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‘आधी रात को निकाले हजारों प्रवासी’: बांग्लादेशी घुसपैठियों पर भारत की सख्त पुश-बैक नीति के खिलाफ Financial Times का विलाप

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार-chatgpt)

भारत में घुसपैठियों को अपना दामाद मानने वालों की कमी नहीं। विपक्ष तो यह काम कर ही रहा है, लेकिन कुछ मीडिया वाले भी पीछे नहीं। जो समाचार-पत्र घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए विलाप करता हो उसके राष्ट्रहित समाचार प्रकाशित करने पर भी शंका होती है। क्या घुसपैठियों पर विलाप करने के लिए उनके दामादों के आकाओं ने किसी रूप में इनाम दिया है? क्या दामाद घुसपैठियों का विलाप करने वाले समाचारपत्र को नहीं मालूम कि ये दामाद किस तरह भारत की अर्थव्यवस्था में दीमक का काम कर रहे हैं?      

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व सफलता मिली। पार्टी ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी की अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस (एआईटीसी या टीएमसी) को सत्ता से बेदखल करते हुए 200 सीटों का आँकड़ा पार किया। यह राज्य में ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव का प्रतीक था और इसने शासन में एक नए युग की शुरुआत की।

नई शुभेंदु सरकार ने भारत-बांग्लादेश की सीमा को सुरक्षित करना और अवैध माइग्रेशन के खिलाफ एक मजबूत नीति लागू करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य शुरू किए, जिन्हें पिछली सरकार ने नजरअंदाज कर दिया था।

दरअसल, टीएमसी ने राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों की एंट्री को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार के साथ लगातार लड़ती रही, यहाँ तक ​​कि उसके नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों को नुकसान पहुँचाते हुए इस तरह के घुसपैठियों को बढ़ावा देने का दावा भी किया। हालाँकि, वोट बैंक की राजनीति के लिए अपनाई गई इस खतरनाक रणनीति को शुभेंदु अधिकारी सरकार ने रोक दिया।

घुसपैठियों का बचाव करने में जुटा गुट

1 जुलाई 2026 को Financial Times ने ‘भारत ने रात के अंधेरे में हजारों प्रवासियों को निष्कासित किया’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया इसके लेखक एंड्रेस शिपानी थे। यह लेख एक संप्रभु राष्ट्र की निर्वाचित राज्य सरकार के फैसलों के विरोध में था, जिसने अपने मतदाताओं के व्यापक हित में पड़ोसी देश से अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने का प्रयास करते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 

लेख में पाठकों को उकसाने के लिए सनसनीखेज शीर्षक का भी इस्तेमाल किया गया। जिसमें आरोप लगाया गया कि भारत में कानून का उल्लंघन करके प्रवेश करने वालों के बजाय वैध नागरिकों को निष्कासित किया जा रहा है।

कथित सरकारी क्रूरता और अन्याय की एक सनसनीखेज कहानी गढ़ते हुए लेख में दावा किया गया, “बांग्लादेशी सीमा रक्षक लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करके अपने भारतीय समकक्षों को लोगों को सीमा पार धकेलने से रोकते हैं।”

इसने बांग्लादेशी अधिकारियों के हवाले से कहा कि भारतीय पक्ष अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अंधेरे का इस्तेमाल ढाल के रूप में करता है, जो मई में पश्चिम बंगाल में भगवा पार्टी के सत्ता में आने के बाद से और भी बढ़ गया है।

लेख में लांस कॉर्पोरल महमूद मसूद के हवाले से लिखा गया है कि उसने बताया, “वे अंधेरा होने का इंतजार करते हैं, फिर स्पॉटलाइट बंद कर देते हैं और सही मौके की तलाश करते हैं।” बांग्लादेश सीमा सुरक्षा के महानिदेशक मोहम्मद अशरफुज्जमान सिद्दीकी ने जोर देकर कहा, “वे भारतीय बाड़ के फाटक खोल देते हैं और लोगों को अँधेरे में धकेल देते हैं। वहाँ महिलाएँ होती हैं, बच्चे होते हैं और ये बेचारे लोग बीच में फँस जाते हैं।”

आर्टिकल में बताया गया है कि भारतीय और बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, राज्य ने हजारों लोगों को, जिनमें अधिकतर बंगाली मूल के मुस्लिम हैं, बांग्लादेश भेज दिया है। इसमें दावा किया गया है कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने ‘भारत और बांग्लादेश की सीमा में मौजूद एक पतली बंजर भूमि जीरो लाइन में फँसे दर्जनों लोगों’ के बारे में बताया।

इसमें कहीं भी बांग्लादेश की आलोचना नहीं की गई है कि वह अपने नागरिकों को अपने यहाँ लाना क्यों नहीं चाहता? बल्कि बड़ी चालाकी से भारत को ‘खलनायक’ के रूप में पेश करने की कोशिश करता है। लेखक कहता है, “निर्वासन अभियान ने दोनों देशों के बीच नाजुक संबंधों को और खराब कर दिया है, हिंदू राष्ट्रवाद के बारे में आशंकाओं को रेखांकित किया है और पश्चिम बंगाल और दूसरे सीमावर्ती राज्यों में लाखों मुसलमानों के लिए असुरक्षा की भावना को बढ़ा दिया है।”

बेशक Financial Times ने तुरंत ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ का सहारा लिया। ज्यादातर लिबरल गैंग इस मूलभूत सिद्धांत का ही सहारा लेते हैं मोदी सरकार पर हमला करने के लिए। लेकिन यह हिन्दू राष्ट्रवाद का नहीं, बल्कि घुसपैठियों को पीड़ित के रूप में पेश करने के दुष्प्रचार का एक हिस्सा है।

धार्मिक रंग देने की कोशिश

लेख में भारत-बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक संबंधों और पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की भाषा में समानता का हवाला देते हुए तर्क दिया कि सरकार को देश में अवैध बांग्लादेशियों को शरण देना चाहिए था। इसमें बांग्लादेश को बस शांत रहने की सलाह दी गई है. क्योंकि उसके लोग पड़ोस में बेलगाम भाग रहे हैं।
असम जैसे राज्यों में बांग्लादेशियों के अनियंत्रित और बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवाह को एक भावुक ‘माइग्रेशन का इतिहास’ के रूप में चित्रित किया गया है। इसका इतिहास या वास्तविकता में कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद लेख में पश्चिम बंगाल सरकार पर अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई गई।

