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थमा Iran-US का ‘महायुद्ध’, ट्रंप बोले- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा तो तेहरान ने भी रखीं 10 शर्तें

  ईरान-अमेरिका ने 38 दिन के युद्ध के बाद सीजफायर का किया ऐलान, हॉर्मुज पर बनी बात (साभार: NYT/Chosun)
ईरान और अमेरिका के बीच 38 दिन से जारी युद्ध के बाद अब दोनों देशों ने सीजफायर की घोषणा कर दी है। ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलने के लिए राजी हो गया है। इससे सहमत होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमला रोकने का ऐलान किया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहाँ के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अनुरोध किया कि आज रात ईरान पर होने वाले हमले को रोक दिया जाए। इस शर्त कि ईऱान तुरंत स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलने के लिए तैयार हो गया है, इसीलिए मैं दो हफ्तों के लिए हमले और बमबारी को रोकने के लिए सहमत हूँ। यह दोनों तरफ से युद्धविराम (सीजफायर) होगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलवाने की डेडलाइन मंगलवार (07 अप्रैल 2026) को ख्तम हो गई, जिसके बाद उम्मीद थी कि अमेरिका कोई बड़ा हमला करेगा। लेकिन डेडलाइन खत्म होने से कुछ घंटों पहले ही दोनों देशों के बीच सीजफायर पर बात बन गई। लेकिन इस सीजफायर की भी कुछ शर्ते हैं। ईरान ने 10 प्रस्ताव दिए, जिसे अमेरिका मानने को तैयार हुआ। तब जाकर यह युद्ध खत्म हुआ।

क्या है ईरान की वो 10 प्रस्ताव

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिका ने इन 10 प्रस्तावों को स्वीकार किया है:

  • अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता होगा कि दोनों एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे
  • स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा
  • ईरान को परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को मान्यता
  • अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी मुख्य प्रतिबंध हटा दिए जाएँगे
  • दूसरे देशों पर असर डालने वाले सभी प्रतिबंध भी खत्म किए जाएँगे
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के ईरान के खिलाफ सभी फैसले खत्म किए जाएँगे
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के ईरान के खिलाफ सभी फैसले खत्म किए जाएँगे
  • ईरान को हुए नुकसान के लिए उसे मुआवजा दिया जाएगा
  • अमेरिका अपने सैनिकों को इस क्षेत्र से वापस बुलाएगा
  • हर जगह चल रही लड़ाई बंद होगी, जिसमें ईरान से जुड़े समूह जैसे लेबनान का हिज्बुल्लाह भी शामिल है
  • सीजफायर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खेलने से जुड़ा होगा
इन प्रस्तावों को मानते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते तक अस्थायी तनाव कम करने के लिए समझौता किया है। इस समझौते में सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है, क्योंकि दुनिया के 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। इसीलिए इस रास्ते को खोलना दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद जरूरी रहा। ईरान ने माना कि वह दो हफ्ते तक जहाजों को सीमित और नियंत्रित तरीके से गुजरने देगा।

जंग अभी खत्म नहीं हुई

अमेरिका के साथ सीजफायर बनी सहमति के ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी मिलिट्री को गोलीबारी रोकने का आदेश दिया है। मोजतबा खामेनेई का यह निर्देश ईरान के सरकारी चैनल IRIB पर सीजफायर के ऐलान के दो घंटे बाद पढ़ा गया।
मोजतबा खामेनेई के बयान में कहा गया, “यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सेना के हिस्सों को सुप्रीम लीडर के आदेश का पालन करते हुए गोलीबारी रोकनी चाहिए।” बयान में यह भी कहा गया कि लड़ाई रोकना पूरी तरह स्थायी नहीं है, बल्कि यह शर्तों पर आधारित है और आगे चल रही बातचीत से जुड़ा हुआ है।

