कि देश दामादों से आगे निकल चुका है। उन्हें तो राजनीति का अनुभव भी नहीं है।

मेनका गाँधी सुल्तानपुर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं। वो 2019 में भी यहाँ से चुनाव जीती थी और एक बार फिर से सुल्तानपुर से ही चुनाव मैदान में हैं। वहीं, उनके बेटे और सुल्तानपुर से साल 2014 में लोकसभा सांसद रहे वरुण गाँधी को इस बार बीजेपी ने टिकट नहीं दिया है। वो मौजूदा समय में पीलीभीत से सांसद हैं। हालाँकि पीलीभीत सीट मेनका गाँधी की पारंपरिक सीट मानी जाती है।

मेनका गाँधी से जब पूछा गया कि बीजेपी ने वरुण गाँधी को टिकट क्यों नहीं दिया, तो उन्होंने इसे पार्टी का फैसला बताया और कहा कि टिकट देने या न देने का फैसला पार्टी का होता है, मेरा नहीं। मेनका गाँधी ने कहा कि पीलीभीत से हमारा लगाव हार-जीत और राजनीति से ऊपर उठकर है।

इस मौके पर उनसे जब प्रशांत किशोर की बात पर सवाल पूछा गया कि राहुल गाँधी को पॉलिटिक्स से ब्रेक ले लेना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर का कहना सही है। कांग्रेस के पास न तो कोई नेता है और न ही कोई आईडिया है। राहुल गाँधी को कोई सलाह देने पर उन्होंने कहा कि सलाह उसे दी जाती है, जो सुने। इस दौरान उन्होंने सोनिया गाँधी पर पूछे गए सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।

11 साल में प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने छिपाई 106 करोड़ रूपए की कमाई: आयकर विभाग ने कसा शिकंजा

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद व पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के ऊपर आयकर विभाग ने आरोप लगाया है कि वाड्रा ने राजस्थान में बेनामी लेन-देन से अपनी कमाई को 11 वर्षों से 106 करोड़ रुपए कम बताया। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, अब इस राशि को निर्धारित वर्ष 2010-11 से 2020-21 के दौरान उनकी आय में जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।

इसके अलावा, आयकर विभाग ने वाड्रा की सात कंपनियों की आय में भी लगभग 9 करोड़ रुपए जोड़ने का प्रस्ताव रखा है, जो कि मूल्यांकन वर्ष 2010-11 से 2015-16 के बीच का है। इन सातों कंपनियों के नाम- मैसर्स आर्टेक्स, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी, स्काईलाइट रियल्टी, ब्लूब्रीज ट्रेडिंग, लैंबोदर आर्ट्स, नॉर्थ भारत आईटी पार्क और रियल अर्थ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कम आय से संबंधी जानकारी का मामला वाड्रा के ख़िलाफ़ राजस्थान में भूमि सौदों में कथित चोरी से जुड़ा है जो बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम के तहत आता है। विभाग ने इस संबंध में दिसंबर 2021 में भी प्रवर्तन को अपने निष्कर्षों से अवगत कराया था, जिसमें ये 106 करोड़ की आय और उनकी सात कंपनियों की 9 करोड़ रुपए की कम आय के बारे में जानकारी थी।

इस संबंध में वाड्रा से संपर्क करने पर उन्होंने कहा, “इसकी वही वजह है जो पिछले कई सालों में रही…मेरा नाम सामने लाने का उनके लिए ये सही समय है। ये स्पष्ट तौर पर दुर्भावनापूर्ण बदला है। मेरी कानूनी टीम इस बारे में आप लोगों को स्पष्ट जवाब दे पाएगी।”

106 करोड़ रुपए की आय का लगभग आधा अमाउंट जो विभाग का दावा है कि वाड्रा ने छुपाया, कथित तौर पर सिर्फ दो साल में कमाया गया था। वाड्रा ने 2013-14 वर्ष में 20 करोड़ रुपए और 2019-20 में 28 करोड़ रुपए की जानकारी छिपाई। अब इस मामले में सूत्रों का कहना है कि वाड्रा और उनकी कंपनियों के पास आय की कथित तौर पर कम जानकारी देने पर आयकर विभाग की जाँच पड़ताल को चैलेंज करने का मौका होगा।

आईटी अधिनियम 1961 की धारा 270 ए के तहत, आयकर चोरी पर या आय की कम जानकारी देने के लिए देय कर पर 50 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा यदि गलत जानकारी देने के कारण कम आय की जानकारी का खुलासा होता है तो जुर्माना देय कर का 200 फीसद भी हो सकता है।