आर्टिकल में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य में 30% मुस्लिम आबादी है, जिसका मतलब यह था कि इन कार्रवाइयों से उन पर असर पड़ने की संभावना है। यह बात नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी आंदोलन के दौरान फैलाई गई साजिश की याद दिलाती है, जिसमें कहा गया था कि इस कानून का इस्तेमाल दूसरी सबसे बड़ी बहुसंख्यक आबादी के खिलाफ हथियार के तौर पर किया जाएगा। हालाँकि इसके लागू होने के बाद ऐसी कोई बात सामने नहीं आई।

संविधान में भारतीय नागरिकों को उनके धर्म की परवाह किए बिना देश के किसी भी हिस्से में रहने और बसने की छूट है, लेकिन सरकार की विश्वसनीयता को कम करने और संदेह और विभाजन को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की बयानबाजी से सच्चाई को दबाने और हिंसा के लिए भड़काने का प्रयास किया गया।

Financial Times ने जोर देते हुए कहा, “आलोचकों का कहना है कि निर्वासन की यह मुहिम भाजपा की भारत को मुस्लिम अल्पसंख्यकों की कीमत पर एक हिंदू राष्ट्र बनाने की इच्छा को दर्शाती है।” इसके बाद उसने ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया उप प्रमुख मीनाक्षी गाँगुली के हवाले से कहा कि भारतीय अधिकारी ज्यादातर मुस्लिम परिवारों को बेरहमी से बांग्लादेश में धकेलने या उन्हें सीमा पर छोड़ रहे हैं। साथ ही ‘मुस्लिम के प्रति इस निंदनीय शत्रुता को समाप्त करने’ की अपील की।

अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले तत्वों से निपटने के लिए सरकार की रणनीति को फाइनेंशियल टाइम्स द्वारा ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की साजिश करार दिया गया। एक तरह से मीडिया संस्थान यह संकेत देता है कि भारत को चुपचाप देखते रहना चाहिए। जबकि भारत के नागरिक अच्छी तरह जानते हैं कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ डाल रहे हैं, बल्कि मुस्लिम सहित सही नागरिकों के अधिकारों का भी उल्लंघन कर रहे हैं।

बांग्लादेश न केवल अपने नागरिकों को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है, बल्कि अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ दमन का एक शर्मनाक इतिहास भी रखता है। लेकिन इस गुट की विकृत विचारधारा उन अत्याचारों को सिर्फ देखती है जो नहीं हो रहा है। ये बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर अत्याचार को नजरअंदाज कर देती है।

न्यायिक आदेशों का सम्मान करने के लिए भाजपा सरकारों पर हमले

शिपानी ने पश्चिम बंगाल सरकार के ‘पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद की कहा था, “उनके पदभार संभालने के बाद से लगभग 10000 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को निष्कासित किया जा चुका है, जबकि 1800 अन्य निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इस मंच ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के इस मुद्दे पर अडिग रुख की भी आलोचना की। मंच ने उनके उन बयानों का जिक्र किया, जिनमें उन्होंने भारत में डेमोग्राफी बदलाव ला सकने वाले घुसपैठियों से निपटने के लिए अपनी सरकार की नीतियों पर प्रकाश डाला था और इसलिए उन्हें उनके वतन वापस भेजने का इरादा जताया था।

गौरतलब है कि अवैध घुसपैठियों की भारी संख्या के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव की नाजुक स्थिति को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक ने माना था। 2025 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कहा कि असम एक ‘मूक और दुर्भावनापूर्ण जनसांख्यिकीय आक्रमण’ का सामना कर रहा है और यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के पास ‘भारतीय क्षेत्र से विदेशियों को निष्कासित करने का पूर्ण और असीमित अधिकार’ हैं। कोर्ट ने कहा, “राज्य के पास घोषित विदेशी नागरिक को निष्कासित करने की शक्ति है।”

असम में घुसपैठियों को शरण न देने में सीएम सरमा की अहम भूमिका रही है और उन्होंने घुसपैठियों के निर्वासन के लिए कठोर नीति अपनाई है। यह मुद्दा राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले जारी किए गए पार्टी के घोषणापत्र का अभिन्न अंग रहा है। इसमें ‘विदेशी’ घोषित किए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का वादा किया गया था। उन्होंने वन और कृषि भूमि सहित कई एकड़ सार्वजनिक संपत्तियों को भी घुसपैठियों के कब्जे से मुक्त कराया है।

दोहरी मानसिकता का खुला प्रदर्शन

अदालत के आदेशों का पालन करने वाली सरकार से फाइनेंशियल टाइम्स को निश्चित रूप से चिढ़ होगी, क्योंकि यह उसके एजेंडे के खिलाफ था। हाल ही में भारत में हो रहे घटनाक्रमों पर बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बयान से भी इसका पता चलता है। बांग्लादेशी अधिकारियों ने अपने नागरिकों को स्वीकार करने में कोताही की है, जबकि पहले से ही करीब ’10 लाख रोहिंग्या’ शरणार्थी बने हुए हैं।

स्पष्ट रूप से बांग्लादेश के पास संकट को कम करने के लिए अपने ही नागरिकों को अस्वीकार करने का अधिकार है, लेकिन भारत, जो विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, उसे खुद पर अतिरिक्त बोझ डालना होगा। इतना ही नहीं अपने संसाधनों के दुरुपयोग की अनुमति भी देनी होगी।

लेख में बताया गया है कि विदेश मामलों के राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने चेतावनी दी है कि अगर भारत अपना रुख नहीं बदलता है तो संबंध ‘तनावपूर्ण’ बने रहेंगे, जबकि उनके देश ने घोषणा की है कि वह एक भी रोहिंग्या का स्वागत नहीं करेगा।

दूसरी ओर, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत में अवैध प्रवासियों के साथ कानूनी रूप से व्यवहार किया जाएगा। भारत ने राष्ट्रीयता सत्यापन के लिए बांग्लादेशी अधिकारियों को 2680 से अधिक मामले भेजे हैं, लेकिन ये अभी भी लंबित हैं। कई मामलों में तो 5 साल की दूरी हो गई है।