जंग में जीत का ईरान और अमेरिका का दावा

बेशक युद्ध सिर्फ दो हफ्तों के लिए ही टाला गया हो, लेकिन ईरान और अमेरिका दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। ईरान ने कहा कि युद्ध के लगभग सभी लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं। वहीं अमेरिका ने कहा कि यह उनकी जीत है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी सेना ने संभव बनाया है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के बयान के अनुसार, तेहरान इस मौजूदा संघर्ष को एक बड़ी रणनीतिक सफलता मान रहा है और उनका कहना है कि युद्ध के लगभग सभी लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष करीब 40 दिनों तक चला, जिसका मकसद जरूरी राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करना था, जिनमें उनके बड़े क्षेत्रीय माँगों को मनवाना भी शामिल था।
इतना ही नहीं ईरान ने युद्ध आगे जारी रखने के भी संकेत दिए। काउंसिल ने यह भी कहा कि ईरान ने पहले अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा तय की गई समय-सीमा को मानने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह दुश्मनों द्वारा तय किए गए समय के अनुसार चलने को तैयार नहीं था। उनका कहना था कि जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
वहीं दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “यह अमेरिका की जीता है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप और हमारी अविश्वसनीय सेना ने संभव बनाया है।” उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ने हॉर्मुज को फइर से खुलवा दिया है। लीविट ने बताया कि राष्ट्रपति ने शुरू से ही कहा था कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 4 से 6 हफ्ते का अभियान होगा और अमेरिका ने 38 दिनों में अपने प्रमुख सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लिया और उनसे कहीं आगे निकल गया।

सीजफायर के बाद तेल की कीमतों में राहत, शेयर बाजार में उछाल

ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा का सीधा असर तेल और शेयर बाजार दोनों पर देखने को मिला है। युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज बंद होने से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं और वैश्विक बाजारों में डर और अस्थिरता फैल गई थी। लेकिन जैसे ही सीजफायर की घोषणा हुई और हॉर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमित बनी, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, कीमतें 13 प्रतिशथ से 16 प्रतिशत तक नीचे आ गईं।
तेल सस्ता होने और तनाव कम होने की वजह से शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। भारत में सेंसेक्स 2600 प्वाइंट के ऊपर रहा और 23,800 के साथ निफ्टी में भी जोरदार उछाल आया, जबकि अमेरिका और अन्य देशों के बाजार भी सकारात्मक संकेत दिखाने लगे। खासकर तेल पर निर्भर कंपनियों और रिफाइनरी सेक्टर को इससे फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि उनका खर्च कम होगा।
हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अभी अस्थायी है, क्योंकि जमीन पर तेल सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और जहाजों की आवाजाही अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही। इसलिए आने वाले समय में बाजार का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि यह सीजफायर स्थायी शांति में बदलता है या नहीं।

ईरान-अमेरिका युद्ध में अब तक क्या-क्या हुआ?

ईरान और अमेरिका के बीच 38 दिन का संघर्ष चला। यह संघर्ष अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान रहा। इसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका के हमले से हुई, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने का दावा किया गया, हालाँकि ईरान ने भी इसकी पुष्टि की, तभी ईरान का नया सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह के बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई को चुना गया।
अयातुल्लाह खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान युद्ध के रड़ में उतरा और सबसे पहले खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू किया। ईरान ने कुवैत, लेबनान, बहराइन से लेकर UAE को निशाना बनाया। इन खाड़ी देशों को अमेरिका का साथ देने की सजा दी गई। इस बीच ईरान के क्षेत्र में तेल का सबसे बड़ा मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने की कगार पर आ गया, जिसके चलते दुनिया में तेल का संकट आ गया। इस दौरान भारत की रणनीतिक साझेदारी दुनियाभर में तारीफ के काबिल रही, हॉर्मुज बंद होने के बावजूद भारत के कई जहाजों की आवाजाही चालू रही।
इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने एक के बाद एक ईरान के टॉप सैन्य कमांडर को निशाना बनाना शुरू कर दिया। 38 दिन के युद्ध में ईरान के सभी टॉप कमांडर को ढेर कर दिया गया। इसके बावजूद ईरान सीजफायर समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, जिससे दुनियाभर के देशों का तेल संकट बढ़ता गया। तब जाकर ट्रंप ने ईरान को 07 अप्रैल 2026 तक की डेडलाइन दी कि अगर ईरान हॉर्मुज नहीं खोलता, तो इसका बहुत बुरा अंजाम खोलना होगा।
हालाँकि, डेडलाइन से दो घंटे पहले दोनों देशों के बीच सीजफायर समझौते पर सहमित बनी और युद्ध विराम की घोषण की गई। लेकिन यह सीजफायर केवल 2 हफ्तों के लिए ही है। ईरान का दावा है कि इन दो हफ्तों में दोनों देशों के बीच बातचीत होगी और युद्ध को स्थायी तौर पर रोकने पर भी सहमित बनेगी।