एफटी ने एक भारतीय अधिकारी के हवाले से कहा है कि देश निकाला एक तरह से तत्काल निष्कासन है, लेकिन इसके लिए उस देश का सहयोग आवश्यक है, जहाँ हम निर्वासित कर रहे हैं। दुर्भाग्य से, बांग्लादेश में ऐसा सहयोग कभी नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि भारत के पास अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

लेख को भावनात्मक मूल्य बनाने के लिए एक ऐसे घुसपैठिए की कहानी भी बताई, जिसे देश में एक दशक से अधिक समय तक रहने के बाद आत्मसमर्पण करना पड़ा।

Financial Times के इस आर्टिकल में सच्चाई की कोई परवाह नहीं की गई और इसका मकसद एक दुर्भावनापूर्ण एजेंडा को बढ़ावा देना था। बांग्लादेश ने भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने में अनिच्छा दिखाई है। ऐसे में भारतीय अधिकारियों के पास क्या विकल्प बचते हैं? एफटी हमेशा की तरह निष्क्रियता का समर्थन करेगा।

कोई भी समझदार सरकार अपने देश में किसी को भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकती और न ही ऐसा करना चाहिए। खुली सीमाएँ किसी भी राष्ट्र के लिए अव्यावहारिक हैं, जिनमें भारत और बांग्लादेश भी शामिल हैं। यही कारण है कि मिस्र और जॉर्डन जैसे राष्ट्र विस्थापित फिलिस्तीनियों को स्वीकार करने से इनकार करते हैं, जबकि वे उनका भरपूर समर्थन करते हैं।

यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई विकसित पश्चिमी शक्तियाँ भी इस तरह के अनियंत्रित आप्रवासन का विरोध करती हैं, क्योंकि वे अपने हितों को प्राथमिकता देती हैं। हालाँकि फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, भारत को इस संप्रभु अधिकार का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उसकी स्थिरता और सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।

भारत का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप पड़ोसी इस्लामी देशों में हिंदू समुदाय को अपने धर्म के कारण उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बड़े जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के परिणाम कश्मीर से लेकर मुर्शिदाबाद तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

7 पीढ़ियाँ भुगतेंगी अंजाम… अब बंगाल में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों की खैर नहीं, दंगाइयों और गुंडों के लिए शुभेंदु सरकार का नया कानून

योगी आदित्यनाथ या हिमंता सरमा से नहीं तो शुभेंदु अधिकारी से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सीखना चाहिए। दिल्ली में आए दिन हो रहे क़त्ल और अधिक्रमण पर श्रीमती रेखा गुप्ता को इन मुख्यमंत्रियों की तरह काम करना चाहिए। क्या हुआ CAG रिपोर्ट्स, शराब घोटाला, मनी लॉन्डरिंग आदि का? क्या इन सबको चुनाव आने तक ठंठे बस्ते में डाल दिया गया है? मुस्लिम तुष्टिकरण को छोड़ काम करना होगा। अब तक जो अधिक्रमण हटाए जा रहे हैं सभी हिन्दू क्षेत्रों में लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों पर आंखें मूंदे हुए हैं। बंगाल मुख्यमंत्री शुभेंदु ने मुख्यमंत्री बनते ही विरोधियों के साथ-साथ दंगाइयों में और बांग्लादेश तक में खलबली मची हुई है। 

ममता की पार्टी TMC  ऐसे ही नहीं बिखरी, अधिकारी की कार्यशैली से बिखरी है। अगर अधिकारी ने बिना भेदभाव के काम किया ममता से अलग हुए कई विधायक और सांसद भी लपेटे में आएंगे। क्योकि ममता राज में जितना भी उपद्रव हुआ इन लोगों का भी प्रत्यक्ष नहीं तो अप्रत्यक्ष समर्थन था। यदि नहीं, फिर क्यों नहीं ममता का विरोध कर पार्टी छोड़ी? तब ये ही सब बड़े आनंद के साथ मलाई खा रहे था।       

पश्चिम बंगाल में अपराधियों और दंगाइयों पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी एक बेहद सख्त नया कानून ला रहे हैं। सोमवार(29 जून) को विधानसभा में पेश होने जा रहा यह बिल यूपी के ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी ज्यादा घातक माना जा रहा है।

इस नए कानून के तहत सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले दंगाइयों से भारी वसूली की जाएगी। इसके कड़े प्रावधानों को देखकर अभी से विपक्ष और अपराधियों के बीच खलबली मच गई है।

54 साल पुराना ढर्रा होगा खत्म

बंगाल सरकार साल 1972 के पुराने कानून ‘द वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट’ में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसकी जगह अब विधानसभा में ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ पेश किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि पुराना कानून आज के आधुनिक और संगठित अपराधों से निपटने के लिए काफी नहीं था। शुभेंदु अधिकारी सरकार ने साफ कर दिया है कि अब बंगाल में सिंडिकेट का नहीं बल्कि सिर्फ कानून का राज चलेगा।

दंगाइयों का होगा आर्थिक खात्मा

इस नए कानून का सबसे बड़ा डर इसका रिकवरी मैकेनिज्म यानी नुकसान की वसूली का नियम है। अगर किसी दंगे या बवाल में सरकारी या किसी की निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचता है, तो उसकी पूरी भरपाई अपराधी की संपत्ति बेचकर की जाएगी।

कानूनी जानकारों के मुताबिक यह कानून इतना कड़ा है कि नुकसान की भरपाई करते-करते दंगाइयों की आने वाली 7 पीढ़ियाँ तक कंगाल हो जाएँगी। यह अपराधियों को पूरी तरह आर्थिक रूप से खत्म करने वाला कदम है।

UP के मॉडल से भी दो कदम आगे

यह नया बिल उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल से भी ज्यादा सख्त बताया जा रहा है। इसमें पुलिस को बिना मुकदमे के हिरासत में लेने और अपराधियों को जिले से बाहर निकालने की असीमित शक्तियाँ दी गई हैं। इतना ही नहीं, दंगाइयों और गुंडों को शरण देने वालों के खिलाफ भी इसमें सख्त नियम हैं। अब किसी भी अपराधी को छिपाने या पनाह देने पर सीधे दो साल की जेल की सजा काटनी होगी।