इजरायल ने ईरान पर किया हमला, तेहरान में सुने गए कई धमाके: हाई अलर्ट पर यहूदी मुल्क

                                                             तेहरान पर इजरायल का हमला

मीडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायल ने शनिवार (28 फरवरी 2026) को दावा किया कि उसने ईरान के खिलाफ ‘प्री-एम्प्टिव अटैक’ यानी संभावित खतरे को रोकने के लिए अग्रिम हमला किया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने बयान जारी कर कहा, “इजरायल राज्य ने अपने ऊपर मंडरा रहे खतरों को खत्म करने के लिए ईरान पर प्री-एम्प्टिव हमला किया है।” ईरानी मीडिया के अनुसार, शनिवार को राजधानी तेहरान में कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब जून में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन तक हवाई हमलों का दौर चला था। उस संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन ताजा घटनाक्रम ने हालात को फिर से गंभीर बना दिया है।

इजरायल के हमले में मारा गया ईरान का कमांडर अली शादमानी, युद्धकालीन सैन्य प्रमुख बताता था शिया देश: मिसाइल हमले में गई जान, ड्रोन फैक्ट्री भी कर दी तबाह

                                                         ईरान मिलिट्री का चीफ अली शादमानी
इजरायल और ईरान के बीच हवाई हमले पाँचवे दिन भी जारी हैं। इजरायल लगातार ईरान पर मिसाइल अटैक कर रहा है। इसी अटैक में युद्धकालीन चीफ ऑफ स्टाफ अली शादमानी की मौत हो गई है। इजरायली सेना ने दावा किया है कि अली ईरान के सैन्य कमांडर भी थे।

इजरायली सेना इजरायल पर बड़ा हमला करने का दावा किया है। इजरायली सेना (आईडीएफ) के मुताबिक उसने तेहरान पर किए गए एक हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी और आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के ख़ातम-अल अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख मेजर जनरल अली शादमानी की हत्या कर दी है। आईडीएफ ने एक ट्वीट करके यह जानकारी एक्स पर साझा की है।

इजरायली सेना (IDF) ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स के जरिए दी। उन्होंने लिखा, “5 दिनों में दूसरी बार IDF ने ईरान के युद्धकालीन चीफ ऑफ स्टाफ, शासन के शीर्ष सैन्य कमांडर को मार गिराया है।”

ईरान ने दावा किया कि अली शादमानी सैन्य अधिकारी और खामेनेई के सबसे करीबी सैन्य सलाहकार भी थे। IDF ने बताया कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर मध्य तेहरान में मिसाइल हमले में वह मारे गए।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी 7 शिखर सम्मेलन को बीच में छोड़ दिया। उन्होंने ईरान की राजधानी तेहरान के लोगों को शहर खाली करने की चेतावनी दी। वहीं, भारत ने भी ईरान में फँसे भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

कौन था अली शादमानी

इज़रायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर अली शादमानी की हत्या कर दी है। शादमानी'ख़ातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' का प्रमुख था। इज़रायली सैन्य प्रवक्ता के अनुसार शादमानी ईरान के “सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर” होने के साथ ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई का बेहद करीबी था। गौरतलब है कि अली शादमानी को इस पद पर हाल ही में तब नियुक्त किया गया था, जब इज़रायल ने शुक्रवार को इसी पद पर रहे पूर्व कमांडर घोलाम अली राशिद की हत्या कर दी थी। ईरान की ओर से इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

जोरदार धमाकों से दहला तेहरान, ईरान ने भी किया पलटवार

तेहरान में जोरदार धमाकों से शहर दहल उठा है। वहीं ईरान भी इजरायल पर पलटवार कर रहा है। इससे तेल अवीव में एयर रेड सायरन बजने लगे हैं। इस बीच ईरान ने एक और घोषणा की है कि वह इज़रायली भूमि पर अब तक का सबसे बड़ा और सबसे तीव्र मिसाइल हमला करने की तैयारी कर रहा है। ईरान की मिसाइल हमले की चेतावनी के कुछ ही देर बाद तेल अवीव और पश्चिम यरुशलम के ऊपर जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। 