बंगाल : पुलिस निकाल रही गुंडों की परेड; किसी को उठाया कच्छे में, किसी को अय्याशी करते हुए दबोचा: 1 हफ्ते में 70+ TMC नेता-कार्यकर्ता गिरफ्तार

                                   TMC नेताओं पर एक्शन जारी ( फोटो साभार-chatgpt)
पश्चिम बंगाल में BJP सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ-साथ आपराधिक नेटवर्क पर लगाम कसी जा रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बांग्लादेशियों को बाहर निकाल रही है, वहीं ‘तोलाबाजी’ यानी सिंडिकेट, चुनाव बाद हिंसा और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ अभियान चला रही है। बीते एक हफ्ते में 70 से ज्यादा टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

कोई बनियान-कच्छे में तो कोई लुंगी पहने हुआ गिरफ्तार

अपराधियों को हर हाल में गिरफ्तार करने के आदेश हैं। यही वजह है कि कई ऐसी तस्वीरें सामने आई जब इन लोगों को अचानक घरों, अड्डों और शराब के ठेकों से उठाया गया और सड़कों पर घुमाया गया। ये वे लोग हैं, जिन्होंने बंगाल में अराजकता फैला दी थी और जनता दहशत में जीने के लिए मजबूर थी।

बंगाल पुलिस ने हावड़ा के गैंगस्टर आकाश सिंह को कच्छा और बनियान में सड़कों पर घुमाया था। वह हावड़ा के डॉन कहलाता था। आकाश सिंह पर 2021 में पुलिसकर्मियों पर गोली चलाने और 20 से ज्यादा बम फेंकने का आरोप है। एक कड़ा संदेश देने के लिए उसे हावड़ा की सड़कों पर सिर्फ अंडरवियर में घुमाया गया।

इसके बाद 25 मई 2026 को टीएमसी के गुंडे और कुख्यात सनी मोल्ला को पुलिस ने गिरफ्तार कर सड़कों पर बनियान-पैजामा में घुमाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सनी मोल्ला TMC से जुड़ा एक संविदा आधारित होम गार्ड था और लंबे समय से संकराइल और आसपास के इलाकों में रंगदारी और दबंगई का नेटवर्क चला रहा था। वह व्यापारियों, छोटे दुकानदारों से रंगदारी वसूलता था। विरोध करने पर धमकी देता, मारपीट करता और कारोबार बंद कराने की चेतावनी देता था। इलाके में लोग उसे ‘छोटा डॉन’ कहकर बुलाते हैं।

टीएमसी से जुड़ा और ‘बड़े भाई’ कहलाने वाले शमीम अहमद को भी पश्चिम बंगाल पुलिस ने बनियान- ऑफ पेंट में सड़कों पर घुमाया। दरअसल ये वह व्यक्ति है, जिस पर शिबपुर में इस्लामी हिंसा भड़काने, सड़कों पर बमबारी करने और BJP समर्थकों पर गोली चलाने के आरोप है।

जलपाईगुड़ी जिले में टीएमसी नेता पंचानन रॉय को एक कार में शराब पीते हुए पकड़ा गया था। वह स्थानीय पंचायत समिति के अध्यक्ष हैं और शराब पार्टी करते हुए गिरफ्तार किया गया। टीएमसी पार्षद मोनी गाजी को भी पुलिस रेड के दौरान शराब की बोतलों और आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया था। उस पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप है।

 ऐसे अपराधी शुभेंदु शासन के आते ही छिपने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि इनलोगों को बनियान कच्छा शॉर्ट पैंट में ही पुलिस उठा कर ले गई। इनलोगों को सड़कों पर घुमा भी रही है, ताकि लोगों के मन में उनका भय खत्म हो सके, जो पिछले 15 सालों से व्याप्त है। सरकार ‘नो नोटिस एक्शन’ वाली छवि बना रही है। अपराधियों को देर रात छापेमारी कर भी गिरफ्तार किया जा रहा है। कई जिलों में लगातार तलाशी के बाद कई लोगों को दबोचा गया, ताकि लोगों को संदेश मिले कि ‘भागने पर भी बचना मुश्किल’ है।

बीते 18 मई से करीब एक हफ्ते में राज्य में भ्रष्टाचार वसूली और चुनाव बाद हिंसा को लेकर टीएमसी के 70 से ज्यादा नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पूर्व मंत्री सुजीत बसु भी शामिल हैं। वहीं पूर्व मंत्री के करीबी बंगाल के बिधाननगर नगर निगम के 34 नंबर वार्ड के टीएमसी पार्षद और बोरो चेयरमैन रंजन पोद्दार को बिधाननगर उत्तर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ तोलाबाजी यानी जबरन वसूली करने और लोगों को डराने-धमकाने का आरोप है।

बीते 23 मई 2026 को एक दिन में राज्यभर में 17 टीएमसी नेताओं को गिरफ्तार किया गया। इनमें कोलकाता और बिधाननगर के कई पार्षद शामिल हैं। मुर्शिदाबाद के बड़ंचा में दबंग तृणमूल नेता अबु बक्कर को हत्या के प्रयास और हथियार से हमला करने के आरोप में पकड़ा गया।

कोलकाता नगर निगम के पार्षद सुदीप पोल्ले और बिधाननगर के पार्षद बरुआ को तोलाबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। हावड़ा से 2021 विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोपित उपग्राम प्रधान गुरुपद माझी और उसके भाई राजू माझी को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा हुगली, नदिया, मुर्शिदाबाद से लेकर कूचबिहार तक के टीएमसी गुंडों को पुलिस ने पकड़ा।

उत्तर 24 परगना जिले में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक पार्षद को घर के अंदर सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। बनगांव नगर पालिका के वार्ड नंबर 22 से TMC पार्षद सुकुमार राय को पुलिस कॉलर पकड़कर थाने ले गई।

पश्चिम बर्धमान के पांडवेश्वर में शेख कमरुद्दीन को चुनावी आतंक, भ्रष्टाचार और वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वहीं कूच बिहार से भवरंजन बर्मन को बीजेपी कार्यकर्ता को पीटने और पैसे माँगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। बीजेपी नेता पप्पू साना पर हमले और शुभेंदु अधिकारी के पीएम रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद पुलिस ने कई इलाकों में लगातार छापेमारी की है और कई लोगों को हिरासत में लिया।

टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के जुल्मों से त्रस्त जनता की प्रतिक्रिया भी इस दौरान सामने आई। जब कोलकाता के युवा टीएमसी अध्यक्ष तपन बिस्वास और उसके साथियों को पुलिस गिरफ्तार कर ले जा रही थी तो उसे लोगों ने थप्पड़ मारे। कुछ ऐसा ही हाल हावड़ा से गिरफ्तार श्यामला मित्रा का हुआ। उसे भी लोगों ने पीटा।

दक्षिण 24 परगना से जब TMC नेता अरित्रा बोस को गिरफ्तार किए जाने के बाद महिलाएँ उसे पीटने के लिए चप्पल- झाड़ू लेकर दौड़ी। जब पुलिस उसे वैन में बैठाकर ले जा रही थी, तब झाड़ू, चप्पल और पानी की बोतलें पुलिस वैन पर फेंकने लगी। संदेशखाली में ईडी टीम पर हमले को लेकर गिरफ्तार टीएमसी नेता शाहजहाँ की मदद करने वाली दो महिला नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया। इन पर शाहजहाँ को बचाने के लिए भीड़ जमा कर हिंसा भड़काने का आरोप है।

घुसपैठियों को बाहर निकालने का अभियान

अवैध घुसपैठ और बॉर्डर नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज हुई है। बंगाल सरकार ने ‘होल्डिंग सेंटर’ शुरू किए हैं और पुलिस-आरपीएफ-बीएसएफ के समन्वय से संदिग्ध घुसपैठियों को बाहर निकालने का अभियान चलाया जा रहा है।

हाल ही में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे 100 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों को मंगलवार सुबह (26 मई 2026) को बांग्लादेश लौटने के लिए उत्तरी 24 परगना के हाकिमपुर चेक पोस्ट पर जमा किया गया।

हाल ही में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि बगैर दस्तावेज वाले बांग्लादेशियों की पहचान कर उसे पुलिस के हवाले करें, ताकि जनता से इनलोगों को अलग किया जा सके और देश से निकाला जा सके।

बीजेपी सरकार का पूरा अभियान ये दिखाता है कि अपराधियों और घुसपैठियों को अब ‘पहले जैसा संरक्षण’ नहीं दिया जाएगा। अपराधियों का जेल भेजा जाएगा और घुसपैठियों को ‘देश निकाला’ मिलेगा। चाहे ये लोग कहीं भी छिप जाएँ, पुलिस उन्हें ढूंढ निकालेगी और हर हाल में सलाखों के पीछे भेजेगी। इसलिए अपराधी कहीं जंगल में छिपे मिल रहे हैं तो कहीं घरों में छिप कर शराब पीते।

बंगाल : अब ‘नो कोर्ट, सीधा डिपोर्ट’: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को BSF को सौंपने का दिया आदेश, बोले- अदालत ना ले जाएँ

       शुभेंदु अधिकारी और अवैध बांग्लादेशी प्रवासी, BSF को सौंपने का आदेश (फोटो साभार : NDTV & Jagran)
बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने पर बीजेपी सरकार ने घुसपैठ पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एलान किया है कि राज्य में पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अब कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपकर वापस भेजा जाएगा। ‘पता लगाओ, हटाओ और देश-निकाला दो’ अभियान के तहत यह नया नियम 20 मई से लागू हो चुका है।

जिन बांग्लादेशियों को अपनी कुर्सी की खातिर ममता बनर्जी दामाद बनाकर पाल रही थी, अब दामादों को जिस तरह देश-निकाला किया जा रहा है, हर बीजेपी राज्य को शुभेंदु के रास्ते पर चलना होगा। ये अवैध घुसपैठियों की वजह से भारतीयों को मिलने वाली सुविधाएं बाधित हो रही है। जब तक देश से घुसपैठियों- पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या- को बाहर नहीं किया जाएगा देश में असुरक्षा का डर हमेशा बना रहेगा। इन घुसपैठियों का समर्थन करने वाली पार्टियों से पूछना चाहिए कि जिन रोहिंग्यों को जब कोई मुस्लिम मुल्क रखने को तैयार नहीं फिर क्यों भारत में रखने के लिए हिन्दू-मुसलमान कर माहौल ख़राब कर रहे हो? क्या ये घुसपैठिये तुम्हारे दामाद हैं?         

अब कोर्ट के चक्कर नहीं, सीधे बॉर्डर पर ‘नो एंट्री’

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हावड़ा में साफ कहा कि पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं। हावड़ा स्टेशन या राज्य में कहीं भी कोई अवैध बांग्लादेशी पकड़ा जाता है, तो उसे अदालत ले जाने की जरूरत नहीं है। पुलिस पहले उसे अच्छे से खाना खिलाएगी और फिर सीधे उत्तर 24 परगना के पेट्रापोल या बशीरहाट बॉर्डर पर BSF के हवाले कर देगी, जहाँ से उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।

किसे मिलेगी राहत और कौन होगा बाहर?

इस नए नियम से उन लोगों को अलग रखा गया है जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में आते हैं। बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थी अगर प्रताड़ना की वजह से भारत आए हैं, तो वे CAA के तहत नागरिकता का दावा कर सकते हैं। लेकिन जो इस दायरे में नहीं आते और अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें तुरंत डिपोर्ट किया जाएगा। हर हफ्ते ऐसे लोगों की रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक (DGP) के जरिए मुख्यमंत्री दफ्तर भेजी जाएगी।

2025 के नए कानून से मिला सरकार को पावर

अब तक का नियम था कि बिना कागजात मिलने वाले विदेशी नागरिक को ‘विदेशी अधिनियम 1946’ के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाता था। यह अदालती प्रक्रिया सालों चलती थी। लेकिन अब सरकार संसद से अप्रैल 2025 में पास हुए ‘प्रवासन और विदेशियों अधिनियम, 2025’ के तहत कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने 14 मई को ही इस संबंध में आदेश जारी किया था, जिसका बंगाल सरकार पालन कर रही है।