इजरायल में कहां-कहां ईरान ने किया पलटवार

तेहरान पर हमले के बाद ईरान भी पलटवार कर रही है। इज़रायली सेना एयर डिफेंस सिस्टम से उसे रोकने का प्रयास कर रही है। आईडीएफ ने एक बयान में कहा है कि वायुसेना "खतरे को खत्म करने के लिए आवश्यक स्थानों पर रोकथाम और हमले की कार्रवाई कर रही है।" हमले के लगभग 20 मिनट बाद सेना ने बताया कि देश के कई इलाकों में लोग अब सुरक्षित स्थानों से बाहर निकल सकते हैं। इज़रायली पुलिस ने कहा कि खोज और बचाव दल उन स्थानों पर कार्यरत हैं, जहां "गिरते हुए प्रोजेक्टाइल्स (मिसाइल या उनके टुकड़े) की रिपोर्टें मिली हैं"। "तेल अवीव क्षेत्र में मिसाइल और उसके टुकड़े गिरे, जिससे भारी भौतिक नुकसान हुआ, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।"

फायर और रेस्क्यू सेवा ने भी बताया कि तेल अवीव से सटे दान ज़िले (Dan District) में मिसाइल हमले हुए। वहीं इज़रायल के समाचार मंच YNet News के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलें इज़रायल के चार अलग-अलग इलाकों में गिरीं, जिससे तटीय शहर हर्ज़लिया में एक आठ मंजिला इमारत को नुकसान पहुंचा और एक खाली बस में आग लग गई।

IDF ने 2 दिन पहले IGRC के इंटेलीजेंस चीफ की भी कर दी थी हत्या

ईरान के IGRC चीफ को मारने से 2 दिन पहले 15 जून को इजरायली सेना ने आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की खुफिया इकाई के प्रमुख मोहम्मद काज़ेमी और उनके डिप्टी हसन मोहाकेक इज़राइली हवाई हमले में मार गिराया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इन दोनों के शव ईरानी खुफिया मुख्यालय के मलबे के नीचे दबे गए। यह हमला आईआरजीसी के खुफिया विभाग को सीधे निशाना बनाकर किया गया था।

ईरान : महिला ने मंच पर हिजाब निकाल घूमाकर फेंका, हिम्मत की लोग दे रहे हैं दाद

                                               मंच पर फेंका हिजाब (वायरल वीडियो का स्क्रीन शॉट)
ईरान में हिजाब पर जारी विवाद (Iran Hijab Controversy) के बीच एक महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। महिला एक कार्यक्रम के दौरान गले से हिजाब उतारकर फेंकती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि गलत तरीके से हिजाब पहनने के कारण उस महिला को तेहरान नेशनल काउंसिल फॉर कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग (Tehran National Council For Construction Engineering) की वार्षिक सभा से निकाल दिया गया था। घटना शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) की है।

बताया जा रहा है कि ज़ेनब काज़ेमपुर (Zeynab Kazempour) नाम की महिला को तेहरान कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशन की वार्षिक सभा के दौरान इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि निदेशक मंडल को उसके हिजाब पहनने का तरीका पसंद नहीं आया। निदेशक मंडल ने ज़ेनब को बोर्ड के सदस्य के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर ज़ेनब ने बीच सभा में हिजाब उतार कर फेंक दिया।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हिजाब उतारने से पहले नाराज ज़ेनब लोगों के सामने छोटा-सा स्पीच दे रही हैं। ज़ेनब ने कहा, “मैं उस असेंबली को मान्यता नहीं देती, जहाँ उम्मीदवारों को हिजाब न पहनने के कारण बर्खास्त कर दिया जाता है।” उनकी बात खत्म होने से पहले ही उनका माइक बंद कर दिया गया।

मंच छोड़ने से पहले जिस तरह ज़ेनब ने हिजाब निकाल फेंका, उससे उपस्थित लोग ज़ेनब के समर्थन में तालियाँ बजा रहे थे। बता दें कि ईरान में लंबे समय से महिलाएँ हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब को लेकर गिरफ्तार की गई 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद हुई थी।