बंगाल में योगी मॉडल लागू करेगी BJP सरकार, उपद्रवियों से वसूला जाएगा नुकसान: डायमंड हार्बर से बोले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी


पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार (16 मई 2026) को डायमंड हार्बर क्षेत्र में एक अहम प्रशासनिक बैठक कर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

यह इलाका लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए कि अब राज्य में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और हिंसा या तोड़फोड़ की कीमत सीधे आरोपियों को चुकानी पड़ेगी।

आसनसोल में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए सुवेंदु ने कहा, “आसनसोल में जो अप्रिय घटना हुई थी, उस पर हमारी सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने अब तक इस मामले में संलिप्त 15 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है। तोड़-फोड़ और हिंसा के लिए जिम्मेदार इन सभी आरोपियों को पुलिस हिरासत, रिमांड और कड़ी पूछताछ का सामना करना पड़ेगा।”

उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी स्थिति में अराजकता फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पुलिस को पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर भरपाई की नीति, सीएम ने कहा- एजेंसियों को दी जाएगी खुली छूट

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नई नीति लागू करने का संकेत देते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से पूरी क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। उन्होंने कहा, “किसी को भी बंगाल में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “आसनसोल घटना या भविष्य में होने वाली किसी भी ऐसी तोड़फोड़ के नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई सीधे आरोपियों के निजी फंड और संपत्तियों से कराई जाएगी। यह कदम राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए बेहद जरूरी है।”

अंत में सुवेंदु कहा, “पूर्ववर्ती व्यवस्था के दौरान CID और अन्य राज्य स्तरीय जाँच एजेंसियों का कानून-व्यवस्था सुधारने में पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया था। हमारी सरकार अब इन पेशेवर एजेंसियों को खुली छूट देगी ताकि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर सकें।”

वाह शुभेंदु अधिकारी वाह ! दिल जीत लिया

कांग्रेस के हटते ही धीरे धीरे नर्क में बदले जा रहे बंगाल में 50 बरस बाद लागू कर दिया योगी मॉडल! सोमवार से सभी स्कूलों में वन्देमातरम अनिवार्य। धर्मस्थलों से हटेंगे लाउडस्पीकर। गौ हत्या और गौ कटान पर पूरी तरह प्रतिबंध। गरीबों और मजदूरों के लिए 5 रूपए में माछ भात । सीमावर्ती तमाम जिलों में बॉर्डर पर फैंसिंग के लिए 6 महीनों के भीतर लैंड ट्रान्सफर। मदरसों की गतिविधियों की पड़ताल, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर सख्त एक्शन। गुंडा माफियाओं के खिलाफ ऑपरेशन लंगड़ा। घुसपैठियों को चुनचुनकर निकालने की तैयारी।

80 साल बाद बंगाल में खुशियों की बहार। छह दिनों में ही शुभेंदु के ताबड़तोड़ फैसलों से ममता बनर्जी इतनी बौखलाई कि वकीलों की ड्रेस और काला कोट पहनकर हाईकोर्ट पहुंच गई। छह ही दिनों में सरकार पर आरोपों की बौछार कर दी। अरी दीदी सब्र करो थोड़ा धीरज धरो। अभी शुभेंदु के पास 5 साल ही नहीं हैं, लंबा भविष्य भी है। बंगाल की जनता ममता से इसकदर ऊब चुकी है कि उनकी सूरत नहीं देखनी चाहते। तभी तो ममता जैसे ही कोर्ट से बाहर निकलीं, लोगों ने चोर चोर के नारे लगाने शुरू कर दिए। याद कीजिए ऐसे ही नारे अभी हाल ही में महुआ मोइत्रा के विरुद्ध भी लगे जब वे प्लेन में कोलकाता से दिल्ली पहुंची। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बंगाल बार से ममता के लाइसेंस की बाबत रिकॉर्ड तलब किया है।
तृणमूल को अभी यह झेलना होगा, ममता समझ लें। थोड़ा रुकिए ममता दीदी, आपके भतीजे अभिषेक को अभी काफी भुगतना है। अपने भ्रष्टाचार, कटमनी, तोलाबाजी और धमकियों के लिए अभिषेक को अभी जेलें भी काटनी हैं। यही नहीं घुसपैठियों की बदौलत बंगाल की डेमोग्राफी बदलने वाली ममता को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय जांच एजेंसियों को बंधक बनाने लेने के लिए काफी कुछ झेलना है। अभिषेक को मुख्यमंत्री पद देकर दिल्ली की राजनीति करते हुए प्रधानमंत्री बनने का स्वप्न तो चकनाचूर हुआ। हां सब ठीक चला तो वे राज्यसभा के रास्ते दिल्ली पहुंचकर दिल्ली में इंडी का नेतृत्व संभाल सकती हैं। बशर्ते कि ममता से मुंह फेर चुके राहुल गांधी अपना सपना वापस ले लें।
तो ममता बनर्जी, आपका खेल खत्म हो चुका है। वामपंथियों ने 35 साल और अपने 15 साल बड़े जुल्म ढहाए। इस बॉर्डर स्टेट को भारत से अलग करने का षड्यंत्र किया, राज्यपाल को कुछ नहीं समझा। आपकी तमन्ना थी कि केन्द्र सरकार बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा दे ताकि आप सहानुभूति का वोट हासिल कर लें। लेकिन दीदी आप शाह मोदी को अब तक गलत पहचानती रही। आ जाएगा, जल्द समझ आ जाएगा कि देश के सिस्टम के ख़िलाफ़ जाना भी देशद्रोह के समान है। बंगाल के साथ साथ पूरे देश की जनता समझ गई है कि आपके समर्थन में बांग्लादेश और पाकिस्तान में प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं? समझ जाओ दीदी वक्त बदल गया है।

बंगाल में बीजेपी सरकार बनने से बांग्लादेश क्यों परेशान? क्यों बाड़बंदी से डरा बांग्लादेश?

बंगाल में BJP सरकार बनने के बाद बौखलाया बांग्लादेश, डर के मारे दे रहा भड़काऊ बयान (प्रतीकात्मक फोटो साभार: AI-ChatGPT)

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनते ही पड़ोसी देश बांग्लादेश में बौखलाहट साफ नजर आ रही है। कहीं बंगाल की नई सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, तो कहीं कट्टरपंथी मौलाना राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को खुलेआम जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। ना केवल कट्टरपंथी मौलाना बल्कि बांग्लादेश की सरकार में अहम पदों पर बैठे लोग भी इससे बौखलाहट में हैं।

इसके पीछे वजह केवल सरकार बदलना और एक पार्टी की जगह दूसरी पार्टी का आना नहीं है बल्कि उस पूरी वैचारिकी का बदलाव है जो इस सत्ता परिवर्तन से बंगाल में होने जा रहा है। भारत की खुली सीमा बांग्लादेश घुसपैठियों के लिए एक प्रवेश द्वार की तरह काम कर रही थी। ममता बनर्जी ने इसे बंद करने का विरोध कर रहीं थी लेकिन अब हालात बदल गए हैं। शुभेंदु अधिकारी ने बाड़बंदी को प्राथमिकता दी है और यही नकेल कट्टरपंथियों की बेचैनी को बढ़ाती जा रही है।

शुभेंदु सरकार का BSF को बाड़बंदी को दी जमीन, ममता सरकार ने अटकाकर रखी

बंगाल में सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने पहले ही कैबिनेट फैसलों में भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी। नई सरकार ने फैसला लिया कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर जिन इलाकों में अब तक बाड़बंदी नहीं हो सकी थी, वहाँ के लिए जरूरी जमीन 45 दिनों के भीतर BSF को सौंप दी जाएगी।

शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि उनकी सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी। राज्य सरकार के इस फैसले से सीमा पर बाड़बंदी पूरी होने के बाद डेमोग्राफी बदलने की साजिश के तहत घुसपैठ, मवेशियों की तस्करी और गैरकानूनी नेटवर्क पर रोक लगेगी।

तब जमीन ममता बनर्जी की TMC सरकार के कार्यकाल में अटका हुआ था। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट तक पहुँचा था, तब हाई कोर्ट ने तत्कालीन ममता सरकार को फटकारा BSF को तय जमीन न देने के लिए फटकारा था और सरकार के अधिकारी पर ₹25 हजार का जुर्माना भी लगाया था।

बाड़बंदी के फैसले से बांग्लादेश में बेचैनी, तारिक रहमान के एडवाइजर का बयान

शुभेंदु सरकार के इस फैसले से बांग्लादेश में बेचैनी बढ़ गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहकार (एडवाइजर) हुमायूं कबीर ने इस फैसले पर कहा कि बांग्लादेश को ‘काँटेदार तार’ से डराया नहीं जा सकता। इसके साथ ही बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) को अलर्ट पर रखे जाने की भी खबर सामने आई है।

यानी जिस फैसले को पश्चिम बंगाल की नई BJP सरकार सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित से जोड़कर देख रही है, उसी फैसले ने बांग्लादेश में राजनीतिक और कट्टरपंथी हलकों की बेचैनी बढ़ा दी है।

बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन और कट्टरपंथियों के भड़काऊ बयान

बंगाल में BJP सरकार बनने के बाद बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथियों के बीच भी खलबली मची है। ये कट्टरपंथी सड़कों पर उतरकर बंगाल की नई सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं कई मौलाना भी खुलकर बंगाल की BJP सरकार और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते दिखाई दे रहे हैं।

एक वायरल वीडियो में बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन ‘इंसाफ कायमकारी छात्र श्रमिक जनता’ से जुड़े मौलाना ने हिंदू घृणा में कहा, “अगर भारत के 40 करोड़ मुस्लिम गुस्से में आ गए तो हिंदू नहीं बचेंगे।” उसने पाकिस्तान की मदद से भारत पर हमला करने और ‘तीन घंटे में कब्जा’ करने जैसे बयान भी दिए। वीडियो में उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का नाम लेकर धमकी दी।

शुभेंदु अधिकारी को बॉर्डर पर गाड़ने की धमकी

एक और वीडियो सामने आया, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को सीमा पर दफन करने की धमकी जारी कर रहा है। यह वीडियो ‘द इंकलाब’ नाम से फेसबुक पेज से प्रसारित किया जा रहा है। हालाँकि, पुलिस इस वीडियो की पुष्टि के लिए जाँच कर रही है।

उधर, बांग्लादेश का मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी कहता है कि अगर बंगाल में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है, तो बांग्लादेश में भी हिंदुओं को सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। वह बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार को भारत के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने की चेतावनी देने के लिए भड़का रहा है।

बंगाल में ‘पोरिबर्तन’ की जमीनी हकीकत, सीमापार के गोरख धंधे होंगे अब बंद

पश्चिम बंगाल में BJP की बढ़ती राजनीतिक ताकत और चुनावी सफलता के बाद बांग्लादेश की बौखलाहट साफ दिख रही है। बंगाल की करीब 2200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है और इसका एक हिस्सा खुला हुआ था। वर्षों से यह इलाका अवैध घुसपैठ, पशु तस्करी, नकली नोटों के नेटवर्क तथा कट्टरपंथी गतिविधियों का हब बना हुआ था।

पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति के कारण सीमा सुरक्षा को लेकर ममता बनर्जी की सरकार में कठोर कदम नहीं उठाए गए। वोट बैंक की राजनीति के चलते अवैध घुसपैठियों को संरक्षण मिलता रहा और धीरे-धीरे कई सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकी तक प्रभावित हुई। यहाँ तक बातें सामने आईं कि बांग्लादेश की और से किए अवैध कामों को तुष्टिकरण की राजनीति में डूबी सरकार की ‘ममता’ मिली हुई थी।

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बंगाल : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बॉर्डर पर दफन करने की धमकी, बांग्लादेश का मौलाना बोला- मु

अब जैसे-जैसे बीजेपी का प्रभाव बढ़ रहा है तो वैसे-वैसे उन तत्वों में घबराहट दिख रही है जो सीमा पार से चलने वाले अवैध कारोबार और राजनीतिक संरक्षण पर निर्भर थे। बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों और वहाँ के मजहबी नेताओं और सरकारी अधिकारियों की प्रतिक्रियाओं को इसे से जोड़कर देखे जाने की जरूरत है। उन्हें डर है कि यदि बंगाल में सख्त प्रशासनिक व्यवस्था लागू होती है तो अब तक जिन अवैध गतिविधियों को संरक्षण मिला हुआ था उन पर अंकुश लग सकता है।