देशभर में जारी विरोध के बाद ईरान की इस्लामी सरकार ने क्रूरता के लिए कुख्यात मोरालिटी पुलिस (Morality Police) को खत्म करने का फैसला लिया है। वहीं, हिजाब पहनने की अनिवार्यता को खत्म करने पर वहाँ की सरकार विचार कर रही है।

ईरान : ‘तानाशाह को मौत दो’: हिजाब विरोधी प्रदर्शन में महिलाओं का गुस्सा फूटा

                ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन में मुल्क के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई के खिलाफ भी नारेबाजी
ईरान में हिजाब न पहनने के कारण पुलिस हिरासत में ली गई एक महिला की मौत हो गई, जिसके बाद हजारों की संख्या में महिलाएँ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। इस महिलाओं ने इस्लामी मुल्क के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई को तानाशाह बताते हुए उसकी मौत की भी दुआ की और इससे संबंधित पोस्टर लहराए। बौखलाई ईरान सरकार ने भारी प्रदर्शनों को देखते हुए इंस्टाग्राम का एक्सेस रोक दिया है। अब तक इन प्रदर्शनों में 7 लोग मारे जा चुके हैं। महिलाओं के साथ कुछ पुरुष भी सड़कों पर हैं।

ईरान ने इंस्टाग्राम को अपने देश में ब्लॉक कर दिया है। 22 वर्षीय माशा अमिनी की मौत के बाद ये प्रदर्शन भड़के हैं। ईरान की मोरालिटी पुलिस ने महिला को ‘अनुचित वस्त्र’ पहनने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। वैश्विक प्रतिबंधों से जूझते इस मुल्क में मानवाधिकार के लिए अब माँग जोर पकड़ रही है। ईरान के एक मंत्री ने ‘सुरक्षा कारणों’ का हवाला देते हुए इंटरनेट तक बंद करने की धमकी दे डाली। बाद में कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था।

वहीं इस्लामी मुल्क के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई ने 1980-88 के बीच चले ईरान-ईराक युद्ध की बरसी बनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाषण देते समय इन प्रदर्शनों का कोई जिक्र नहीं किया। इससे पहले ईरान में इस तरह के विरोध प्रदर्शन 2019 में देखने को मिले थे, जब सरकार ने गैस का दाम बढ़ा दिया था। सुरक्षा बल लगातार दमनकारी तरीके आजमा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान 23 साल की उर्मिया और16 साल की पीरंसहर को पुलिस ने गोली मार दी।

ईरान का प्रशासन इन मौतों की पुष्टि नहीं कर रहा है। ईरान के प्रदर्शनकारी अब एक जगह पर जुट रहे हैं और पुलिस के आने से पहले वहाँ से निकल जाते हैं, ताकि क्रूरता का उन्हें सामना न करना पड़े। तेहरान यूनिवर्सिटी के पश्चिमी इलाके में कई युवाओं को पुलिस ने पीटा। 450 लोग इन प्रदर्शनों में पुलिसिया कार्रवाई से घायल हुए हैं। ईरान सरकार ‘स्वच्छ जाँच’ की बात कह रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की माँग इतनी सी नहीं है। उधर इजरायल की महिलाओं ने ईरान की प्रदर्शनकारियों को समर्थन दिया है।

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ईरान : खुली सड़कों पर हिजाब जलाए, बाल काट कर फेंके: महसा अमिनी की हत्या के बाद औरतें भड़कीं

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ईरान : खुली सड़कों पर हिजाब जलाए, बाल काट कर फेंके: महसा अमिनी की हत्या के बाद औरतें भड़कीं

सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियोज सामने आई हैं जिसमें औरतें खुले बाल लेकर अपने हिजाब को जला रही हैं और कुछ अपने बालों को काट कर घटना का विरोध कर रही हैं। ईरानी महिला अपने बाल काट कर और हिजाब जलाकर महसा अमिनी की हत्या पर अपना गुस्सा दिखा रही हैं। पत्रकार अलीनेजाद बताती हैं कि 7 की उम्र से अगर ईरान में लड़कियाँ अपने बाल को न ढकें तो उन्हें स्कूल नहीं जाने दिया जाता और कोई जॉब नहीं मिलती। ईरान में औरतें इस लैंगिक भेदभाव की व्यवस्था से तंग आ गई हैं।