बंगाल : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बॉर्डर पर दफन करने की धमकी, बांग्लादेश का मौलाना बोला- मुस्लिम हुए असुरक्षित तो हिंदुओं को नहीं छोड़ेंगे; बंगाल ही नहीं पूरे भारत से बांग्लादेशियों का सफाया होना चाहिए

                        बांग्लादेश के मौलाना ने हिंदुओं और शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी (फोटो साभार: NBT)
जब से पश्चिमी बंगाल में बीजेपी सरकार बनी है, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश से बांग्लादेशियों को बाहर करने की बात कही है मुस्लिम कट्टरपंथियों की जुबान बहुत ज्यादा खुलने लगी है। क्या इन कट्टरपंथियों को भी सबक सिखाने का अध्याय बंगाल से ही लिखा जाएगा? जिस तरह चुनाव में हिन्दुओं ने एकजुटता दिखाई है वही इन कट्टरपंथियों और इनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए दिखानी होगी। बहुत हो गया हिन्दू मुसलमान। ये वही कट्टरपंथी हैं जिन्होंने हिन्दू -मुसलमानों के बीच नफरत के बीज बोये हैं। दूसरे, बांग्लादेशियों को बाहर करने के बंगाल सरकार के फैसले से कट्टरपंथियों की बौखलाहट जाहिर कर रही है कि बंगाल में कितने ज्यादा बांग्लादेशियों को पिछली सरकारों ने दामाद बनाकर रखा हुआ था। 

हुमायूँ कबीर साथ-साथ बांग्लादेशी मौलाना भी बंगाल मुख्यमंत्री को धमकी देने मैदान में आ गए हैं यानि ये इस बात को साबित करता है कि यदि बंगाल से ही बांग्लादेशियों को वापस भेजना शुरू होते ही बांग्लादेश पाकिस्तान की तरह भुखमरी के रस्ते पर आ जाएगा। बंगाल से बाहर भी जितने बांग्लादेशी घुसे हुए है सभी को बाहर करना होगा। भारत सरकार को इन धमकियों को गंभीरता से लेते हुए बांग्लादेश सरकार से सख्ती के साथ जवाब तलब करना होगा। और बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक मदद बंद करनी होगी। जिस तरह पाकिस्तान को सबक सिखाया जा रहा है वही बांग्लादेश के साथ होना चाहिए। 

जब पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा हिन्दू महिलाओं का उजाड़ने पर Operation Sindoor हो सकता है फिर बांग्लादेश में सैकड़ों हिन्दुओं के मारे जाने पर भारत सरकार खामोश क्यों? बांग्लादेश को कब सबक सिखाया जाएगा?   

 

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद से पड़ोसी देश बांग्लादेश में खलबली मची हुई है। आए दिन बांग्लादेशी मौलाना भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। ताजा बयान बांग्लादेश के कट्टरपंथी मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी का है, जिसने कहा कि बंगाल में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है, तो बांग्लादेश में भी हिंदुओं को सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। उधर, शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी देने का भी एक वीडियो सामने आया है।

मौलाना अब्बासी कहता है, “भारत में हिंदुओं के लिए यहूदी मॉडल की तरह एक हिंदू-केंद्रित व्यवस्था बनाना नामुमकिन हो जाएगा। बीजेपी, जिसने अब बंगाल में सत्ता संभाल ली है, पहले से ही इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। गोमांस बेचने वाली दुकानों को तोड़ा जा रहा है और मुस्लिमों पर जुल्म और अत्याचार किए जा रहे हैं। इसका हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए।”

अब्बासी ने बंगाल में मुस्लिमों पर कथित शोषण का बदला बांग्लादेश में हिंदुओं से लेने की बात कही। उसने कहा, “इस स्थिति में बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार का भी एक बहुत ही अहम फर्ज है। भारत को एक सख्त चेतावनी दी जानी चाहिए कि हम उनके साथ अपने व्यापारिक संबंध तोड़ देंगे। इसके अलावा, यह भी साफ कर दिया जाना चाहिए कि अगर बंगाल में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है, तो बांग्लादेश में भी हिंदुओं को सुरक्षित रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

ये वही मौलाना अब्बासी है, जो भारत विरोधी, भड़काऊ भाषणों और नफरती बयानों के लिए जाना जाता है। अब्बासी ने पहले भी भारत-विरोधी बयान दिया था कि बांग्लादेश के मुस्लिम दिल्ली में इस्लाम का झंडा फहराएँगे और मदरसों को हथियारों से लैस छावनी में बदल देंगे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी कर चुका है।

अवलोकन करें:-

बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी
बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी
 

शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी

ऐसी ही एक और भारत-विरोधी बयान सामने आया है, जिसमें बांग्लादेशी मुस्लिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी देता है। द इंकलाब नाम से फेसबुक पेज से प्रसारित वीडियो में बांग्लादेशी का एक मुस्लिम व्यक्ति शुभेंदु अधिकारी को सीमा पर ही दफनाने और उन पर हमला करने की धमकी दे रहा है। हालाँकि, इस वीडियो की पुष्टि नहीं हो पाई है, पुलिस इसकी जाँच कर रही है।

बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी चैनल पर कहा- ‘मुस्लिमों को हाथ लगाया तो पीटूँगा’

                                                                                                         साभार - एक्स/@ItzBDHindus
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूँ कबीर ने राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पीटने की धमकी दी है। बांग्लादेशी चैनल ‘फेस द पीपल’ पर दिए इंटरव्यू में कबीर ने कहा, “अगर शुभेंदु किसी मुस्लिम को हाथ लगाएँगे, तो हम भी शुभेंदु को पीटेंगे।”

बयान सामने आने के बाद वीडियो के कमेंट सेक्शन में बांग्लादेश के कई अकाउंट्स से इंशाअल्लाह जैसे कमेंट भी किए गए। गौरतलब है कि शनिवार (9 मई 2026) को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शुभेंदु के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और खुदीराम टुडु ने भी मंत्री पद की शपथ ली। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही ममता बनर्जी सरकार के बाद यह पहला मौका है जब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी है।